01/02/2026
करमा बाई की यह कथा हमें सिखाती है कि ईश्वर को दिखावा नहीं, प्रेम चाहिए।
जिस ठाकुर जी के लिए छप्पन भोग सजते हैं, वही एक बुढ़िया की सादी खिचड़ी के लिए भूखे रह गए।
जब नियम भक्ति से बड़े हो जाएँ, तब प्रेम खो जाता है।
और जहाँ प्रेम होता है, वहाँ भगवान खुद दौड़े चले आते हैं।
यह कथा हर उस इंसान के लिए है जो सोचता है कि
“मैं योग्य नहीं हूँ भगवान की पूजा के लिए।”
👉 याद रखिए —
भगवान विधि नहीं देखते, भाव देखते हैं।
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