22/02/2026
तुमने ये जीवन प्राण दिया - मेरा फर्ज है तुमको ध्याऊँ मैं
झंझट संसार के साथ दिए - फिर कैसे ध्यान लगाऊं मैं
जब जब मैं आंखें बन्द करूं - प्रभु तेरा ध्यान लगाने को
अन्तर में महा हलचल चलती मन दौड़ के आता खाने को
उस मन से करूं सुमरन कैसे - प्रभू कैसे तुमकों पाऊं मैं
आसन तो लगाना सरल मगर इन मन को बिठाना मुश्किल है
माला को घुमाना कठिन नहीं - पर मन को घुमाना मुश्किल है
क्षण भर में जो सारा जग घूमे - उसे कैसे अचल बनाऊं मैं