22/08/2026
👉बड़ौत ( उत्तर प्रदेश ) से आई एक बस भक्तों की टोली
🙏🌧️ मंगलमय शांति वर्षायोग ~ केशवराय पाटन अपडेट
🗓️ 22 अगस्त 2026 | शनिवार
📯 भारत गौरव तीर्थ संवर्धिका स्वस्तिधाम प्रणेत्री परम् विदुषी लेखिका गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माता जी ससंघ
श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र केशवराय पाटन में भक्ति भाव से चल रहा है
🙏आज प्रातः मूलनायक भगवान के मंगल अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्च्यात
🎙️परम् पूज्य गुरु माँ के मंगल प्रवचन हुए।
संध्या में आरती व गुरु भक्ति हुई
दिन में दर्शनार्थ बड़ौत , उत्तर प्रदेश से एक बस।
पूर्व में परम् पूज्य गुरु माँ ने अपना एक वर्षायोग बड़ौत नगर को दिया था। तभी से भक्तों की टोली माता जी के चरणों से जुडी हुई है।
हर वर्ष कम से कम एक बार सब का चातुर्मास स्थल पर जाना होता ही है।
आज हुए मंगल प्रवचन का सार
आत्मा और शरीर का भेद समझना ही सच्चा ज्ञान : स्वस्ति भूषण माता जी
धर्म स्नेही बंधुओं, परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्ति भूषण माता जी ने अपने प्रवचन में आत्मा और शरीर के वास्तविक स्वरूप को सरल उदाहरण के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि दूध में पानी मिला देने पर दूध पतला हो जाता है, लेकिन पानी के गुण कभी दूध के समान नहीं हो जाते। दूध में कैल्शियम, विटामिन आदि अनेक गुण होते हैं, जबकि पानी के गुण अलग होते हैं। अज्ञानी व्यक्ति को दूध और पानी में भिन्नता दिखाई नहीं देती, इसलिए वह पानी को भी दूध ही समझ लेता है, जबकि ज्ञानी व्यक्ति दोनों की वास्तविकता को अलग-अलग पहचानता है।
माता जी ने कहा कि ठीक इसी प्रकार हमारी आत्मा और शरीर साथ-साथ दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में दोनों अलग हैं। शरीर पुद्गल है और आत्मा चेतन है। शरीर में कार्य होता है, लेकिन उसका अनुभव आत्मा करती है। जब तक आत्मा शरीर में रहती है, तब तक शरीर को होने वाले दर्द का अनुभव होता है। मृत्यु के समय आत्मा शरीर से अलग हो जाती है, तब वही शरीर पड़ा रहता है, लेकिन उसे किसी प्रकार का सुख-दुःख महसूस नहीं होता।
उन्होंने कहा कि सुख और दुःख का संबंध हमारी आसक्ति और अटैचमेंट से है। बाहरी वस्तुओं के प्रति जितना अधिक लगाव होगा, उतना ही उनसे सुख और दुःख दोनों प्राप्त होंगे। यदि वस्तुओं के प्रति आसक्ति समाप्त हो जाए तो सुख-दुःख की अनुभूति भी समाप्त होने लगती है। वास्तव में सुख और दुःख आत्मा के अनुभव हैं, शरीर के नहीं।
माता जी ने श्रद्धालुओं को आत्मा और शरीर की भिन्नता को समझने का संदेश देते हुए कहा कि जिस दिन मनुष्य को अपने वास्तविक स्वरूप का ज्ञान हो जाएगा, उसी दिन वह बाहरी पदार्थों के प्रति मोह और आसक्ति से ऊपर उठने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा। आत्मा चेतन और जीवंत है, जबकि शरीर पुद्गल है। इसलिए जीवन का वास्तविक आधार शरीर नहीं, बल्कि चेतन आत्मा है।
नोट:- आदरणीय,
श्री 1008 मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, केशवराय पाटन पर
परम् पूज्य भारत गौरव तीर्थ संवर्धिका के. पाटन पुनरुद्धरिका परम् विदुषी लेखिका गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माता जी के सनिध्य में
🗓️ दिनांक 4 अगस्त से 13 सितम्बर 2026 चलने वाले
श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा पाठ 40 बार की प्रतिदिन होगा
इस पाठ की न्यौछावर राशि 2100 /- मात्र है।
समस्त राशि का सदुपयोग, जिन मंदिर के निर्माण कार्य में होगा।
आप प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से इस पुण्यशाली कार्य में हिस्सेदारी बना सकते हैं।
किसी भी दिनांक पर नाम आरक्षित कराने हेतु निम दूरभाष पर संपर्क करें - 9351996326 , 9829230520
धन्यवाद एवं आभार
🧐 देखें आज के समस्त द्रश्य
#वन्देस्वस्तिभूषणं