Munisuvrat Swastidham

Munisuvrat Swastidham भू-गर्भ से प्रगटित स्वस्तिधाम विराजित श्री 1008 भगवान मुनिसुव्रतनाथ के नियमित दर्शन भक्ति हेतू
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23/05/2026

कैसे बनी संगीता ... आर्यिका माँ स्वस्तिभूषण
देखना ना भूलें आस्था का आतिशय - महिमा स्वस्तिधाम की
📽️Feature Film

✨ Teaser Release

23/05/2026

इनके दर्शन को जो भी है पाता... मन का अंधियारा पल में मिट जाता

#वन्देस्वस्तिभूषणं #स्वस्तिधाम

23/05/2026

👉 असली नेता कौन ?? ~ भारत गौरव तीर्थ संवर्धिका स्वस्तिधाम प्रणेत्री परम् विदुषी लेखिका गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी।

#वन्देस्वस्तिभूषणं #स्वस्तिधाम

22/05/2026

जो आदमी इस कार्य को नियम से करेगा, उसका दिमाग शुद्ध रहेगा

#वन्देस्वस्तिभूषणं #स्वस्तिधाम

22/05/2026

इनका जो भी करता है वंदन.. जग में होजाता है वो ही कुंदन

#वन्देस्वस्तिभूषणं #स्वस्तिधाम

21/05/2026

आखिर कब तक चलेगा यह सब???

भारत गौरव स्वस्तिधाम प्रणेत्री गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने

आर्यिका श्री 105 श्रुतमती माताजी एवं आर्यिका श्री 105 उपशममति माता जी के साथ हुए इस दुःखद घटनाक्रम पर अपने भाव रखे

#वन्देस्वस्तिभूषणं #श्रुतमतिमाताजी #उपशममतिमाताजी

21/05/2026

✨✨चर्चा दुनिया में है जिनके नाम की ... स्वस्तिधाम - स्वस्तिधाम तीर्थ धाम की

#वन्देस्वस्तिभूषणं #स्वस्तिधाम

20/05/2026

✨ कैसे बनी संगीता... आर्यिका माँ 105 श्री स्वस्तिभूषण जी

✅ आस्था का अतिशय ... महिमा स्वस्तिधाम की
शीघ्र ही आपके नज़दीकी Cinema घरों में

देखना ना भूलें

#वन्देस्वस्तिभूषणं #स्वस्तिधाम

🔰 केशवराय पाटन प्रवास अपडेट🗓️ 19 मई 2026 📯 भारत गौरव तीर्थ संवर्धिका स्वस्तिधाम प्रणेत्री परम् विदुषी लेखिका गणिनी आर्यि...
19/05/2026

🔰 केशवराय पाटन प्रवास अपडेट
🗓️ 19 मई 2026

📯 भारत गौरव तीर्थ संवर्धिका स्वस्तिधाम प्रणेत्री परम् विदुषी लेखिका गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माता जी ससंघ

✅ विश्व के प्राचीनतम जैन अतिशय क्षेत्र
🚩 श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र केशवराय पाटन राजस्थान में विराजमान हैं।
4100 वर्ष इस प्राचीन जिनालय का सम्पूर्ण पुनर्निर्माण गुरु माँ की प्रेरणा व निर्देशन में गतिमान है।

प्रातः अभिषेक व शांतिधारा के पश्च्यात
गुरु माँ के मंगल प्रवचन हुए

प्रवचन सार
धर्म स्नेही बन्धुओं,
किसी को बुलाने में बताने में व्यंग्य कर रहे हैं तो शब्दों के द्वारा यहाँ तक की सपने में भी शब्द बोल रहे हैं! जिसकी जो मूल भाषा है वह सपनों में बोलता है! तत्वार्थ सूत्र ग्रन्थ में भी शब्द हैं! शब्द किसी को पढना आएं या ना आएं बोलना जरूर आता है!
शब्द संभल कर बोलिए, शब्द के हाथ ना पाँव!
एक शब्द औषधि करे, एक करे है घाव!!
बिल्ली म्याऊँ म्याऊँ करती है कुत्ता भौ भौ करता है कोयल कूँ कूँ करती है! उनको उतने ही शब्द आते हैं!शब्द मिले हैं मनुष्यों के लिए! सारे संसार में कोई उत्कृष्ट प्राणी है तो वह मनुष्य ही है! मनुष्य के लिए यहाँ से मोक्ष स्वर्ग नरक त्रियंच सभी जगह के द्वार खुले हैं! शब्द तो वही रहते हैं सिर्फ भाव आपके रहते हैं! दो प्रकार के शब्द हैं स्वर और व्यंजन! स्वर और व्यंजन जब दोनों मिल जाते हैं तब स्वाद आता है! जैसे भोजन में जब तक रस (घी तेल मीठा आदि ) ना हो तब तक भोजन में रस नहीं आता है! शब्दों में भाव जैसे भोजन यदि प्रसन्नता पूर्वक प्रेम भाव से परोसा जाए तो भोजन ग्रहण करने वाला अतिथि भी प्रसन्न भाव से भोजन ग्रहण करता है! वह भोजन उसके लिए पौष्टिक एवं गुणकारी होता है! किन्तु वही भोजन यदि अपमान पूर्वक दिया जाए तो वह मजबूरी वश खा तो लेगा किन्तु वह ना तो गुणकारी रहेगा ना ही पौष्टिक ही रहेगा! एक महिला के पास आटा, चावल, दाल, चीनी आदि सामग्री तो है किन्तु उसको बनाना कुछ नहीं आता तो उसके पास वह सामग्री व्यर्थ है! वैसे ही तुम्हारे पास शब्द स्वर व्यंजन सब है लेकिन उपयोग करना ना आये तो सब बेकार हैं! शब्दों के लेखन से भी व्यक्ति का स्वभाव पढ़ लिया जाता है! वह किस स्वभाव कैसी प्रवित्ती का है ये उसके लेखन से भी प्रतीत हो जाता है! शब्द बहुत बड़ी शक्ति हैं! जिस प्रकार किसी को बन्दूक की गोली बिना बन्दूक के फेंक कर मारे तो कुछ नहीं होगा किन्तु वही गोली यदि बन्दूक में डालकर यदि किसी के ऊपर चला दे तो वह चोट पहुंचा देती है इसी प्रकार शब्दों को क्रोध आदि कषायों के साथ किसी के लिए प्रयोग करते हैं तो वह मन में घाव पैदा कर देते हैं! जैसे अच्छी गृहणी अच्छा भोजन बना लेती हैं वैसे ही अच्छा ज्ञानी शब्दों को अच्छा बना लेता है!

देखें आज के समस्त दृश्य

#वन्देस्वस्तिभूषणं #केशोरायपाटन #शांतिसागरजी_शताब्दी_पदारोहण_महोत्सव

19/05/2026

शब्द कैसे आपके और दूसरों के जीवन में एक अंतर पैदा करते हैं ?

#वन्देस्वस्तिभूषणं #स्वस्तिधाम

18/05/2026

ध्यान किसे कहते हैं ?? ~ भारत गौरव तीर्थ संवर्धिका स्वस्तिधाम प्रणेत्री परम् विदुषी लेखिका गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी।

#वन्देस्वस्तिभूषणं #स्वस्तिधाम #ध्यान #ध्यान_की_सही_विधि_और_लाभ

Address

Shri 1008 Munisuvratnath Digamber Jain Atishay Kshetra Swastidham Jahazpur
Jahazpur
311201

Opening Hours

Monday 5am - 8pm
Tuesday 5am - 8pm
Wednesday 5am - 8pm
Thursday 5am - 8pm
Friday 5am - 8pm
Saturday 5am - 8pm
Sunday 5am - 8pm

Telephone

+919782063107

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