Shree Jeen mata mandir khatolai

Shree  Jeen mata mandir khatolai ऊं नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:।
नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्म ताम्॥

05/05/2026
जय माता दी
27/03/2026

जय माता दी

जय माता दी
26/03/2026

जय माता दी

जय माता दी 🙏✍️मार्कण्डेय पुराण का देवी माहात्म्य आद्याशक्ति को महामाया संबोधित करता है।✍️महामाया आसुरी शक्तियों का नाश क...
23/03/2026

जय माता दी 🙏
✍️मार्कण्डेय पुराण का देवी माहात्म्य आद्याशक्ति को महामाया संबोधित करता है।
✍️महामाया आसुरी शक्तियों का नाश करती हैं। सगुण ब्रह्म के रूप में महामाया अर्थात आद्याशक्ति सर्वशक्तिमान,सार्वकालिक और चरम सत्य हैं। सभी चराचर जगत आद्याशक्ति से उद्भूत हैं।
✍️ त्रिदेव भी आद्याशक्ति की इच्छानुसार उनकी आज्ञा से कार्य करते हैं। देवी के आँख मूदने से प्रलय और खोलने से सृष्टि होती है।

✍️जब जब पृथ्वी पर आसुरी शक्तियों की अभिवृद्धि से सभ्यताओं के विनाश और प्रणियों पर संकट आया ब्रह्मा ने अन्य देवों के साथ मिलकर इन्हें जागृत किया।
✍️राम ने रावण से युद्ध के पहले इनका प्रबोधन कर आराधना की। अर्जुन ने महाभारत युद्ध में कुरुक्षेत्र में कृष्ण की प्रेरणा से इनका ध्यान किया तब आकाश में अवतीर्ण हो देवी ने अर्जुन को विजयी होने का आशीर्वाद दिया ।

✍️विभिन्न असुरों का नाश करने के कारण उन असुरों की नाशिनी, घातिनी, मर्दिनी आदि कह कर भी इन्हें संबोधित किया जाता है। यथा महिषासुरमर्दिनी, शुंभविनाशिनी आदि।

✍️समस्त भारत में देवी ममतामयी, करुणामयी, कल्याणी, सौम्या एवं रौद्र आदि रूपों में पूजिता हैं। ✍️केरल में ये "भगवती" के विशेष नाम से संबोधित हैं तो तमिलनाडु में "कण्णकी" नाम से। आंध्र और तेलंगाना में इनका 'जोकुलांबिका" नाम प्रचलित है।

✍️विविध नामों से संपूर्ण भारत में प्रशस्त और पूजिता होने के बाद भी देवी का "दुर्गा" नाम सर्वत्र सभी रूपों में विख्यात, प्रचलित एवं पूजित है।
✍️असुरसंहारिणी के किसी स्वरूप के पर्यायवाची नाम का स्थान दुर्गा नाम ने ले लिया है।

✍️मार्कण्डेय पुराण के देवी माहात्म्य के ग्यारहवें अध्याय में देवी ने भविष्य की अपनी लीलाओं के वर्णन क्रम में कहा है कि मैं पृथ्वी पर अनावृष्टि होने पर अवतीर्ण हो सौ नेत्रों से उसका समाधान करूँगी जिस कारण "शताक्षी" नाम से जानी जाऊँगी।
✍️मैं अपने शरीर से उत्पन्न शाक से प्राणियों की रक्षा करूँगी अतः शाकंभरी कहलाऊँगी।
✍️उसी अवतार में "दुर्गम" नामक दैत्य का संहार करूँगी जिस कारण दुर्गा नाम से विदित होऊँगी।

✍️देवीभागवत सप्तम स्कंध के अनुसार असुर हिरण्याक्ष वंश में दैत्य तरु का पुत्र था दुर्गम। एक बार उसने सोचा कि देवताओं की शक्ति का कारण है वेद। यदि वेद न रहे तो न ही यज्ञ होंगे न देवताओं को हवि प्राप्त होगी जिससे वे दुर्बल हो जाएँगे।अतः देवताओं को परास्त करने के लिए वेदों को नष्ट करना आवश्यक है।उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने घोर तपस्या की जिससे प्रसन्न हो ब्रह्मा प्रकट हुए और उससे वर माँगने को कहा। दुर्गम ने उनसे माँगा कि मुझे वेदों के सारे मंत्र और उसकी शक्ति चाहिए, सभी मंत्रों के देवगण मेरे अधीन हो जाएँ। वरदान मिलने पर शीघ्र ही पृथ्वी पर हाहाकार मच गया, देवगण, ब्राह्मणगण निष्क्रिय और निस्तेज हो गए। वर्षा रुक गई, कृषि और वनस्पतियाँ नष्ट हो गई। देवगण स्वर्ग से च्युत हो गए। ब्राह्मणगण पहाड़ों की गुफाओं में छुप गए। सौ वर्षों की इस यातना के बाद ब्रह्मणों ने हिमालय पर देवी जगदम्बा की आराधना की।
✍️देवी जब प्रकट हुईं तब पृथ्वी की दुरावस्था देख उनके सौ नेत्रों से अश्रुधाराएँ प्रस्फुटित होने लगीं जिससे जल संकट दूर हुआ और वे शताक्षी कहलाईं।
✍️उन्होंने अपने शरीर से शाक,कंद मूल फल आदि की आपूर्ति लोगों के लिए कर प्राणियों की रक्षा की और शाकंभरी नाम से आभिहित हुईं।
✍️तत्पश्चात दुर्गम के वध को उन्मुख हुईं जिस क्रम में उसके विशाल सेनाओं के संहार हेतु उन्होंने "धारिणी" , "बाला", "त्रिपुरा", "भैरवी" और "काली" का प्राकट्य किया और स्वयं पंद्रह बाणों से दैत्य दुर्गम का वध किया।

✍️कालान्तर मेंं देवी के किसी भी रूप के लिए दुर्गा शब्द प्रचलित हो आद्या के पर्यायवाची रूप में प्रचलित हो गया।
✍️आद्या के अधीन अर्थात उनके द्वारा उद्भूत यद्यपि त्रिदेव को कहा गया है तथापि आद्या के किसी भी रूप का तादात्म्य या एकरूपता पार्वती मेंं वर्णित किया जाता है।
✍️संभवतः सृष्टि चक्र काल और उनकी शक्ति काली की लीला या प्राकट्य है। काल स्वयं शिव हैं और काली रूप उनकी शक्ति आद्या हैं।
प्रेम से बोलो
जय माता दी 🙏💐

🌷हे देवी! नमो नमः और नमस्ते।आप जगत के कारण और आधार हैं।आपके हाथ में शंख, चक्र और गदा हैं और आप नारायण के हृदय में स्थित ...
23/03/2026

🌷हे देवी! नमो नमः और नमस्ते।
आप जगत के कारण और आधार हैं।
आपके हाथ में शंख, चक्र और गदा हैं और आप नारायण के हृदय में स्थित हैं।

🌷हे देवी! आप वेदमूर्ति हैं, जगत की पालक और कारणस्थान स्वरूपिणी हैं।
आप वेदों के त्रय के प्रमाण को जानती हैं और सभी देवताओं द्वारा पूजनीय हैं।

🌷हे देवी! आप माहेश्वरी, महाभागा और महामाया हैं।आप महादेव को प्रिय हैं और उनके प्रिय कर्मों की प्रेरक हैं।
🌷हे देवी! आप गोपों की प्रिय हैं, प्रमुख आनंद और महोत्सव की स्रोत हैं।
आप महामारियों से रक्षा करने वाली हैं और देवताओं द्वारा पूजित हैं।

🌷हे देवी! आप सर्वमंगल की मंगलमयी हैं, शिव और सभी कार्य सिद्ध करने वाली हैं। हे शरण्ये त्र्यम्बके गौरी, नारायणी, आपको नमन है।
🌷हे देवी! आप ही वह स्रोत हैं जिससे यह विश्व प्रकट हुआ और निरंतर बना हुआ है।आप चैतन्य की एकमात्र साधिका हैं, जो आरंभ और अंत रहित तेज का भंडार हैं।
🌷हे देवी! जब ब्रह्मा, विष्णु और शिव (हरि) सब कुछ करते हैं, तब भी यह आपका अनुग्रह ही है जो संसार की रक्षा और संहार करता है।

🌷हे देवी! आप ह्रीं, कीर्ति, स्मृति, कांति, कमला, गिरिजा और सती हैं। आप दाक्षायणी और वेदगर्भा भी हैं, जो सदा सिद्धियाँ देने वाली हैं।
🌷हे देवी! मैं आपकी स्तुति करता हूँ, नमन करता हूँ, पूजा करता हूँ और जप करता हूँ।
मैं आपको ध्यान करता हूँ, भाव से स्मरण करता हूँ, मुझे कृपा करके देखें और सुने।
🌷हे देवी! आप वह हैं जिनमें ब्रह्मा, वेद, कृष्ण और लक्ष्मी वास करती हैं।
पुरंदर और त्रिलोकपति आपकी उपासना से धन, ऐश्वर्य और समृद्धि प्राप्त करता है।
🌷हे देवी! आप ही कुबेर के साथ निधिनाथ हैं, अमृत और परेतों की उत्पत्ति करने वाली हैं। नैरृत, राक्षसों और सोम आदि का पालन करने वाली आप ही हैं।
🌷 हे देवी! आप त्रिलोक में वंदनीय हैं और महामंगल की स्वरूपिणी हैं। आपको पुनः नमन है, जगत की पालनकर्ता नारायणी, नमः।

🙏🙏🙏🙏🙏
सरदार मल

Address

Jaipur

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shree Jeen mata mandir khatolai posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share