बॉकवीर सिंह राठौड़ पोकरण जैसलमेर

  • Home
  • India
  • Jaipur
  • बॉकवीर सिंह राठौड़ पोकरण जैसलमेर

बॉकवीर सिंह राठौड़ पोकरण जैसलमेर सनातन धर्म और संस्कृति

महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं।
07/07/2024

महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं।

06/07/2024

जय श्रीराम 🚩🙏

।। राम ।।इक्यावन शक्ति पीठों में से एक कन्याकुमारी को क्यों कहते हैं कन्याकुमारी?????कन्या कुमारी शब्द बरसो से हम भारतीय...
26/03/2023

।। राम ।।
इक्यावन शक्ति पीठों में से एक कन्याकुमारी को क्यों कहते हैं कन्याकुमारी?????

कन्या कुमारी शब्द बरसो से हम भारतीयों को एक होने का अनुभव कराता रहा। शोर्य की हर बात में हम कहते रहे हैं की भारत कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक हैं। कन्या कुमारी को अंग्रेजो के समय केप कोमोरिन के नाम से भी जाना जाता रहा हैं।

कन्या कुमारी तमिलनाडु प्रान्त के सुदूर दक्षिण तट पर बसा एक शहर है। यह हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर का संगम स्थल है, जहां भिन्न सागर अपने विभिन्न रंगो से मनोरम छटा बिखेरते हैं।

भारत के दक्षिण छोर पर बसा कन्याकुमारी वर्षो से कला, संस्कृति, सभ्यता का प्रतीक रहा है। भारत के पर्यटक स्थल के रूप में भी इस स्थान का अपना ही महत्व हैं। दूर-दूर फैले समुद्र के विशाल लहरों के बीच यहां का सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बेहद आकर्षक लगता हैं।

समुद्र तट पर फैली रंग बिरंगी रेत इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देती है।कन्याकुमारी दक्षिण भारत के महान शासकों चोल, चेर, पांड्य के अधीन रहा है। यहां के स्मारकों पर इन शासकों की छाप स्पष्ट दिखाई देती है। इस जगह का नाम कन्‍याकुमारी पड़ने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है।

कहा जाता है कि भगवान शिव ने असुर बाणासुर को वरदान दिया था कि कुंवारी कन्या के अलावा किसी के हाथों उसका वध नहीं होगा। प्राचीन काल में भारत पर शासन करने वाले राजा भरत को आठ पुत्री और एक पुत्र था। भरत ने अपना साम्राज्य को नौ बराबर हिस्सों में बांटकर अपनी संतानों को दे दिया।

दक्षिण का हिस्सा उसकी पुत्री कुमारी को मिला। कुमारी को शक्ति देवी का अवतार माना जाता था। कुमारी ने दक्षिण भारत के इस हिस्से पर कुशलतापूर्वक शासन किया। उसकी ईच्‍छा थी कि वह शिव से विवाह करें। इसके लिए वह उनकी पूजा करती थी।

शिव विवाह के लिए राजी भी हो गए थे और विवाह की तैयारियां होने लगीं थी। लेकिन नारद मुनि चाहते थे कि बाणासुर का कुमारी के हाथों वध हो जाए। इस कारण शिव और देवी कुमारी का विवाह नहीं हो पाया।

इस बीच बाणासुर को जब कुमारी की सुंदरता के बारे में पता चला तो उसने कुमारी के समक्ष शादी का प्रस्ताव रखा। कुमारी ने कहा कि यदि वह उसे युद्ध में हरा देगा तो वह उससे विवाह कर लेगी। दोनों के बीच युद्ध हुआ और बाणासुर को मृत्यु की प्राप्ति हुई।

कुमारी की याद में ही दक्षिण भारत के इस स्थान को कन्याकुमारी कहा जाता है।माना जाता है कि शिव और कुमारी के विवाह की तैयारी का सामान गेहू व चावल थे, आगे चलकर रंग बिरंगी रेत में परिवर्तित हो गये।

सागर के मुहाने के दाई और स्थित यह एक छोटा सा मंदिर है जो पार्वती को समर्पित है। मंदिर तीनों समुद्रों के संगम स्थल पर बना हुआ है। यहां सागर की लहरों की आवाज स्वर्ग के संगीत की भांति सुनाई देती है। भक्तगण मंदिर में प्रवेश करने से पहले त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाते हैं जो मंदिर के बाई ओर 500 मीटर की दूरी पर है। मंदिर का पूर्वी प्रवेश द्वार को हमेशा बंद करके रखा जाता है क्योंकि मंदिर में स्थापित देवी के आभूषण की रोशनी से समुद्री जहाज इसे लाइटहाउस समझने की भूल कर बैठते है और जहाज को किनारे करने के चक्‍कर में दुर्घटनाग्रस्‍त हो जाते है।हिन्दुओ के लिए हमेशा से यह स्थान पावन एवं पवित्र माना जाता रहा हैं।

यह एक ऐसा स्थान हैं जहा देवी भगवती के नाबालिंग रूप की पूजा होती हैं।पुराने ग्रंथो में इस स्थान का जिक्र मिलता हैं. एक अन्य पोरानिक कथा के अनुसार ये स्थान हिन्दू धर्म के 51 शक्ति पीठो में से एक हैं. यहाँ देवी सती की पीठ गिरी थी और यहाँ देवी के पीठ रूप की पूजा होती हैं।

एक अन्य कथा के अनुसार जब देवी कन्या ने शिव से विवाह की इच्छा जताई और इसके लिए देवी ने समुन्द्र में एक चट्टान पर एक पैर पर खड़े होकर शिव को प्रसन्न कर उन्हें विवाह के राजी किया तो शिव ने विवाह के लिए एक नियत समय तय किया।

उस दिन भगवान शिव कैलाश से बारात लेकर चले, पर जिस रात को शिव को समुन्द्र तट पर पहुचना था उस रात को वे वहा पहुचते उससे पहले नारद जी, जो की बाणासुर का वध कुँवारी कन्या के हाथो करवाना चाहते थे।

उन्होंने मुर्गा बन कर बाग लगा दी और दिन का उदय कर दिया इस तरह भगवान शिव कन्याकुमारी स्थान से 10 किलोमीटर दूर एक स्थान जो आज शुचीन्द्रम के नाम से जाना जाता हैं वहा रुक गए। इस प्रकार पार्वती अवतार देवी और शिव का मिलाप नहीं हो सका।

आज भी शुचीन्द्रम में शिव का विशाल मंदिर बना हुआ हैं. तथा कन्याकुमारी में उस चट्टान पर जहा देवी ने तप किया था वहा पर भी देवी के एक पैर की प्रतिकृति उकरी हुई हैं। अब वहा पद मंडपम नाम का छोटा सा मंदिर बना हुआ हैं।

एक अन्य पोराणीक कथा के अनुसार जब हनुमानजी लक्ष्मण के लिए संजीवनी पर्वत को लेकर लंका की और जा रहे थे, तब समुन्द्र तट से कुछ दूर संजीवनी पहाड़ का एक टुकड़ा टूट कर नीचे गिर गया।

जिसे आज मरुन्यु वजुम पर्वत कहते हैं। अब ये पर्वत कन्याकुमारी से नागरकोइल हाईवे पर कोतत्रम नामक जगह पर हैं। और क्योंकि संजीवनी बूटी वाला पर्वत दवाओ का भंडार था और ये पहाड़ भी उस पवित्र पर्वत का ही टुकड़ा था तो इस पर्वत पर भी आयुर्वेदिक वनस्पतियो का भंडार हैं।

अगस्त्य मुनि जो स्वयं एक आयुर्वेद ज्ञाता थे इस पर्वत पर ही रहते थे वहाँ पर उनकी कुटिया आज भी विद्यमान हैं। तथा सुचिन्द्रम में जहा भगवान शिव का मंदिर हैं उसी मन्दिर में हनुमान जी की भी ऊँची और भव्य मूर्ति हैं जो बरबस ही श्रद्धालु का ध्यान आकर्षित कर लेती हैं।

कालांतर में इस स्थान को अगस्त्य मुनि के नाम पर अगस्तीवरम भी कहा जाने लगा।क्योंकि देवी भगवती का विवाह शिव से न हो सका तो देवी ने सन्यास ले लिया था। अतः हर व्यक्ति जो सन्यास लेना चाहता हैं या सन्यासी हैं उसे भी इस पावन और पवित्र स्थान के दर्शन अवश्य करने चाहिए।

स्वामी विवेकानंद जी जो की सन्यासी थे ने भी अपने गुरु के कहे अनुसार इस स्थान पर आराधना व ध्यान किया था। समुन्द्र में स्थित दो चट्टानें जहा एक पर देवी ने तप किया था उसके सामने बैठ कर तीन तीन दिन तक ध्यान किया था. उसी चट्टान पर आज एक तरफ पद मंडपम हैं और दूसरी तरफ विवेकानंदध्यान योग केंद्र बना हुआ हैं।

जिसमे स्वामीजी की विशाल प्रतिमा भी बनी हुई हैं। इसके अलावा पास की दूसरी चट्टान पर तिरुक्कुरुल ग्रन्थ की रचना करने वाले अमर तमिल कवि तिरूवल्लुवर की यह प्रतिमा बनी हुई हैं जो पर्यटकों को बहुत लुभाती हैं। ये दोनों चट्टानें समुन्द्र के अन्दर पानी में समुन्द्र तट से 500 मीटर दूर हैं। वहा पर जाने के लिए आज नावों की समुचित व्यवस्था हैं।

ये क्षेत्र पहले हिन्दू आबादी ही था, पर आंठवी शताब्दी में यहाँ ईसायत और इसलाम का प्रसार प्रचार हुआ। आज यहाँ तीनो धर्मो का अनुपात हमें देखने को मिलता हैं।

कुल मिलाकर हिन्दुओ के लिए यहाँ की जमीन और मिटटी वन्दनीय हैं क्योंकि यहाँ महान देवताओ, महर्षियो और माँ शक्ति का आश्रय स्थल था। इन सब कथाओ के अनुसार ये स्थान हिन्दू धर्म में अत्यंत ही महान और पवित्र हैं। जहा प्रत्येक हिन्दू को जीवन काल में यात्रा करनी चाहिएl
जय सिया राम🚩🚩🚩🚩

26/03/2023

🙏🏻कलयुग के लक्षण🙏🏻

1. कुटुम्ब कम हुआ . 2 सम्बंध कम हुए 3. नींद कम हुई. 4. बाल कम हुए 5. प्रेम कम हुआ 6. कपड़े कम हुए 7. शर्म कम हुई• 8 लाज-लज्जा कम हुई 09 मर्यादा कम हुई 10. बच्चे कम हुए 11. घर में खाना कम हुआ 12. पुस्तक वाचन कम हुआ 13. भाई-भाई प्रेम कम हुआ 15. चलना कम हुआ 16. खुराक कम हुआ 17. घी-मक्खन कम हुआ 18. तांबे - पीतल के बर्तन कम हुए 19. सुख-चैन कम हुआ 20. मेहमान कम हुए 21. सत्य कम हुआ 22. सभ्यता कम हुई 23. मन-मिलाप कम हुआ 24. समर्पण कम हुआ...😔*संतान को दोष न दें...*
*बालक या बालिका को 'इंग्लिश मीडियम'* में पढ़ाया...
*'अंग्रेजी'* बोलना सिखाया...
*'बर्थ डे'* और *'मैरिज एनिवर्सरी'*
जैसे जीवन के *'शुभ प्रसंगों'* को *'अंग्रेजी कल्चर'* के अनुसार जीने को ही *'श्रेष्ठ'* मानकर...
माता-पिता को *'मम्मा'* और
*'डैड'* कहना सिखाया...

जब *'अंग्रेजी कल्चर'* से परिपूर्ण बालक या बालिका बड़ा होकर, आपको *'समय'* नहीं देता, आपकी *'भावनाओं'* को नहीं समझता, आप को *'तुच्छ'* मानकर *'जुबान लड़ाता'* है और आप को बच्चों में कोई *'संस्कार'* नजर नहीं आता है,
तब घर के वातावरण को *'गमगीन किए बिना'*... या...
*'संतान को दोष दिए बिना'*...
कहीं *'एकान्त'* में जाकर *'रो लें'*...

*क्योंकि...*
पुत्र या पुत्री की पहली वर्षगांठ से ही,
*'भारतीय संस्कारों'* के बजाय
*'केक'* कैसे काटा जाता है ? सिखाने वाले आप ही हैं...
*'हवन कुण्ड में आहुति'* कैसे डाली जाए...
*'मंदिर, मंत्र, पूजा-पाठ, आदर-सत्कार के संस्कार देने के बदले'...*
केवल *'फर्राटेदार अंग्रेजी'* बोलने को ही,
अपनी *'शान'* समझने वाले आप...

बच्चा जब पहली बार घर से बाहर निकला तो उसे
*'प्रणाम-आशीर्वाद'* के बदले
*'बाय-बाय'* कहना सिखाने वाले आप...

परीक्षा देने जाते समय
*'इष्टदेव/बड़ों के पैर छूने'* के बदले
*'Best of Luck'*
कह कर परीक्षा भवन तक छोड़ने वाले आप...

बालक या बालिका के *'सफल'* होने पर, घर में परिवार के साथ बैठ कर *'खुशियाँ'* मनाने के बदले...
*'होटल में पार्टी मनाने'* की *'प्रथा'* को बढ़ावा देने वाले आप...

बालक या बालिका के विवाह के पश्चात्...
*'कुल देवता / देव दर्शन'*
को भेजने से पहले...
*'हनीमून'* के लिए *'फाॅरेन/टूरिस्ट स्पॉट'* भेजने की तैयारी करने वाले आप...

ऐसी ही ढेर सारी *'अंग्रेजी कल्चर्स'* को हमने जाने-अनजाने *'स्वीकार'* कर लिया है...

अब तो बड़े-बुजुर्गों और श्रेष्ठों के *'पैर छूने'* में भी *'शर्म'* आती है...

गलती किसकी..?
मात्र आपकी *'(माँ-बाप की)'*...

अंग्रेजी International *'भाषा'* है...
इसे *'सीखना'* है...
इसकी *'संस्कृति'* को,
*'जीवन में उतारना'* नहीं है...

*मानो तो ठीक...*
*नहीं तो भगवान ने जिंदगी दी है...*
*चल रही है, चलती रहेगी...*
*आने वाली जनरेशन बहुत ही घातक सिद्द्ध होने वाली है, हमारी संस्कृति और सभ्यता विलुप्त होती जा रही है, बच्चे संस्कारहीन होते जा रहे हैं और इसमें मैं भी हूं , अंग्रेजी सभ्यता को अपना रहे*

*सोच कर, विचार कर अपने और अपने बच्चे, परिवार, समाज, संस्कृति और देश को बचाने का प्रयास करें...*

*हिन्दी हमारी राष्ट्र और् मातृ भाषा है इसको बढ़ावा दें, बच्चों को जागरूक करें ताकि वो हमारी संस्कृति और सभ्यता से जुड़ कर गौरवशाली महसूस करें।*

•💐एक राजकुमारी की अनोखी शर्त,💐-💚-एक राजा की लड़की की शादी होनी थी, लड़की की शर्त ये थी कि जो भी 20 तक कि गिनती सुनाएगा उ...
02/03/2023

•💐एक राजकुमारी की अनोखी शर्त,💐

-💚-एक राजा की लड़की की शादी होनी थी, लड़की की शर्त ये थी कि जो भी 20 तक कि गिनती सुनाएगा उसको राजकुमारी अपना पति चुनेगी!गिनती ऐसी हो जिसमें सारा संसार समा जाए,यदी नहीं सुना सकेगा तो उसको 20 कोड़े खाने पड़ेंगे! और ये शर्त केवल राजाओं के लिए ही है!*-अब एक तरफ *राजकुमारी का वरणऔर दूसरी तरफ कोड़े!एक-एक करके राजा महाराजा आए राजा ने दावत भी रखी मिठाई और सब पकवान तैयार कराए गए!पहले सब दावत का मजा ले रहे होते हैं,फिर सभा में राजकुमारी का स्वयंवर शुरू होता है!*
💚--एक से बढ़ कर एक राजा महाराजा आते हैं!सभी गिनती सुनाते हैं जो उन्होंने पढ़ी हुई थी,लेकिन कोई भी वह गिनती नहीं सुना सका जिससे राजकुमारी संतुष्ट हो सके!अब जो भी आता कोड़े खा कर चला जाता,कुछ राजा तो आगे ही नहीं आए उनका कहना था!कि गिनती तो गिनती होती है राजकुमारी पागल हो गई है,ये केवल हम सबको पिटवा कर मजे लूट रही है!
💚*-ये सब नजारा देख कर एक हलवाई हंसने लगता है!वह कहता है अरे डूब मरो राजाओं, आप सबको 20 तक गिनती नहीं आती!*
💚--ये सब सुनकर सब राजा उसको दण्ड देने के लिए बोलते हैं!राजा उनसे पूछता है कि तुम क्या गिनती जानते हो यदी जानते हो तो सुनाओ!
💚*-हलवाई कहता है, हे राजन यदी मैने गिनती सुनाई तो क्या राजकुमारी मुझसे शादी करेगीं!क्योंकि मैं आपके बराबर नहिं हूं,और ये स्वयंवर भी केवल राजाओं के लिए है!तो गिनती सुनाने से मुझे कोइ फायदा नहीं, और मैं नहीं सुना सका तो सजा भी नहीं मिलनी चाहिए!*
💚--राजकुमारी बोलती है, ठीक है यदी तुम गिनती सुना सके तो मैं तुमसे शादी करूंगी!और यदि नहीं सुना सके तो तुम्हें मृत्युदंड दिया जायेगा!, सब देख रहे थे कि आज तो हलवाई की मौत तय है!
💚*-हलवाई को गिनती बोलने के लिए कहा जाता है,राजा की आज्ञा लेकर हलवाई गिनती शुरू करता है!*
🔸--एक भगवान
🔸*-दो पक्ष*
🔸--तीन लोक
🔸*-चार युग*
🔸--पांच पांडव
🔸*-छह शास्त्र*
🔸--सात वार
🔸*-आठ खंड*
-🔸-नौ ग्रह
🔸*दश दिशा*
🔸--ग्यारह रुद्र
🔸*-बारह महिनें*
🔸--तेरह रत्न
🔸*-चौदह विद्या*
🔸--पन्द्रह तिथि
🔸*-सोलह श्राद्ध*
🔸--सत्रह वनस्पति
🔸*-अठारह पुराण*
🔸--उन्नीसवीं तुम
--और--
🔸*बीसवा मैं*
💚--सब हके बक्के रह जाते हैं,राजकुमारी हलवाई से शादी कर लेती है!इस गिनती में संसार के सारी वस्तु मौजूद हैं,यहां शिक्षित से बड़ा तजुर्बा है!

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

जय श्रीराम ‼️⛳🚩🙏
28/02/2023

जय श्रीराम ‼️⛳🚩🙏

 #खाटूश्याम बाबा की कहानी .....📢राजस्थान के सीकर जिले में श्री खाटू श्याम जी का सुप्रसिद्ध मंदिर है. वैसे तो खाटू श्याम ...
07/11/2022

#खाटूश्याम बाबा की कहानी .....

📢राजस्थान के सीकर जिले में श्री खाटू श्याम जी का सुप्रसिद्ध मंदिर है. वैसे तो खाटू श्याम बाबा के भक्तों की कोई गिनती नहीं लेकिन इनमें खासकर वैश्य, मारवाड़ी जैसे व्यवसायी वर्ग अधिक संख्या में है. श्याम बाबा कौन थे, उनके जन्म और जीवन चरित्र के बारे में जानते हैं इस लेख में.

खाटू श्याम जी का असली नाम बर्बरीक है. महाभारत की एक कहानी के अनुसार बर्बरीक का सिर राजस्थान प्रदेश के खाटू नगर में दफना दिया था. इसीलिए बर्बरीक जी का नाम खाटू श्याम बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुआ. वर्तमान में खाटूनगर सीकर जिले के नाम से जाना जाता है. खाटू श्याम बाबा जी कलियुग में श्री कृष्ण भगवान के अवतार के रूप में माने जाते हैं.

श्याम बाबा घटोत्कच और नागकन्या नाग कन्या मौरवी के पुत्र हैं. पांचों पांडवों में सर्वाधिक बलशाली भीम और उनकी पत्नी हिडिम्बा बर्बरीक के दादा दादी थे. कहा जाता है कि जन्म के समय बर्बरीक के बाल बब्बर शेर के समान थे, अतः उनका नाम बर्बरीक रखा गया. बर्बरीक का नाम श्याम बाबा कैसे पड़ा, आइये इसकी कहानी जानते हैं.

बर्बरीक बचपन में एक वीर और तेजस्वी बालक थे. बर्बरीक ने भगवान श्री कृष्ण और अपनी माँ मौरवी से युद्धकला, कौशल सीखकर निपुणता प्राप्त कर ली थी. बर्बरीक ने भगवान शिव की घोर तपस्या की थी, जिसके आशीर्वादस्वरुप भगवान ने शिव ने बर्बरीक को 3 चमत्कारी बाण प्रदान किए. इसी कारणवश बर्बरीक का नाम तीन बाणधारी के रूप में भी प्रसिद्ध है. भगवान अग्निदेव ने बर्बरीक को एक दिव्य धनुष दिया था, जिससे वो तीनों लोकों पर विजय प्राप्त करने में समर्थ थे.

जब कौरवों-पांडवों का युद्ध होने का सूचना बर्बरीक को मिली तो उन्होंने भी युद्ध में भाग लेने का निर्णय लिया. बर्बरीक अपनी माँ का आशीर्वाद लिए और उन्हें हारे हुए पक्ष का साथ देने का वचन देकर निकल पड़े. इसी वचन के कारण हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा यह बात प्रसिद्ध हुई.

जब बर्बरीक जा रहे थे तो उन्हें मार्ग में एक ब्राह्मण मिला. यह ब्राह्मण कोई और नहीं, भगवान श्री कृष्ण थे जोकि बर्बरीक की परीक्षा लेना चाहते थे. ब्राह्मण बने श्री कृष्ण ने बर्बरीक से प्रश्न किया कि वो मात्र 3 बाण लेकर लड़ने को जा रहा है ? मात्र 3 बाण से कोई युद्ध कैसे लड़ सकता है. बर्बरीक ने कहा कि उनका एक ही बाण शत्रु सेना को समाप्त करने में सक्षम है और इसके बाद भी वह तीर नष्ट न होकर वापस उनके तरकश में आ जायेगा. अतः अगर तीनों तीर के उपयोग से तो सम्पूर्ण जगत का विनाश किया जा सकता है.

ब्राह्मण ने बर्बरीक (Barbarik) से एक पीपल के वृक्ष की ओर इशारा करके कहा कि वो एक बाण से पेड़ के सारे पत्तों को भेदकर दिखाए. बर्बरीक ने भगवान का ध्यान कर एक बाण छोड़ दिया. उस बाण ने पीपल के सारे पत्तों को छेद दिया और उसके बाद बाण ब्राह्मण बने कृष्ण के पैर के चारों तरफ घूमने लगा. असल में कृष्ण ने एक पत्ता अपने पैर के नीचे छिपा दिया था. बर्बरीक समझ गये कि तीर उसी पत्ते को भेदने के लिए ब्राह्मण के पैर के चक्कर लगा रहा है. बर्बरीक बोले – हे ब्राह्मण अपना पैर हटा लो, नहीं तो ये आपके पैर को वेध देगा.

श्री कृष्ण बर्बरीक के पराक्रम से प्रसन्न हुए. उन्होंने पूंछा कि बर्बरीक किस पक्ष की तरफ से युद्ध करेंगे. बर्बरीक बोले कि उन्होंने लड़ने के लिए कोई पक्ष निर्धारित किया है, वो तो बस अपने वचन अनुसार हारे हुए पक्ष की ओर से लड़ेंगे. श्री कृष्ण ये सुनकर विचारमग्न हो गये क्योकि बर्बरीक के इस वचन के बारे में कौरव जानते थे. कौरवों ने योजना बनाई थी कि युद्ध के पहले दिन वो कम सेना के साथ युद्ध करेंगे. इससे कौरव युद्ध में हराने लगेंगे, जिसके कारण बर्बरीक कौरवों की तरफ से लड़ने आ जायेंगे. अगर बर्बरीक कौरवों की तरफ से लड़ेंगे तो उनके चमत्कारी बाण पांडवों का नाश कर देंगे.

कौरवों की योजना विफल करने के लिए ब्राह्मण बने कृष्ण ने बर्बरीक से एक दान देने का वचन माँगा. बर्बरीक ने दान देने का वचन दे दिया. अब ब्राह्मण ने बर्बरीक से कहा कि उसे दान में बर्बरीक का सिर चाहिए. इस अनोखे दान की मांग सुनकर बर्बरीक आश्चर्यचकित हुए और समझ गये कि यह ब्राह्मण कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है. बर्बरीक ने प्रार्थना कि वो दिए गये वचन अनुसार अपने शीश का दान अवश्य करेंगे, लेकिन पहले ब्राह्मणदेव अपने वास्तविक रूप में प्रकट हों.

भगवान कृष्ण अपने असली रूप में प्रकट हुए. बर्बरीक बोले कि हे देव मैं अपना शीश देने के लिए बचनबद्ध हूँ लेकिन मेरी युद्ध अपनी आँखों से देखने की इच्छा है. श्री कृष्ण बर्बरीक ने बर्बरीक की वचनबद्धता से प्रसन्न होकर उसकी इच्छा पूरी करने का आशीर्वाद दिया. बर्बरीक ने अपना शीश काटकर कृष्ण को दे दिया. श्री कृष्ण ने बर्बरीक के सिर को 14 देवियों के द्वारा अमृत से सींचकर युद्धभूमि के पास एक पहाड़ी पर स्थित कर दिया, जहाँ से बर्बरीक युद्ध का दृश्य देख सकें. इसके पश्चात कृष्ण ने बर्बरीक के धड़ का शास्त्रोक्त विधि से अंतिम संस्कार कर दिया.

महाभारत का महान युद्ध समाप्त हुआ और पांडव विजयी हुए. विजय के बाद पांडवों में यह बहस होने लगी कि इस विजय का श्रेय किस योद्धा को जाता है. श्री कृष्ण ने कहा – चूंकि बर्बरीक इस युद्ध के साक्षी रहे हैं अतः इस प्रश्न का उत्तर उन्ही से जानना चाहिए. तब परमवीर बर्बरीक ने कहा कि इस युद्ध की विजय का श्रेय एकमात्र श्री कृष्ण को जाता है, क्योकि यह सब कुछ श्री कृष्ण की उत्कृष्ट युद्धनीति के कारण ही सम्भव हुआ. विजय के पीछे सबकुछ श्री कृष्ण की ही माया थी.

बर्बरीक के इस सत्य वचन से देवताओं ने बर्बरीक पर पुष्पों की वर्षा की और उनके गुणगान गाने लगे. श्री कृष्ण वीर बर्बरीक की महानता से अति प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा – हे वीर बर्बरीक आप महान है. मेरे आशीर्वाद स्वरुप आज से आप मेरे नाम श्याम से प्रसिद्ध होओगे. कलियुग में आप कृष्णअवतार रूप में पूजे जायेंगे और अपने भक्तों के मनोरथ पूर्ण करेंगे.

भगवान श्री कृष्ण का वचन सिद्ध हुआ और आज हम देखते भी हैं कि भगवान श्री खाटू श्याम बाबा जी अपने भक्तों पर निरंतर अपनी कृपा बनाये रखते हैं. बाबा श्याम अपने वचन अनुसार हारे का सहारा बनते हैं. इसीलिए जो सारी दुनिया से हारा सताया गया होता है वो भी अगर सच्चे मन से बाबा श्याम के नामों का सच्चे मन से नाम ले और स्मरण करे तो उसका कल्याण अवश्य ही होता है. श्री खाटू श्याम बाबा की महिमा अपरम्पार है, सश्रद्धा विनती है कि बाबा श्याम इसी प्रकार अपने भक्तों पर अपनी कृपा बनाये रखें।

Address

Jaipur

Telephone

9823901975

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when बॉकवीर सिंह राठौड़ पोकरण जैसलमेर posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to बॉकवीर सिंह राठौड़ पोकरण जैसलमेर:

Share