Shri Shri 1008 Shri Heeramal Maharaj ॐ Shri Surajmal Bhomiya ji Maharaj

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Shri Shri 1008 Shri Heeramal Maharaj ॐ Shri Surajmal Bhomiya ji Maharaj Situated quite close to Nangal Rajawatan, Bhomiya Ji Maharaj Mandir is a local temple sacred to king Surajmal.

Best time to visit the temple would be a grand fair that is organized here during Chaturthi (4th day of any lunar month in hindu calendar).

26/04/2026
Jai Bhaumiya Baba @ Dev Dham Dehlas
05/03/2026

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Jai Bhaumiya Baba
10/07/2025

Jai Bhaumiya Baba

Jai baba ki 🙏
09/09/2024

Jai baba ki 🙏

"🌟 देहलवास का गौरवमयी क्षण 🌟  हमारे गांव देहलवास, टोडावास और सीमपुरा ने जल संरक्षण की दिशा में एक अनोखी पहल करते हुए झिल...
02/09/2024

"🌟 देहलवास का गौरवमयी क्षण 🌟
हमारे गांव देहलवास, टोडावास और सीमपुरा ने जल संरक्षण की दिशा में एक अनोखी पहल करते हुए झिलमिली बांध के ओवरफ्लो पानी को मोरेल नदी में बहने से रोकने के लिए तीन एनीकट तैयार किए हैं। 45 ट्रैक्टर, 7 जेसीबी और 450 मेहनती ग्रामीणों ने मिलकर मात्र 7 दिनों में यह अद्भुत कार्य किया! इस प्रयास से न केवल पानी का संरक्षण होगा, बल्कि 20 गांवों के भू-जल स्तर में भी वृद्धि होगी।
आइए, एक साथ मिलकर एक उज्ज्वल और सतत भविष्य की दिशा में काम करें! 💧 #गर्व #देहलावास ंरक्षण #सामुदायिक_शक्ति"

**देहलावास गाँव: सामूहिक प्रयासों से जल संकट का समाधान**राजस्थान के दौसा जिले के नांगल राजावतान ब्लॉक में स्थित देहलावास...
26/08/2024

**देहलावास गाँव: सामूहिक प्रयासों से जल संकट का समाधान**

राजस्थान के दौसा जिले के नांगल राजावतान ब्लॉक में स्थित देहलावास गाँव ने जल संकट से निपटने के लिए एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। यह गाँव, जो कभी पानी की समृद्धि के लिए जाना जाता था, हाल के वर्षों में जल संकट का सामना कर रहा था। भूजल के अत्यधिक दोहन, पानी की अत्यधिक खपत वाली फसलों का उत्पादन, और लगातार घटती वर्षा ने इस गाँव को जल संकट की ओर धकेल दिया। स्थिति इतनी विकट हो गई कि 2020 तक आते-आते गाँव के अधिकांश ट्यूबवेल और कुएं सूख गए। इस संकट ने ग्रामीणों के सामने अस्तित्व का प्रश्न खड़ा कर दिया, और उन्हें जल संरक्षण का महत्व सिखाया।

**पानी की समृद्धि से सूखाग्रस्त गाँव तक की यात्रा**

देहलावास गाँव का भूजल स्तर कभी 40 फीट पर ही मिल जाता था, जिससे यहाँ के किसान आराम से खेती करते थे। ट्यूबवेल और कुओं में पानी की कोई कमी नहीं थी, और खेती के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध था। ग्रामीणों ने कभी सोचा भी नहीं था कि उन्हें जल संकट का सामना करना पड़ेगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, गाँव में अधिक लाभदायक फसलों के उत्पादन के लिए जल की आवश्यकता बढ़ी। सस्ती बिजली की उपलब्धता और बेरोजगारी के कारण लोग खेती के विस्तार में जुट गए।

गाँव में पानी की जरूरतें बढ़ने के साथ-साथ भूजल का अति दोहन शुरू हो गया। इसके अलावा, लगातार कम होती वर्षा ने गाँव को सूखे की स्थिति में ला खड़ा किया। धीरे-धीरे, गाँव के ट्यूबवेल और कुएं सूखने लगे, और जल संकट विकराल रूप धारण करने लगा। पानी की कमी के कारण खेती प्रभावित हुई, जिससे ग्रामीणों को अनाज और पशुओं के लिए चारा भी बाहर से खरीदना पड़ा। यह स्थिति गाँव वालों के लिए एक बड़ा झटका थी, और उन्होंने जल का महत्व गहराई से समझा।

**जल संरक्षण की ओर पहला कदम**

2024 में, पूर्वी राजस्थान में अचानक भारी वर्षा हुई, जिससे मोरल नदी में एक बार फिर पानी बहने लगा। यह दृश्य देखकर गाँव वालों के चेहरों पर खुशी लौट आई, लेकिन साथ ही उन्हें इस बात का भी एहसास हुआ कि अगर इस पानी को संरक्षित नहीं किया गया, तो यह जल्दी ही व्यर्थ बहकर चला जाएगा। इस प्रकार, गाँव के युवाओं ने जल संरक्षण के महत्व को समझते हुए इस बहुमूल्य जल को संरक्षित करने का संकल्प लिया।

गाँव के सभी ट्रैक्टर, जेसीबी और अन्य साधनों को जुटाकर, ग्रामीणों ने मिलकर मोरल नदी पर एनीकट बनाने की योजना बनाई। एनीकट का निर्माण आसान नहीं था, लेकिन गाँव वालों का संकल्प अटूट था। लगभग 45,000 रुपए के डीजल की लागत से, ग्रामीणों ने कठोर मेहनत से मिट्टी के एनीकट का निर्माण शुरू किया। गाँव के सभी लोग मिलकर एनीकट को तैयार करने में जुट गए, और जल्द ही यह एनीकट पानी से भर गया।

**सफलता की ओर बढ़ते कदम**

जब एनीकट पूरी तरह से भर गया और पानी उसकी सीमा से ऊपर बहने लगा, तो गाँव वालों को एक और एनीकट बनाने की आवश्यकता महसूस हुई। इस प्रकार, गाँव वालों ने टोडरवास की सीमा पर दूसरा एनीकट बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए, ग्रामीणों ने देसी जुगाड़ का उपयोग करके 12 इंच मोटे पाइप के 6 गेट बनाए, जिससे अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से दूसरी जगह पर भेजा जा सके।

गाँव वालों ने सामूहिक प्रयासों और सीमित संसाधनों के बावजूद, दूसरे एनीकट का निर्माण भी सफलतापूर्वक कर लिया। इस दूसरे एनीकट में भी उतनी ही क्षमता से पानी भर गया। इस प्रकार, देहलावास गाँव ने अपनी सूझबूझ और परिश्रम से पाँच साल की जल आवश्यकताओं का समाधान कर लिया।

**जन सहयोग से जल संकट का समाधान**

इस सामूहिक प्रयास ने देहलावास गाँव को जल संकट से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिना किसी सरकारी सहायता के, मात्र एक लाख रुपए की लागत से ग्रामीणों ने दो बड़े एनीकट का निर्माण किया, जिनमें पाँच साल की जल आवश्यकताओं का पानी संचित हो गया। इस कार्य से न केवल गाँव के लोग खुश हैं, बल्कि इसने पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा का काम किया है।

गाँव के लोग अब दिन-रात इन एनीकटों की सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं और इस पानी को अपने भविष्य का संबल मानते हैं। आसपास के गाँवों के लोग भी इस पहल से प्रेरित होकर जल संरक्षण के लिए छोटे-बड़े एनीकट बनाने पर विचार कर रहे हैं। यह पहल पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है, और लोग देहलावास गाँव के लोगों की प्रशंसा कर रहे हैं।

**देहलावास की प्रेरणादायक कहानी: एक सीख**

देहलावास गाँव की यह कहानी पूरे राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देती है: जब सामूहिक प्रयास और सूझबूझ के साथ काम किया जाता है, तो बड़े से बड़ा संकट भी हल किया जा सकता है। जल संरक्षण की यह पहल न केवल देहलावास के लिए, बल्कि पूरे राज्य के लिए अनुकरणीय है। इससे पता चलता है कि जल संकट से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास कितने महत्वपूर्ण और प्रभावी हो सकते हैं।

इस प्रकार, देहलावास गाँव ने जल संकट के समाधान की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है, जो पूरे राजस्थान के लिए एक उदाहरण है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जल संरक्षण के प्रति जागरूकता और सामूहिक प्रयास ही इस गंभीर समस्या से निपटने का एकमात्र समाधान है।

**भविष्य की राह**

देहलावास गाँव की यह पहल न केवल जल संकट का समाधान है, बल्कि यह भविष्य के लिए एक स्थायी समाधान भी प्रस्तुत करती है। गाँव वालों ने इस पहल से यह साबित कर दिया कि सामूहिक प्रयास, सूझबूझ और दृढ़ संकल्प के साथ किसी भी समस्या का समाधान संभव है। अब, यह आवश्यक है कि अन्य गाँव और समुदाय भी इस तरह के प्रयासों को अपनाएं और जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाएं।

जल संकट का सामना कर रहे क्षेत्रों के लिए देहलावास गाँव की यह कहानी एक प्रकाश स्तंभ है। यह दिखाती है कि किस प्रकार स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास बड़े संकटों का समाधान कर सकते हैं। जल संरक्षण के इस अभियान को पूरे राज्य में फैलाने की आवश्यकता है ताकि राजस्थान के सभी गाँव जल संकट से मुक्त हो सकें।

Jai baba ki
14/05/2024

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हर हर महादेव
02/04/2024

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श्री हीरामल महाराज एवं श्री सूरजमल राजा भोमिया जी महाराज  सेवा समिति की ओर से सभी भक्तजनों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामन...
01/01/2024

श्री हीरामल महाराज एवं श्री सूरजमल राजा भोमिया जी महाराज सेवा समिति की ओर से सभी भक्तजनों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

Jai bhaumiya baba
01/01/2024

Jai bhaumiya baba

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