22/11/2022
लग्न अनुसार अशुभ मंगल
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हिंस्नो युवा पैत्तिक रक्त गौरः पिङ्गेच्छनो वह्वी निभो प्रचंड:।
शुरोप्युदार: सतमास्त्रिकोणो मज्जाधिको भूतनय: सगर्व:।।
अर्थात मंगल ग्रह एक हिंसक, युवा, लाल, गौरवर्ण अधिक मज्जा व पित्त प्रधान प्रकृति का, रक्त नेत्रों वाला, तेज स्वभाव वाला उदार, तामसिक तथा गर्वीले स्वभाव के साथ त्रिकोण आकार का है।
आज हम लग्न के अनुसार अशुभ मंगल की चर्चा करेंगे जिससे आप स्वयं ही अपनी पत्रिका में मंगल की स्थिति देख सकें इसके साथ ही मंगल के साथ बैठे ग्रह को देखें तथा मंगल पर कौन सा ग्रह दृष्टि डाल रहा है यह भी देखें वह मित्र है अथवा शत्रु इसके बाद ही निष्कर्ष निकाले की मंगल कितना शुभ अथवा अशुभ है।
मेष लग्न 👉 इस लग्न में मंगल द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, एकादश एवं द्वादश भाव में अत्यधिक अशुभ फल देता है यहां पर मंगल दूसरे 11 वें तथा 12 वें भाव में आर्थिक रुप से कमजोर करता है।
वृष लग्न 👉 इस लग्न में मंगल तृतीय, चतुर्थ, पंचम, अष्टम, द्वादश भाव में अधिक अशुभ फल देता है।
मिथुन लग्न 👉 इस लग्न में मंगल प्रथम, चतुर्थ, षष्ठम, अष्टम, नवम भाव व द्वादश भाव में अशुभ फलदाई होता है।
कर्क लग्न 👉 इस लग्न में मंगल तृतीय, षष्ठम, सप्तम, अष्टम तथा एकादश भाव में अधिक अशुभ रहता है।
सिंह लग्न 👉 इस लग्न में मंगल लग्न, षष्ठम, अष्टम तथा एकादश भाव में अशुभ फल ही देता है।
कन्या लग्न 👉 कन्या लग्न में मंगल धन भाव, चतुर्थ, षष्ठम व द्वादश भाव में पूर्णतया अशुभ फल देता है।
तुला लग्न 👉 लग्न चतुर्थ, अष्टम, एकादश तथा द्वादश भाव में विशेष अशुभ फल देता है।
वृश्चिक लग्न 👉 वृश्चिक लग्न में मंगल धन भाव, सुख भाव, रोग भाव, सप्तम, अष्टम, एकादश एवं द्वादश भाव में अशुभ फल देता है।
धनु लग्न 👉 इस लग्न में भी मंगल लग्न भाव, तृतीय तथा एकादश भाव में अत्यधिक अशुभ फल देता है।
मकर लग्न 👉 मकर लग्न में लग्न स्थित मंगल, धन भाव, सुख भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव, नवम भाव तथा व्यय भाव में अशुभ फलदायक होता है।
कुम्भ लग्न 👉 इस लग्न में भी मंगल पूर्णत: धन, सुख, रोग, मारक, कर्म तथा व्यय भाव में अशुभ फल ही देता है।
मीन लग्न 👉 इस लग्न में मंगल द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम, दशम, एकादश स्थान में सर्वदा अशुभ फल देता है।
मंगल के अशुभ योगों के उपाय
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1👉 मंगल कृत अरिष्ट शांति के लिए किसी भी शुक्ल पक्ष के मंगलवार से शुरू करके लाल वस्त्र पहनकर श्री हनुमान जी की मूर्ती से सामने कुशाशन पर बैठा कर गेरू अथवा लाल चंदन का टीका लगाकर एवं घी की ज्योति जगाकर श्री हनुमानाष्टक अथवा हनुमान चालीसा का प्रतिदिन काम से कम 21 संख्या में पाठ करे।ऐसा नियमित 41 दिन तक करने पर कठिन से कठिन कार्य की सिद्धि होती है।श्री हनुमानाष्टक पाठ के प्रारंभ में श्री हनुमत-स्तवन के सात मंत्रो का भी पाठ करने से विशेष लाभ होता है।पाठ के बाद किशमिश या लड्डू का भोग लगाना शुभ रहेगा।
2👉 हर मंगलवार को स्नान आदि से निवृत होकर लाल वस्त्र एवं लाल चंदन का तिलक धारण कर कुशाशन पर बैठ कर 41 दिन नियमित रूप से 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ एवं लड्डू का भोग लगाने से भौमकृत अरिष्ट की शांति होती है।
3👉 जन्म कुंडली में मंगल योग कारक होकर भी शुभ फल ना दे रहा हो तो हर मंगल वार कपिला गाय को मीठी रोटियां खिलाकर नमस्कार करना चाहिए गौ को हरा चारा जल सेवा एवं लाल वस्त्र पहना कर अलंकृत करने से मंगल के अशुभ फल की शांति होती है।
4👉 अपने इष्ट देव को घर में ही 27 मंगलवार सिंदूर का तिलक लगाकर खुद भी प्रसाद स्वरूप तिलक लगाना शुभदायक रहेगा।
5👉 सोमवार की रात्रि को ताँबे के बर्तन में पानी सिराहने रख कर मंगलवार की प्रातः घर में लगाये हुए गुलाब के पौधों को वही जल मंगल का बीज मंत्र पढ़ते हुए डाले।
6👉 किसी भी विशेष यात्रा पर जाने से पहले शहद का सेवन शुभ रहेगा।
7👉 यदि कुंडली में मंगल नीच राशिगत हो या अस्त हो तो शरीर पर सोने या तांबे का गहना या अन्य कोई वस्तु धारण नहीं करना चाहिए।इस स्तिथि में लाल रंग के वस्रों एवं लाल चंदन का भी परहेज करना चाहिए।
8👉 मंगल अशुभ होने की स्तिथि में मंगल सम्बंधित वस्तुओ (ताम्र बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तु, लाल वस्त्र, गुड़ आदि) के उपहार विशेष कर मंगलवार या मंगल के नक्षत्रो में ग्रहण ना करे अपतु इनका दान इन दिनों विशेष लाभदाय रहेगा।
9👉 गेंहू तथा मसूर की दाल के सात-सात दाने लाल पत्थर पर सिंदूर का तिलक लगाकर इनको लाल वस्त्र में लपेटकर मंगलवार को मंगल का बीज मंत्र पढ़ते हुए बहते जल में प्रवाहित करें।
10👉 27 मंगलवार किसी अंध विद्यालय में या किसी अंगहीन व्यक्ति को मीठा भोजन कराना शुभ होगा।
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