Bhakti Sangeet

भक्ति वह पवित्र भाव है जिसमें मनुष्य अपने आराध्य के प्रति निःस्वार्थ प्रेम, श्रद्धा और समर्पण से जुड़ जाता है। भक्ति में अहंकार मिट जाता है और मन शुद्ध होकर ईश्वर की सेवा, स्मरण और नाम जप में लीन हो जाता है। भक्ति से मन को शांति, जीवन को दिशा मिलती है।

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालंप्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालंप्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि।।   ...
25/05/2026

चलत्कुण्डलं भ्रूसुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं
प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि।।

हे दक्क्षयग्य बिनाशकम् हे कामदाहन कारणम्।श्री गणेशस्कं द नमस्कृतम् करुणाकरम् जगदीश्वम्।।
24/05/2026

हे दक्क्षयग्य बिनाशकम् हे कामदाहन कारणम्।
श्री गणेशस्कं द नमस्कृतम् करुणाकरम् जगदीश्वम्।।

काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ।सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत।।
23/05/2026

काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ।
सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत।।

ता कहुँ प्रभु कछु अगम नहिं जा पर तुम्ह अनुकुल।तब प्रभावँ बड़वानलहिं जारि सकइ खलु तूल।।
22/05/2026

ता कहुँ प्रभु कछु अगम नहिं जा पर तुम्ह अनुकुल।
तब प्रभावँ बड़वानलहिं जारि सकइ खलु तूल।।

तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम।सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम।।
21/05/2026

तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम।
सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम।।

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावकेकिशोरचंद्रशेखरे ...
20/05/2026

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।
विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावके
किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥

तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग।तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग।।
19/05/2026

तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग।
तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग।।

गलरुण्डमाल कपालब्याल तनभस्म शोभित सुंदरम् ।।तवशक्ति अंग शुशोभितम् करुणा करम् जगदीश्वम् ।।
18/05/2026

गलरुण्डमाल कपालब्याल तनभस्म शोभित सुंदरम् ।।
तवशक्ति अंग शुशोभितम् करुणा करम् जगदीश्वम् ।।

न जानामि योगं जपं नैव पूजांनतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ।जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानंप्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।
17/05/2026

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोहं सदा सर्वदा शम्भुतुभ्यम् ।
जराजन्मदुःखौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।

राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान।आसिष देह गई सो हरषि चलेउ हनुमान।।
16/05/2026

राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान।
आसिष देह गई सो हरषि चलेउ हनुमान।।

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