Hans Vihar Mandir

Hans Vihar Mandir Hans bihar mandir is a religious place for Hindus.

Magh Month Jai Shri Ram
03/01/2026

Magh Month

Jai Shri Ram

22/09/2025

*!!या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता*
*नमस्तस्ए नमस्तस्ए नमस्तस्ए नमो नमः!!*

*नवरात्रि हमें प्रेम, करुणा और दया जैसे सकारात्मक गुणों को अपनाने की प्रेरणा देती है। माँ दुर्गा का दिव्य आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख शांति और समृद्धि प्रदान करे, माँ का आशीर्वाद सभी पर बना रहे यही प्रार्थना है !*

Shardiya Nav Ratta Sthapna
22/09/2025

Shardiya Nav Ratta Sthapna

17/09/2025

-ईश्वर बहुत दयालु है

एक राजा का एक विशाल फलों का बगीचा था। उसमें तरह-तरह के फल होते थे और उस बग़ीचे की सारी देखरेख एक किसान अपने परिवार के साथ करता था. वह किसान हर दिन बगीचे के ताज़े फल लेकर राजा के राजमहल में जाता था।

एक दिन किसान ने पेड़ों पे देखा नारियल अमरुद, बेर, और अंगूर पक कर तैयार हो रहे हैं, किसान सोचने लगा आज कौन सा फल महाराज को अर्पित करूँ, फिर उसे लगा अँगूर करने चाहिये क्योंकि वो तैयार हैं इसलिये उसने अंगूरों की टोकरी भर ली और राजा को देने चल पड़ा! किसान जब राजमहल में पहुचा, राजा किसी दूसरे ख्याल में खोया हुआ था और नाराज भी लग रहा था किसान रोज की तरह मीठे रसीले अंगूरों की टोकरी राजा के सामने रख दी और थोड़े दूर बेठ गया, अब राजा उसी खयालों-खयालों में टोकरी में से अंगूर उठाता एक खाता और एक खींच कर किसान के माथे पे निशाना साधकर फेंक देता।

राजा का अंगूर जब भी किसान के माथे या शरीर पर लगता था किसान कहता था, ‘ईश्वर बड़ा दयालु है’ राजा फिर और जोर से* *अंगूर फेकता था किसान फिर वही कहता था ‘ईश्वर बड़ा दयालु है।

थोड़ी देर बाद राजा को एहसास हुआ की वो क्या कर रहा है और प्रत्युत्तर क्या आ रहा है वो सम्भल कर बैठा , उसने किसान से कहा, मै तुझे बार-बार अंगूर मार रहा हूँ , और ये अंगूर तुंम्हे लग भी रहे हैं, फिर भी तुम यह बार-बार क्यों कह रहे हो की ‘ईश्वर बड़ा दयालु है’।

किसान ने नम्रता से बोला, महाराज, बागान में आज नारियल, बेर और अमरुद भी तैयार थे पर मुझे भान हुआ क्यों न आज आपके लिये अंगूर् ले चलूं लाने को तो मैं अमरुद और बेर भी ला सकता था पर मैं अंगूर ही लाया। यदि अंगूर की जगह नारियल, बेर या बड़े बड़े अमरुद रखे होते तो आज मेरा हाल क्या होता ? इसीलिए मैं कह रहा हूँ कि ‘ईश्वर बड़ा दयालु है’!!

🌷 कथा सार 🌷
इसी प्रकार ईश्वर भी हमारी कई मुसीबतों को बहुत हल्का कर के हमें उबार लेता है पर ये तो हम ही नाशुकरे हैं जो शुकर न करते हुए उसे ही गुनहगार ठहरा देते हैं, मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ , मेरा क्या कसूर, आज जो भी फसल हम काट रहे हैं ये दरअसल हमारी ही बोई हुई है, बोया बीज बबूल का तो आम कहाँ से होये।। और बबुल से अगर आम न मिला तो गुनहगार भी हम नहीं हैं , इसका भी दोष हम किसी और पर मढेंगे, कोई और न मिला तो ईश्वर तो है ही।

आज हमारे पास जो कुछ भी है अगर वास्तविकता के धरातल पर खड़े होकर देखेंगे तो वास्तव में हम इसके लायक भी नही हैं पर उसके बावजूद मेरे ईश्वर ने मुझे जरूरत से ज़्यादा दिया है और बजाय उनका धन्यवाद करने के हम उनहे हमेशा दोष ही देते रहते हैं। पर वो तो हमारा पिता है हमारी माता है किसी भी बात का कभी बुरा नहीं मानते और अपना आशीर्वाद हम पर बरसाते रहते है। अगर एक बार उनके तोहफों की तरफ देखेंगे तो सारी उम्र धन्यवाद दोगे तो भी कम पड़ेंगे।

Hans Vihar MandirJanmastami UtsavJai Shri Krishna
17/08/2025

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Bhagwan in Sawan mood
20/07/2025

Bhagwan in Sawan mood

27/04/2025

भगवान की आरती करने का सही तरीका

कोई भी पूजा भगवान की आरती के बाद ही संपन्न मानी जाती है. स्कंद पुराण के अनुसार आरती मुख्य रूप से सात प्रकार की होती है.
1. मंगला आरती- सुबह जल्दी की जाने वाली आरती.
2. पूजा आरती- पूजा के दौरान की जाने वाली आरती.
3. श्रृंगार आरती- भगवान के श्रृंगार के बाद की जाने वाली आरती.
4. भोग आरती- जब भगवान को भोग अर्पित किया जाता है, तब ये आरती की जाती है.
5. धूप आरती- धूप दिखाने के बाद की जाने वाली आरती.
6. संध्या आरती- शाम के समय की जाने वाली आरती.
7. शयन आरती- रात में सोने से पहले की जाने वाली आरती.

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है. मान्यताओं के अनुसार, नियमित रूप से पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. वहीं, कोई भी पूजा भगवान की आरती के बाद संपन्न मानी जाती है. यानी पूजा में देवी-देवताओं की आरती करना आवश्यक माना गया है और बिना आरती के पूजा अधूरी होती है.

आरती करने का तरीका
आरती हमेशा श्रद्धा और भक्ति भाव से करनी चाहिए. वहीं, भाव से अलग आरती करने के 4 मुख्य नियम हैं. ये नियम कुछ इस प्रकार हैं-
1. आरती की शुरुआत भगवान के चरणों से करें और चरणों में आरती की थाल को चार बार घुमाएं. ये खुद को परमात्मा के चरणों में समर्पित करने की ओर इशारा होता है.
2. इसके बाद आरती की थाली को भगवान की नाभि के पास दो बार घुमाएं. माना जाता है कि भगवान ब्रह्मा का जन्म भगवान विष्णु की नाभि से हुआ था, ऐसे में भगवान के चरणों में नमन करने के बाद नाभि का पूजन किया जाता है.
3. इसके बाद आरती की थाल को भगवान के मुखमंडल के सामने एक बार घुमाएं.
4. आखिर में दीये को भगवान के पूरे शरीर पर सात बार घुमाते हुए आरती करें.
इस तरह कुल 14 बार आरती घुमाने से चौदह भुवनों तक आपकी भक्ति पहुंचती है.
स्कंद पुराण के अनुसार आरती के नियम
स्कंद पुराण में भी आरती के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. इसमें पंच प्रदीप का प्रयोग किया जाता है ।
पंच प्रदीप के लिए गाय के दूध से बने घी में डूबी हुई रुई की 5 बत्तियों का दीपक जलाएं. इसे पंच प्रदीप कहा जाता है.
श्रद्धा और भक्ति
यदि कोई व्यक्ति मंत्र और पूजा विधि नहीं जानता, लेकिन श्रद्धापूर्वक आरती करता है, तो उसकी पूजा भी स्वीकार होती है.
आरती करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
• आरती हमेशा खड़े होकर करें- आरती के दौरान खड़े रहना शुभ माना जाता है.
• थोड़ा झुककर आरती करें- इसे भक्ति का प्रतीक माना जाता है.
• आरती की थाली सही धातु की हो- तांबे, पीतल या चांदी की थाली में आरती करें.
• थाली में पूजा सामग्री रखें- गंगाजल, कुमकुम, चावल, चंदन, अगरबत्ती, फूल और भोग में फल या मिठाई रखें.
ध्यान रखें कि आरती पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसे सही विधि से करने से न केवल पूजा पूरी होती है, बल्कि मन को शांति भी मिलती है. माना जाता है कि श्रद्धा और भक्ति से की गई आरती भगवान तक अवश्य पहुंचती है और भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.

HANUMAN JANMOTSAVJAI SHRI RAM
13/04/2025

HANUMAN JANMOTSAV

JAI SHRI RAM

Hanuman Janmotsav 2025JAI HANUMAN JAI SHRI RAM
12/04/2025

Hanuman Janmotsav 2025

JAI HANUMAN JAI SHRI RAM

JAI MATA DI
31/03/2025

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