SHIV / Sangathit Hindu International Vahini

SHIV / Sangathit Hindu International Vahini हमारा संकल्प हिंदू के घर जन्म लेने वाले बच्चों को सनातन धर्म कि बेसिक शिक्षा प्रदान करे🚩 विकास गुरु

 #कौन_है_सामान्यवर्ग ?आओ बताता हूँ .... प्रधानमंत्री जी या मुख्यमंत्री  जी ध्यान से सुनिएगा...सामान्य वर्ग (General Cate...
27/01/2026

#कौन_है_सामान्यवर्ग ?

आओ बताता हूँ .... प्रधानमंत्री जी या मुख्यमंत्री जी ध्यान से सुनिएगा...

सामान्य वर्ग (General Category) कौन हैं ?
#सामान्य_वर्ग ( भूमिहार, लाला(कायस्थ) जैन , ब्राह्मण , राजपूत , बनिया )

जिस व्यक्ति पर एट्रोसिटी_एक्ट 89 के तहत #बिना_जांच के भी कार्यवाई की जा सकती है, वो सामान्य वर्ग है

जिसको #जाति_सूचक शब्द इस्तेमाल करके #बेखौफ_गाली दी जा सकती है, वो सामान्य वर्ग है,

देश में आरक्षित 131 लोकसभा सीटो और 1225 विधानसभा सीटो पर #चुनाव नही लड़ सकता है, लेकिन #वोट दे सकता है, वो सामान्य वर्ग है,

जिसके #हित के लिए आज तक कोई आयोग नही बना, वो सामान्य वर्ग है,

जिसके लिए कोई #सरकारी_योजना न बनी हो,
वो सामान्य वर्ग है,

जिसके साथ देश का #संविधान_भेदभाव करता है, वो सामान्य वर्ग है,

मात्र जिसको सजा देने के लिए और का गठन किया गया वो सामान्य वर्ग है,

मात्र जिसे #सजा देने के लिए हर जिले में विशेष ्यायालय खोले गए हैं, वो अभागा सामान्य वर्ग है,

जो स्कूल में अन्य वर्गों के मुकाबले #चार_गुनी_फीस दे कर अपने बच्चों को पढाता है, वो बेसहारा सामान्य वर्ग है,

नौकरी, प्रमोशन, घर allotment आदि में जिसके साथ #कानूनन_भेदभाव वैध है वो बेचारा सामान्य वर्ग है,

सरकारों व सविधान द्वारा सबसे ज्यादा #प्रताड़ित किया जाने वाला वो सामान्य वर्ग है,

सबसे ज्यादा वोट देकर भी खुद को #लुटापिटा ठगा सा महसूस करने वाला वो सामान्य वर्ग है

#सभाओं में फर्श तक बिछा कर एक अच्छी सरकार की चाह में आपको सत्ता सौंपने वाला वो सामान्य वर्ग है,

#देशहित मे आपका तन मन धन से साथ देने वाला वो सामान्य वर्ग है,

इतने भेदभाव के #बावजूद भी,
धर्म की जय हो,अधर्म का नाश हो प्राणियों में सद्भावना हो,
विश्व का कल्याण हो की भावना जो रखता है,वो सामान्य वर्ग है,

सबका साथ सबका विकास में हमारी स्थिती क्या है ? विचार अवश्य करें?

समस्त सामान्य वर्ग परिवारों की तरफ से भारत सरकार को समर्पित ...

अगर आपको उपरोक्त बातें सही लगी हो तो कम से कम शेयर जरुर करें ।
ये बात माननीय प्रधानमंत्री जी ,राष्ट्रपति जी व मुख्यमंत्री जी तक अवश्य पहुँचनी चाहिए....







24/12/2025

बहुत चमत्कारिक है... हरी प्याज खाने के फायदे

  धर्म पूछकर निरपराध पर्यटकों को गोली मारने वाले मज़हबी दरिंदों, ये तस्वीर हम भारतीय न हम भूलेंगे, न तुम्हें माफ़ करेंगे...
28/04/2025

धर्म पूछकर निरपराध पर्यटकों को गोली मारने वाले मज़हबी दरिंदों, ये तस्वीर हम भारतीय न हम भूलेंगे, न तुम्हें माफ़ करेंगे, न छोड़ेंगे 😡 तुम्हारी ना-पाक कब्रों तक तुम्हें ढूँढकर इस वहशीपन की वो सज़ा देगें जिसे तुम्हारे देसी और परदेसी ख़ैरख्वाह और आका याद रखेंगें । आक् थू तुम्हारी नामर्दी पर 😡

हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में जो मौजूदा हालात हैं उसमें कट्टरपंथी इस्लामीक संगठनो द्वारा जो हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक...
09/08/2024

हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में जो मौजूदा हालात हैं उसमें कट्टरपंथी इस्लामीक संगठनो द्वारा जो हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का नरसंहार और अमानवीय कृत्य किया जा रहा है उसका मैं पुरजोर विरोध करता हूं और हमारी वर्तमान सरकार से अपील करता हूं कि जल्द से जल्द बांग्लादेश की नवगठित सरकार पर दबाव बनाया जाए जिससे इस तरह के हो रहे नरसंहार और अत्याचार को तुरंत प्रवाह से रोका जाए और हमारे बांग्लादेशी हिंदू भाई बहनों तक हर संभव मदद पहुंचाई जाए !
हमारे भारतवर्ष में भी सभी को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए और बांग्लादेश की सरकार और इन कट्टरपंथियों तक यह मैसेज पहुंचना चाहिए की बांग्लादेश में रह रहे हिंदू भाई बहन अकेले नहीं है पूरा हिन्दुस्तान उनके साथ है इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि इसका असर जल्द नजर आए !
जय हिंद🇮🇳

कहते हैं लंका से लौटने के बाद और राज्याभिषेक के बाद माता सुनयना ने जँवाई बेटा को मिथिला आने का सासू माँ का लाड़ भरा आग्रह...
21/01/2024

कहते हैं लंका से लौटने के बाद और राज्याभिषेक के बाद माता सुनयना ने जँवाई बेटा को मिथिला आने का सासू माँ का लाड़ भरा आग्रह भेजा।

राम भला कैसे इनकार करते।

लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न को भी ससुराल जाने का चाव पूरा हुआ।

हनुमान उन दिनों वहीं थे सो उनको भी आने का आग्रह हुआ।

सुग्रीव, अंगद, नल, नील आदि ने प्रभु से शिकायत की कि ये तो सरासर पक्षपात है।

मंद मंद मुस्कुराते हुए प्रभु ने सबको स्वीकृति दे दी।

वानरों से भलीभांति परिचित डिग्निटी पसंद लक्ष्मण की पेशानियों पर बल पड़ गए कि कहीं संभ्रांत आर्य नागर परंपरा से अनभिज्ञ सरल परंतु उजड्ड वानर ससुराल में भैया के साथ साथ पूरे रघुवंश को हमेशा के लिए हंसी का पात्र न बना दें।

लक्ष्मण इस बात से भली भांति परिचित थे कि औपनिषदिक जनक परंपरा के गंभीर राजाओं की श्रृंखला के बावजूद मिथिला वाले किसी की टांग खींचकर मजे लेने से कभी बाज नहीं आते हैं और बुरा मानने पर कवित्तों के माध्यम से सदियों तक ताना देने में समर्थ हैं।

लेकिन भैया का आदेश टाल भी नहीं सकते थे इसलिए उन्होंने सुग्रीव, हनुमान, अंगद, नल नील आदि को नागर परंपराओं की ट्रेनिंग देना शुरू किया और बाकी वानरों से कहा कि वे ठीक वैसा ही करें जैसा उनके यूथपति करें।

कैसे प्रणाम करना है, कैसे प्रणाम का उत्तर देना है, कैसे बैठना है, उठना है।

विशेषतः सामूहिक भोज के राजसी नियम कायदे क्या हैं।

रास्ते भर ये ट्रेनिंग लेते हुए अयोध्या का यह अद्भुत सार्थ मिथिला पहुँचा।

सुसंस्कृत कर्मकांडी वासिष्ठ आचार्य, अयोध्या के संभ्रांत श्रेष्ठि, पौरजन, श्रृंगवेरपुर के श्यामल निषाद, सौराष्ट्र से आये ऋक्ष और दक्षिण के वानर।

शिव बारात का दृश्य पुनः उपस्थित हो गया।

मिथिला में जवाईयों व उनके मित्रों, सहयोगियों का हार्दिक स्वागत हुआ।

खाना पीना, नृत्य संगीत उत्सव के बीच श्रीराम के लौटने के आग्रहों को ठुकराते और मैथिलों के मनुहारों के बीच एक महीना कब बीत गया, पता ही नहीं चला।

अंततः अनासक्त राजर्षि सीरध्वज को भी भाव भरे भारी मन से लौटने की अनुमति देनी पड़ी।

विदाई पूर्व संध्या पर भव्य सामूहिक भोज का आयोजन हुआ।

लक्ष्मण बहुत संतुष्ट थे। सबकुछ उनकी ट्रेनिंग व प्लान के हिसाब से ही हुआ व सबकुछ ठीक हुआ।

संध्या को भोज में सब पंक्तियों में विराजे।

अपनी अपनी रुचि के अनुसार सामिष निरामिष व्यंजनों की लंबी तालिका थी और विशिष्ट व्यंजन के रूप में था, कटहल।

हनुमान जी को कटहल बहुत भाया विशेषतः अलोने स्वाद की उसकी गुठली।

हनुमान जी ने कटहल की गुठली निकालने को उंगलियों से दवाब डाला और गुठली हवा में उछल गई।

हनुमान जी के दिमाग में कौंधा, "हो गई बेइज्जती।"

और इज्जत बचाने की खातिर वे उस गुठली को पकड़ने उछल पड़े।

अंगद भी उधर देख रहे थे।

सीनियर की उछाल को इशारा माना और उन्होंने भी कटहल की गुठली उछाली और उछल पड़े।

फिर क्या था।

कटहल की गुठलियां हवा में उछलने लगीं और उनके साथ ही वानर भी।

धीर गंभीर राम हंस पड़े।

राम को हंसता देख उत्साहित हनुमान ने दूसरी गुठली उचकायी और फिर उछल पड़े।

फिर क्या था! घमासान धमाचौकड़ी मच गई।

अयोध्या वाले झेंपे जा रहे थे और मिथिला वाले हंस हंस कर मजे लिए जा रहे थे।

लक्ष्मण सिर पकड़कर बैठ गए और हनुमान जी ने पूरी मासूमियत से आकर पूछा, "लक्ष्मण भैया, हम सब ठीक ठाक कर रहे है न?"

इस भोले से प्रश्न को सुनकर रोकते रोकते भी लक्ष्मण की हंसी छूट पड़ी।

इधर कभी न देखी गई राम की उन्मुक्त हँसी जारी थी।

मेरे राम आ रहे हैं ...🚩🚩

राजस्थान के सपूत एवं राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा के अध्यक्ष श्री सुखदेव सिंह गोगामेडी जी की निर्मम हत्या का मुझे बड़ा ही ...
05/12/2023

राजस्थान के सपूत एवं राष्ट्रीय राजपूत करणी सेवा के अध्यक्ष श्री सुखदेव सिंह गोगामेडी जी की निर्मम हत्या का मुझे बड़ा ही दुख है। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और हत्यारों को तुरंत सरकार और पुलिस प्रशासन अरेस्ट करें ।
राजपूत करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी को न्याय दिलाने के लिए संपूर्ण हिंदू समाज सदैव तत्पर रहेगा। इस कायरता पूर्ण हरकत को बर्दास्त नही जायेगा!
संगठित हिन्दू ईंटरनेशनल वाहिनी
S. H. I. V. (शिव🔱) 🚩
जय श्री राम 🚩
जय माँ भारती 🇮🇳🚩
🙏🙏
राष्ट्रीय अध्यक्ष

हम क्यों सर्वेश्रेष्ठ है..पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूर्ण करने में 365 दिन, 5 घण्टे, 48 मिनीट और 46 सेकेण्ड लगते है...
03/04/2023

हम क्यों सर्वेश्रेष्ठ है..
पृथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा पूर्ण करने में 365 दिन, 5 घण्टे, 48 मिनीट और 46 सेकेण्ड लगते है। इस अंतर को समाप्त करने के लिए ईसाइयों के वर्तमान calendar में 4 वर्षों के अंतराल में लीप वर्ष मनाकर उसमें 1 दिन बढ़ाया जाता है। लेकिन इसप्रकार 4 वर्षों में 44 मिनीट अतिरिक्त पकड़े जाते है, जिसका ध्यान इस calendar के निर्माताओं ने नहीं रखा है। इस कारण से यह क्रम इसीप्रकार चलता रहा तो 1000 वर्षों के बाद लगभग 8 दिन अतिरिक्त पकड़े होंगे। और लगभग 10,000 वर्षों के बाद लगभग 78 दिन अतिरिक्त पकड़ लिए गए होंगे। इसका सीधा-सीधा अर्थ यह है की दस हज़ार वर्षों के बाद 1st Jan. शीत ऋतु की जगह वसंत ऋतु में होली के आसपास आएगी। यह सीधा-सादा गणित है। परंतु लाखों वर्षों से चली आ रही हमारी राम नवमी आज भी वसंत ऋतु में ही आती है, दशहरा व दिवाली शरद ऋतु में ही आते है। क्योंकि हमारे पुरखे खगोल और गणित में भी बहुत ही निपुण थे। अत: उन्होंने इस गणित व खगोल विज्ञान के आधार पर ही हज़ारों वर्षों में आनेवाले ग्रहणों का स्थान, दिन तथा समय भी exact लिख रखा है। इसलिए आग्रह है की कई बार बदली ईसाइयों की दक़ियानूसी वाली कालगणना छोड़िए तथा स्वाभिमान के साथ अपने पुरखों की वैज्ञानिक कालगणना अपनाइए जो अक्षरश: अचूक व बेजोड़ है।
नव वर्ष का इतिहास व महत्त्व
भरतपुत्र रात के अँधेरे में नव-वर्ष का स्वागत नहीं करते।
अपितु सूर्य की पहली किरण का
अभिवादन करके नव वर्ष का स्वागत करते हैं l
विश्व के सर्वाधिक प्राचीन और वैज्ञानिक कालगणना के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही वास्तविक नववर्ष है।
हम परस्पर उसी दिन एक दूसरे को शुभकामनायें दें और प्रगतिशील कहलाएं ।

18/03/2023

19 मार्च का दिन हो समाज को समर्पित, आप चाहे कहीं भी हों 19 मार्च को जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम पहुंचना है!

#ब्राह्मण_महापंचायत

आओ मंदिर चले..... ☘️
25/01/2023

आओ मंदिर चले..... ☘️

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