05/08/2016
बहुत सारे व्यक्तियों ने फेसबुक पर अनेक बार मुझसे मेरे ""गुरू"" के बारे मे जानना चाहा है ।
आज मैं आपको मेरे ही नहीं बल्कि इस संसार मे जितने भी ज्ञानी, विद्वान, संत तथा महापुरूष हुये है , तथा वर्तमान मे इस धरा पर है , उन सभी के ""गुरू"" का परिचय देता हुँ ।
इस संसार मे जितने भी ज्ञानी , विद्वान महापुरूष आये तथा वर्तमान मे जितने भी ज्ञानी इस पृथ्वी पर विद्यमान है , उन सभी के गुरू केवल मात्र एक """ देवगुरू बृहस्पति"" है ।
जो ज्योतिष शास्त्र के संपर्क मे होते है केवल उनका ही परिचय देवगुरू बृहस्पति से हो पाता है , बाकि सब अपने संपूर्ण जीवनकाल मे इनसे अपरिचित ही रहते है ,
वो इस संसार मे देवगुरू बृहस्पति कि कृपा से अपने जीवन मे आये किसी ज्ञान कि ज्योति जगाने वाले महापुरूष को ही अपना गुरू स्वीकार करते है ।
पर वास्तव मे देखा जाये तो किसी भी व्यक्ति के जीवन मे किसी ज्ञानी , संत, विद्वान , महापुरूष का आगमन केवल मात्र "" देवगुरू बृहस्पति"" कि ही कृपा से हो पाता है ।
ज्ञान देने वाले तथा अंतर आत्मा मे ज्ञान को जागृत करने वाले भी देवगुरू बृहस्पति ही है ।
किसी व्यक्ति कि जन्मकुंडली मे "" बृहस्पति"" अगर अशुभ स्थिति या अशुभ स्थान मे बैठ जाये तो उस व्यक्ति को इस संसार मे चाहे कोई कितना ही ज्ञानी विद्वान महापुरुष धुरंधर क्यों ना हो , वो उसे ज्ञान का अंश मात्र भी प्रदान नही कर सकता है l
क्योंकि बृहस्पति के अशुभ होने पर उस व्यक्ति का मन ज्ञान, धर्म , भगवान , अध्यात्म इन सब मे बिल्कुल नही लगेगा ।
दूसरी ओर यदि बृहस्पति जन्मकुंडली मे अच्छे स्थान ओर अच्छी स्थिति मे बैठ जाये तो उस व्यक्ति कि अन्तरआत्मा के भीतर स्वतः ज्ञान जागृत होता है l उसका मन सदैव धर्म , भगवान , अध्यात्म मे लगा रहता है l
अतः वास्तव मे मेरे ओर आप सभी के गुरू "" देवगुरू बृहस्पति"" ही है ।
इन्ही कि कृपा से किसी के जीवन मे भगवान , ज्ञानी , संत , विद्वान तथा महापुरूषों का आगमन हो पाता है ।
**** रहस्य ******
आपका संबंध हृदय से जिसके साथ जुड जाता है, उस व्यक्ति के ग्रह नक्षत्र आपको प्रभावित करने लगते है ।