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भारत की गौरवमयी सनातन संस्कृति को पुनर्स्थापित करने के लिए नवोन्मेष फाउंडेशन द्वारा 22 दिसम्बर 2024 को राजस्थान की राजधानी जयपुर में "नवोन्मेष विक्रम संवत २०८१" का भव्य आयोजन किया गया
---------------------- 1.आर्य भारत में बाहर से नहीं आए थे बल्कि यही के मूल निवासी थे राखीगढ़ी के शोध ने यह और अधिक वैज्ञानिक रूप से स्पष्ट कर दिया है आर्य किसी जाति का नहीं बल्कि संस्कृत भाषा में श्रेष्ठता का पर्याय

वाची है।

पुरुष सूक्त चरणों पर झुकने के लिए कहा गया है अर्थात यदि हम समाज को एक पुरुष के रूप में देखें तो समाज का वह अंग जो समाज को गतिमान रखता है। उसकी सेवा के लिए कहा गया है।

3. गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है कि मैंने चार वर्णों की स्थापना व्यक्तियों के गुणों और कर्मों के आधार पर की है न की जन्म के आधार पर।

4.सभी को शिक्षा का अधिकार समान रूप से प्राप्त था उदाहरण स्वरूप महर्षि वाल्मीकि पहले एक डाकू थे बाद में उन्होंने नारद जी की प्रेरणा से शिक्षा प्राप्त की और वाल्मीकि रामायण का लेखन किया।

5. इसी प्रकार महर्षि वेदव्यास भी एक शुद्र थे किंतु उन्होंने संस्कृत के 100000 से अधिक श्लोकों वाले महाभारत का निर्माण किया जिसका एक भाग श्रीमद्भगवद्गीता विश्व का मार्गदर्शन कर रहा है।

6.आधुनिक इतिहासकार जो वामपंथी विचारधारा के हैं इन दोनों को ही काल्पनिक बताते हैं किंतु उनके ही अनुसार मध्यकाल में जबकि जातिवाद और शोषण देश सबसे अधिक था तब मेड़ता के राठौड़ राजाओं की पुत्री एवं महाराणा प्रताप की दादी महाराणा सांगा की बहू रैदास जी महाराज की शिष्य थी और रैदास जी महाराज रामानंदाचार्य जी के शिष्य थे जिनके शिष्यों की श्रंखला में अनेकों संत जैसे पीपाजी दादू जी और कबीर दास जी है यह सभी कुलीन नहीं थे अपितु समाज के सामान्य वर्ग से आते थे इससे स्पष्ट है कि समाज में वैसा विषैला वातावरण नहीं था जैसा आज वामपंथी इतिहासकार फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

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