harsh*t dixit

harsh*t dixit Jay shree radhe Krishna

08/04/2026
21/03/2026

श्री यंत्र का कमलगट्टे से अर्चन 🙏🙏

25/02/2026

।।श्री आमलकी एकादशी व्रत की महिमा ।।
इस व्रत में भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं। आमलकी एकादशी का व्रत रखने वाले व्यक्ति को स्वर्ग और मोक्ष दोनों में जो अभीष्ट हो, वह प्राप्त होता है। जो व्यक्ति 1000 गायों का दान कर पुण्य प्राप्त करता है, उतना पुण्य आमलकी एकादशी व्रत को करके प्राप्त कर सकते हैं। व्रत में आंवले का बड़ा महत्व है, उसके वृक्ष की पूजा होती है और भगवान को आंवले का भोग भी लगाते हैं। भक्त प्रसाद स्वरूप आंवले का ही सेवन करते हैं। दान में भी आंवला देते हैं ।
एकादशी के दिन गौ सेवा व संत सेवा अवश्य करें।

श्री मलूकपीठ में
श्री आमलकी एकादशी
27 फरवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी ।

🙏🙏🙏🙏

⌚️पारण का समय⌚️

अगले दिन, शनिवार को प्रातः सूर्योदय के पश्चात्।

।।जय गोमाता जय गोपाल।।

12/02/2026
हवन में अग्निवास आदि का मुहूर्त जानना 〰️〰️🌸🌸🌸🌸〰〰🌟🌟🌟👇(भू रुदन, भू रजस्वला, भू शयन, भू हास्य, किस पक्ष मे शुभ कार्य न करे,...
11/12/2025

हवन में अग्निवास आदि का मुहूर्त जानना
〰️〰️🌸🌸🌸🌸〰〰🌟🌟🌟👇
(भू रुदन, भू रजस्वला, भू शयन, भू हास्य, किस पक्ष मे शुभ कार्य न करे, यज्ञ कुंड के प्रकार, कितना हवन किया जाए विस्तृत वर्णन?)

कोई भी अनुष्ठान के पश्चात हवन करने का शास्त्रीय विधान है और हवन करने हेतु भी कुछ नियम बताये गए हैं जिसका अनुसरण करना अति – आवश्यक है , अन्यथा अनुष्ठान का दुष्परिणाम भी आपको झेलना पड़ सकता है ।

इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात है हवन के दिन ‘अग्नि के वास ‘ का पता करना ताकि हवन का शुभ फल आपको प्राप्त हो सके ।

1👉 जिस दिन आपको होम करना हो, उस दिन की तिथि और वार की संख्या को जोड़कर 1 जमा (1 जोड़ ) करें फिर कुल जोड़ को 4 से भाग देवें- अर्थात् शुक्ल प्रतिपदा से वर्तमान तिथि तक गिनें तथा एक जोड़े , रविवारसे दिन गिने पुनः दोनों को जोड़कर चार का भाग दें।

👉 यदि शेष शुन्य (0) अथवा 3 बचे, तो अग्नि का वास पृथ्वी पर होगा और इस दिन होम करना कल्याणकारक होता है ।

👉 यदि शेष 2 बचे तो अग्नि का वास पाताल में होता है और इस दिन होम करने से धन का नुक्सान होता है ।

👉 यदि शेष 1बचे तो आकाश में अग्नि का वास होगा, इसमें होम करने से आयु का क्षय होता है ।

अतः यह आवश्यक है की होम में अग्नि के वास का पता करने के बाद ही हवन करें ।

शास्त्रीय विधान के अनुसार वार की गणना रविवार से तथा तिथि की गणना शुक्ल-पक्ष की प्रतिपदा से करनी चाहिए तदुपरांत गृह के ‘मुख-आहुति-चक्र ‘ का विचार करना चाहिए ।

मान लो आज हम कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि मे चल रहे है तो ।

शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा तक 15 तिथि तो कुल योग आया 15 + 4 + 1 = 20

आज कौन सा दिन हैं और इस दिन को रविवार से गिने। मानलो आज बुधवार हैं तो रविवार से गिनने पर बुधवार 3 आया । कुल योग 20 + 3 = 23/4 कर दे तो शेष कितना बचा। 4 - 23 / 5

👉 20 में 4 के भाग में 3 को शेष कहा जायेगा । परिणाम इस प्रकार से होंगे ।

👉 शेष 0 तो अग्नि का निवास पृथ्वी पर ।

👉 शेष 1 तो अग्नि का निवास आकाश मे ।

👉 शेष 2 तो अग्नि का निवास पाताल मे ।

👉 शेष 3 बचे तो पृथ्वी पर माने ।

पृथ्वी पर अग्नि वास सुख कारी होता हैं । आकाश मे प्राणनाश और पाताल मे धन नाश होता हैं । मतलब हमें वह तिथि चुनना हैं जिस तिथि मे शेष 3 बचे ।

वह तिथि ही लाभकारी होगी । प्रज्वलित अग्नि के आकार को देख कर कई नाम रखे गए हैं । पर अभी उनसे हमें सरोकार नही हैं । इस तरह से अग्नि वास का पता हमें लगाना हैं।
आचार्य श्री हर्षित नारायण दास जी महाराज
9219268479

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