Gita Parichay Abhiyan

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गीता परिचय अभियान द्वारा ऑनलाइन/ऑफलाइन गीता क्लासेज और सेमिनार के लिए गीता परिचय अभियान ऐप - https://play.google.com/store/apps/details?id=com.geeta.parichay गीता राष्ट्रीय सम्मेलन -
https://geetaparichay.com/backend/events

11/04/2026
14/03/2026

हरे कृष्ण

*विना गीता या अध्यात्म के आश्रय के प्राप्त सफलता का परिणाम*

"हाँ, मैंने अपनी पत्नी को मार दिया!"... बेंगलुरु के एक पॉश सीनियर लिविंग अपार्मेंट से आई ये गूंज पूरे देश को झकझोर रही है। आखिर क्यों एक 76 साल के रिटायर्ड ISRO वैज्ञानिक ने अपनी ही जीवनसंगिनी की जान ले ली? वजह कोई नफरत या जायदाद नहीं, बल्कि एक 'खौफनाक डर' था। वी. नागेश्वर राव, जिन्होंने देश के बड़े स्पेस मिशन में योगदान दिया, आज सलाखों के पीछे हैं। वजह? उन्हें चिंता थी कि उनके मरने के बाद उनकी बीमार पत्नी का ख्याल कौन रखेगा? इकलौती बेटी सात समंदर पार अमेरिका में है, पास में कोई दूसरा सहारा नहीं, और इसी अकेलेपन की बेबसी ने एक होनहार वैज्ञानिक को कातिल बना दिया। उन्होंने तौलिये से अपनी पत्नी संध्या का गला घोंटा और फिर शांति से बैठकर पुलिस का इंतज़ार किया। पुलिस भी दंग है कि ये एक क्रूर अपराध है या हमारे समाज में बुजुर्गों के अकेलेपन की एक चीख? क्या आप इसे एक हत्या मानते हैं या एक बेबस इंसान का आखिरी खौफनाक फैसला

*इस घटना की पहली सीख भाईसाहब वैज्ञानिक तो बन गए लेकिन जीवन का विज्ञान भगवान की वाणी गीता नहीं पढ़ी यदि पढ़ी होती तो उन्हें पक्का विश्वास होता कि वास्तव में सब का पालन भगवान ही करते हैं उदाहरण के लिए शिशु के माँ के उदर से बाहर आने से पूर्व माँ के स्तनों में दूध का इंतजाम भगवान ने कर रखा है फिर वे ऐसा भयानक कृत्य करते ही नहीं*

दूसरा संसार में अपने सुख में खलल नहीं पड़े इस के लिए एक बच्चा पैदा करो या नहीं करो

उसके बाद चाहे कितना भी पैसा लगे उसे विदेश भेजो

फिर पागल की तरह अकेले पन में मानसिक विकृत हो जाओ , छोटा परिवार बुढ़ापा बेकार, दुख अपार
*यदि विचारवान है तो चेतना चाहिए कि हम जा किस और रहे है । अपने को और समाज को महान पतन की और ले जा रहे है जहाँ घोर अशांति अवसाद और निराशा के अलावा कुछ नहीं*

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07/02/2026

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*गीता के पहले अध्याय का मंतव्य*

अर्जुन ने कहा-_
*“केशव! सामने अपने हैं।”*

_श्रीकृष्ण ने कहा-_
*“अपने हैं तो सामने क्यों हैं ?”*

श्रीकृष्ण का यह कथन केवल युद्धभूमि में अर्जुन को कर्म के लिए प्रेरित करने वाला वाक्य नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र, समाज और व्यक्ति- तीनों के लिए आत्ममंथन का शंखनाद है। “अपने” यदि सच में अपने हों, तो वे सामने शस्त्र लेकर खड़े नहीं होते। जो सामने खड़ा है, जो राष्ट्र के मार्ग में बाधा है, जो समाज को तोड़ने का कार्य कर रहा है- वह केवल रक्त से अपना हो सकता है, विचार से नहीं।
राष्ट्रवाद रक्त-संबंधों से नहीं, राष्ट्र के प्रति निष्ठा से बनता है।

भारत का इतिहास गवाह है कि सबसे गहरे घाव बाहरी आक्रमणों से नहीं, बल्कि भीतर के विश्वासघात से लगे हैं। जब-जब निजी स्वार्थ, सत्ता की लालसा, या वैचारिक भ्रम ने राष्ट्रहित से ऊपर स्थान पाया, तब-तब “अपने” ही “सामने” खड़े दिखाई दिए।

श्रीकृष्ण अर्जुन को यह नहीं सिखा रहे कि अपनों से युद्ध करो, बल्कि यह समझा रहे हैं कि अधर्म के पक्ष में खड़ा व्यक्ति, चाहे कितना ही निकट क्यों न हो, राष्ट्र और धर्म के लिए “अपना” नहीं रह जाता। राष्ट्रवाद भावुकता नहीं, विवेक है। यह आँख मूँदकर अपनाने की नहीं, सत्य को पहचानने की शक्ति है।

आज के भारत में भी यह प्रश्न उतना ही प्रासंगिक है। जब राष्ट्र की एकता, संस्कृति और संप्रभुता पर चोट होती है, तब हमें पूछना होगा- जो भारत को कमजोर करने की भाषा बोलता है, जो समाज को बाँटता है, जो राष्ट्रविरोधी विचारों को पोषित करता है- क्या वह सच में वह “अपना” है....?

यदि वह सामने खड़ा है, तो श्रीकृष्ण का उत्तर आज भी स्पष्ट है। राष्ट्रवाद का अर्थ घृणा नहीं, बल्कि स्पष्टता है। यह किसी समुदाय या व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि राष्ट्रविरोधी सोच के विरुद्ध खड़ा होना है। जैसे अर्जुन को मोह त्यागकर धर्म का पक्ष लेना पड़ा, वैसे ही आज हर नागरिक को भ्रम, डर और झूठे सहानुभूति के आवरण से बाहर निकलना होगा।

श्रीकृष्ण का यह वाक्य हमें सिखाता है कि राष्ट्र पहले है, रिश्ते बाद में और जब रिश्ते राष्ट्र के विरुद्ध खड़े हों, तब राष्ट्र ही सर्वोपरि है। यही भारत की चेतना है, यही राष्ट्रधर्म है और यही सच्चा राष्ट्रवाद। क्योंकि जो राष्ट्र के साथ है, वही अपना है और जो राष्ट्र के सामने अर्थात राष्ट्र के विरूद्ध है, वह चाहे कोई भी हो, अपना नहीं है।

*वंदेमातरम्*

01/02/2026

हरे कृष्ण
कल एक विवाह समारोह में जाने का अवसर मिला । कैसे गौधूली वेला में वैदिक रीति से पाणीग्रहण संस्कार हुआ विशेष बात रही पूरे कार्यक्रम को भगवान् के नाम से जोड़ा, देख कर बहुत आनंद हुआ । हमे भी इस से प्रेरणा लेकर अपने बच्चों के विवाह में इसका अनुकरण करना चाहिए और सनातन के वास्तविक परिपाटी की और लौटे और विवाह में आए प्रदूषण को दूर करे । जो विवाह योग्य बच्चे जो इस विवाह में थे उन्होंने भी संकल्प किया कि वे भी ऐसे ही विवाह करेंगे ।
हरे कृष्ण

24/01/2026

हरे कृष्ण

*एक करबद्ध निवेदन*
(कृपया एक बार पूरा मैसेज अवश्य पड़े)

जीने का समय निकलता जा रहा है और हर क्षण मृत्यु का समय निकट आ रहा है । जैसे अभी तक की आयु बीत गई ऐसे ही बची हुई भी निकल जाएगी । हमे लगता है कि हमारे पास बहुत धन है बुद्धि बहुत तेज है । हमे बहुत नॉलेज है, हमारा समाज में बहुत आदर है । हमारा स्वास्थ बहुत अच्छा है हम डेली वर्कआउट भी करते है । ये सब होना अच्छी बात है किंतु ये यह सब बहुत अस्थाई है ।

अल्टीमेटली ये सब कोई काम आने वाला नहीं है । सब छूटने ही वाला है, छूटने वाला क्या हर पल छूट ही रहा है । फिर हम किस के भरोसे निश्चिंत होकर बैठे है ।
हमारे सनातन के ग्रंथ चीख चीख कर कह रहे है कि यह मनुष्य जीवन मिलना बहुत ही दुर्लभ है ।इसके सदुपयोग से हम इस दुर्लभ अवसर को सार्थक बना सकते है । और जीवन के परम लक्ष्य को सहज ही प्राप्त कर सकते है ।
एक बार यह जीने का समय निकल गया फिर पछताने के अलावा कुछ हाथ आने वाला नहीं ।
भगवान की वाणी गीता हमे न केवल हमारे जीवन के लक्ष्य का बोध कराती है बल्कि उस लक्ष्य को कैसे सरलता से प्राप्त करे यह भी बताती है । अतः गीता को भाव रूप से समझ कर पढ़ना गीता के सम्मुख होना उतना ही आवश्यक है जितना कि श्वास लेना ।
हम सोचते है कि गीता पढ़ने में क्या है हम कभी भी मार्केट से बुक ले कर पढ़ लेंगे । लेकिन मित्रो जीवन का यह सबसे महत्वपूर्ण और विस्तृत ज्ञान गीता में सूत्र रूप में दिया है जिसे हम स्वय पढ़ कर ठीक से नहीं समझ सकते इस लिए अकिंचन भगवान के परम् भक्तों/ संतों के आश्रय से समझना चाहिए ।
ऐसे ही संत हुए है श्रद्धेय स्वामी श्री राम सुखदास जी महाराज जिन्होंने पूरा जीवन गीता के अनुसंधान में लगाया है मनुष्य का सरल से सरल तरीके से कल्याण कैसे हो इसके उपाय उन्होंने खोज निकाले । ऐसे समाधान उन्होंने गीता टीका साधक संजीवनी में बताए है । इसी गीता टीका को आधार बना कर गीता परिचय अभियान एक वर्ष का गीता कोर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में चलाता है । इसमें सप्ताह में एक दिन दो घंटे की क्लास अटेंड करनी होती है ।
यदि आप इस कोर्स को जॉइन करते है तो निश्चित है तो हमारे बहुमूल्य जीवन में हमे शांति और आनंद का अनुभव होता है। वर्तमान में इस कोर्स में 10000 से अधिक साधक जुड़े है 150 साप्ताहिक क्लास चल रही है ।
इस कोर्स में स्टडी मैटेरियल के रूप में एक गीता जीवन संगीत पुस्तक 360 पेज की जो कि साधक संजीवनी का सार रूप है बह साधक को डाक से भेजी जाती है । कोर्स की समाप्ति पर साधक चाहे तो अपने द्वारा जमा किए शुल्क 550/- में 500/- रिफंड का विकल्प चुन ले या गौ सेवा में दान का विकल्प ले सकता है । यानी गीता परिचय अभियान का कोई व्यावसायिक उद्देश नहीं है केवल निश्काम भाव से गीता जैसे महान ग्रंथ का लाभ जन जन को मिले
आप से निवेदन हाँ कि गीता परिचय अभियान का ऐप play store से डाउनलोड कर आज ही अपना रजिस्ट्रेशन करे ।
नया बैच 1 मार्च आरम्भ हो रहा है ।
हरे कृष्ण
निवेदक
महावीर बंसल एक्स GM AAI

24/01/2026

हरे कृष्ण

*एक करबद्ध निवेदन*
(कृपया एक बार पूरा मैसेज अवश्य पड़े)

जीने का समय निकलता जा रहा है और हर क्षण मृत्यु का समय निकट आ रहा है । जैसे अभी तक की आयु बीत गई ऐसे ही बची हुई भी निकल जाएगी । हमे लगता है कि हमारे पास बहुत धन है बुद्धि बहुत तेज है । हमे बहुत नॉलेज है, हमारा समाज में बहुत आदर है । हमारा स्वास्थ बहुत अच्छा है हम डेली वर्कआउट भी करते है । ये सब होना अच्छी बात है किंतु ये यह सब बहुत अस्थाई है ।

अल्टीमेटली ये सब कोई काम आने वाला नहीं है । सब छूटने ही वाला है, छूटने वाला क्या हर पल छूट ही रहा है । फिर हम किस के भरोसे निश्चिंत होकर बैठे है ।
हमारे सनातन के ग्रंथ चीख चीख कर कह रहे है कि यह मनुष्य जीवन मिलना बहुत ही दुर्लभ है ।इसके सदुपयोग से हम इस दुर्लभ अवसर को सार्थक बना सकते है । और जीवन के परम लक्ष्य को सहज ही प्राप्त कर सकते है ।
एक बार यह जीने का समय निकल गया फिर पछताने के अलावा कुछ हाथ आने वाला नहीं ।
भगवान की वाणी गीता हमे न केवल हमारे जीवन के लक्ष्य का बोध कराती है बल्कि उस लक्ष्य को कैसे सरलता से प्राप्त करे यह भी बताती है । अतः गीता को भाव रूप से समझ कर पढ़ना गीता के सम्मुख होना उतना ही आवश्यक है जितना कि श्वास लेना ।
हम सोचते है कि गीता पढ़ने में क्या है हम कभी भी मार्केट से बुक ले कर पढ़ लेंगे । लेकिन मित्रो जीवन का यह सबसे महत्वपूर्ण और विस्तृत ज्ञान गीता में सूत्र रूप में दिया है जिसे हम स्वय पढ़ कर ठीक से नहीं समझ सकते इस लिए अकिंचन भगवान के परम् भक्तों/ संतों के आश्रय से समझना चाहिए ।
ऐसे ही संत हुए है श्रद्धेय स्वामी श्री राम सुखदास जी महाराज जिन्होंने पूरा जीवन गीता के अनुसंधान में लगाया है मनुष्य का सरल से सरल तरीके से कल्याण कैसे हो इसके उपाय उन्होंने खोज निकाले । ऐसे समाधान उन्होंने गीता टीका साधक संजीवनी में बताए है । इसी गीता टीका को आधार बना कर गीता परिचय अभियान एक वर्ष का गीता कोर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन मोड में चलाता है । इसमें सप्ताह में एक दिन दो घंटे की क्लास अटेंड करनी होती है ।
यदि आप इस कोर्स को जॉइन करते है तो निश्चित है तो हमारे बहुमूल्य जीवन में हमे शांति और आनंद का अनुभव होता है। वर्तमान में इस कोर्स में 10000 से अधिक साधक जुड़े है 150 साप्ताहिक क्लास चल रही है ।
इस कोर्स में स्टडी मैटेरियल के रूप में एक गीता जीवन संगीत पुस्तक 360 पेज की जो कि साधक संजीवनी का सार रूप है बह साधक को डाक से भेजी जाती है । कोर्स की समाप्ति पर साधक चाहे तो अपने द्वारा जमा किए शुल्क 550/- में 500/- रिफंड का विकल्प चुन ले या गौ सेवा में दान का विकल्प ले सकता है । यानी गीता परिचय अभियान का कोई व्यावसायिक उद्देश नहीं है केवल निश्काम भाव से गीता जैसे महान ग्रंथ का लाभ जन जन को मिले
आप से निवेदन हाँ कि गीता परिचय अभियान का ऐप play store से डाउनलोड कर आज ही अपना रजिस्ट्रेशन करे ।
नया बैच 1 मार्च आरम्भ हो रहा है ।
ऐप आप नीचे दिए लिंक से भी कर सकते है
हरे कृष्ण
निवेदक
महावीर बंसल एक्स GM AAI

20/01/2026

क्या आप महाराज जी द्वारा अनुशंषित श्रीमद् भगवत गीता की सर्वश्रेष्ठ टीका *साधक संजीवनी* को पढ़ना/समझना चाहते हैं ?

तो आपके लिए एक जबरदस्त अवसर *गीता परिचय अभियान* उपलब्ध करा रहा है।
जन-जन तक गीता पहुंचे। गीता से हर व्यक्ति लाभान्वित हो इसके लिए गीता परिचय अभियान गीता की साप्ताहिक क्लास लगाता है जिसमें आप किसी एक दिन अपनी सुविधा के अनुसार 2 घंटे की क्लास ऑफलाइन या ऑनलाइन अटेंड कर सकते हैं।

यदि आप इंटरेस्टेड हैं तो गीता परिचय अभियान की मोबाइल ऐप को डाउनलोड कीजिए। प्ले स्टोर से भी कर सकते हैं।
और अपना रजिस्ट्रेशन करा। सकते हैं।

वर्ष 2025 26 में 140 गीता क्लास के माध्यम से 10000 से अधिक साधक जुड़े हुए हैं। यह एक साल भर का कोर्स है। 2026-27 की क्लास मार्च 2026 से शुरू होगी।
गीता के अलावा आप श्रीमद् भागवत और महाभारत का कोर्स भी कर सकते हैं और बाल संस्कार में बच्चों के लिए भी गीता चुन सकते हैं।
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तो आपके लिए एक जबरदस्त अवसर *गीता परिचय अभियान* उपलब्ध करा रहा है।
जन-जन तक गीता पहुंचे। गीता से हर व्यक्ति लाभान्वित हो इसके लिए गीता परिचय अभियान गीता की साप्ताहिक क्लास लगाता है जिसमें आप किसी एक दिन अपनी सुविधा के अनुसार 2 घंटे की क्लास ऑफलाइन या ऑनलाइन अटेंड कर सकते हैं।

यदि आप इंटरेस्टेड हैं तो गीता परिचय अभियान की मोबाइल ऐप को डाउनलोड कीजिए। प्ले स्टोर से भी कर सकते हैं।
और अपना रजिस्ट्रेशन करा। सकते हैं।

वर्ष 2025 26 में 140 गीता क्लास के माध्यम से 10000 से अधिक साधक जुड़े हुए हैं। यह एक साल भर का कोर्स है। 2026-27 की क्लास मार्च 2026 से शुरू होगी।
गीता के अलावा आप श्रीमद् भागवत और महाभारत का कोर्स भी कर सकते हैं और बाल संस्कार में बच्चों के लिए भी गीता चुन सकते हैं।
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