श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर

  • Home
  • India
  • Jaipur
  • श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर

श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर समस्या दो समाधान लो
जीवन का सम्पूर्ण हल जाने,कठिन से कठिन समस्याओ केसमाधान के लिए संपर्क करे

श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर
पंडित एस आर ज्योतिषी ( खानदानी ज्योतिषी )
[ जन्मपत्रिका हस्तकरेखा विशेषग्य समाधानकर्ता ]
पिछले 35 वर्षो से लगातार आपकी सेवा में
जयपुर में विराजमान


हस्तक रेखा जन्मपत्रिका देखकर जीवन का सम्पूर्ण हाल बताया जाता है
आर्थिक मानसिक पारिवारिक जटिल समस्या - नौकरी, कारोबार में लाभ हानि, प्रेम विवाह, गृह कलेश, जादू टोना, कर्जा मुक्ति, तरक्की, पति पत्नी में अनबन सास बहु में तक

रार, लक्ष्मी का न बचना, सौतन व दुश्मन से छुटकारा, विदेश यात्रा में रूकावट, कोर्ट कचहरी, बनते कार्यों का बिगड़ जाना, पढाई में मन तथा बीमारी में दवा का ना लगाना, शादी विवाह में रूकावट, संतान का ना होना या होकर मर जाना, मनचाहा प्यार, समाधान पाये तुरंत, घर में बीमारी का क्लेश का न जाना या बरकत ना होना, घर में सुख शांति ना होना मांगलिक दोष, कार्लसर्प दोष, पितर दोष, कुंडली दोष, कठिन से कठिन समस्याओ के समाधान के लिए संपर्क करे

श्रद्धा ज्योतिष दरबार
मानसरोवर - जयपुर
मोबाइल : 09799938908

 #समस्या दो समाधान लोजीवन का सम्पूर्ण हल जाने,कठिन से कठिन समस्याओ के  #समाधान के लिए संपर्क करेआज ही मिले
15/12/2016

#समस्या दो समाधान लो
जीवन का सम्पूर्ण हल जाने,कठिन से कठिन समस्याओ के #समाधान के लिए संपर्क करे
आज ही मिले

 #राशिफल क्या है?राशिफल द्वारा भविष्यफल जानने की यह सबसे पौराणिक पद्धति है। किसी व्यक्ति का भविष्यफल जानने की कई विधियां...
15/12/2016

#राशिफल क्या है?

राशिफल द्वारा भविष्यफल जानने की यह सबसे पौराणिक पद्धति है। किसी व्यक्ति का भविष्यफल जानने की कई विधियां होती है, लेकिन यह विधि सर्वाधिक प्रिय है। विस्तृत व सूक्ष्म भविष्यफल जातक की कुंडली देखकर बताया जा सकता है। यह राशिफल मासिक या वार्षिक दोनों प्रकार से देखा या लिखा जा सकता है। राशियों पर आधारित हम किसी व्यक्ति का भविष्यफल बता सकते हैं जो कि पंचांगों और अखबारों में राशिफल के नाम से प्रकाशित होता है।
हम में से अधिकतर व्यक्ति अपने भविष्य के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं. यद्यपि उनमें से बहुत से लोगों का ज्योतिष में विश्वास नहीं होता फिर भी कौतहुल वश या शौक के कारण वो अपना दैनिक राशीफल पढ्ते है.

इसे हम ज्योतिष का चमत्कार ही कहेंगे कि जो लोग सार्वजनिक जीवन में इस विद्या की आलोचना या खण्डन करते हैं, वो अपने निजी जीवन में इसके प्रति आकर्षण रखते हैं. यह दोहरा चरित्र उन व्यक्तियों का स्वंय का है, ज्योतिष शास्त्र का नहीं.
राशिफल के फायदे?
राशिफल देखने से आपको पता चलता है कि आने वाला दिन या महीना या सप्ताह कैसा रहने वाला है। व्यक्ति उसी के आधार पर योजनाओं को कार्यान्वित कर सकता है। इसके अतिरिक्त यदि व्यक्ति को मालूम

 #शादी में देरी -  #कारण और  #निवारणशादी - शादी - ब्याह में देरी के अनेक कारण हाक सकते है।यदि आप ज्योतिष की दृषिट से देख...
10/12/2016

#शादी में देरी - #कारण और #निवारण

शादी - शादी - ब्याह में देरी के अनेक कारण हाक सकते है।यदि आप ज्योतिष की दृषिट से देखे तो विलम्ब मुख्य रूप से शनि, षुक्र, गुरु और राहु उत्तरदायी हैं। यदी आपकी कुण्डली में निम्न योगों में से कोर्इ एक या इससे ज्यादा योग विधमान है, तो विवाह देरी से होने की होने की सम्भावना हाक सकती हैं-
यदि लग्न और चन्द्र से शनि पहले, तीसरे, पांचवे, सातवें या दषवे भाव में हो तो विवाह में देरी हो सकती हैं।

पंचम भाव में शुक्र तथा चतुर्थ भाव में राहु होता है तो विवाह में देरी हो सकती हैं।

यदि सातवें भाव में पाप ग्रह तथा गुरु की अषुभ दृषिट (अष्टमेष) पर हो।

शनि अष्टम में हो व लग्नेष शुक्र से युक्त हो।

यदि मंगल है अष्टम भाव मे और राहु सप्तम में हो तो विवाह में देरी हो सकती हैं।

यदि मंगल तथा शुक्र की युति पंचम, सप्तम या नवम भाव मे हो तथा उन पर गुरु की पाप दृषिट हाक तो विवाह में देरी हो सकती हैं।

यदि शनि व चंद्र की युति 1,2,7 या 12 भाव मे हो या शुक्र पंचम मे तथा राहु एकादष में हो।

यदि 6,8,12वें भाव में पाप ग्रह हो तो विवाह में देरी हो सकती हैं।

यदि सप्तमेष 6,8,12 भाव मे गया हो तो विवाह में देरी हो सकती हैं।
उपाय
'श्री रामतक्षास्त्रोत का नियमित 9 दिन तक नौ बार पाठ करें तथा चैत्र नवरात्र में मां गौरी की पूजा अर्चना करें।
महागौरी पार्वती का पूजन करके निम्न् मंत्र की 11 माला जपें।

'है गौरी शंकराधिडिंग यथा त्वं शंर प्रिया।
तथा मां कुरु कल्याणी कांतकांता सुदुर्लभाम।।

कुल देवी का आर्षिवाद प्राप्त करे। गुरुवार का व्रत करें।

#श्रद्धा_ज्योतिष_दरबार
मानसरोवर - #जयपुर
मोबाइल : 09799938908

 #क्यों लगाते है हम  #तिलक  #तिलक का अर्थ संस्कृत के तिल क्रिया से लिया गया है,जिसका अाश्य है निचोड़,निष्कर्म या थोड़े में...
10/12/2016

#क्यों लगाते है हम #तिलक

#तिलक का अर्थ संस्कृत के तिल क्रिया से लिया गया है,जिसका अाश्य है निचोड़,निष्कर्म या थोड़े में बहुत कुछ जान लेना,आयुर्वेद शास्त्रानुशासर
मष्तिष्क में पियूष ग्रंथि होती है,जहा अमृत का वास होता है,हमारे वेदो में भी कहा गया है की तिलक दोना भोहों के बीच होना चाहिये,इससे मनुष्य के
सोचने समझने की क्षमता में वृद्धि होती है, #तिलक के मुख्य रूप से दो ही तत्व विचारणीय है,देव पूजा के अतिरिक्त अन्य सभी अवसरों पर अक्षत रोली
का तिलक किया जाता है,दूसरा -अखंडित चावल रोली के तिलक लगाये जाते है,दरअसल,रोली का लाल रंग जीवन की लालिमा का प्रतिक है,रक्त की
लालिमा जीवन का प्रतिक है,स्त्रोत है,प्रेम का भी रंग लाल माना जाता है,इसे तेज़ के रूप में भी स्वीकार किया गया है,इस रोली के तिलक को प्राय अक्षत
से अलंकृत किया जाता है,अक्षत यानि अखंडित चावल। #चावल के सफ़ेद रंग में सत्व गुण पाया जाता है,इसे प्रकाश शीतलता तथा ज्ञान का प्रतीक
माना गया है,ज्ञान के प्रकाश के बिना प्रेम ,शक्ति,तेज़ की पहचान है,इसलिये श्वेत रंग अर्थात सत्व गुण के अभाव में प्रेम मोह बन जाता है,शक्ति
हत्याचार बन सकती है और तेज़ आंतक का रूप धारण कर सकती है,इसलिये चावल रोली का तिलक लगाया जाता है।

श्रद्धा ज्योतिष दरबार
मानसरोवर - जयपुर
मोबाइल : 09799938908

08/12/2016

#शनि देव और आपका #व्यवसाय

मैने कई बार शनि देव के बारे मे बताया है आज बताते है की कौन जातक नौकरी करता है और कौन करवाता है यानी नौकर चाकर होते है इनका सीधा सबंध शनि देव से है जब भी शनि देव नीचगत हो या खराब हो साथ मे परम मित्र शुक्र भी मंगल व सुर्य से पिडित हो तो जातक काम अपना खोलेगा तो कर्जा ही देगा राहू 12 मे होगा तो काम बदलता रहेगा पर कभी न सफल होता है न समझ पाता है एक समय मे वह काम करवाता था अब ऐसे हाल मे गुलामी यानी नौकरी करनी पडती है पर वहाॅ भी धन सचंय नही हो पाता । सभी राशियो का अपना एक अधिकार रहता है शनि देव और केतू एक साथ अपना साथ निभाते है साथ मे सुर्य का बलवान होना भी एक अहम बात है चद्रमा अपने घर मे उच्च का हो शुभफलदायी हो मगंल गुरू का मेल हो तो जातक के कई होटल व काम होगे जिनमे कई लोग उसके लिए काम काम करते है केतू और शनी कर्म दोनो का सूचक है शनि का बलवान होना यानी केतू का बलवान होना पर यदि गुरू पिडित हो तो फल इतने अच्छे केतू नही दे पाता इसलिए उसको अनचाहे अनजाने दुश्मनो से खतरा होता रहेगा नौकरी करवाना और नौकरी करना दो अलग अलग बातें है। जिन लोगो की कुडंली मे बुध और केतू के साथ सुर्य गुरू अच्छे होते है वह पिता का ब्यापार चलाते है उसको बढाता है यानी चौथा घर दसवा व ग्याहरवा घर पूर्ण बली होता है वह सब सुख भोग करता है पर 36 वे साल से कामयाम होगा जन्म कुन्डली में अगर शनि नीच का है तो नौकरी करवायेगा,और शनि अगर उच्च का है तो नौकरों से काम करवायेगा। तुला का शनि उच्च का होता है और मेष का शनि नीच का होता है। मेष राशि से जैसे जैसे शनि तुला राशि की तरफ़ बढता जाता है उच्चता की ओर अग्रसर होता जाता है,और तुला राशि से शनि जैसे जैसे आगे जाता है नीच की तरफ़ बढता जाता है,अपनी अपनी कुन्डली में देख कर पता किया जा सकता है कि शनि की स्थिति कहां पर है। और जिस स्थान पर शनि होता है उस स्थान के साथ शनि अपने से तीसरे स्थान पर,सातवें स्थान पर और दसवें स्थान पर अपना पूरा असर देता है। जिसकी कुडंली मे मगंल नीच का होगा या दसवे का स्वामी होकर बुध के साथ छठे घर मे होगे उसका काम बिना किसी से कर्ज लिए नी चलता कमायेगा तो महीना खतम होते ही उसको फिर जरूरत होती है उसका बिजनिस शुरू तो अच्छा होगा पर उसको पैसा समय पर नी मिलता या रूक जाता है ऐसे लोग झूठे केसो मे फसं जाते है इसके साथ ही शनि पर राहु केतु मगंल अगर असर दे रहे है तो शनि के अन्दर इन ग्रहों का भी असर शुरु हो जाता है,मतलब जैसे शनि नौकरी का मालिक है,और शनि वृष राशि का है,वृष राशि धन की राशि है और भौतिक सामान की राशि है,वृष राशि से अपनी खुद की पारिवारिक स्थिति का पता किया जाता है। वृष राशि में शनि नीच का होगा लेकिन उच्चता की तरफ़ बढता हुआ होगा,इसके प्रभाव से जातक धन और भौतिक सामान के संस्थान के प्रति काम करने के लिये उत्सुक रहेगा,इसके साथ ही शनि की तीसरी निगाह कर्क राशि पर होगी,कर्क राशि चन्द्रमा की राशि है,और कर्क राशि के लिये माता मन मकान पानी पानी वाली वस्तुयें चांदीचावल जनता और वाहन आदि के बारे में जाना जाताहै,तो जातक का ध्यान काम करने के प्रति भौतिक साधनों तथा धन के लिये इन क्षेत्रों में सबसे पहले ध्यान जायेगा। उसके बाद शनि की सातवीं निगाह वृश्चिक राशि पर होगी,यह भी जल की राशि है और मंगल इसका स्वामी है। यह मृत्यु के बाद प्राप्त धन की राशि है,जो सम्पत्ति मौत के बाद प्राप्त होती है उसके बारे में इसी राशि से जाना जाता है। किसी की सम्पत्ति को बेचकर उसके बीच से प्राप्त कियेजाने वाले कमीशन की राशि है,तो जातक जब नौकरी करेगा तो उसका ध्यान इन कामों की तरफ़ भी जायेगा। काम करवाने के लिऐ शनि का अच्छा होना साथ ही केतू अहम है जैसे शनि मृत्यु है वैसे केतू उसके बाद मोक्ष का है यानी शनि कर्म है और कराने का काम केतू का । जिसका चौथा भाव बलि या उसका स्वामि पूर्ण बल मे हो दसवा पूर्ण फल मे हो ऐसे जातक के पास सारी सुविधा होती है पर वह समय की कद्र नही करता तब लोग उसे लूटते रहेगे । पर जिनका राहू 11-12 घर जाऐगा वो अपनी जन्म भूमि से दूर काम करेगा 12 मे तो दूसरे देशो की यात्रा और वही का काम देगा अपनी जन्म भूमी मे वह कामयाब नही होता । जातक रत्नो के माध्यम से अपना लग्न कर्म और भाग्य को मजबूत कर सकते है रत्नो की ऊर्जा हमारे सभी चक्रो की ऊर्जा से मिलकर हमारे अदंर उन ग्रहो शुभ प्रभाव बढा देता है । रत्नो से जातक को उल्टे सीधे उपाय करने नही पडते पर हा रत्न किसी अच्छे सलाहकार से पहने ताकी धन और समय की हानी न हो

 #शनि देव और आपका  #व्यवसायमैने कई बार शनि देव के बारे मे बताया है आज बताते है की कौन जातक नौकरी करता है और कौन करवाता ह...
08/12/2016

#शनि देव और आपका #व्यवसाय

मैने कई बार शनि देव के बारे मे बताया है आज बताते है की कौन जातक नौकरी करता है और कौन करवाता है यानी नौकर चाकर होते है इनका सीधा सबंध शनि देव से है जब भी शनि देव नीचगत हो या खराब हो साथ मे परम मित्र शुक्र भी मंगल व सुर्य से पिडित हो तो जातक काम अपना खोलेगा तो कर्जा ही देगा राहू 12 मे होगा तो काम बदलता रहेगा पर कभी न सफल होता है न समझ पाता है एक समय मे वह काम करवाता था अब ऐसे हाल मे गुलामी यानी नौकरी करनी पडती है पर वहाॅ भी धन सचंय नही हो पाता । सभी राशियो का अपना एक अधिकार रहता है शनि देव और केतू एक साथ अपना साथ निभाते है साथ मे सुर्य का बलवान होना भी एक अहम बात है चद्रमा अपने घर मे उच्च का हो शुभफलदायी हो मगंल गुरू का मेल हो तो जातक के कई होटल व काम होगे जिनमे कई लोग उसके लिए काम काम करते है केतू और शनी कर्म दोनो का सूचक है शनि का बलवान होना यानी केतू का बलवान होना पर यदि गुरू पिडित हो तो फल इतने अच्छे केतू नही दे पाता इसलिए उसको अनचाहे अनजाने दुश्मनो से खतरा होता रहेगा नौकरी करवाना और नौकरी करना दो अलग अलग बातें है। जिन लोगो की कुडंली मे बुध और केतू के साथ सुर्य गुरू अच्छे होते है वह पिता का ब्यापार चलाते है उसको बढाता है यानी चौथा घर दसवा व ग्याहरवा घर पूर्ण बली होता है वह सब सुख भोग करता है पर 36 वे साल से कामयाम होगा जन्म कुन्डली में अगर शनि नीच का है तो नौकरी करवायेगा,और शनि अगर उच्च का है तो नौकरों से काम करवायेगा। तुला का शनि उच्च का होता है और मेष का शनि नीच का होता है। मेष राशि से जैसे जैसे शनि तुला राशि की तरफ़ बढता जाता है उच्चता की ओर अग्रसर होता जाता है,और तुला राशि से शनि जैसे जैसे आगे जाता है नीच की तरफ़ बढता जाता है,अपनी अपनी कुन्डली में देख कर पता किया जा सकता है कि शनि की स्थिति कहां पर है। और जिस स्थान पर शनि होता है उस स्थान के साथ शनि अपने से तीसरे स्थान पर,सातवें स्थान पर और दसवें स्थान पर अपना पूरा असर देता है। जिसकी कुडंली मे मगंल नीच का होगा या दसवे का स्वामी होकर बुध के साथ छठे घर मे होगे उसका काम बिना किसी से कर्ज लिए नी चलता कमायेगा तो महीना खतम होते ही उसको फिर जरूरत होती है उसका बिजनिस शुरू तो अच्छा होगा पर उसको पैसा समय पर नी मिलता या रूक जाता है ऐसे लोग झूठे केसो मे फसं जाते है इसके साथ ही शनि पर राहु केतु मगंल अगर असर दे रहे है तो शनि के अन्दर इन ग्रहों का भी असर शुरु हो जाता है,मतलब जैसे शनि नौकरी का मालिक है,और शनि वृष राशि का है,वृष राशि धन की राशि है और भौतिक सामान की राशि है,वृष राशि से अपनी खुद की पारिवारिक स्थिति का पता किया जाता है। वृष राशि में शनि नीच का होगा लेकिन उच्चता की तरफ़ बढता हुआ होगा,इसके प्रभाव से जातक धन और भौतिक सामान के संस्थान के प्रति काम करने के लिये उत्सुक रहेगा,इसके साथ ही शनि की तीसरी निगाह कर्क राशि पर होगी,कर्क राशि चन्द्रमा की राशि है,और कर्क राशि के लिये माता मन मकान पानी पानी वाली वस्तुयें चांदीचावल जनता और वाहन आदि के बारे में जाना जाताहै,तो जातक का ध्यान काम करने के प्रति भौतिक साधनों तथा धन के लिये इन क्षेत्रों में सबसे पहले ध्यान जायेगा। उसके बाद शनि की सातवीं निगाह वृश्चिक राशि पर होगी,यह भी जल की राशि है और मंगल इसका स्वामी है। यह मृत्यु के बाद प्राप्त धन की राशि है,जो सम्पत्ति मौत के बाद प्राप्त होती है उसके बारे में इसी राशि से जाना जाता है। किसी की सम्पत्ति को बेचकर उसके बीच से प्राप्त कियेजाने वाले कमीशन की राशि है,तो जातक जब नौकरी करेगा तो उसका ध्यान इन कामों की तरफ़ भी जायेगा। काम करवाने के लिऐ शनि का अच्छा होना साथ ही केतू अहम है जैसे शनि मृत्यु है वैसे केतू उसके बाद मोक्ष का है यानी शनि कर्म है और कराने का काम केतू का । जिसका चौथा भाव बलि या उसका स्वामि पूर्ण बल मे हो दसवा पूर्ण फल मे हो ऐसे जातक के पास सारी सुविधा होती है पर वह समय की कद्र नही करता तब लोग उसे लूटते रहेगे । पर जिनका राहू 11-12 घर जाऐगा वो अपनी जन्म भूमि से दूर काम करेगा 12 मे तो दूसरे देशो की यात्रा और वही का काम देगा अपनी जन्म भूमी मे वह कामयाब नही होता । जातक रत्नो के माध्यम से अपना लग्न कर्म और भाग्य को मजबूत कर सकते है रत्नो की ऊर्जा हमारे सभी चक्रो की ऊर्जा से मिलकर हमारे अदंर उन ग्रहो शुभ प्रभाव बढा देता है । रत्नो से जातक को उल्टे सीधे उपाय करने नही पडते पर हा रत्न किसी अच्छे सलाहकार से पहने ताकी धन और समय की हानी न हो

संतान बाधा कारण व उपायज्योतिष शास्त्र को वेदों का नैत्र कहा गया हैं, इस शास्त्र के द्वारा जीवन के विभिन्न पहलुओं को देखा...
08/12/2016

संतान बाधा कारण व उपाय
ज्योतिष शास्त्र को वेदों का नैत्र कहा गया हैं, इस शास्त्र के द्वारा जीवन के विभिन्न पहलुओं को देखा व समझा जा सकता हैं। जन्म कुंडली में जिन योगों की वजह से संतान होने में बाधायें आती हैं, उनमें से प्रमुख योग हैं-

1- पंचम स्थान व षष्ट स्थान के मालिक यदि एकदूसरे की राशि में स्थित हो तो ऐसे जातक की सन्तान बार बार गर्भ पात के कारण नष्ट हो जाती हैं ।

2- पंचमेश, अष्टम स्थान में हो त्था पंचम स्थान पर पापी ग्रहों का प्रभाव हो तो जातक को सन्तान सुख प्राप्त नही हो पाता ।

3- पंचम स्थान पर शनि व राहु का प्रभाव मृतसंतान देता हैं या संतान सुख से हीन करता हैं ।

4- मंगल का पंचम प्रभाव अत्यँधिक कष्ट पूर्वक संतान देता हैं, ऐसे जातकों कि संतान ऑपरेशन के द्वारा होती हैं । यदि शुभ प्रभाव हो तो अन्यथा अशुभ प्रभाव में संतान नहीं होती । मंगल व राहु का संयुक्त प्रभाव सर्प श्राप के कारण संतान होने में दिक्क्त देता हैं ।

5- सूर्य का पंचम भाव पर प्रभाव संतान से वंचित करता हैं, या अत्यंधिक प्रयत्न करने से एक संतान की प्राप्ती करवाता हैं।

6- लग्न, पंचम व सप्तम स्थान पर सूर्य, बुध और शनि का प्रभाव संतान प्राप्ती नही होने देता ।

7- शुक्र यदि पुरुष~जातक की जन्म कुंडली में शनि, बुध व राहु के साथ स्थित हो तथा पंचम व सप्तम स्थान पर पापी ग्रहों का प्रभाव हो तो शुक्र(वीर्य) दोष होता हैं ।

8- पंचम स्थान पर शनि सूर्य का प्रभाव हो तथा राहु या केतु से दृष्टि सम्बंध बनाये तो पितृदोष के कारण संतान प्राप्ती में अचूक बाधा आती हैं ।

9- पंचम स्थान पर देवगुरु बृहस्पति स्थित हो तथा पापी ग्रहों का प्रभाव हो तो संतान होने में अनेक बाधाये आती हैं।

10- पंचमेश व गुरु दोनो एक साथ द्वादश स्थान में स्थित हो तथा मंगल व अष्ट मेश पंचम भाव में हो तो जातक को सन्तान सुख से वंचित होना पडता हैं ।

उपाय –
🌹🌹🌹

1- बृहस्पति देव संतान कारक होते हैं । गुरु का पूजन करने से विभिन्न प्रकार के दोष स्वत:नष्ट हो जाते हैं।

2- संतान प्राप्ती के लिये संतान बाल गोपाल पूजन किया जाता हैं, इस पूजन में कृष्ण भगवान का बाल रूप मे पूजन होता हैं। संतान बाल गोपाल का मंत्र हैं- ” ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ।”

3- किसी मन्दिर या स्कुल में केले का पेड लगायें व इसका नित्य पूजन करें।

4- हरिवंश महापुराण का पाठ करायें तथा श्रवण करें।

5- पित्रों के लिये दान करें। पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलायें तथा चीटियों व कौओं को दाना आदि दें।

6- 11 प्रदोष व्रत करें। भगवान शिव का अभिषेक संतान प्राप्ती की लिये लाभदायक उपाय हैं ।

क्या आपको धन की कमी है -करे ये उपाययदि आपके निवास के आग्नेय कोण (पूर्व तथा दक्षिण का कोना) में गलती से पानी की व्यवस्था ...
08/12/2016

क्या आपको धन की कमी है -करे ये उपाय

यदि आपके निवास के आग्नेय कोण (पूर्व तथा दक्षिण का कोना) में गलती से

पानी की व्यवस्था हो गई हो तो यह वास्तुशास्त्र के अनुसार बहतु ही बड़ा दोष है।

इसके निवारण हेतु आप उस स्थान पर 24 घण्टे एक लाल बल्ब जलता रहने दें।

सांयकाल में उस स्थान पर उक दीपक अवश्‍य रखें। इससे धन का आगमन होगा।

आर्थिक चिन्ता मुक्त हों

आप कभी खाली हाथ घर न आएं यदि आप बाजार से कुछ लाने की स्थिती में

नहीं है तो मार्ग से एक कागज का टुकड़ा ही उठा लायें। घर में धन-धान्य के

आगमन का मार्ग प्रशस्त होगा।

[धन हानि से बचने का उपाय ]

घर में नमक किसी खुले डिब्बे में ना रखें। इससे धन हानि होती है।

दरिद्रता नाश हेतु

घर में जितनें भी दरवाजे हों, उनमें समय समय पर तेल अवश्‍य डालते रहें। उनमें

से ही से आवाज नहीं आनी चाहिए। इससे लक्ष्मी का आगमन होता है।

लक्ष्मी की अनुकंपा

यदि आप गुरूवार को केले के वृक्ष पर सादा जल चढाकर घी का दीपक अर्पित करें

तथा शनिवार को पीपल के वृक्ष में गुड़ दूध मिश्रित मीठा जल व सरसों का तेल

का दीपक चढाएं तो कभी भी आर्थिक रूप से परेशान नहीं रहेंगे तथा लक्ष्मी की

सदा अनुकंपा बनी रहेगी।

अशुभता से सावधान

यदि किसी दिन घर का कोई बच्चा सुबह उठते ही कुछ खाने को मांगे अथवा

अकारण रोने लगे तो उस दिन घर के प्रत्येक सदस्य को सावधान रहने की

आवश्‍यक्‍ता है, क्यों कि अशुभता एवं धन हानि का सूचक है।

धनागम से रोक हटे

यदि नियमित रूप से घर की प्रथम रोटी गाय को तथा अन्तिम रोटी कुत्ते को दे

तो धनागमन होनें से कोई नहीं रोक सकता।

दान द्वारा धनवृद्धि

यदि कभी किसी को दान दें तो देहरी में न आनें दें। दान घर की देहरी के अन्दर

से ही दें। इससे धनवृद्धि होती है।

धन रोकने के उपाय

आप अपने निवास में कुछ कच्चा स्थान अवश्‍य रखें। यथा सम्भव यह घर के

मध्य स्थान में हो। यदि आप वहां तुलसी को पौधा लगा दे तों धन लाभ में कभी

रूकावट नहीं आती सकती।

धनलक्ष्मी से भिक्षा मांगे

किसी भी रात्रि में 3 से 5 बजे के मध्य उठें और अपने निवास के उस खुले स्थान

में आ जाएं जहां से आसमान दिखाई देता हो। अब पश्चिम दिशा की ओर मुख

करके अपने दोनों हाथ के पंजो को इस प्रकार मिला लें जैसे आप कुछ मांग रहे

हो। इसके पश्चात् आकाश की ओर देखते हुए धन लक्ष्मी से अपनी सम्पन्नता की

भिक्षा मांगे। फिर दोनों हथेलियों को अपने चेहरे पर फेर लें। कुछ ही दिनों में धन

का आगमन होने लगेगा।

लक्ष्मी का वास

प्रत्येक शनिवार को घर के मकड़ी के जाले, रद्दी एवं टूटी – फूटी सामग्री आदि

हटाने पर भी लक्ष्मी का वास होता है।

धन बढ़ाने का उपाय

रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र में कुषमूल लाकर उसको गंगाजल से स्नान कराकर

देव प्रतिमा की भांति पूजन करें और लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रख दें।

प्रतिदिन धूप दीप करें। तिजोरी का धन दिनोंदिन बढ़ता रहेगा।

धन प्राप्त करना

शुक्रवार के दिन कमल पुष्प लाकर लाल वस्त्र में लपेटकर अपनी तिजोरी अथवा

अलमारी में रख दें। धन सरलतापूर्वक प्राप्त हो जायेगा।

धन का आगमन होना

प्रातःकाल उठकर हथेलियों को कुछ क्षण देखकर उन्हें चूमनें और अपने चेहरे पर 3

- 4 बार फिरानें से धनागम होनें लगता है।

लक्ष्मी का आगमन होना

पीपल वृक्ष के नीचे पारद शिवलिंग स्थापित करके प्रतिदिन प्रातः काल उस पर

जल चढ़ाएं और धूप दीप दिखाकर पूजन अर्चन करें। तत्पश्‍चात् 5 माला निम्न

मंत्र का जाप करें। सायंकाल भी प्रतिमा की धूप दीप से पूजा करनी चाहिए। इससे

लक्ष्मी का आगमन होनें लगता है। मंत्र इस प्रकार है -

ऊँ नमः शिवाय।

धन की कमी ना रहे

घर के मुख्य द्वार पर प्रतिदिन सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दीपक बुझ जानें

पर बचे हुए तेल को पीपल वृक्ष पर सन्ध्या के समय चढ़ा दें। इस प्रकार 7

शनिवार तक करनें पर घर में धन की कमी नहीं रहती।

आर्थिक स्थिरता बनी रहे

माह में दो बार किसी भी दिन जलते उपले पर थोड़ा सा लोपान रखकर उसके धुएं

को पूरे घर में घुमाएं। इससे घर धन धान्य से भरपूर रहता है।

पाठ आदि से धनलाभ

जिस घर में नियमित रूप से अथवा प्रत्येक शुक्रवार को श्रीसूक्त या श्रीलक्ष्मी

सूक्त का पाठ होता है, वहां धनलक्ष्मी का स्थायी वास होता है।

आर्थिक रूप से समर्थतता

यदि आप चाहतें है कि आपके घर में सुख - शांति बनी रहें तथा आप आर्थिक रूप

से समर्थ रहें तो प्रत्येक अमावस्या को पूरे घर की पूर्ण सफाई करें। जितना भी

फालतू सामान इक्कट्ठा हो, उसे कबाड़ी को बेच दें अथवा बाहर फैंक दें। सफाई के

बाद 5 अगरबत्तियां घर में मन्दिर में जलाएं ।

श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर जन्मपत्रिका हस्तकरेखा विशेषग्य समाधानकर्ता पिछले 35 वर्षो से लगातार आपकी सेवा में हस्तक रेखा...
08/12/2016

श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर
जन्मपत्रिका हस्तकरेखा विशेषग्य समाधानकर्ता
पिछले 35 वर्षो से लगातार आपकी सेवा में
हस्तक रेखा जन्मपत्रिका देखकर जीवन का सम्पूर्ण हाल बताया जाता है
आर्थिक मानसिक पारिवारिक जटिल समस्या - नौकरी, कारोबार में लाभ हानि, प्रेम विवाह, गृह कलेश, जादू टोना, कर्जा मुक्ति, तरक्की, पति पत्नी में अनबन सास बहु में तकरार, लक्ष्मी का न बचना, सौतन व दुश्मन से छुटकारा, विदेश यात्रा में रूकावट, कोर्ट कचहरी, बनते कार्यों का बिगड़ जाना, पढाई में मन तथा बीमारी में दवा का ना लगाना, शादी विवाह में रूकावट, संतान का ना होना या होकर मर जाना, मनचाहा प्यार, समाधान पाये तुरंत, घर में बीमारी का क्लेश का न जाना या बरकत ना होना, घर में सुख शांति ना होना मांगलिक दोष, कार्लसर्प दोष, पितर दोष, कुंडली दोष, कठिन से कठिन समस्याओ के समाधान के लिए संपर्क करे
श्रद्धा ज्योतिष दरबार
मानसरोवर - जयपुर
मोबाइल : 09799938908

श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर जन्मपत्रिका हस्तकरेखा विशेषग्य समाधानकर्ता पिछले 35 वर्षो से लगातार आपकी सेवा में हस्तक रेखा...
08/12/2016

श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर
जन्मपत्रिका हस्तकरेखा विशेषग्य समाधानकर्ता
पिछले 35 वर्षो से लगातार आपकी सेवा में
हस्तक रेखा जन्मपत्रिका देखकर जीवन का सम्पूर्ण हाल बताया जाता है
आर्थिक मानसिक पारिवारिक जटिल समस्या - नौकरी, कारोबार में लाभ हानि, प्रेम विवाह, गृह कलेश, जादू टोना, कर्जा मुक्ति, तरक्की, पति पत्नी में अनबन सास बहु में तकरार, लक्ष्मी का न बचना, सौतन व दुश्मन से छुटकारा, विदेश यात्रा में रूकावट, कोर्ट कचहरी, बनते कार्यों का बिगड़ जाना, पढाई में मन तथा बीमारी में दवा का ना लगाना, शादी विवाह में रूकावट, संतान का ना होना या होकर मर जाना, मनचाहा प्यार, समाधान पाये तुरंत, घर में बीमारी का क्लेश का न जाना या बरकत ना होना, घर में सुख शांति ना होना मांगलिक दोष, कार्लसर्प दोष, पितर दोष, कुंडली दोष, कठिन से कठिन समस्याओ के समाधान के लिए संपर्क करे

श्रद्धा ज्योतिष दरबार
मानसरोवर - जयपुर
मोबाइल : 09799938908

07/12/2016

श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर
पंडित एस आर ज्योतिषी ( खानदानी ज्योतिषी )
[ जन्मपत्रिका हस्तकरेखा विशेषग्य समाधानकर्ता ]
पिछले 35 वर्षो से लगातार आपकी सेवा में
जयपुर में विराजमान

हस्तक रेखा जन्मपत्रिका देखकर जीवन का सम्पूर्ण हाल बताया जाता है
आर्थिक मानसिक पारिवारिक जटिल समस्या - नौकरी, कारोबार में लाभ हानि, प्रेम विवाह, गृह कलेश, जादू टोना, कर्जा मुक्ति, तरक्की, पति पत्नी में अनबन सास बहु में तकरार, लक्ष्मी का न बचना, सौतन व दुश्मन से छुटकारा, विदेश यात्रा में रूकावट, कोर्ट कचहरी, बनते कार्यों का बिगड़ जाना, पढाई में मन तथा बीमारी में दवा का ना लगाना, शादी विवाह में रूकावट, संतान का ना होना या होकर मर जाना, मनचाहा प्यार, समाधान पाये तुरंत, घर में बीमारी का क्लेश का न जाना या बरकत ना होना, घर में सुख शांति ना होना मांगलिक दोष, कार्लसर्प दोष, पितर दोष, कुंडली दोष, कठिन से कठिन समस्याओ के समाधान के लिए संपर्क करे

श्रद्धा ज्योतिष दरबार
मानसरोवर - जयपुर
मोबाइल : 09799938908

श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर पंडित एस आर ज्योतिषी ( खानदानी ज्योतिषी )[ जन्मपत्रिका हस्तकरेखा विशेषग्य समाधानकर्ता ]पिछले...
05/12/2016

श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर
पंडित एस आर ज्योतिषी ( खानदानी ज्योतिषी )
[ जन्मपत्रिका हस्तकरेखा विशेषग्य समाधानकर्ता ]
पिछले 35 वर्षो से लगातार आपकी सेवा में
जयपुर में विराजमान

हस्तक रेखा जन्मपत्रिका देखकर जीवन का सम्पूर्ण हाल बताया जाता है
आर्थिक मानसिक पारिवारिक जटिल समस्या - नौकरी, कारोबार में लाभ हानि, प्रेम विवाह, गृह कलेश, जादू टोना, कर्जा मुक्ति, तरक्की, पति पत्नी में अनबन सास बहु में तकरार, लक्ष्मी का न बचना, सौतन व दुश्मन से छुटकारा, विदेश यात्रा में रूकावट, कोर्ट कचहरी, बनते कार्यों का बिगड़ जाना, पढाई में मन तथा बीमारी में दवा का ना लगाना, शादी विवाह में रूकावट, संतान का ना होना या होकर मर जाना, मनचाहा प्यार, समाधान पाये तुरंत, घर में बीमारी का क्लेश का न जाना या बरकत ना होना, घर में सुख शांति ना होना मांगलिक दोष, कार्लसर्प दोष, पितर दोष, कुंडली दोष, कठिन से कठिन समस्याओ के समाधान के लिए संपर्क करे

श्रद्धा ज्योतिष दरबार
मानसरोवर - जयपुर
मोबाइल : 09799938908

Address

Mansrovar
Jaipur
302020

Opening Hours

Monday 8am - 7am
Tuesday 8am - 7am
Wednesday 8am - 7am
Thursday 8am - 7am
Friday 8am - 7am
Saturday 8am - 7am
Sunday 8am - 7am

Telephone

9799938908

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when श्रद्धा ज्योतिष दरबार जयपुर posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category