विश्व संग्राम vishva sangram

विश्व संग्राम vishva sangram आतंकवाद के खिलाफ एक अभियान

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिवो शिवम्‌ ॥१॥

जटाकटाहसंभ्रमभ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥२॥

धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुरस्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धर

ापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥३॥

जटाभुजंगपिंगलस्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे।
मदांधसिंधुरस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूतभर्तरि ॥४॥

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः।
भुजंगराजमालयानिबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥५॥

ललाटचत्वरज्वलद्धनंजयस्फुलिङ्गभा निपीतपंचसायकंनमन्निलिंपनायकम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥६॥

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वलद्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके।
धराधरेंद्रनंदिनीकुचाग्रचित्रपत्रकप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥७॥

नवीनमेघमंडलीनिरुद्धदुर्धरस्फुरत्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥८॥

प्रफुल्लनीलपंकजप्रपंचकालिमप्रभा विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌।
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥९॥

अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥१०॥

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजंगमस्फुरद्धगद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदंगतुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित: प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥११॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंगमौक्तिकमस्रजोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥१२॥

कदा निलिंपनिर्झरी निकुञ्जकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥१३॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं परिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥१४॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥१५॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं विमोहनं हि देहनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥१६॥

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतं यः शम्भूपूजनपरम् पठति प्रदोषे।
तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तां लक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥१७॥

॥ इति रावणकृतं शिव ताण्डव स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥

24/07/2021

गौरक्षा- सवा शेर
पहला हत्था तोड़ने का किस्सा-23July1930
टोहाना में मुस्लिम राँघड़ो का एक गाय काटने का एक कसाईखाना था।वहां की 52 गांवों की नैन खाप ने इसका कई बार विरोध किया। कई बार हमला भी किया जिसमें नैन खाप के कई नौजवान शहीद हुए व कुछ कसाइ भी मारे गए।लेकिन सफलता हासिल नहीं हुई।क्योंकि ब्रिटिश सरकार मुस्लिमों के साथ थी।और खाप के पास हथियार भी नहीं थे।
तब नैन खाप ने वीर हरफूल को बुलाया व अपनी समस्या सुनाई।हिन्दू वीर हरफूल भी गौहत्या की बात सुनकर लाल पीले हो गए और फिर नैन खाप के लिए हथियारों का प्रबंध किया।हरफूल ने युक्ति बनाकर दिमाग से काम लिया। उन्होंने एक औरत का रूप धरकर कसाईखाने के मुस्लिम सैनिको और कसाइयों का ध्यान बांट दिया।फिर नौजवान अंदर घुस गए उसके बाद हरफूल ने ऐसी तबाही मचाई के बड़े बड़े कसाई उनके नाम से ही कांपने लगे।उन्होंने कसाइयों पर कोई रहम नहीं खाया।अनेकों को मौत के घाट उतार दिया।और गऊओ को मुक्त करवाया।अंग्रेजों के समय बूचड़खाने तोड़ने की यह प्रथम घटना थी।

इस महान साहसिक कार्य के लिए नैन खाप ने उन्हें सवा शेर की उपाधि दी व पगड़ी भेंट की।
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उसके बाद तो हरफूल ने ऐसी कोई जगह नहीं छोड़ी जहां उन्हें पता चला कि कसाईखाना है वहीं जाकर धावा बोल देते थे।
उन्होंने जींद,नरवाना,गौहाना,रोहतक आदि में 17 गौहत्थे तोड़े।ऊनका नाम पूरे उत्तर भारत में फैल गया।कसाई उनके नाम से ही थर्राने लगे ।उनके आने की खबर सुनकर ही कसाई सब छोड़कर भाग जाते थे। मुसलमान और अंग्रेजों का क्साइवाड़े का धंधा चौपट हो गया।
इसलिए अंग्रेज पुलिस उनके पीछे लग गयी। मगर हरफूल कभी हाथ न आये।कोई अग्रेजो को उनका पता बताने को तैयार नहीं हुआ।

गरीबों का मसीहा-
वीर हरफूल उस समय चलती फिरती कोर्ट के नाम से भी मशहूर थे।जहाँ भी गरीब या औरत के साथ अन्याय होता था वे वहीं उसे न्याय दिलाने पहुंच जाते थे।उनके न्याय के भी बहुत से किस्से प्रचलित हैं।

हरफूल की गिरफ्तारी व बलिदान

अंग्रेजों ने हरफूल के ऊपर इनाम रख दिया और उन्हें पकड़ने की कवायद शुरू कर दी।

इसलिए हरफूल अपनी एक ब्राह्मण धर्म बहन के पास झुंझनु(रजस्थान) के पंचेरी कलां पहुंच गए। इस ब्राह्मण बहन की शादी भी हरफूल ने ही करवाई थी।
यहां का एक ठाकुर भी उनका दोस्त था।
वह इनाम के लालच में आ गया व उसने अंग्रेजों के हाथों अपना जमीर बेचकर दोस्त व धर्म से गद्दारी की।

अंग्रेजों ने हरफूल को सोते हुए गिरफ्तार कर लिया।कुछ दिन जींद जेल में रखा लेकिन उन्हें छुड़वाने के लिये हिन्दुओ ने जेल में सुरंग बनाकर सेंध लगाने की कोशिश की और विद्रोह कर दिया।सलिये अंग्रेजों ने उन्हें फिरोजपुर जेल में चुपके से ट्रांसफर कर दिया।
बाद में 27 जुलाई 1936 को चुपके से पंजाब की फिरोजपुर जेल में अंग्रेजों ने उन्हें रात को फांसी दे दी। उन्होंने विद्रोह के डर से इस बात को लोगो के सामने स्पष्ट नहीं किया। व उनके पार्थिव शरीर को भी हिन्दुओ को नहीं दिया गया। उनके शरीर को सतलुज नदी में बहा दिया गया।

इस तरह देश के सबसे बड़े गौरक्षक, गरीबो के मसीहा, उत्तर भारत के रॉबिनहुड कहे जाने वाले वीर हरफूल सिंह ने अपना सर्वस्व गौमाता की सेवा में कुर्बान कर दिया।

वीर हरफूल का जन्म 1892 ई० में भिवानी जिले के लोहारू तहसील के गांव बारवास में एक जाट क्षत्रिय परिवार में हुआ था।उनके पिता एक किसान थे।
बारवास गांव के इन्द्रायण पाने में उनके पिता चौधरी चतरू राम सिंह रहते थे।उनके दादा का नाम चौधरी किताराम सिंह था। 1899 में हरफूल के पिताजी की प्लेग के कारण मृत्यु हो गयी। इसी बीच ऊनका परिवार जुलानी(जींद) गांव में आ गया।यहीं के नाम से उन्हें वीर हरफूल जाट जुलानी वाला कहा जाता है।

सेना में 10 साल
उसके बाद हरफूल सेना में भर्ती हो गए।उन्होंने 10 साल सेना में काम किया।उन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध में भी भाग लिया। उस दौरान ब्रिटिश आर्मी के किसी अफसर के बच्चों व औरत को घेर लिया।तब हरफूल ने बड़ी वीरता दिखलाई व बच्चों की रक्षा की।अकेले ही दुश्मनों को मार भगाया। फिर हरफूल ने सेना छोड़ दी।जब सेना छोड़ी तो उस अफसर ने उन्हें गिफ्ट मांगने को कहा गया तो उन्होंने फोल्डिंग गन मांगी।फिर वह बंदूक अफसर ने उन्हें दी।
उसने अपना बाद का जीवन गौरक्षा व गरीबों की सहायता में बिताया।
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मगर कितने शर्म की बात है कि बहुत कम लोग आज उनके बारे में जानते हैं।कई गौरक्षक सन्गठन भी उनको याद नहीं करते। गौशालाओं में भी गौमाता के इस लाल की मूर्तियां नहीं है।

ऐसे महान गौरक्षक को मैं नमन करता हूँ।

सबसे पुराना गोरक्षा संघठन से जुड़िये और जानिए अखिल भारतीय सर्व गो दलीय गो रक्षा अभियान समितिमें जुड़ने के लिए अपना नंबर औ...
01/03/2015

सबसे पुराना गोरक्षा संघठन से जुड़िये और जानिए अखिल भारतीय सर्व गो दलीय गो रक्षा अभियान समितिमें जुड़ने के लिए अपना नंबर और 1 पासपोट साइज फोटो और आईडी भेजे (आधार कार्ड ,वोटर आईडी ,मार्कशीट ,या फोटो आईडी पहचान के लिए भेजे ) डा.पवन सुरोलिया राजस्थान प्रदेश adhyaksh अखिल भारतीय सर्व गो दलीय गो रक्षा अभियान संपर्क सूत्र -9829567063 —

जयपुर मुहाना थाना क्षेत्र में ट्रक में ३७ गो माता मृत मिलने उपरांत सर्व दलीय गो रक्षा अभियान समिति व राजस्थान हिन्दू महा...
26/02/2015

जयपुर मुहाना थाना क्षेत्र में ट्रक में ३७ गो माता मृत मिलने उपरांत सर्व दलीय गो रक्षा अभियान समिति व राजस्थान हिन्दू महासभा के प्रदेस अध्यक्ष डा.पवन कुमार सुरोलिया हिन्दू क्रांति दल के प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज जटोलिया हिन्दू क्रांति सेना के मनीष शर्मा व प्रवीन जी शिव सेना हिन्दूस्तान के प्रदेश अध्यक्ष ललित पवार के नेत्रित्व में हिन्दू महासभा ,हिन्दू क्रांतिदल ,हिन्दू क्रांति सेना सर्व दलीय गो रक्षा अभियान समिति के हजारो कार्य कर्त्ता और स्थानीय १० हजार की भीड़ ने मुहाना रोड को चक्का जैम किया लाठी चार्ज हुवा डा.पवन सुरोलिया ने भगदड़ मचने पर पुलिस की लाठी पकड़कर सड़को पर लेट गए पुलिस को हर माननी पड़ी एसपी सहित सात थानों की पुलिस को घटना स्थल पर आना पड़ा दुबारा बल प्रयोग हुवा तो भीड़ तीतर बितर हुई और सर्व दलीय गो रक्षा अभियान समिति व राजस्थान हिन्दू महासभा के प्रदेस अध्यक्ष डा.पवन कुमार सुरोलिया हिन्दू क्रांति दल के प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज जटोलिया हिन्दू क्रांति सेना के मनीष शर्मा व प्रवीन जी शिव सेना हिन्दूस्तान के प्रदेश अध्यक्ष ललित पवार के पर मुहाना थाना को हजारो कार्य कर्त्ता और स्थानीय भीड़ ने घेराव किया वार्ता चली जिसमे सर्व दलीय गो रक्षा अभियान समिति व राजस्थान हिन्दू महासभा के प्रदेस अध्यक्ष डा.पवन कुमार सुरोलिया हिन्दू क्रांति दल के प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज जटोलिया हिन्दू क्रांति सेना के मनीष शर्मा व प्रवीन जी शिव सेना हिन्दूस्तान के प्रदेश अध्यक्ष ललित पवार के और एसपी के बीच वार्ता हुई सारी शर्ते प्रशाशन को माननी पड़ी अभी गो मातावो के अंतिम सस्कार की तैयारी चल रही हैसर्व दलीय गो रक्षा अभियान समिति व राजस्थान हिन्दू महासभा के प्रदेस अध्यक्ष डा.पवन कुमार सुरोलिया हिन्दू क्रांति दल के प्रदेश अध्यक्ष श्री मनोज जटोलिया हिन्दू क्रांति सेना के मनीष शर्मा व प्रवीन जी शिव सेना हिन्दूस्तान के प्रदेश अध्यक्ष ललित पवार के नेत्रित्व में हिन्दू महासभा ,हिन्दू क्रांतिदल ,हिन्दू क्रांति सेना सर्व दलीय गो रक्षा अभियान समिति के हजारो कार्य कर्त्ता और स्थानीय हजार की भीड़ घटना स्थल पर मोजूद स्थानीय चैनल कवरेज करके गए है कुछ छाया चित्र
विशेष -प्रथम चित्र में सर्व दलीय गो रक्षा अभियान समिति व राजस्थान हिन्दू महासभा के प्रदेस अध्यक्ष डा.पवन कुमार सुरोलिया ,बगरू क्षेत्र के विधायक डा.कैलास वर्मा और एस.पी रवि प्रसाद आपस में वार्ता करते हुए घटना स्थल पर

डा.पवन कुमार सुरोलिया से मिलने दिल्ली मुबई से पधारे फ़िल्म निर्माता DS Kasana, फ़िल्म डायरेक्टर Prof.SK Singh साथ में दिल्...
23/01/2015

डा.पवन कुमार सुरोलिया से मिलने दिल्ली मुबई से पधारे फ़िल्म निर्माता DS Kasana, फ़िल्म डायरेक्टर Prof.SK Singh साथ में दिल्ली से पधारे Ompal Singh Khatana व गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री बच्चूसिंह बैंसला नवोदित फ़िल्म अभिनेता Muneesh Tonwar के साथअपनी पुस्तक चांदनी चोक के फूल को भेट करते का छाया चित्र इस अवसर पर डा.पवन सुरोलिया ने अपने गो रक्षा आन्दोलन की जानकारी दी तथा फ़िल्म निर्माता DS Kasana अपने सीरियल और फ़िल्म प्रोडक्सन की जानकारी दी तथा डा.सुरोलिया को सुरोलिया फिल्म्स द्वारा कोई भी फ़िल्म निर्माण में मदद का आश्वासन भी दिया डापवन कुमार सुरोलिया .इम्पा [मुंबई ] से रजिस्टर्ड है अब सुरोलिया फ़िल्म्स भीइम्पा [मुंबई ] से रजिस्टर्ड है

गांधीवध क्यों ??नाथूराम गोडसे ने न्यायालय के समक्ष गान्धी-वध के जो १५० कारण बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं...
18/01/2015

गांधीवध क्यों ??

नाथूराम गोडसे ने न्यायालय के समक्ष गान्धी-वध के जो १५० कारण बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं: -
ये क्रमांकित सूची इस प्रकार हैं:
जब २२ अक्तूबर १९४७ को पाकिस्तान ने कश्मीर पर बिना सोचे आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउण्टबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को ५५ करोड़ रुपये की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन शुरू कर दिया जिसके परिणामस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।
जब पाकिस्तानी मुसलमानों द्वारा हिन्‍दुओं को भारी मात्रा में काटा जाने लगा तो वहां से आये विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।
१४-१५ जून १९४७ को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुँच कर जबरन प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा। क्‍या यह गांधी के द्विपक्षीय घटिया राजनीति को प्रदर्शित नही करती।
अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (१९१९) से समस्त देशवासियों में आक्रोश की ज्‍वाला फूट रही थी, वे चाहते थे कि इस नरसंहार के नायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाये। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से स्पष्ठ मना कर दिया। क्‍या गांधी ने जलिया वाले बाग में हुये नरसंहार के लोगों की आत्‍मा के साथ अन्‍याय नही किया।
भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश रो रहा था व गान्धी की ओर कातर भरी नजरों से देख रहा था, कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु के पंजें से बचायें, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया।
६ मई १९४६ को समाजवादी कार्यकर्ताओं को दिये गये अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।
मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए १९२१ में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग १५०० हिन्दू मारे गये व २००० से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।
१९२६ में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द की अब्दुल रशीद नामक मुस्लिम युवक ने हत्या कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिये अहितकारी घोषित किया।
गान्धी ने अनेक अवसरों पर शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोबिन्द सिंह को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।
गान्धी ने जहाँ एक ओर कश्मीर के हिन्दू राजा हरि सिंह को कश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दू बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।
यह गान्धी ही थे जिन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।
कांग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिये बनी समिति (१९३१) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गान्धी की जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।
कांग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टाभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहे थे, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पद त्याग दिया।
लाहौर कांग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।
जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे; ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और १३ जनवरी १९४८ को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।
गोडसे व आप्‍टे को फाँसी
नाथूराम गोडसे को सह-अभियुक्त नारायण आप्टे के साथ १५ नवम्बर १९४९ को पंजाब की अम्बाला जेल में फाँसी पर लटका कर बहुत ही क्रूरतम तरीके से मार दिया गया। नाथूराम फांसी से पूर्व अपने अन्तिम आत्‍मोद्गार कुछ इस प्रकार व्‍यक्‍त किया था:
“यदि अपने देश के प्रति भक्तिभाव रखना कोई पाप है तो मैंने वह पाप किया है और यदि यह पुण्य है तो उसके द्वारा अर्जित पुण्य पद पर मैं अपना नम्र अधिकार व्यक्त करता हूँ”
– नाथूराम विनायक गोडसे
by. साधक बाधक

गांधीवाद या गंधिवध क्यों जरुरी था गांधीवध अपने न्यायालय में दिए वक्तव्य में स्वयं नाथूराम विनायक गोडसे जी ने उन कारणों क...
15/01/2015

गांधीवाद या गंधिवध
क्यों जरुरी था गांधीवध
अपने न्यायालय में दिए वक्तव्य में स्वयं नाथूराम विनायक गोडसे जी ने उन कारणों को बताया जिसके कारण उन्होंने गांधी की हत्या की |

उन्होंने अपने राजनितिक जीवन की शुरुआत "राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ " से की वहां कई वर्षों तक रहे परन्तु बाद में हिन्दू महासभा में शामिल हो गए वे वीर सावरकर की विचारधारा से प्रभावित थे

उन्होंने अग्रणी तथा हिन्दू राष्ट्र नामक दो समाचार-पत्रों का सम्पादन भी किया था। वे मुहम्मद अली जिन्ना की अलगाववादी विचार-धारा का विरोध करते थे।

प्रारम्भ में तो उन्होंने मोहनदास करमचंद गांधी के कार्यक्रमों का समर्थन किया परन्तु बाद में गान्धी के द्वारा लगातार और बार-बार हिन्दुओं के विरुद्ध भेदभाव पूर्ण नीति अपनाये जाने तथा मुस्लिम तुष्टीकरण किये जाने के कारण वे गांधी के प्रबल विरोधी हो गये।

गान्धी-हत्या के कारण

गान्धी-हत्या के मुकद्दमें के दौरान न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति माँगी थी और उसे यह अनुमति मिली थी। नाथूराम गोडसे का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबन्धित कर दिया गया था। इस प्रतिबन्ध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गान्धी-हत्या के सह-अभियुक्त गोपाल गोडसे ने ""६०"" वर्षों तक वैधानिक लडाई लड़ी और उसके फलस्वरूप सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रतिबन्ध को हटा लिया है तथा उस वक्तव्य के प्रकाशन की अनुमति दी है । नाथूराम गोडसे ने न्यायालय के समक्ष गान्धी-वध के जो १५० कारण बताये थे उनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं: -

क्रमांकित सूची आइटम
1.अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (१९१९) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के नायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाये। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से स्पष्ठ मना कर दिया।
2.भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गान्धी की ओर देख रहा था, कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचायें, किन्तु गान्धी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया।
3.६ मई १९४६ को समाजवादी कार्यकर्ताओं को दिये गये अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी।
4.मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए १९२१ में गान्धी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग १५०० हिन्दू मारे गये व २००० से अधिक को मुसलमान बना लिया गया। गान्धी ने इस हिंसा का विरोध नहीं किया, वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया।
5.१९२६ में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द की अब्दुल रशीद नामक मुस्लिम युवक ने हत्या कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गान्धी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गल राष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिये अहितकारी घोषित किया।
6.गान्धी ने अनेक अवसरों पर शिवाजी, महाराणा प्रताप व गुरू गोबिन्द सिंह को पथभ्रष्ट देशभक्त कहा।
7.गान्धी ने जहाँ एक ओर कश्मीर के हिन्दू राजा हरि सिंह को कश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दू बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।
यह गान्धी ही थे जिन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।
8.कांग्रेस के ध्वज निर्धारण के लिये बनी समिति (१९३१) ने सर्वसम्मति से चरखा अंकित भगवा वस्त्र पर निर्णय लिया किन्तु गान्धी की जिद के कारण उसे तिरंगा कर दिया गया।
9.कांग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से काँग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गान्धी पट्टाभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहे थे, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पद त्याग दिया।
10.लाहौर कांग्रेस में वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गान्धी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया।
11.१४-१५ १९४७ जून को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गान्धी ने वहाँ पहुँच कर प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।
12.जवाहरलाल की अध्यक्षता में मन्त्रीमण्डल ने सोमनाथ मन्दिर का सरकारी व्यय पर पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पारित किया, किन्तु गान्धी जो कि मन्त्रीमण्डल के सदस्य भी नहीं थे; ने सोमनाथ मन्दिर पर सरकारी व्यय के प्रस्ताव को निरस्त करवाया और 13.१३ जनवरी १९४८ को आमरण अनशन के माध्यम से सरकार पर दिल्ली की मस्जिदों का सरकारी खर्चे से पुनर्निर्माण कराने के लिए दबाव डाला।
14.पाकिस्तान से आये विस्थापित हिन्दुओं ने दिल्ली की खाली मस्जिदों में जब अस्थाई शरण ली तो गान्धी ने उन उजड़े हिन्दुओं को जिनमें वृद्ध, स्त्रियाँ व बालक अधिक थे मस्जिदों से खदेड़ बाहर ठिठुरते शीत में रात बिताने पर मजबूर किया गया।
15.२२ अक्टूबर १९४७ को पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया, उससे पूर्व माउण्टबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को ५५ करोड़ रुपये की राशि देने का परामर्श दिया था। केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने आक्रमण के दृष्टिगत यह राशि देने को टालने का निर्णय लिया किन्तु गान्धी ने उसी समय यह राशि तुरन्त दिलवाने के लिए आमरण अनशन शुरू कर दिया जिसके परिणामस्वरूप यह राशि पाकिस्तान को भारत के हितों के विपरीत दे दी गयी।

नाथूराम गोडसे को सह-अभियुक्त नारायण आप्टे के साथ १५ नवम्बर १९४९ को पंजाब की अम्बाला जेल में फाँसी पर लटका कर मार दिया गया। उन्होंने अपने अन्तिम शब्दों में कहा था:

"यदि अपने देश के प्रति भक्तिभाव रखना कोई पाप है तो मैंने वह पाप किया है और यदि यह पुण्य है तो उसके द्वारा अर्जित पुण्य पद पर मैं अपना नम्र अधिकार व्यक्त करता हूँ"

साधक-बाधक समाचार पत्र

राजस्थान हिन्दू महा सभा की देश की हिन्दू जनता से मार्मिक अपीलहिन्दू महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता कमलेश तिवारी और उत्त...
10/01/2015

राजस्थान हिन्दू महा सभा की देश की हिन्दू जनता से मार्मिक अपील
हिन्दू महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता कमलेश तिवारी और उत्तर प्रदेश हिन्दू महासभा कार्यकर्ताओ पर फर्जी मुकदमा धारा 199a और 153a के तहत फर्जी केस दर्ज करने की राजस्थान हिन्दू महासभा कठोर शब्दों में निंदा करती है इस मामले प्रदेस अध्यक्ष डा.पवन सुरोलिया से चर्चा कर उत्तर प्रदेश हिन्दू महासभा की तन मन धन से हर तरह से मदद की जाएगी राष्ट्रपति जी से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश अली की सांप्रदायिक सरकार की बर्खास्तगी की मांग करती है राजस्थान हिन्दू महासभा मांग करती है
गोपेस कुमार गोत्तम
प्रदेस कार्य्यालय मंत्री
राजस्थान प्रदेस महासभा

08/01/2015

फ्रांस की जनता का जबाब -इस्लाम को -शठे प्रति शाठ्यम समाचरेत
साथ ही फ्रांस में एक साप्ताहिक पत्रिका के कार्यालय पर हमले के बाद कुछ फ्रांसीसी शहरों में मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया
है, हालांकि इन घटनाओं में कोई हताहत नहीं हुआ। अभियोजकों के अनुसार पेरिस
के पश्चिम में स्थित ली मांस शहर में कल मध्यरात्रि के बाद एक मस्जिद पर
तीन ब्लैंक ग्रेनेड फेंके गए तथा दक्षिणी फ्रांस में नारबोने के निकट
पोर्त-ला-नौवेले जिले में एक मुस्लिम प्रार्थना कक्ष में मगरिब यानी शाम की
नमाज के बाद उसमें गोलीबारी की गई। पूर्वी फ्रांस के
विलेफ्रांशे-सुर-साओने में आज सुबह एक मस्जिद के निकट कबाब की एक दुकान पर
विस्फोट हुआ। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ।

07/01/2015

इस्लाम का फ्रान्स पर कहर
पेरिस: पैगंबर का कार्टून छापने वाली पत्रिका के दफ्तर पर हमला, एडिटर समेत 12 की मौत

aajtak.in [Edited By: कुलदीप मिश्र] | पेरिस, 7 जनवरी 2015 | अपडेटेड: 19:30 IST
टैग्स: फ्रेंच मैगजीन| चार्ली हेब्डो| बगदादी| कार्टून| शूटआउट

हमले के बाद की तस्वीर
फ्रांस के पेरिस में बुधवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने व्यंग्य-पत्रिका 'चार्ली हैबदो' के दफ्तर पर हमला बोल दिया. हमले में कम से कम 12 लोगों के मरने की खबर है, वहीं 6 गंभीर रूप से घायल हैं. पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि मरने वालों में 9 पत्रकार और 2 पुलिसकर्मी शामिल हैं. पत्रिका के संपादक स्टीफन चारबोनियर की भी हमले में मौत हो गई है.

पुलिस ने मुठभेड़ में दो हमलावरों को मार गिराया, वहीं दो और हमलावरों के एक कार में बैठकर भाग निकलने की खबर है. पुलिस उनकी तलाश में जुटी है और फ्रांस में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. पेरिस में हमले के बाद दिल्ली में भी भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
कार्टूनिस्ट कोरीन रे उर्फ 'कोको' उन लोगों में से हैं जिन्होंने बिल्डिंग के भीतर छिपकर अपनी जान बचाई. उन्होंने दावा किया कि हमलावर सधी हुई फ्रेंच भाषा बोल रहे थे और खुद को अलकायदा का बता रहे थे. उन्होंने बताया, 'हमला पांच मिनट तक चला. उन्होंने वोलिंस्की और काबू को गोली मार दी. मैं एक डेस्क के नीचे छिप गया. वे परफेक्ट फ्रेंच बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि वे अलकायदा से हैं.'

हमलावरों ने लगाए नारे!
बताया जा रहा है कि हमलावर मैगजीन में छपे पैगंबर मुहम्मद के कार्टून से नाराज थे. पत्रिका काफी समय अपने कथित 'इस्लाम विरोधी' कंटेंट की वजह से कट्टरपंथियों के निशाने पर थी. इसने हाल ही में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के मुखिया अबू बकर अल-बगदादी का कार्टून भी ट्विटर पर शेयर किया गया था. पुलिस ने दावा किया कि घटनास्थल पर हमलावरों ने 'हमने पैगबंर का बदला ले लिया' जैसे नारे लगाए.
जांच कार्य से करीबी रूप से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि ऑटोमैटिक राइफल क्लाशनिकोव और एक रॉकेट लॉन्चर लिए दो लोगों ने मध्य पेरिस स्थित इमारत पर धावा बोल दिया. सूत्र ने बताया कि बंदूकधारियों ने एक कार पर कब्जा किया और एक राहगीर से इसे तेजी से चलाने को कहा.

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