01/06/2020
पांच तत्व का धड़ नहिं मेरा,
जानूं ज्ञान अपारा।
सत्य स्वरुपी नाम साहिब का,
सोई नाम हमारा।।
कबीर हम बैरागी ब्रह्म पद,
सन्यासी महादेव।
सोहं मंत्र दिया शंकर को,
करत हमारी सेव।।
जोनी संकट मेट दूं,
जो न बिसरे मोंहि।
जिन संसारी चित धरी,
नहीं छुड़ाऊं तोहि।।
कबीर शब्द हमारा आदि है,
इससे बली न कोय।
आगा पीछा जो करे,
सो बल हीनै होय।।
गरीब पुरुष कबीर ने,
देह धरी न कोय।
शब्द स्वरुपी रुप है,
घट घट बोले सोय।।
सुन सुन नाम कबीर का,
काल नवाबै माथ।
जो नाम भरोसे नर चले,
होय न बांका बाल।।
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