Deewane DUGRI WALE KE

Deewane DUGRI WALE KE JAI GURU JI ❤
Guru's is like candles who burn themselves to give light to others 🫶

*Wishing Beloved Sangat a Very Happy Raksha Bandhan ✨🌹❤️* *Guruji Maharaj bless everyone with his divine blessings!✨🌻*
28/08/2026

*Wishing Beloved Sangat a Very Happy Raksha Bandhan ✨🌹❤️*

*Guruji Maharaj bless everyone with his divine blessings!✨🌻*

🪷🪷🪷सत्संग🪷🪷🪷     गुरु जी ने मुझे दी एक नई                ज़िंदगी1).गुरु जी ने कहा कि जब भगवान शिव खुद तुम्हारे सामने मौज...
08/08/2026

🪷🪷🪷सत्संग🪷🪷🪷
गुरु जी ने मुझे दी एक नई
ज़िंदगी
1).गुरु जी ने कहा कि जब भगवान शिव खुद तुम्हारे सामने मौजूद हैं, तो कैलाश मानसरोवर जाने का क्या मकसद है। उस साल बीस-बीस तीर्थयात्रियों के दो जत्थे भयंकर लैंडस्लाइड में मारे गए। गुरु जी ने बाद में अंकल से कहा कि मैंने आपकी जान बचाई है।
2.)हालांकि बड़ी मुश्किल से उनका नाम शामिल हो पाया, अंकल ने गुरु जी की आज्ञा मानी।
3) असल में गुरु जी ने उन्हें मेडिकल टेस्ट में रिजेक्ट करवा दिया था। अनंतम शुक्राना गुरु जी। गुरु जी कहते हैं कि तुम लोग दीवार तक देख सकते हो, दीवार के उस पार तुम्हें पता नहीं होता।
4).एक बार गुरु जी की शरण में आने के बाद, गुरु जी हमारे कई जन्मों का अतीत/भविष्य देखते भी हैं और बचाते भी हैं
5).एक और आंटी ने बताया कि एक बार सरकारी मंज़ूरी मिल गई, तो मना करना लगभग नामुमकिन था। उन्होंने बताया कि उनके जूनियर कलीग के भाई और भाभी दोनों मारे गए। अंकल एक भयानक हादसे से बच गए। उन्होंने मुझे एक बार फिर बचाया
6.)दिल की गंभीर समस्या के बाद गुरु जी की सलाह पर अंकल की एंजियोग्राफी AIIMS में की गई।
7.)एंजियोग्राफी के बाद अंकल को ICU में ले जाया गया क्योंकि उन्हें साइलेंट हार्ट अटैक आया था। दो आर्टरी पूरी तरह से ब्लॉक थीं और तीसरी 90%।
8.)अंकल इस बड़े हार्ट अटैक से बच गए क्योंकि वह ICU में थे।
9.)परिवार को बताया गया कि ब्लॉकेज बहुत ज़्यादा थे और खून पतला करने वाली दवाएं ली जा रही थीं, इसलिए बायपास सर्जरी रिस्की थी। डॉक्टरों ने कहा कि इसके सफल होने की बहुत कम उम्मीद है।
10 )गुरु जी ने परिवार को भरोसा दिलाया कि डॉक्टरों को अंदर करने दें। जो भी ज़रूरी होगा, मैं करूंगा।
11.)गुरु जी कृपा मेहर की दुआ से अंकल बच गए और अब नॉर्मल हो गए हैं।
12).आंटी ने बताया कि बायपास सर्जरी के बाद इन्फेक्शन हो गया था, फिर से पूरा सिस्टम खोला गया, इन्फेक्शन निकाला गया। यह दूसरी बायपास सर्जरी थी। गुरु जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया और ठीक कर दिया।
13).अब जब अंकल हर दो साल में चेकअप के लिए जाते हैं, तो डॉक्टर कहते हैं कि आप अपने गुरु की कृपा पर जी रहे हैं। अनंतम शुक्राना गुरु जी।
14).आंटी ने बताया कि गुरु जी ने अंकल को तीन बार बचाया, जो उन्होंने खुद भी बताया था। हालांकि, चोला छोड़ने के बाद गुरु जी ने अंकल को कई बार बचाया है।
तीसरी बार जान बच गई।
15.) 31 दिसंबर 2006 को, सेलिब्रेशन के बाद गुरु जी ने मेरे परिवार को जाने दिया लेकिन मुझे वहीं रुकने को कहा। एक घंटे बाद गुरु जी ने कहा कि उन्होंने नई ज़िंदगी दी है, अब घर जा सकते हैं। जब अंकल घर पहुंचे तो उन्हें परिवार के कार एक्सीडेंट के बारे में बताया गया। एक स्पीड ब्रेकर पर, आगे वाली कार ने ब्रेक लगाए, हमारी कार उससे टकरा गई। कार का बंपर टूट गया, ग्रिल बुरी तरह डैमेज हो गई। मेरी पत्नी का सिर विंडस्क्रीन से टकराया जो टूट गई। लेकिन किसी को कोई चोट नहीं आई। अगले दिन गुरु जी ने बताया कि पूरे परिवार को नई ज़िंदगी मिली है। आज हम ज़िंदा हैं, इसका क्रेडिट गुरु जी को जाता है।
16 )गुरु जी ने कहा कि मैं बहुत सारे कल्याण करता हूँ, तुम लोगों को बाद में पता ही नहीं चलता।
17)हम आम तौर पर किसी भी संगत को अपना सत्संग सुनाते हुए सुनते हैं कि गुरु जी हमेशा मेरे साथ हैं।
18 )एक बार गुरु जी ने एक संगत को छोटा मंदिर में अंदर जाते हुए दिखाया, गुरु जी हर संगत के साथ बैठे हैं। जय गुरु जी।
19.)गुरु जी हमारे मन, आत्मा और खुद को बुराइयों से बचाते हैं। राम और रावण दोनों हमारे अंदर हैं।
20).गुरु जी हमारा भविष्य पहले से देख लेते हैं और हमारे भविष्य/हित की रक्षा के लिए जो भी ज़रूरी होता है, वह ज़्यादातर हमारे पूछे/बताए/जानें बिना ही करते हैं।
21)गुरु जी अपनी सभी संगत के लिए हर समय बहुत कुछ करते हैं।
22)गुरु जी ने हमें सभी अगर-मगर, वहम, रस्मों से बाहर निकाला है।
23)हम सभी परेशानियाँ गुरु जी को सौंपकर अपना मन हल्का कर लेते हैं।
24) गुरु जी ने हमें मानसिक शांति के साथ-साथ धैर्य भी दिया है। बस गुरु जी की शरण में आने से पहले की ज़िंदगी को याद करें।
25.)किसी भी पूजा की जगह पर माथा टेकते समय हम सिर्फ़ जय गुरु जी ही बोलते हैं।
26).गुरु जी हमें अलग-अलग रूपों में अपनी मौजूदगी का एहसास कराते हैं, गुरु जी की खास खुशबू, चपाती में ओम का दर्शन, मोर, तितली, गुरु जी के स्टिकर वाली कोई भी कार....
27.)गुरु जी कृपा मेहर आशीर्वाद, हमने शिकायत करना बंद कर दिया है।
28).हमारे 90% कर्म गुरु जी मिटा देते हैं और कहते हैं कि बाकी दस% के लिए तुम्हें ताकत लो। वरना यह भी तुम्हारे लिए मुमकिन नहीं है।
29).गुरु जी कहते हैं कि लिपस्टिक लगाते आंटियों को मुझे याद रखना चाहिए। सिमरन, शुक्राना।
30.)गुरु जी से प्यार करो। गुरु जी कहते हैं कि लोग अपनी लिस्ट लेकर आते हैं।
31.) शब्द "चरण कमल तेरे दोये दोये पीवा" आंटी कहती हैं कि गुरु जी के वचनों को मानना ​​चाहिए। जो कोई भी इसे मानता है वह जीवन के सागर से पार हो जाता है।
(32) हमारे गुरु जी बहुत सिंपल और प्रैक्टिकल हैं। उन्होंने हमें कोई रिचुअल फॉलो करने के लिए नहीं कहा।
(33) गुरु जी ने हमारी वहम दूर कर दीं जैसे बिल्ली रास्ता काट गई हो, आज नहाया नहीं है वगैरह। गुरु जी की सलाह है कि सोच सकारात्मक (थींक पॉजिटिव )और आत्मा साफ रखें।
(34 )गुरु जी ने संगत से कहा कि मैं अपने स्वरूप में हूँ। गुरु जी सुनें और जवाब दें/हमें गाइड करें। कभी-कभी शब्द, दूसरी संगत सत्संग में सॉल्यूशन मिल जाता है।
गुरु जी असल में हमारी मदद करते हैं, सुरक्षा करते हैं, देखभाल करते हैं और हमेशा हमारे साथ रहते हैं। अनंतम शुक्राना गुरु जी। हम सभी गुरु जी की कृपा, मेहर का आशीर्वाद चाहते हैं।
कृपया सेवक को किसी भी गलती/चूक के लिए माफ करें।
✨जय गुरु जी💫

Today DUGRI MANDIR Langer PARSHAD Shukran Shukran Guruji BLESS EVERYONE 🙏🙏🙏🙏
02/08/2026

Today DUGRI MANDIR Langer PARSHAD Shukran Shukran Guruji BLESS EVERYONE 🙏🙏🙏🙏

*दिव्य आभा* में संकलित गुरूजी के भक्तों के सत्संग  *कर्म बंधनों से मुक्ति* ज्योति वर्मा के सास और ससुर दोनों को रक्त कें...
01/08/2026

*दिव्य आभा* में संकलित गुरूजी के भक्तों के सत्संग

*कर्म बंधनों से मुक्ति*

ज्योति वर्मा के सास और ससुर दोनों को रक्त केंसर होने का निदान हुआ था। इस समाचार के पश्चात् ज्योति वर्मा और उसके पति देहरादून में अपना कारखाना और पेट्रोल पम्प बेच कर दिल्ली आ गये थे।
इस बीच में ज्योति वर्मा के ससुर के स्वास्थ्य में भी परिवर्तन आया। एक दिन कीमोथेरेपी करते हुए उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। उनकी जेब में सदा गुरुजी का चित्र रहता था; उन्हें न केवल नव जीवन मिला वह रोग मुक्त भी हो गये। उसके बाद उन्होंने कभी कैंसर का उपचार नहीं करवाया।

अपने अनूठे तरीके से गुरुजी ने उनके पति की भी जीवन रक्षा करी। एक बार उन्होंने संगत से आज्ञा लेते समय उनके पति को बैठने को कहा। पांच मिनट के उपरान्त उन्होंने जाने की आज्ञा भी दे दी। किसी को समझ नहीं आया कि गुरुजी ने ऐसा क्यों किया। पर वर्मा परिवार को शीघ्र ही इसका कारण पता चल गया। मार्ग में उन्होंने कुछ
ही देर पहले हुई एक भयंकर दुर्घटना देखी। यदि गुरुजी ने उनका निकलना नहीं रोका होता तो उनका भी संभवतः यही परिणाम होना था।

गुरुजी की कृपा ज्योति के सम्बन्धियों पर भी हुई है। शरीर के मेरुदंड में एक चक्र के हिलने से उनके पति शय्या पर थे। डेढ़ माह तक गुरुजी ने उनके बारे में पूछा भी नहीं; फिर, अचानक एक दिन उन्होंने उन्हें हल्दी वाला दूध पिलाने को कहा। उसे पीकर वह स्वस्थ हो गये।

ज्योति के एक घनिष्ठ सम्बन्धी, जो लखनऊ स्थित हिन्दुस्तान ऐरोनौटिक लिमिटेड में एक वरिष्ठ अधिकारी थे, की विचित्र समस्या थी। उनकी अपने वरिष्ठ अधिकारी से अनबन थी और उस अधिकारी ने उनकी पदोन्नति रोकी हुई थी। उन्होंने मन ही मन पद त्यागने का निश्चय कर लिया था। परन्तु गुरुजी की दया से उनकी पदोन्नति हुई और हैदराबाद स्थानान्तरण हो गया। चेन्नई में अपने साक्षात्कार के उपरान्त उन्होंने स्वयं कहा था कि उनकी पदोन्नति असंभव है। आज वह भी प्रसन्न हैं और कुछ बड़े विभागों का कार्य संभाले हुए हैं।

देहरादून की तुलना में दिल्ली में रहना अधिक महंगा था। वर्मा परिवार में उनके दो बच्चों के अलावा उनके माता-पिता भी थे। उन्हें लगता था कि यहाँ पर वह कभी भी सुख और समृद्ध जीवन व्यतीत नहीं कर पायेंगे। उन्हें प्रतीत होता था कि कर्मों के बंधनों में जकड़े हुए वह सब किसी अंतहीन, अँधेरी गुफा में फंसे हुए, बिना किसी दिशा के चक्कर काट रहे हैं। कर्मों के चक्र उन्हें घुमा रहे थे। नव जीवन पुनः आरम्भ करने के लिए उन्होंने किसी अन्य छोटे शहर में रहने का निश्चय कर लिया था। यहाँ तक कि देहरादून से आने के बाद उन्होंने अपना सामान भी नहीं खोला था।

फिर एक मित्र के कहने पर, जिसकी बेटी के विवाह में वह गये थे, वह गुरुजी के पास पहुंचे। अगले दिन वह एम्पाएर एस्टेट आये और उन्होंने घंटों बैठ कर गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

उनकी आर्थिक चिंताएँ इतनी अधिक थीं कि गुरुजी के यहाँ आते हुए ज्योति ने अपने पति को कहा कि प्रतिदिन ५०० रूपये का पेट्रोल व्यय कर गुरुजी के पास आने का तात्पर्य समझ नहीं आ रहा था। वर्मा परिवार गाज़ियाबाद से एम्पाएर एस्टेट आते थे जिसकी दूरी कम नहीं है। उन दिनों सातों दिन संगत होती थी और वह वहाँ पर जैसे खिंचे चले आते थे। उन्हें अचानक आश्चर्य हुआ जब सब व्यथाएं धीरे-धीरे दूर होने लगीं गुरुजी के निर्देशन में कर्मों की कसी हुई रस्सियाँ ढीली हो रहीं थीं।

शीघ्र ही उन्होंने बेक्स्टर हेल्थकेयर नामक कंपनी का मानव रक्त से निर्मित, शिरा द्वारा दिया जाने वाला एक विशेष तरल पदार्थ आयात कर बेचना आरम्भ कर दिया। उनकी कंपनी जो कभी छह से दस हज़ार से अधिक शीशियाँ प्रतिवर्ष नहीं बेच पाती थी आज उनकी मांग पूरी नहीं कर पाती है। वर्मा परिवार की आर्थिक चिंताएं दूर हो गयी थीं। उनका रुका हुआ धन भी वापस आ गया था। अपनी कठिनाईयाँ व्यक्त करने से पूर्व ही वर्मा परिवार को गुरुकृपा का आभास हो गया था। गुरुजी के पास जाते हुए वह दोनों यही वाद विवाद करते रहते थे कि गुरुजी को अपने कष्टों के बारे में बताया जाये या नहीं। परन्तु गुरुजी ने उनके कहे बिना ही उनकी यह पहेली हल कर दी थी।

GURUJI KA ASHRAMBeloved Sangat is hereby informed thatDugri Mandirwill be open for darshans on2nd August 2026 i.e Sunday...
31/07/2026

GURUJI KA ASHRAM

Beloved Sangat is hereby informed that
Dugri Mandir
will be open for darshans on

2nd August 2026 i.e Sunday

Timings for darshans:
10AM - 4PM

Teri Sharan Puran Dayala Mere Sahib ♥️🥺🙏🏻
31/07/2026

Teri Sharan Puran Dayala Mere Sahib ♥️🥺🙏🏻

*दिव्य आभा* में संकलित गुरूजी के भक्तों के सत्संग *भक्तों की सुनामी से रक्षा* मैं एक अन्य अविस्मरणीय सन्दर्भ की ओर ध्यान...
28/07/2026

*दिव्य आभा* में संकलित गुरूजी के भक्तों के सत्संग

*भक्तों की सुनामी से रक्षा*

मैं एक अन्य अविस्मरणीय सन्दर्भ की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। 2004 के शीतकाल में गुरुजी ने जालंधर जाने से पूर्व सेवानिवृत सैनिकों को आशीर्वाद देने की आकांक्षा व्यक्त करी। मैंने गुरुजी को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बहुत अधिक सेवानिवृत सैनिक नहीं होंगे तो क्या उस अवसर पर सेवारत सैनिकों, जो राष्ट्र के अमूल्य मानव संसाधन हैं, को भी बुला लिया जाये। सदा की भांति, उदार हृदय गुरुजी ने हामी भर कर कहा कि तिथि और स्थान के बारे में वह बाद में बताएँगे। कुछ दिनों के पश्चात् जब मैंने गुरुजी से पुनः इसका उल्लेख किया तो उन्होंने मुझे, श्री प्रेम सिंह, सिंगापुर में भारत के भूतपूर्व राजदूत, के साथ छतरपुर मंदिर के निकट एक स्थान का निरीक्षण करने को कहा। हम गुरुजी के एक अन्य अनुयायी, श्री क्लेर, के विस्तृत फार्म हाउस पर रात्रि में 11 बजे गये। वह अति उपयुक्त स्थान था प्रेम सिंह और मैंने वापस आकर गुरुजी को समारोह के लिए पूर्ण योग्य स्थान बताया।

गुरुजी ने मुझे स्पष्ट कर दिया था कि मैं अपना ध्यान केवल सेवारत और सेवानिवृत सैनिकों पर केन्द्रित रखूँ। समारोह रविवार, 26 दिसंबर 2004, को होना था। कई भक्तों ने बाहर थाईलैंड, मलयेशिया,बैंगकॉक, कुआला लम्पुर, अंडमान और निकोबार, गोवा आदि रमणीय समुद्र तटों पर छुट्टी के लिए जाने की योजना बनायी हुई थी। फलस्वरूप कई भक्तों ने गुरुजी से समारोह में न आने की आज्ञा मांगी परन्तु गुरुजी ने सबको बिना कोई बहाना किये आने का निर्देश दिया। चूँकि गुरुजी के कथन सबके लिए निर्विवाद आज्ञा हैं, भक्तों ने अपनी योजनाएं रद्द या स्थगित कर दीं। इस प्रकार उस समारोह में सैनिकों के साथ अन्य अनेक असैनिक अनुयायी भी आये।

सर्व विदित है कि उसी दिन एशिया महाद्वीप के दक्षिण तटों पर अधिकतर यह वह स्थान थे जहाँ सुनामी की विनाश लीला हुई थी भक्तों ने बड़ा दिन और नव वर्ष की छुट्टियाँ मनाने की योजनाएं बनायी थी। इन प्रकार गुरुजी ने अनेक भक्तों के जीवनों की रक्षा की और उनको नव जीवन दान दिया।

गुरुजी अपने भक्तों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने और आशीष देने के लिए अनोखे मार्ग अपनाते हैं। गुरुजी अपने भक्तों का वह अभेद्य कवच हैं जो उनकी बड़ी से बड़ी विपदाओं से रक्षा करता है। उनके पास रक्षा प्रदान करने वाले की शक्ति और संवेदना है; वह परम आनन्द के दाता हैं जो उस दयालु ईश्वर के अन्यथा और कोई नहीं हो सकता।

'दिव्य आभा" में संकलित गुरूजी के भक्तों के सत्संग  *दम्पति की मनोकामना पूर्ति* गौरव मारवाहा दिल्ली के सदर बाजार में व्यव...
24/07/2026

'दिव्य आभा" में संकलित गुरूजी के भक्तों के सत्संग

*दम्पति की मनोकामना पूर्ति*

गौरव मारवाहा दिल्ली के सदर बाजार में व्यवसाय करते थे परन्तु उसमें कठिनाईयाँ आ रही थीं। उनके एक घनिष्ठ सम्बन्धी ने उनको गुरुजी के दर्शन करने का सुझाव दिया। वह अपनी पत्नी के साथ मोटर साईकल पर गुरुजी के पास आये। उनकी पत्नी, मोटर साईकल के पीछे बैठे हुए, गुरुजी से प्रार्थना करती थी कि उनको और आरामदायक वाहन मिल जाये।

शीघ्र ही उनका व्यवसाय चल पड़ा और एक मास में ही उस दम्पति ने कार ले ली। उन्हें लगा कि उनका भाग्य पलट गया। एक पुराने अनुयायी ने इसमें गुरुजी का हस्तक्षेप होने की बात करी तो उन्होंने उस पर विश्वास नहीं किया। गौरव की पत्नी ने सोचा कि वह तभी मानेगी जब गुरुजी उसको पहचान जाएंगे। जब वह अगली बार संगत में आये तो गुरुजी ने ऐसे ही वार्तालाप करते हुए कहा कि देखो जनकपुरी से कितने मुसलमान आ रहे हैं। फिर उन्होंने अपना वक्तव्य बदला और बोले कि वह यमुना पार के मुसलमानों की बात कर रहे हैं। गौरव की पत्नी जनकपुरी में रहती थी और गुरुजी के इस कथन के कुछ सप्ताह पश्चात् उन्होंने यमुना पार क्षेत्र में घर ले लिया। वह गर्भवती भी हो गयी।
दिन गुजरते गये और महिला गर्भ परीक्षण के लिए गयी। विशेषज्ञों ने गर्भ सम्बंधित समस्याओं से अवगत कराया और गर्भपात कराने का परामर्श दिया। भक्तों ने दम्पति को बताया कि वह गुरुजी पर आस्था बनाये रखें तो कोई अप्रिय घटना नहीं होगी। वह गुरुजी के पास आते रहे और अंततः उन्हें एक कन्या की प्राप्ति हुई।

2005 में गुरुजी ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर गौरव की पत्नी को बुलाया और कहा कि वह बहुत मोटी हो गयी है। वह मुस्कुरा कर चली गयी। गुरुजी के इस कथन के एक मास में ही बिना कोई व्यायाम किये या भोजन पर प्रतिबन्ध करे हुए उसका वजन 15 किलो कम हो गया। दम्पति की पहली धारणा कि उन्होंने कार अकस्मात् ली थी गलत था। गुरुजी स्वयं कहते हैं कि संयोग से कुछ नहीं होता, चुनाव से ही कामना की पूर्ति संभव है; और ईश्वर होने के कारण गुरुजी चयन करते हैं।

गौरव मारवाहा, दिल्ली द्वारा कथित

'दिव्या आभा 'में संकलित गुरूजी के भक्तों के सत्संग *सर्वोपरि गुरुजी* निः संदेह मैं कुछ चमत्कारिक और ईश्वरीय संस्मरणों का...
22/07/2026

'दिव्या आभा 'में संकलित गुरूजी के भक्तों के सत्संग

*सर्वोपरि गुरुजी*

निः संदेह मैं कुछ चमत्कारिक और ईश्वरीय संस्मरणों का वर्णन करना चाहती हूँ। मैं उन कुछ भाग्यवानों में हूँ, जो प्रभु की उपस्थिति और कृपा पाकर धनी और कृतज्ञ हुए हैं। इस प्रभु को हम गुरुजी के नाम से जानते हैं। गुरुजी उनके बारे में मैं क्या कहूं? वह तो सर्वोपरि हैं, वह सर्वोच्च हैं। उन्हें प्रतिदिन स्मरण करना चाहिए।

जन्म से मुझे गुरुजी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। सुख दुःख में वह सदा मुझे और मेरे परिवार को आधार देते रहे हैं। उन्होंने हमें बताये बिना ही, हमें हमारे कष्ट और कुकर्म, ज्ञात या अज्ञात, दोनों से मुक्त किया है। आज आपके सम्मुख उस दयावान के साथ अपनी आपबीती बाँट कर मुझे अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है।

*पान के पत्तों से पुटक की चिकित्सा*

मुझे अब तक वह दिन याद है जब मैंने अपने जीवन की सबसे अधिक पीड़ा का अनुभव किया था। मैं 15 वर्ष की थी और हम जालंधर में रहते थे। स्नान करते हुए अचानक मुझे अपने पेट के निचले हिस्से में अत्याधिक दर्द हुआ। वेदना इतनी अधिक थी कि मैं खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। मैं वहीं स्नानकक्ष में लेट गयी थी और अपनी माँ को पुकार रही थी। स्वाभाविक रूप से सबको तुरन्त गुरुजी की याद आयी जो उन दिनों पंचकूला में थे और वहीं पर संगत करते थे। हम उसी दिन पंचकूला के लिए चल पड़े। चंडीगढ़ पहुंच कर गुरुजी के पास जाने से पूर्व हमने पी जी आई और कुछ अन्य निजी केन्द्रों में परीक्षण करवाना उचित समझा।

परिणाम आने पर हम चकित रह गये। मेरे गर्भाशय में एक पुटक फूट गया था; उससे विषैला पदार्थ निकल कर शरीर में फैल रहा था। यदि उसे निकाला नहीं जाता तो वह प्राणघातक सिद्ध होता। चिकित्सकों ने तुरन्त शल्य क्रिया कराने को कहा तो हमने मना कर दिया। उसी संध्या को हम गुरुजी के पास पहुंचे और उनको स्थिति से अवगत किया। उन्होंने अपनी सर्व प्रसिद्ध मुस्कान देते हुए चिंता मुक्त होने को कहा। उन दिनों वह पान के पत्तों को अभिमंत्रित कर रोग के स्थान पर रख देते थे। यह गुरुजी की शल्य क्रिया थी। मुझे लिटा कर उन्होंने वैसा ही किया और 10-15 मिनट विश्राम करने को कहा। उसके पश्चात् उन्होंने मुझे अगले दिन पुनः परीक्षण करवाने को कहा।

उनमें विश्वास और आस्था बनाये रखते हुए मैंने वैसा ही किया। यद्यपि मुझे परिणामों का ज्ञान था, चिकित्सकों के अवाक चेहरों को देखकर मुझे अपने ईश्वर, गुरुजी पर पूर्ण विश्वास हो गया। परीक्षण में 20 घंटे पूर्व दिखे हुए पुटक या विषैले पदार्थ का कोई चिह्न नहीं था।

प्रसन्नता के साथ होने वाले अचम्भे को हम रोक नहीं पा रहे थे। चिकित्सक भी गुरुजी के बारे में जानने के लिए उतने ही उत्सुक थे जितना हम उनको बताने के लिए। उसके उपरान्त उन चिकित्सकों की आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत हुई।

उस दिन शाम को मैं फिर उनके पास गयी। जैसा सर्व विदित है उनको कुछ भी बताने की आवश्यकता नहीं थी; उन्हें इसका ज्ञान पहले से ही था। उन्हें अपनी कृतज्ञता प्रकट करने के लिए हमारे पास शब्द नहीं थे, पर वह यह नहीं चाहते। उन्हें केवल हमारा प्रेम और निःस्वार्थ आस्था चाहिए, जिसके साथ हम परम आनंद की कठिन यात्रा पर अग्रसर होते रहें।

'दिव्य आभा' में संकलित गुरूजी के भक्तों के सत्संग वास्तविक चमत्कार : गुरुजीके पथ परकौन कह सकता है कि उसने ईश्वर के दर्शन...
21/07/2026

'दिव्य आभा' में संकलित गुरूजी के भक्तों के सत्संग

वास्तविक चमत्कार : गुरुजी
के पथ पर

कौन कह सकता है कि उसने ईश्वर के दर्शन किये हैं? मैं कह सकती हूँ। गुरुजी मेरे परमेश्वर हैं। मुझे प्रतीत होने लगा है कि कोई देवता मेरे गुरु सदृश नहीं है। वह महान हैं, उनके जैसा न कोई कभी हुआ है और न ही कभी होगा। किसी को उन्हें अपने कष्ट बताने की आवश्यकता नहीं है। वह सब जानते हैं। एक बार उनके पथ पर अग्रसर होने के पश्चात् कर्म स्वयं होने लगते हैं। आपको उनमें मात्र विश्वास करना है, आस्था रखनी है और कभी कुछ मांगना नहीं है।

मेरे पुत्र उद्धव को डेढ़ वर्ष की आयु से अस्थमा रहा था। जब मैंने गुरुजी को बताना चाहा तो उन्होंने मुझे रोक दिया और कहा कि ऐसे मैं स्वयं अपना अहित करूंगी। यह कथन उनका आदेश था, मैं चुप हो गयी।

इसके ढाई वर्ष बाद गुरुजी हमारे घर एक विवाह के अवसर पर आये और उन्होंने उद्धव को एक ग्लास जल पीने के लिए दिया। मेरे पुत्र को गुरुजी का आशीष मिल गया था। उस जल को पीने के बाद उसे कभी अस्थमा का दौरा नहीं पड़ा। उसमें अभूतपूर्व सुधार हुआ। उसकी लम्बाई बढ़ गयी, उसका वजन भी बढ़ा और अब वह एक सक्रिय बालक है।

मेरे पति को भी दमा था। जब वह गुरुजी से पहली बार मिले तो गुरुजी ने कहा कि वह अत्यंत अन्धविश्वासी हैं। उनके इस कथन के साथ ही उनकी आधी समस्याएँ तो तुरन्त ही समाप्त हो गयीं। गुरुजी ने उनको ताम्र लोटे से जल पीने को कहा और शीघ्र ही उनके अस्थमा की भी इति हो गयी।

मुझे भी गुरु कृपा प्राप्त हुई। मेरी आँख में एक पुटक था और चिकित्सक ने उसे साधारण शल्य क्रिया से निकालने का सुझाव दिया था। मैं भयभीत थी। एक वृहस्पतिवार को गुरुजी मुझे बहुत ध्यान से देख रहे थे। मुझे पता था कि उनके इस प्रकार देखने का कारण होगा। अगले दिन प्रातः मेरी आँख बिल्कुल सामान्य थी। गुरुजी अपनी दृष्टि से उसी प्रकार के चमत्कार कर देते हैं, जिस प्रकार शब्दों से।

पांच वर्ष पूर्व मेरे ससुर को हृदय का दौरा पड़ा था। उन्हें मलेर कोटला के हृदय रोग संस्थान ले जाया गया जहाँ उनकी एंजियोप्लास्टी होनी थी। गुरुजी ने कहा, "कल्याण हो गया" और उसके बाद सब ठीक हो गया। जब वह वहां से निवृत होकर घर लौट रहे थे, तो हृदय रोग विशेषज्ञ ने बताया कि उनके हृदय की अग्रिम स्नायु क्षतिग्रस्त है और उसमें कोई सुधार संभव नहीं है।
घर लौटते हुए जब हमने गुरुजी के दर्शन किये तो उन्होंने उन्हें शुद्ध देशी घी से बना हुआ हलुवा खाने को दिया। इसके उपरान्त मेरे ससुर अपना सामान्य कार्य करने लगे। औषधि के रूप में गुरुजी ने उन्हें प्रतिदिन व्हिस्की के दो पेग पीते रहने को कहा।

तीन माह के उपरान्त जब उनका टी एम टी परीक्षण हुआ तो चिकित्सकों ने देखा कि उस मृत घोषित स्नायु में रक्त प्रवाह हो रहा था। यह अनुभव गुरुजी के क्रियात्मक रूप को साकार करते हैं। वह सब कुछ करने की क्षमता रखते हैं। उनके शब्दकोष में कुछ भी असंभव नहीं है केवल श्रद्धा, निष्ठा और धैर्य की आवश्यकता है।

श्रीमती गायत्री सब्बरवाल, गुड़गाँव

Address

3451
Jagraon
142026

Telephone

+917009512544

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Deewane DUGRI WALE KE posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Deewane DUGRI WALE KE:

Shortcuts

Share