18/05/2026
ऊं नमो आदेश फतेह फतेह
#दिल्ली विजय दिवस
#सिद्धाचार्य श्री देव जसनाथ जी महाराज द्वारा प्रवर्तित "जसनाथी संप्रदाय" के महान् सिद्धपुरुष रुस्तम जी महाराज द्वारा मुगल हुक्मरानों के विरुद्ध। 346वा दिल्ली विजय दिवस की सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
#सिद्ध रुस्तम जी लिखमादेसर के टिकाई महंत धनराज जी ज्याणी के शिष्य थे गुरु गोरखनाथ जी की प्रेरणा से ही रूस्तम जी ने धनराज जी को अपना गुरु बनाया
धनराज जी स्वयं बड़े पहुंचे हुए पुरुष थे
धनराज जी के धन बंटे,ज्यू कूवा को निर।
सतपुरुषो को खाठीयो,जुग सारे को सीर
√ आज ही के दिन अर्थात् ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया को सिद्धपुरुष रुस्तम जी महाराज ने 10 लम्फरों (सिद्धों) के साथ दिल्ली जाकर सनातनी दुश्मन, कट्टर बादशाह औरंगजेब को 52 परचे देकर झुकने व माफी मांगने पर मजबूर कर दिया था।
दस लफर
1 बिजोजी ज्याणी बिनादेसर
2 भारमल जी ज्याणी (बीनदेसर से है) समाधी रोलसाहबसर
3खेतो जी मंडा भरपालसर
4 बिरमो जी मंडा लिखमणसर
5 ठुकरो जी कलवाणिया कल्याण सर
6 सुरतो जी कलवाणिया झझेऊ
7 रुपो जी सऊ सतासर
8 रत्नों जी सऊ सतासर
9 पांचों जी टांडी पारेवडा
10 टिलो जी ज्याणी दङिबा
"सम्वत सत्रह साल छतीसो,जेठ तपतो सावण होंतो आगे
भर करलो सिट्टा रो लाया, हरियो मतीरो सागे।।
√ बादशाह औरंगजेब ने हार स्वीकार करते हुए ""पंजाब का राज्य और बहुत सारा धन"" उपहार स्वरूप लेने को कहा....
"जावो रुस्तम घर आप रै, थाने तूठा गुरु जसनाथ।
गांव लेवो घोड़ा लेवो,लेवो पंजाबी राज।।"
√ लेकिन रुस्तम जी महाराज ने मना कर दिया था और कहां कि...
"कमी नहीं किणी बात री, खींसै खेर खुदाय।
जसनाथी पंथ परगटयो,चोहा जुगा री बात।।"
√ बादशाह ने राजस्थान के चुरू जिले के रतनगढ़ तहसील के गांव छाजूसर(रुस्तमपुरा) में रुस्तम जी महाराज का "मुगल शैली में मंदिर" निर्मित करवाया।
√ जसनाथी सम्प्रदाय के नगाड़े - निशान को चारो दिशाओं में पुरे देश भर में निर्बाध रूप से लेकर घूमने और बजाने की स्वतंत्रता का ""ताम्रपत्र"" भेट किया जो आज भी रुस्तमपुरा (छाजूसर) में रुस्तम जी की बाड़ी(मंदिर) में है।
√ अग्नि में घी और नारियल को होमने (हवन) की परंपरा को भी कायम रखने का परवाना जारी किया।
√ भेंट स्वरूप ""2 नारियल और बिना धागे की गुदड़ी"" प्रदान की तब रुस्तम जी महाराज ने कहां कि....
" पीले पाट री डगली सीली, बिन सुई बिन तागे
आ डगली म्हारे गुरु ने सोहे,लिखमादेसर आगे
महर हुई सिद्ध रुस्तम बोले, बादशाह पाए लागे"
यह सामग्री वर्तमान में जसनाथी सिद्धपुरूष बिजोजी महाराज के मंदिर बिनादेसर, रतनगढ़ चूरू में अवस्थित हैं।।
"एक बार पुनः सभी को जसनाथी पंथ के महान सिद्धपुरुष रुस्तम जी महाराज के दिल्ली फतह की शुभकामनाएं....."
सिद्ध रुस्तमजी की दिल्ली यात्रा विषयक रतनोजी का एक पद्य इस प्रकार भी है । इस ' सबद ' में गुरु गोरखनाथ के मम्मिलन से लेकर बादशाह औरंगजेब का परवाना प्राप्त करने एवं दिल्ली जाकर चमत्कार दिखलाने तक का पूर्ण विवरण मिलता है:-
रुस्तम छाळी चारता, आय मिल्या रहमाण ।
बाजो मिलतो बाँसळी, सरस घुरै निरसाण ।
पंचा देवाँ परगट्या, पंच भणीजै न्याव ।
पूरै गुर परगट किया, कुळ जुग पो ' रै आव ।
जुग मोह्या जुम्मा किया, मिलिया गोरख राव ।
तपस्या लग परगट किया, परवाणा पौ' चाय ।
परवाणा तपस्या रा, सिद्ध कर लिया सा ' य ।
माता मीठी लापसी, काळल करँ कड़ाय ।
छतरी चढ़िया ख्याँत कर, लाग गुराँ रै पाय ।
अणभै खड़ै उँतावळा, घाल दमामा घाव ।
सिद्ध पै 'ली स्याम मिल्या, दरसण आवै दाय ।
कवलै सूँ कर जोड़ताँ, सासो सास सहाय ।
साधाणा सुणता भया, नौरंग नेड़ा जाय ।
साह सुणंताँ समसोकह, इसड़ो कुण खुदाय ।
रूमी चिढ़ियो रीस कर, राजा पैठी राय ।
खबर मँगागो खान री, मदन झरोखा आय ।
माथै मैंमद मोळियो, मदन झरोखा आय ।
गरज पडै तो गाँवल्यो, पीर परगना खाय ।
मो 'र चढ़ावै मैदनी, रूपो आवै राय |
माया मत कर गीरबो, लेखो देवो लुटाय ।
ताँता राखो त्याग रा, निगुण जीता जाय ।
लसगर ल्यावो नाम घर, गुरु रो ग्यान सुणाय ।
आसण आयो ओलियो, पतस्या नै परचाय ।
रतनो ( जी ) गावै रीझ सूँ, स्यामी सबद सुणाय ।
सिद्ध रुस्तम जी दिल्ली विजय के पश्चात् सीधे लिखमादेसर अपने गुरु श्री धनराजजी के पास लौट आये । गुरुजी ने प्रसन्त्र होकर उन्हें गले लगाया ।
रुस्तमजी ने बादशाह की पीली गुदड़ी गुरुजी को भेट की और अपने स्थान पर आ गये । इसके बाद सिद्ध रुस्तमजी विभिन्न स्थानों का भ्रमण करते रहे और लोगों को धर्मोपदेश देते रहे ।
सिद्ध श्री रुस्तम जी महाराज कृत (नाचणियो शब्द)
सतगुरु सिंवरो मोवण्यां,जिण ओ संसार उपायो।
मनस्या सृजि धरतरी, बचना सूं आभ थमायो।।1।।
पवन र पाणी गुरु म्हारे सृज्या, निश्चल तख्त रचनायों।
वासग राजा गुरु म्हारे सृज्या,बासो सप्त पिंयाळ बसायो।।2।।
धवळो धोरी गुरु म्हारे सृज्या, धरती भार थम्बायो।
सातूं शायर गुरु म्हारे सृज्या, नदियां नीर हलायो।।3।।
अटकळ पर्वत गुरु म्हारे सृज्या, पर्वत सुमेरु सवायो।
चांद सुरज गुरु म्हारे सृज्या,तारां मण्डल छायो।।4।।
ब्रह्मा विष्णु महेश्वर इश्वर,जिण यो संसार उपायो।
सुरनर सृज्या देवी देवता, ज्ञानी ज्ञान सुणायो।।5।।
मनस्या देहि उपन्यो,अंत कोई विरळां पायो।
गोरख रूपी गोमदो,बन में नाद बजायो।।6।।
सुतो बन में ओजक्यो, गुरु गोरख आय जगायो।
रिती छागळ जळ भरी,जद म्हे परचो पायो।।7।।
दुहि बाळीग बकरी,जिण रो दूध पिलायो।
उजड़ बहुतों ऐवाळियो, गुरु म्हाने राह बतायो।।8।।
धरती पगल्या नां टिकै,जद म्हे गुरु दर्शन पायो।
मैं बलिहारी गुरु देव री,भूल्यां ने राह बतायो।।9।।
दशवंत खरचो देव रे,थाने गुरु देव फरमायो।
रहयो बिछोवो देव रो,म्हाने सुरनर लेवण आयो।।10।।
रूस्तम गावै जुग सुणे,फल सुचियारो पायो।
सतगुरु सिंवरो मोवण्यां,जिण यो संसार उपायों।।11।।
बोलिए गुरु गोरखनाथ, जसनाथ जी, धनराज जी महाराज की जय।
सिद्ध श्री रुस्तम जी महाराज की जय।।
ओम नमो आदेश
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#रूस्तमजी