04/09/2025
रामस्वरुप यूनिवर्सिटी, बाराबंकी मामले की टाइमलाइन और ABVP से सवाल:
👉 LLB के छात्रों पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने लेट फाइन लगाया, जो 5000 रुपए तक पहुँच गया था।
👉लेट फाइन को वापस लेने के लिए छात्रों ने विरोध शुरू किया, इस दौरान LLB की मान्यता को लेकर भी आरोप लगाया गया।
👉यूनिवर्सिटी के वीसी विकास मिश्रा ने छात्रों को बताया- LLB की 2022-23 तक की मान्यता है। 2023-24 की ऑनलाइन मान्यता है। लेटर आना बाकी है।
👉इस बीच ABVP भी मामले में कूद पड़ी। फाइन को लेकर शुरू हुआ छात्रों का गुस्सा हंगामे में बदल गया।
👉वीसी मिश्रा ने DM शशांक त्रिपाठी और SP अर्पित विजयवर्गीय को फोन किया और मदद की माँग की।
👉CO हर्षित चौहान SP के निर्देष पर वीसी मिश्रा एवं विश्वविद्यालय प्रशासन को बचाने निकले।
👉छात्रों ने हंगामा किया। पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
👉सीएम योगी के विरोधियों ने इसे हवा दी और पुलिस पर कार्रवाई की माँग की।
👉सीएम योगी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए CO सहित सभी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की। IG को विश्वविद्यालय की जाँच के लिए भेजा।
👉ABVP के बड़े बड़े पदाधिकारियों ने जिला प्रमुख डीएम-एसपी से सवाल पूछने के बजाय सचिव संजय प्रसाद को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
👉ABVP का मामला शांत हुआ। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य घायल छात्रों से मिलने गए।
👉अगले दिन ABVP ने शिक्षा माफिया के खिलाफ कार्रवाई की माँग शुरू करी दी और नए सिरे से आंदोलन की चेतावनी दी।
कुछ तथ्य जो जानने लायक हैं-
👉विश्वविद्यालय राज्य सरकार के अधीन नहीं है, सीधा राज्यपाल के अधीन है। राज्य सरकार का काम कानून व्यवस्था बिगड़ने पर यूनिवर्सिटी के आग्रह पर कानून-व्यवस्था बनाना है।
👉VC मिश्रा के अनुसार LLB की डिग्री अब तक मान्य थी। अगर नहीं भी है तो यह मान्यता बार काउंसिल (BCI) देने का काम करता है, जो केंद्र सरकार के अधीन है।
👉BCI ने 4 सितंबर 2025 को बताया कि BHU और लखनऊ विश्वविद्यालय की लॉ की मान्यता का नवीनीकरण भी लंबे समय से नहीं हुआ है।
👉 कोई भी बड़ा पत्रकार या इंफ्लुएंसर इस तथ्य को लोगों को नहीं बता रहा है।
ABVP से सवाल-
👉जब VC विकास मिश्रा ने पुलिस बुलाई और SP विजयवर्गीय के निर्देश पर पुलिस भेजी गई तो इन दोनों का नाम ABVP क्यों नहीं ले रही?
👉BHU और लखनऊ यूनिवर्सिटी की LLB की मान्यता भी अभी लंबित है। फिर ABVP वहाँ प्रदर्शन क्यों नहीं कर रही?
👉शिक्षा माफिया के खिलाफ कार्रवाई की माँग ABVP कर रही है, लेकिन अब तक के सबसे भ्रष्ट कुलपति विनय पाठक के खिलाफ कार्रवाई के खिलाफ माँग क्यों नहीं की?
👉विनय पाठक ने सैकड़ों करोड़ हड़पे, अपने सगे-संबंधियों को नौकरी दिलवाई। VC बनाने का ठेका लेता था। कॉन्ट्रैक दिलवाता था।
👉विनय पाठक पर योगी सरकार ने कार्रवाई शुरू की तो ABVP ने मौन रहकर इसका विरोध क्यों किया?
👉 पंत कृषि विश्वविद्यालय के वीसी के तौर पर जब बद्री नारायण तिवारी ने अवैध भर्ती की तो ABVP ने क्यों सवाल नहीं उठाया।
👉ABVP के पदाधिकारी अंशुल द्विवेदी पर जातिवाद के गहरे आरोप लगते हैं। इस पर आजतक उन्होंने सफाई क्यों नहीं दी?
ये पूरा मामला प्रायोजित जान पड़ता है। इस मामले को योगी आदित्यनाथ के विरोधी हवा दे रहे हैं और अपरोक्ष रूप से अखिलेश को सपोर्ट कर रहे हैं। इस प्रकरण से ऐसा लगता है।
ABVP का बवाल विशुद्ध जातिवादी क्रियाकलाप है। बारांबकी के CO हर्षित चौहान और कोतवाल आरके राणा को जेल भेजवाने की साजिश है। चौहान साहब और राणा जी बेहद ईमानदार अधिकारी हैं और उन्हें बदनाम कर जेल भेजवाने के लिए एक लॉबी काफी समय से सक्रिय थी। भ्रष्टाचार करने वाले रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी के वीसी विकास मिश्रा पर कार्रवाई की बात किसी ने नहीं की, जबकि मामला सीधा-सीधा विकास मिश्रा से जुड़ा है। इस साजिश में जातिवाद का आरोप झेल रहे प्रांत संगठन मंत्री अंशुल द्विवेेदी की बड़ी भूमिका है।