Sarveshwar mahadev mandir jgn

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11/03/2021
26/01/2021

सभी प्रकार की इच्छाओं को पूरा करेगा यह शिवलिंग, घर में स्थापित कर ऐसे करें पूजा
इस शिवलिंग की पूजा का लाभ कई धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है।
इसकी पूजा करने वाले व्यक्ति की रक्षा स्वयं भगवान शंकर करते हैं।
नई दिल्ली। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सबसे अच्छा तरीका शिवलिंग की पूजा करना माना गया है। शिवलिंग भगवान शंकर की पूजा का अभिन्न अंग है क्योंकि इसकी पूजा किए बिना आपको शिव पूजा का लाभ मिलना मुश्किल है। घर में पारद शिवलिंग की स्थापना एवं पूजा बहुत ही सिद्धिदायक मानी जाती है। इस शिवलिंग की पूजा करने से सभी इच्छाएं जल्दी ही पूरी होती हैं।

1.प्राचीन ग्रंथों में बताया गया है कि पारद शिवलिंग बहुत ही शुद्ध धातु का शिवलिंग माना जाता है जिसका वर्णन एक नहीं बल्कि कई महत्वपूर्ण ग्रथों में मिल जाता है।

2.शिवपुराण में पारद शिवलिंग सम्पूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति का कारण माना गया है जिसके कारण ही दुनिया का विस्तार हो रहा है।

3.धार्मिक ग्रंथों के अनुसार बताया गया है कि पारद शिवलिंग इतना लाभकारी है जिसके केवल दर्शन मात्र से ही मनुष्य की इच्छाएं पूरी हो जाती हैं।

4.पारद शिवलिंग की पूजा करने वाले व्यक्ति को स्वास्थ्य, धन-यश, समृद्धि मिलती है और उसके जन्मों जन्म के कष्ट समाप्त होते हैं।

5.पारद शिवलिंग को साक्षात भगवान शंकर का ही रूप माना गया है इसे घर में स्थापित करने से एवं नियमित पूजा करने से हर प्रकार के तंत्र-मंत्र के प्रभाव को नष्ट किया जा सकता है।

6.इसकी पूजा के पीछे ऐसी धारणा है कि जो भी व्यक्ति पारद शिवलिंग की पूजा करता है उसकी रक्षा स्वयं भगवान शंकर करते है और उसे लाभान्वित करते हैं।

7.पारद शिवलिंग के श्रद्धा पूर्वक दर्शन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को जल्दी ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है और उसका सम्पूर्ण जीवन सुख-शांति से भर जाता है।

8.व्यक्ति को जीवन में कभी भी किसी चीज़ की कमी के कारण परेशान नहीं रहना पड़ता है सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

9.पारद शिवलिंग के समक्ष दीपक जलाएं गुलाब के फूल अर्पण करें और किसी भी शिव मंत्र का तीन बार जाप करेंगें तो आपको पूजा का लाभ मिलेगा।

10.पारद शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति को लंबी आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है साथ ही उसे शारीरिक रोगों से भी मुक्ति मिलती है।.... Har har mahadev🙏
Jai shiv shakti🙏🙏

10/01/2021
Happy hanuman jayanti
08/04/2020

Happy hanuman jayanti

28/03/2019

तुलसी जी को तोडने के नियम!!
1. तुलसी जी को नाखूनों से कभी नहीं तोडना चाहिए,नाखूनों के तोडने से पाप लगता है।
2.सांयकाल के बाद तुलसी जी को स्पर्श भी नहीं करना चाहिए ।
3. रविवार को तुलसी पत्र नहीं
तोड़ने चाहिए ।
4. जो स्त्री तुलसी जी की पूजा करती है। उनका सौभाग्य अखण्ड रहता है । उनके घर
सत्पुत्र का जन्म होता है ।
5. द्वादशी के दिन तुलसी को नहीं तोडना चाहिए ।
6. सांयकाल के बाद तुलसी जी लीला करने जाती है।
7. तुलसी जी वृक्ष नहीं है! साक्षात् राधा जी का अवतार है ।
8. तुलसी के पत्तो को चबाना नहीं चाहिए।
"तुलसी वृक्ष ना जानिये।
गाय ना जानिये ढोर।।
गुरू मनुज ना जानिये।
ये तीनों नन्दकिशोर।।
अर्थात-
तुलसी को कभी पेड़ ना समझें
गाय को पशु समझने की गलती ना करें और गुरू को कोई साधारण मनुष्य समझने की भूल ना करें, क्योंकि ये तीनों ही साक्षात भगवान रूप हैं
!! जय श्रीराधे!!

पूजा में दीपक क्यों जलाया जाता है ?1) भारतीय संस्कृति में हर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में दीपक जलाने की ...
26/05/2018

पूजा में दीपक क्यों जलाया जाता है ?
1) भारतीय संस्कृति में हर धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में दीपक जलाने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि अग्नि देव को साक्षी मानकर उसकी मौजूदगी में किए काम जरूर सफल होते हैं। हमारे शरीर की रचना में सहायक पांच तत्वों में से अग्नि भी एक है। दूसरा अग्नि पृथ्वी पर सूर्य का बदला हुआ रूप है। इसलिए किसी भी देवी- देवता के पूजन के समय ऊर्जा को केंद्रीभूत करने के लिए दीपक प्रज्वलित किया जाता है।
2) हम ईश्वर को प्रकाश के रूप में मानते हैं इसलिए दीपक जलाकर उसकी ज्योति के रूप में ईश्वर को स्थापित करते हैं | दीपक से एकाग्रता और उर्जा दोनों प्राप्त होती है | अलग-अलग मुखी दीपक जलाकर अलग मनोकामनाएं पूरी की जा सकती हैं | आमतौर पर एकमुखी दीपक जलाना सबसे उत्तम होता है |
3) दीपक का जो असाधाण महत्व बताया गया है, उसके पीछे कारण यह है कि प्रकाश ज्ञान का प्रतीक है। परमात्मा प्रकाश और ज्ञान रूप में ही सब जगह व्याप्त है। ज्ञान प्राप्त करने से अज्ञान रूपी मनोविकार दूर होते हैं और सासारिक शूल मिटते हैं। इसलिए प्रकाश की पूजा को ही परमात्मा की पूजा कहा गया है। मंदिर में आरती करते समय दीपक जलाने के पीछे उद्देश्य यही होता है कि प्रभु हमारा मन प्रकाश की ओर ले चलें। मौत से अमरता की ओर हमें ले चलें।

आज के श्रृंगार दर्शन (11.04.2018)
11/04/2018

आज के श्रृंगार दर्शन (11.04.2018)

ज्योतिष में बुध रत्न पन्ने का महत्व -ज्योतिष-शास्त्र में बताये गये विभिन्न उपायों में रत्नो का भी बड़ा विशेष महत्व है रत्...
04/04/2018

ज्योतिष में बुध रत्न पन्ने का महत्व -
ज्योतिष-शास्त्र में बताये गये विभिन्न उपायों में रत्नो का भी बड़ा विशेष महत्व है रत्न ग्रहों के द्वारा ब्रह्माण्ड में फैली उनकी विशेष किरणों की ऊर्जा को मनुष्य को प्राप्त कराकर एक विशेष फ़िल्टर का कार्य करते हैं पर सर्वप्रथम तो यह समझना चाहिए के रत्न धारण करने से होता क्या है इसके विषय में यह स्मरण रखें के रत्न पहनने से किसी ग्रह से मिल रही पीड़ा समाप्त नहीं होती या किसी ग्रह की नकारात्मकता समाप्त नहीं होती बल्कि किसी भी ग्रह का रत्न धारण करने से उस ग्रह की शक्ति बढ़ जाती है अर्थात जिस ग्रह से सम्बंधित रत्न पहना है आपकी कुंडली का वह ग्रह बलवान बन जाता है उससे मिलने वाले तत्वों में वृद्धि हो जाती है परन्तु हमारी कुंडली में सभी ग्रह हमें शुभ फल देने वाले नहीं होते कुछ ग्रह हमारी कुंडली के अशुभ कारक ग्रह होते हैं और उनकी भूमिका हमें समस्या, संघर्ष और कष्ट देने की ही होती है अब यदि ऐसे ग्रह का रत्न धारण कर लिया जाये तो वह अशुभ कारक ग्रह भी बलवान हो जायेगा जिससे वह और अधिक समस्याएं देगा अतः यह तो निश्र्चित है के किसी भी व्यक्ति के लिए हर एक रत्न शुभ नहीं होता। रत्न धारण में हमारी जन्मकुंडली की लग्न का ही महत्व होता है कुंडली के लग्नेश और लग्नेश के मित्र ग्रह जो त्रिकोण(1,5,9) के स्वामी भी हों उन्ही ग्रहों का रत्न धारण किया जाता है। यह बात भी ध्यान रखें के रत्न धारण का कुंडली में चल रही दशाओं से भी कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है ऐसा बिलकुल नहीं है के जिस ग्रह की महादशा या अंतर्दशा चल रही है उसी ग्रह का रत्न धारण कर लिया जाये तो बिना विश्लेषण के यह हानिकारक हो सकता है क्योंकि केवल हमारी कुंडली के शुभ फल कारक ग्रहों के रत्न ही धारण किये जाते है जो हमारे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं
पन्ना –
ज्योतिष की रत्न शाखा में बुध के लिए "पन्ने" को निश्चित किया गया है जिसे हम एमरल्ड नाम से भी जानते हैं पन्ना एक प्रकार से बुध ग्रह का ही प्रतिरूप होता है इसमें बुध के गुण विद्यमान होते हैं, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि में बुध को बली या मजबूत करने के लिए धारण किया जाता है ज्योतिष में बुध को बुद्धि, कैचिंग पॉवर, तर्कशक्ति, निर्णय क्षमता, याददास्त, सोचने समझने की क्षमता, वाणी, बोलने की क्षमता, उच्चारण, व्यव्हार कुसलता, सूचना, संचार, यातायात, व्यापार, वाणिज्य, गणनात्मक विषय, लेखन, कम्युनिकेशन और गहन अध्ययन का कारक माना गया है और ये सभी घटक हमारे जीवन में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं विशेषतः बुद्धि क्षमता की तो आज के समय में सर्वाधिक और हर जगह आवश्यकता होती है इन सब के अलावा बुध का हमारे स्वास्थ और शरीर पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है बुध हमारे शरीर के बहुत विशेष घटकों को नियंत्रित करता है ज्योतिष की चिकित्सीय शाखा में बुध को मष्तिष्क, नर्वस-सिस्टम, गला, नसें, त्वचा, बोलने की क्षमता, याददाश्त आदि का प्रतिनिधित्व बुध ही करता है इसलिए पन्ना रत्न में भी ये सभी गुण विद्यमान होते हैं
“पन्ना हरे रंग की आभा रखने वाला रत्न होता है इसमें भी नवीन दूब घांस की तरह हलके हरे रंग की आभा रखने वाले हलके हरे रंग और पारदर्शी पन्ने को श्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से पन्ना धारण करने से व्यक्ति की कुंडली में स्थित बुध को बल प्राप्त होता है। ........ पन्ना धारण करने से व्यक्ति बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है, तर्क शक्ति प्राप्त होती है गणनात्मक कार्यों में लाभ मिलता है, वाणी क्षमता और वाक शक्ति प्रबल होती है, शिक्षा और अनुसन्धान कार्यों में सहायता मिलती है, व्यव्हार कुशलता आती है, व्यापारिक गुणों का विकास होता है..... इसके अलावा त्वचा सम्बन्धी रोग, स्नायु तन्त्र की समस्या, मस्तिष्क से जुडी समस्याएं, अस्पष्ट उच्चारण की समस्या और हेजिटेशन की समस्या में भी पन्ना धारण करना लाभदायक होता है। ..... जो लोग उनकी कुंडली में स्थित कमजोर बुध के कारण अपनी प्रतिभा या अपने ज्ञान का सही से प्रदर्शन नहीं कर पाते उनके व्यक्तित्व में भी पन्ना धारण करने से सकारात्मक परिवर्तन आते हैं इसके अंतिरिक्ष बुद्धिपरक, गणनात्मक और रिसर्च कार्य करने वाले लोगो के लिए पन्ना धारण करना सहायक और सकारात्मक परिवर्तन करने वाला होता है। ......... पर जैसा की हमने पहले ही ऊपर समझाया है के पन्ना धारण केवल तभी करना चाहिए जब यह अपनी कुंडली के हिसाब से शुभ हो यदि बुध कुंडली में नकारात्मक फल देने वाला ग्रह है उन्हें पन्ना धारण नहीं करना चाहिए और पन्ना धारण से पहले किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।”
समान्यतः वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुम्भ लग्न के जातकों के लिए पन्ना धारण शुभ है।
पन्ना धारण विधि -
पन्ने को चाँदी की अंगूठी में बनवाकर सीधे हाथ की कनिष्ठा उंगली में धारण कर सकते हैं इसके अतिरिक्त हरे धागे या चांदी की चेन के साथ लॉकेट के रूप में गले में भी धारण कर सकते हैं पन्ने को बुधवार के दिन प्रातः काल सर्व प्रथम गाय के कच्चे दूध व गंगाजल से अभिषेक करके धूप दीप जलाकर बुध के मन्त्र का तीन माला जाप करना चाहिए फिर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके पन्ना धारण कर लेना चाहिए। ......
पन्ना धारण मन्त्र - ॐ बुम बुधाय नमः

श्री हनुमान बाबा के श्री चरणों में कोटि कोटि प्रणाम.... जय सिया-राममाँ के गर्भ से बाहर आते ही हमारा सबसे पहला सम्बन्ध श्...
03/04/2018

श्री हनुमान बाबा के श्री चरणों में कोटि कोटि प्रणाम.... जय सिया-राम
माँ के गर्भ से बाहर आते ही हमारा सबसे पहला सम्बन्ध श्री हनुमान बाबा के साथ जुड़ता है
आप परमात्मा के किसी भी स्वरुप में आस्था रखने वाले हों कोई भी आपका इष्ट हो पर ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं जो हनुमान से अछूता रहे हनुमान जी के साथ तो सभी का मन जुड़ा हुआ है और वैसे भी दसवे रूद्र के रूप में अवतरित हनुमान बाबा तो जगत पिता हैं और भला कोई बालक अपने पिता से अछूता कैसे रह सकता है इसलिए हनुमान बाबा तो सभी के हैं और सभी के लिए हैं और क्योंकि हनुमान जी प्राण अर्थात वायु तत्व हैं इसलिए वायु के बिना तो जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती... ये एक बहुत ही गहरी बात है के जिस समय एक बालक का जन्म होता है तो माँ के शरीर से अगल होते ही जिस समय बालक पहली साँस लेता है तभी सबसे पहले श्री हनुमान जी वायु के रूप में उस बालक के भीतर प्रवेश कर जाते हैं और इसी वायु तत्व के रूप में जीवन के अंतिम क्षण तक व्यक्ति के साथ रहते हैं... इसलिए हम सभी का इस जगत में सबसे पहला सम्बन्ध वायु तत्व के रूप में हनुमान बाबा के साथ ही जुड़ता है... और लौकिक दृष्टि से भी देखें तो भला कौन ऐसा देव है जिसका नाम सुनते ही आपके मन के सरे भय दूर हो जाते हैं क्या कमाल की शक्ति है बाबा के नाम में के एक छोटा सा बच्चा भी जय हनुमान ज्ञान गुण सागर कहते हुए अंधियारी गली से निडर होकर निकल जाता है क्योंकि उसे पता है के अब तो मैंने बाबा को याद कर लिया उन्हें यहाँ बुला लिया अब भला मुझे क्या डर और वास्तव में सही बात है श्री हनुमान जी के नाम स्मरण मात्र से किसी भी व्यक्ति के मन से सभी डर भय दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को अभय प्राप्त होता है मूल रूप से तो वायु ही हमारे जीवन का मुख्य आधार है इसलिए हर एक व्यक्ति का जीवन चल तो हनुमान बाबा के ना के सहारे ही रहा है और हम आप सभी के लिए बाबा से प्रार्थना करते हैं के आप सभी पर श्री हनुमान बाबा अपनी कृपा और प्रेम सदैव बनाये रखें....... श्री हनुमान बाबा को हमारी जय सिया-राम 👏👏👏

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