ज्योतिष परामर्श केन्द्र

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लग्न अनुसार अशुभ मंगल〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️हिंस्नो युवा पैत्तिक रक्त गौरः पिङ्गेच्छनो वह्वी निभो प्रचंड:।शुरोप्युदार: सतमास्त्रि...
22/11/2022

लग्न अनुसार अशुभ मंगल
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हिंस्नो युवा पैत्तिक रक्त गौरः पिङ्गेच्छनो वह्वी निभो प्रचंड:।
शुरोप्युदार: सतमास्त्रिकोणो मज्जाधिको भूतनय: सगर्व:।।

अर्थात मंगल ग्रह एक हिंसक, युवा, लाल, गौरवर्ण अधिक मज्जा व पित्त प्रधान प्रकृति का, रक्त नेत्रों वाला, तेज स्वभाव वाला उदार, तामसिक तथा गर्वीले स्वभाव के साथ त्रिकोण आकार का है।

आज हम लग्न के अनुसार अशुभ मंगल की चर्चा करेंगे जिससे आप स्वयं ही अपनी पत्रिका में मंगल की स्थिति देख सकें इसके साथ ही मंगल के साथ बैठे ग्रह को देखें तथा मंगल पर कौन सा ग्रह दृष्टि डाल रहा है यह भी देखें वह मित्र है अथवा शत्रु इसके बाद ही निष्कर्ष निकाले की मंगल कितना शुभ अथवा अशुभ है।

मेष लग्न 👉 इस लग्न में मंगल द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, एकादश एवं द्वादश भाव में अत्यधिक अशुभ फल देता है यहां पर मंगल दूसरे 11 वें तथा 12 वें भाव में आर्थिक रुप से कमजोर करता है।

वृष लग्न 👉 इस लग्न में मंगल तृतीय, चतुर्थ, पंचम, अष्टम, द्वादश भाव में अधिक अशुभ फल देता है।

मिथुन लग्न 👉 इस लग्न में मंगल प्रथम, चतुर्थ, षष्ठम, अष्टम, नवम भाव व द्वादश भाव में अशुभ फलदाई होता है।

कर्क लग्न 👉 इस लग्न में मंगल तृतीय, षष्ठम, सप्तम, अष्टम तथा एकादश भाव में अधिक अशुभ रहता है।

सिंह लग्न 👉 इस लग्न में मंगल लग्न, षष्ठम, अष्टम तथा एकादश भाव में अशुभ फल ही देता है।

कन्या लग्न 👉 कन्या लग्न में मंगल धन भाव, चतुर्थ, षष्ठम व द्वादश भाव में पूर्णतया अशुभ फल देता है।

तुला लग्न 👉 लग्न चतुर्थ, अष्टम, एकादश तथा द्वादश भाव में विशेष अशुभ फल देता है।

वृश्चिक लग्न 👉 वृश्चिक लग्न में मंगल धन भाव, सुख भाव, रोग भाव, सप्तम, अष्टम, एकादश एवं द्वादश भाव में अशुभ फल देता है।

धनु लग्न 👉 इस लग्न में भी मंगल लग्न भाव, तृतीय तथा एकादश भाव में अत्यधिक अशुभ फल देता है।

मकर लग्न 👉 मकर लग्न में लग्न स्थित मंगल, धन भाव, सुख भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, नवम भाव तथा व्यय भाव में अशुभ फलदायक होता है।

कुम्भ लग्न 👉 इस लग्न में भी मंगल पूर्णत: धन, सुख, रोग, मारक, कर्म तथा व्यय भाव में अशुभ फल ही देता है।

मीन लग्न 👉 इस लग्न में मंगल द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम, दशम, एकादश स्थान में सर्वदा अशुभ फल देता है।

मंगल के अशुभ योगों के उपाय
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1👉 मंगल कृत अरिष्ट शांति के लिए किसी भी शुक्ल पक्ष के मंगलवार से शुरू करके लाल वस्त्र पहनकर श्री हनुमान जी की मूर्ती से सामने कुशाशन पर बैठा कर गेरू अथवा लाल चंदन का टीका लगाकर एवं घी की ज्योति जगाकर श्री हनुमानाष्टक अथवा हनुमान चालीसा का प्रतिदिन काम से कम 21 संख्या में पाठ करे।ऐसा नियमित 41 दिन तक करने पर कठिन से कठिन कार्य की सिद्धि होती है।श्री हनुमानाष्टक पाठ के प्रारंभ में श्री हनुमत-स्तवन के सात मंत्रो का भी पाठ करने से विशेष लाभ होता है।पाठ के बाद किशमिश या लड्डू का भोग लगाना शुभ रहेगा।

2👉 हर मंगलवार को स्नान आदि से निवृत होकर लाल वस्त्र एवं लाल चंदन का तिलक धारण कर कुशाशन पर बैठ कर 41 दिन नियमित रूप से 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ एवं लड्डू का भोग लगाने से भौमकृत अरिष्ट की शांति होती है।

3👉 जन्म कुंडली में मंगल योग कारक होकर भी शुभ फल ना दे रहा हो तो हर मंगल वार कपिला गाय को मीठी रोटियां खिलाकर नमस्कार करना चाहिए गौ को हरा चारा जल सेवा एवं लाल वस्त्र पहना कर अलंकृत करने से मंगल के अशुभ फल की शांति होती है।

4👉 अपने इष्ट देव को घर में ही 27 मंगलवार सिंदूर का तिलक लगाकर खुद भी प्रसाद स्वरूप तिलक लगाना शुभदायक रहेगा।

5👉 सोमवार की रात्रि को ताँबे के बर्तन में पानी सिराहने रख कर मंगलवार की प्रातः घर में लगाये हुए गुलाब के पौधों को वही जल मंगल का बीज मंत्र पढ़ते हुए डाले।

6👉 किसी भी विशेष यात्रा पर जाने से पहले शहद का सेवन शुभ रहेगा।

7👉 यदि कुंडली में मंगल नीच राशिगत हो या अस्त हो तो शरीर पर सोने या तांबे का गहना या अन्य कोई वस्तु धारण नहीं करना चाहिए।इस स्तिथि में लाल रंग के वस्रों एवं लाल चंदन का भी परहेज करना चाहिए।

8👉 मंगल अशुभ होने की स्तिथि में मंगल सम्बंधित वस्तुओ (ताम्र बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तु, लाल वस्त्र, गुड़ आदि) के उपहार विशेष कर मंगलवार या मंगल के नक्षत्रो में ग्रहण ना करे अपतु इनका दान इन दिनों विशेष लाभदाय रहेगा।

9👉 गेंहू तथा मसूर की दाल के सात-सात दाने लाल पत्थर पर सिंदूर का तिलक लगाकर इनको लाल वस्त्र में लपेटकर मंगलवार को मंगल का बीज मंत्र पढ़ते हुए बहते जल में प्रवाहित करें।

10👉 27 मंगलवार किसी अंध विद्यालय में या किसी अंगहीन व्यक्ति को मीठा भोजन कराना शुभ होगा।

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10/10/2022

संपूर्ण राहु की महादशा का विवरण अनुभव और शोध पर आधारित

राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा - जिस तरह एक पुराने मकान को ढहा कर फिर से नए मकान स्थापित की जाती है उसी प्रकार पुरानी मंगल की महादशा का पूरा निर्माण को तोड़कर राहु अपने तरीके से पहले पुराने मकान को तोड़ेगा फिर नई पिलर स्थापित करके अपने हिसाब से घर बनाएगा यह दौर पूर्ण परिवर्तन का दौर रहता है और जीवन में बहुत कुछ नया होता है

राहु की महादशा में बृहस्पति की अंतर्दशा - चुकी राहु और बृहस्पति आपस में शत्रु हैं तो यह समय संघर्ष भरा रहता है छोटे-मोटे शारीरिक कष्ट होने की संभावना रहेगी, शिक्षा बाधित होता है, पेट संबंधित समस्या होती है, और जातक अत्यधिक परेशान रहता है

राहु की महादशा में शनि की अंतर्दशा - राहु और शनि आपस में मित्र हैं फिर भी राहु की महादशा में शनि की अंतर्दशा जबरदस्त संघर्ष देता है, इस दौरान परिवार में किसी बुजुर्ग की मृत्यु संभव होती है जातक का संबंध विच्छेद होता है, शिक्षा बाधित होती है ,नौकरी में जबरदस्त संघर्ष होता है, और जातक पैसे पैसे का मोहताज हो जाता है

राहु की महादशा में बुध की अंतर्दशा - अगर कुंडली में राहु राजयोग कारक है तो फिर राहु की महादशा में बुध की अंतर्दशा इतना जबरदस्त लाभ देती है कि जातक अचानक से अमीर बन जाता है अचानक से उसके पास वाहन, घर, मकान का सुख, मिलने लगता है जातक का विवाह भी हो जाता है संतान सुख भी प्राप्त होता है देश विदेश से उसमें उसका व्यापार भी चलने लगता है और अचानक से वह सामान्य सा दिखने वाला जातक का रहन-सहन पूरा बदल जाता है

राहु की महादशा में केतु की अंतर्दशा - यह समय मानसिक कष्ट और धन हानि का होता है और जातक परेशान रहता है

राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा - जातक को धन लाभ होता है, मकान का सुख प्राप्त होता है, वाहन सुख प्राप्त होता है, पूरे राहु की महादशा में अगर देखा जाए तो सबसे अच्छी अंतर दशा बुध की और शुक्र की होती है तो यह संपूर्ण राज्ययोग का समय होता है जातक सुखी जीवन व्यतीत करता है चौतरफा आनंद प्राप्त करता है

राहु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा - राहु सूर्य आपस में कट्टर शत्रु हैं अब यह दौर राहु के वापसी का होता है यानी अब राहु की महादशा खत्म होने पर है तो अब राहु धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है वह जो आनंद बुध की अंतर्दशा, और शुक्र की अंतर्दशा में दिया वह सभी वापस लेना शुरू सूर्य की अंतर्दशा में करने लगता है ।। राहु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा में जातक को राजदंड झेलना पड़ता है, व्यापार में हानि होती है और अगर राहु अच्छा हो तो परिवार में किसी का विवाह अवश्य होता है

राहु की महादशा में चंद्रमा का अंतर्दशा - क्योंकि राहु अपने महादशा के अंतिम चरण पर रहता है और यह जाने वाला होता है इसलिए इस समय राहु जातक को पूरी तरीके से तितर-बितर कर देता है, व्यापार ठप हो जाता है, घर में कलेश होता है, जातक को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जबरदस्त मानसिक अशांति रहती है ।। परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती है, जीवन साथी को कष्ट होता है, पैसे को लेकर विवाद होता है, जातक का अपने रिश्तेदारों के साथ कटु संबंध हो जाता है, जातक इतना परेशान रहता है कि उसे भय लगने रहता है ।। राहु की महादशा में कमाए गए सभी धन अस्पतालों में खर्च हो जाते हैं ।। पैसा व्यापार में डूब जाता है और राहु की महादशा में अचानक अमीर हुआ जातक पुनः अपने वापस सामान्य स्थिति में आ जाता है ।। राहु तिल तिल कर के मारता है, चंद्रमा की अंतर्दशा में जबरदस्त मानसिक तनाव देता है

जातक मानसिक तनाव झेल कर इतना अकेला हो जाता है कि वह भयभीत होकर न उसे दिन चैन मिलता है और ना रात को नींद आती है

राहु की महादशा में मंगल का अंतर्दशा - अब राहु की महादशा खत्म होने वाली रहती है तो राहु अपनी महादशा के स्वर्णिम दौर में जो जो चीज, सुख देता है वह सारा सुख अब लेना शुरू कर देता है और जातक का सब कुछ वापस ले लेता है जो उसने अपनी महादशा में दिया क्योंकि आने वाली महादशा बृहस्पति की है अतः राहु अपना दिया व संपूर्ण साम्राज्य को वापस लेना शुरू कर देता है मानसिक तनाव शारीरिक कष्ट देता है

नोट - चुकी राहु उल्टा चलता है इसीलिए राहु की महादशा में राहु की अंतर्दशा में राहु जातक के पैर में रहता है, और पैर को चोट पहुंचाता है ।। इसी दौरान राहु की महादशा का मध्यकाल चलता है यानी बुध की अंतर्दशा उसमें राहु पेट तक आ जाता है और पेट का विकार देता है पर जब राहु की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा चलती है उस समय राहु मस्तक पर आ जाता है,

राहु की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा में राहु जातक के जीभ और मस्तिष्क पर अधिकार करता है

इस दौरान जातक अनाप-शनाप बकता है, गालियां देता है, रिश्ता खराब कर लेता है, और 24 घंटा मानसिक तनाव झेलता है

जातक अनाप-शनाप बोलता है, संबंध खराब कर लेता है, उसका संपूर्ण व्यापार, नौकरी चौपट हो जाता है

राहु की महादशा में मंगल का अंतर्दशा में राहु मस्तिष्क से बाहर निकल जाता है

चुंकि राहु हमेशा वक्री चलता है इसीलिए अपनी महादशा के शुरुआती दौर में यह हमेशा जातक के पैर होते हुए शरीर में प्रवेश करता है

इसलिए राहु की महादशा का शुरुआती दौर जातक के पैर में वह तकलीफ पहुंचाता है

फिर वह घुटना जांघ होते हुए पेट तक पहुंचता है

और अपनी महादशा के मध्य भाग में पेट को तकलीफ देता है

इसके बाद अंत भाग सूर्य की अंतर्दशा में वह हृदय तक पहुंचता है ह्रदय को आघात पहुंचाता है

और चंद्रमा की अंतर्दशा में वह जीभ तक पहुंच जाता है और वाणी द्वारा कष्ट पहुंचाता है मानसिक तनाव देता है और मंगल की अंतर्दशा में मस्तिष्क से वह बाहर निकल जाता है
राहु का रत्न macmani पहनिए
राहु का जाप करवाए
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7389321001

14/08/2021
सभी ज्योतिषाचार्यो के लिए इस जातक का स्वस्थ ओर मकान के बारे में बताइए20 /01/19638 pm
30/06/2020

सभी ज्योतिषाचार्यो के लिए इस जातक का स्वस्थ ओर मकान के बारे में बताइए
20 /01/1963
8 pm

19/01/2020

*आदत बदलने से भी ग्रह अच्छा फल देते है..*

*1-मंदिर को साफ़ करते है तो बृहस्पति बहुत अच्छे फल देगा।*

*2-अपनी झूठी थाली या बर्तन उसी जगह पर छोड़ना -सफलता मे कमी..*

*3-झूठे बर्तन को उठाकर जगह पर रखते है या साफ़ कर लेते है तो चन्द्रमा, शनि ग्रह ठीक होते है।*

*4-देर रात तक जागने से चन्द्रमा अच्छे फल नहीं देता है।*

*5-कोई भी बाहर से आये उसे स्वच्छ पानी जरुर पिलाए। राहू ग्रह ठीक होता है,राहू का बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।*

*6-रसोई को गन्दा रखते हैं तो आपको मंगल ग्रह से दिक्क्तें आएँगी। रसोई हमेशा साफ़ सुथरी रखेंगै तो मंगल ग्रह ठीक होता है।*

*7-घर में सुबह उठकर पौधों को पानी दिया जाता है तो हम बुध, सूर्य, शुक्र और चन्द्रमा मजबूत करते हैं।*

*8-जो लोग पैर घसीट कर चलते है उन का राहु खराब होता है।*

*9-बाथरूम में या घर में कपडे उतारकर इधर उधर फेंकते है शनि खराब होता है।*

*10- बाथरूम में पानी बिखराकर आ जाते है तो चन्द्रमा अच्छे फल नहीं देता है।*

*11-बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोज़े इधर उधर फेंक देते है, उन्हें शत्रु परेशान करते है।*

*12- राहू और शुक्र ठीक फल नही देते है जब बिस्तर हमेशा फैला हुआ होगा, सलवटे होंगी, चादर कही, तकिया कही होगी।*

*13-चीख कर बोलेंने से शनि खराब खराब होता है।*

*14-बुजूर्गों के आशीर्वाद से घर में सुख समृद्धि बढती है तथा गुरू ग्रह अच्छा होता है।*

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गर्भावस्था के दौरान ही शिशु के हाथ में लकीरो का जाल बुन जाता है, जो कि जन्म से लेकर मृत्यु तक रेखाओ के रुप में विद्यमान ...
01/01/2020

गर्भावस्था के दौरान ही शिशु के हाथ में लकीरो का जाल बुन जाता है, जो कि जन्म से लेकर मृत्यु तक रेखाओ के रुप में विद्यमान रहता है। इसे हस्त रेखा (Palm line) के रुप में जाना जाता है। सामान्यतया 16 वर्ष तक की आयु के बच्चो की हाथों की रेखाओ में परिवर्तन होता रहता है।

अधिक जानकारी के लिए whatsap Astrlojar Anju iyer
6263392552
पर संपर्क कर सकते हैं ।

25/12/2019

यदि गुरू कर्क राशि का तथा चन्द्र्मा वर्षभ राशि का हो तो , जातक शिक्षा विभाग में उच्च स्तरीय अधिकारी होता है

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12/12/2019

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*राहू ग्रह व उस से बनने वाले कुछ विशेष योग-**राहु एक विच्छेदात्मक ग्रह है, जब इसका प्रभाव सप्तम भाव से संबंधित बातों पर ...
10/11/2019

*राहू ग्रह व उस से बनने वाले कुछ विशेष योग-*

*राहु एक विच्छेदात्मक ग्रह है, जब इसका प्रभाव सप्तम भाव से संबंधित बातों पर पड़ता है यथा, सप्तमभाव के स्वामी व शुक्र पर पड़ता है तो यह प्रभाव जातक के विवाह में विलम्ब, जात्येतर सम्बन्ध, अलगाव, व तलाक की और संकेत करता है। यदि राहू के साथ शनि और सूर्य का प्रभाव भी सप्तम भाव से संबंधित घटकों पर हो तो अशुभ फलों में और तीव्रता आ जाती है। यदि किसी कुंडली में राहू, शनि की युति हो तो शनि का प्रभाव दुगना हो जाता है।*

*1- यदि मेष, वृषभ, या कर्क राशि का राहू तीसरे, षष्ठ अथवा एकादश भाव में हो तो, यह राहू अनेक अशुभ फलों का नाश कर देता है।*

*2- यदि राहू केंद्र, त्रिकोण 1, 4, 7, 10, 5, 9 वें भाव में हो और केन्द्रेश या त्रिकोणेश से सम्बन्ध रखता हो तो यह राज योग प्रदान कर देता है।*

*3-यदि 10 वें भाव में राहू हो तो, यह राहू नेतृत्व शक्ति प्रदान करता है।*

*4- यदि सूर्य, चन्द्र के साथ राहू हो तो, यह राहू इनकी शक्ति को कम करता है।*

*5- राहू की दृष्टि सप्तम भाव, सप्तमेश, मंगल, व शुक्र पर हो तो, ऐसी जातिका अंतर्जातीय विवाह करती है।*

*6- जिस जातिका के पंचम भाव में राहू होता है, उस जातिका का मासिक धर्म अनियमित होता है, जिस कारण से जातिका को संतान होने में परेशानी हो सकती है।*

*7- यदि पंचम भाव में कर्क, वृश्चिक अथवा मीन राशि हो और उसमें राहू, शुक्र की युति हो तो, वह जातिका प्रेम जाल में फंस जाती है।*

*8- यदि पंचम भाव में राहू, शुक्र की युति हो तो, वह जातिका यौन रोग, अथवा प्रसव सम्बंधित रोगों से ग्रसित होती है।*

*9- यदि अष्टम भाव में मेष, कर्क, वृश्चिक, या मीन राशि हो और उसमें राहू स्थित हो तो, जातिका की शल्य क्रिया अवश्य होती है।*

*10- सप्तम भाव में राहू, शनि, तथा मंगल की युति हो तो, दाम्पत्य जीवन कष्टमय होता है।*

*11-यदि 8 वें भाव में शनि, राहू, व मंगल हो तो, उस जातिका/ जातक के 80% तलाक की संभावना होती है। अथवा जीवन भर वैचारिक मतभेद रहते हैं।*

*12- यदि मेष, या वृश्चिक राशि में 8 वें भाव में या दूसरे भाव में राहू पाप ग्रह से युत अथवा दृष्ट हो तो, जातिका का दाम्पत्य जीवन कष्टमय होता है।*

*13- यदि पंचम भाव में राहू मेष या वृश्चिक राशि का हो अथवा मंगल की दृष्टि हो तो, उस जातिका की संतान की हानि होती है।*

*14- यदि राहू, गुरु की युति हो तो, जातिका का एक बार गर्भपात होता है।*

*15- सप्तम भाव में स्थित राहू दाम्पत्य जीवन को कष्टमय कर देता है।*

*16- यदि दूसरे भाव में धनु राशि का राहू हो तो, जातिका धनवान हो जाती है।*

*17- एकादश भाव में राहू, शुक्र की युति हो तो जातिका का दाम्पत्य जीवन बहुत दुःखी होता है।*

*18- यदि शुक्र अथवा गुरु पर राहू की दृष्टि हो तो, जातिका अंतर्जातीय एवं प्रेम विवाह करती है।*

*19- यदि दूसरे या पंचम भाव में राहू हो तो, उस जातिका का विवाह बहुत कठिनाई से होता है।*

*20-यदि 8 वें भाव या 11 वें भाव में राहू हो तो, उस जातिका का विवाह तो हो जाता है, किन्तु दाम्पत्य जीवन कष्टप्रद होता है। अथवा अलगाव/तलाक की आशंका अधिक होती है।*
*👉🏿अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए व्हाट्सअप करें-6263392552
अंजू अयर

शनि न्याय के देवता है। माना जाता है कि हर राशि पर शनि का प्रभाव लगभग साढ़े सात साल तक रहता है। 2019  में वृश्चिक, मकर और...
02/11/2019

शनि न्याय के देवता है। माना जाता है कि हर राशि पर शनि का प्रभाव लगभग साढ़े सात साल तक रहता है। 2019 में वृश्चिक, मकर और धनु राशि पर शनि का प्रभाव रहेगा। मतलब ये तीन राशियां महत्वपूर्ण रूप से शनि की साढ़े साती से ग्रसित रहेगी। इसके अलावा कुछ और राशियों पर भी शनि का प्रभाव रहता है।
लोगों में शनि को लेकर अनेक मान्यताएं हैं। कर्इ लोगों का मानना है कि जातक के जीवन में मुश्किलें और विघ्नों को लाने का काम शनि करता है। लेकिन, यह मान्यता सरासर गलत है। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनि के शुभ होने पर वह जातकों को शुभ फल दिलाने के अलावा मोक्ष के मार्ग पर भी अग्रसर करता है।
शनि आपकी जिंदगी को किस तरह प्रभावित करेगा ? तो खरीदें साढ़े साती रिपोर्ट आैर शनि के बारे में सब कुछ जानें।

एक राशि में ढाई साल तक रहते हैं शनि
शनिदेव जब भी किसी राशि पर आते हैं तो वहां ढाई वर्ष तक भ्रमण करते हैं। शनि जिस भी राशि में होता है, उसका प्रभाव पहले और बाद की राशि पर पड़ने से शनि की अवधि कुल मिलाकर साढ़े सात वर्ष तक होती है। इसलिए, इस अवधि को शनि की साढ़े साती के नाम से पुकारा जाता है। जैसे कि शनि धनु राशि में है तो उसके पहले की राशि वृश्चिक के लिए शनि की साढ़े साती का अंतिम चरण, धनु के लिए साढ़े साती का दूसरा चरण और मकर राशि के लिए साढ़े साती का पहला चरण कहा जाएगा।

शनि की साढ़े साती से जुड़े तथ्यः ऐसे देते हैं शनि अच्छा फल
अगर आपकी जन्मकुंडली में जन्म के चंद्र से बारहवें, पहले और दूसरी राशि से शनि का भ्रमण होता हो तो आप शनि के प्रभाव में कहे जाएंगे। साढ़े साती के दौरान ढाई-ढाई वर्ष के तीन चरण होते हैं। हर एक जातक की कुंडली में जब साढ़े साती की शुरुआत होती है, तब उसको इन तीन चरणों में से होकर गुजरना पड़ता है। तीन चरणों में से दूसरा चरण सबसे कठिन माना जाता है। सामान्य रूप से हर एक आदमी साढ़ेसाती को लेकर डरा और सहमा-सा रहता है। जो जातक सभी की मदद करते हैं, कपट नहीं करते, सदा पुण्य कर्म करते है, ईमानदार रहते हैं, अभिमान नहीं करते हैं उन सभी के लिए शनिदेव कभी भी बाधा नहीं बनते हैं। एेसे सच्चरित्र जातकों के ऊपर हमेशा शनिदेव की कृपा बनी रहती है।

ऐसे होते हैं शनि प्रसन्न
जन्मकुंडली में यदि शनि वक्री हो, नीच राशि (मेष राशि) का हो, अस्त का हो, पाप ग्रह केतु, मंगल, राहु या केतु के साथ युति, प्रतियुति या फिर दृष्टि संबंध बना रहा हो अथवा गोचर में शनि की बड़ी पनौती या छोटी पनौती हो तो एेसे जातकों को शनिदेव की सेवा करके उन्हें प्रसन्न करने का उपाय करना चाहिए।
वृश्चिक पर आखिरी तो मकर राशि पर शुरू हुई है साढ़े साती

शनि अभी धनु राशि में भ्रमण कर रहे हैं। इस कारण मकर राशि के जातकों के लिए वे जन्म के चंद्र से बारहवें में भ्रमण कर रहे होने से उनके लिए साढ़ेसाती का प्रथम चरण रहेगा। जब धनु राशि के जातकों के लिए शनि जन्म के चंद्र के ऊपरसे गोचर करता है, तो इस राशि के जातकों के लिए साढ़े साती का दूसरा चरण कहा जाएगा। वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि जन्म के चंद्र से दूसरे स्थान पर गति करता है। इन जातकों के लिए साढ़े साती का अंतिम चरण रहेगा। कन्या राशि के जातकों के लिए शनि जन्मकालीन चंद्र से चौथे स्थान पर गोचर करता है। इसलिए, कन्या राशि के लिए शनि की छोटी पनौती (ढैय्या) कही जाएगी। वृषभ राशि की बात करें तो शनि जन्मकालीन चंद्र से आठवें स्थान पर से गतिमात होता है। शनि के इस चाल की वजह से वृषभ राशि के जातक इस समय शनि की छोटी पनौती की अवस्था से होकर गुजर रहे हैं।


शनि के इन उपायों को करने से मिलेगी शांति

– शनि मंत्र का नियमित रूप से जप करें। ये मंत्र हैं-

(1) ॐ शं शनैश्चराय नमः
(2) नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

– संपूर्ण आस्था और श्रद्धा के साथ शनि चालीसा का पाठ करें।

– प्रत्येक शनिवार को उड़द की दाल भोजन में लीजिए और एक समय उपवास करें।

– हर शनिवार को शनिदेव के मंदिर में जाकर तेल चढ़ाएं।

– हर शनिवार को उड़द की जलेबी या कचौड़ी बनाकर अपंग व दरिद्र व्यक्ति को खिलाने से शनिदेव की कृपा मिलती है।

– लोहे की अंगूठी को मध्यमा उंगली में धारण करें।लोगों में शनि को लेकर अनेक मान्यताएं हैं। कर्इ लोगों का मानना है कि जातक के जीवन में मुश्किलें और विघ्नों को लाने का काम शनि करता है। लेकिन, यह मान्यता सरासर गलत है। शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनि के शुभ होने पर वह जातकों को शुभ फल दिलाने के अलावा मोक्ष के मार्ग पर भी अग्रसर करता है।

– विशेषज्ञ की राय से शनि का रत्न नीलम पंचधातु की अंगूठी में जड़वाकर पहनने से शनिदेव के लाभदायी प्रभाव में बढ़ोतरी की जा सकती है।

– शनि यंत्र की पूजा करने से शनिदेव का आशीर्वाद मिलता है।

– हर शनिवार को उड़द की दाल, काला कपड़ा अथवा काला चादर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान में देने से शनिदेव खुश होते हैं।

– संध्याकाल के बाद और रात में सोने से पहले उत्तर दिशा की ओर मुख करके हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनिदेव के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।

– हर शनिवार को बजरंगबली हनुमानजी को आक (आंकड़ा) के फूल की माला चढ़ाएं।

– शनिवार को पवनपुत्र हनुमानजी को तेल-सिंदूर चढ़ाकर शनिदेव की आराधना करें।

– भगवान शनिदेव को शुभ बनाने के लिए शनिवार को काले तिल के लड्डू बनाकर गाय या छोटे बालकों को खिलाएं।

– कुपित शनि को शांत करने के लिए सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करना फलदायी होता है।

– हर शनिवार को *ॐ हं हनुमते नमः * की माला का जप करिये।

शनि का पाठ करते समय खास ध्यान में रखने योग्य बातेंः-
– पाठ करते समय हमेशा उत्तर दिशा की तरफ बैठें।

– तांबे के दीपक में तिल या सरसों का तेल भरकर ज्योति जलाएं।

– हनुमान जयंती अथवा शनि अमावस्या के दिन हवन कराकर शनिदेव की उपासना की जा सकती है।

इस लेख में बताए गए किसी भी उपाय को अाजमाने पर जातकों पर शनिदेव की कृपा बनी रहती है। इससे जीवन के कष्टों व विघ्नों का शमन होता है। शनि की साढ़े साती के दौरान यदि इन उपायों को पूरी आस्था व विश्वास के साथ किया जाए तो शनिदेव अवश्य ही प्रसन्न होकर वक्त की मार झेल रहे व्यक्ति को मुसीबतों से बाहर लाते हैं। शनिदेव दयालु हैं और अपने भक्तों की सभी दुःखों से रक्षा करते हैं। जिन जातकों के जीवन में इस समय शनि की साढ़े साती चल रही हो, यदि वे सुझाए गये सभी उपायों को अपनाएंगे तो निश्चित रूप से शनि के अनिष्टकारी प्रभाव से बचे रहकर राहत का अनुभव करेंगे।

नीचे दी गई राशि के जातकों को ये उपाय अवश्य ही करना चाहिएः-

वृश्चिक राशि (न, च) – शनि की पनौती का अंतिम चरण (चंद्र से दूसरे स्थान पर शनि)

धनु राशि (भ, ध, फ, थ)– शनि की पनौती के मध्य का चरण (चंद्र के ऊपर से शनि)

मकर राशि (ख, ज) – शनि की साढ़े साती का प्रथम चरण (चंद्र से बारहवें में शनि)

कन्या राशि (प, ठ, ण) – शनि की छोटी पनौती (चंद्र से चौथे स्थान पर शनि)

वृषभ राशि (ब,व,उ) – शनि की छोटी पनौती (चंद्र से आठवें में शनि की उपस्थिति)

इसके अलावा, जातक की कुंडली में शनि वक्री या अस्त का हो, नीच का हो, पाप ग्रह मंगल, केतु या राहु के साथ संबंध में हो तो इन तमाम जातकों के लिए बताए गए ज्योतिषीय उपाय कारगर साबित होंगे। इन उपायों को अमल में लाने से जीवन में आ रही समस्याएं दूर हो जाती हैं। शनि के कष्ट निवारण हेतु हमारे द्वारा बताए गए उपायों को अपनाकर कष्टमुक्त जीवन जी सकेंगे।

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