05/11/2025
الحمدللہ رب العالمین
हम मुसलमान है और इमामुल अम्बिया ﷺ के उम्मती है
हुज़ूरे पाक ﷺ की शरीअत में बालिग होने के बाद हर आकिल पर इल्मे दीन सीखना फ़र्ज़ होता है
लेकिन देखा गया है कि जिस ऊलूम का सीखना हम पर फ़र्ज़ है जैसे तहारत,वज़ु,गुस्ल,निकाह,तलाक,तिजारत, नौकरी वगैरह के अहकाम हमको नहीं आता है
और ना ही हमने सीखने की कोशिश की
दौलत अल्लाह करीम की बहुत बड़ी नेमत है अगर अल्लाह करीम ने हमको इस नेमत से नवाज़ा है तो हमको चाहिए कि दीन के कामो में खर्च करे और अपने रिश्तेदारों व पड़ोसी की मदद करे
लेकिन इल्मे दीन ना सीखने की वजह से कुछ जाहिल लोग उल्मा व बुज़ुर्गो की तनक़ीद करने लगते हैं
यहां तक कि हर बात में हदीस तलब करने लगते हैं जबकि ना तो इनको अरबी ज़बान पता होती है और ना ही इतनी समझ होती है
अल्लाह की पनाह
अल्लाह करीम हमको ऐसे अमल से अपने ह़बीब ﷺ
के नालेन मुक़द्दस के सदक़े में बचाए