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29/07/2026

पाखंडी रामपाल, जो बाढ़ का पानी निकालने का ढोंग करता है, उसे असम की बाढ़ क्यों नहीं दिखाई देती—यही उसके तथाकथित चमत्कारों की सच्चाई है।

❤️Rampal balatkari hai😂😂😂
20/07/2026

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17/07/2026
17/07/2026

सतलोक आश्रम वाला रामपाल लुटता है गरीबो के पैसे

14/07/2026

श्रीमद देवी भागवत महापुराण

व्यास जी ने दोनों ग्रंथों को 'भागवत' नाम इसलिए दिया क्योंकि 'भागवत' शब्द का अर्थ है "भगवान या परम सत्ता से संबंधित"। दोनों संप्रदायों के अपने-अपने ठोस तर्क हैं कि कौन सा ग्रंथ असली महापुराण है:

१. व्यास जी द्वारा दोनों को 'भागवत' नाम देने का आधारश्रीमद्भागवत (कृष्ण प्रधान): इसमें 'भगवन्' (ऐश्वर्य और शक्तियों से पूर्ण परमेश्वर) के रूप में श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन है। इसलिए यह 'भागवत' है।

देवी भागवत (शक्ति प्रधान): इसमें 'भगवती' (सृष्टि की सर्वोच्च आद्यशक्ति) की महिमा का वर्णन है। व्याकरण के अनुसार, भगवती से संबंधित ग्रंथ को भी 'भागवत' ही कहा जाता है।

२. प्राचीनता और प्रामाणिकता के तर्क (कौन सा पुराना है?) आधुनिक शोधकर्ताओं और प्राचीन विद्वानों के अनुसार दोनों ग्रंथों के पक्ष में ये बातें कही जाती हैं:
देवी भागवत का तर्क (शाक्त पक्ष): महापुराणों के लक्षणों में एक नियम है कि महापुराण वही होगा जिसमें 'गायत्री मंत्र' की व्याख्या से शुरुआत होगी। देवी भागवत की शुरुआत सीधे गायत्री मंत्र के ध्यान से होती है, इसलिए शाक्त विद्वान इसे सबसे पुराना और असली महापुराण मानते हैं।
श्रीमद्भागवत का तर्क (वैष्णव पक्ष): ऐतिहासिक और साहित्यिक दृष्टि से श्रीकृष्ण प्रधान श्रीमद्भागवत दुनिया भर में सबसे ज़्यादा प्रसिद्ध, अनुवादित और पढ़ी जाने वाली किताब है। ९वीं से १२वीं शताब्दी के बीच के कई महान संतों (जैसे आदि शंकराचार्य के बाद के आचार्यों) ने इसके श्लोकों के प्रमाण दिए हैं।
सरल शब्दों में फैसला इतिहासकारों के अनुसार, श्रीमद्भागवत (कृष्ण प्रधान) ग्रंथ को समाज में बहुत पहले ही 'महापुराण' के रूप में भारी लोकप्रियता और सर्वमान्य स्वीकृति मिल गई थी। इसी कारण आम तौर पर छपने वाली १८ पुराणों की लिस्ट में देवी भागवत का नाम अलग से नहीं दिखता और उसे उपपुराण की श्रेणी में गिन लिया जाता है।

#हमारेपुराण

14/07/2026

श्रीमद देवी भागवत महापुराण

पिछले पोस्ट मे हमने इसकी महीमाँ के बारे मे पड़ा था अब हम समझेंगे की विवाद है क्या 👇

महापुराण' के दर्जे पर विवाद (The Status Debate)
दो भागवत पुराण: 👉हिंदू परंपरा में 'भागवत' नाम से दो पुराण प्रसिद्ध हैं—एक श्रीमद्भागवत पुराण (जिसमें भगवान कृष्ण की महिमा है) और दूसरा देवी भागवत पुराण।विद्वानों के मत: वैष्णव संप्रदाय के लोग कृष्ण प्रधान भागवत को 18 महापुराणों में गिनते हैं और देवी भागवत को उपपुराण मानते हैं। वहीं, शाक्त संप्रदाय (देवी उपासक) के अनुसार देवी भागवत ही मुख्य महापुराण है। हालांकि, दोनों ही ग्रंथों को समाज में महापुराण जैसा ही सर्वोच्च आदर प्राप्त है।

देवी भागवत (देवी महापुराण) को १८ महापुराणों या १८ उपपुराणों की सामान्य सूची में अलग से इसलिए नहीं रखा जाता क्योंकि यह 'भागवत' नाम के अधिकार को लेकर होने वाले एक पुराने विवाद का हिस्सा है। इसे आसान शब्दों में इस प्रकार समझें:
१. 'भागवत' नाम की एक ही सीट (The Slot for 'Bhagavata') महर्षि वेदव्यास द्वारा संकलित मुख्य १८ महापुराणों की सूची में 'भागवत पुराण' नाम का एक स्लॉट (स्थान) तय है। लेकिन हिंदू परंपरा में 'भागवत' नाम के दो बड़े और अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ उपलब्ध हैं:श्रीमद्भागवत पुराण: जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और विष्णु के अवतारों की कथा है (वैष्णव ग्रंथ)।देवी भागवत महापुराण: जिसमें आदिशक्ति दुर्गा की महिमा और देवी गीता है (शाक्त ग्रंथ)।चूंकि महापुराणों की संख्या १८ ही रखनी थी, इसलिए दोनों संप्रदायों के बीच इस बात को लेकर मतभेद हो गया कि असली 'महापुराण' कौन सा है।
२. सूचियों में यह कैसे शामिल है?ऐसा नहीं है कि यह सूची से बाहर है। अलग-अलग संप्रदाय अपनी-अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार इसे १८ महापुराणों के अंदर ही गिनते हैं:शाक्त संप्रदाय का मत: जो लोग देवी (शक्ति) के उपासक हैं, वे महापुराणों की सूची में श्रीकृष्ण वाले भागवत पुराण को हटाकर देवी भागवत को महापुराण मानते हैं। उनके लिए श्रीकृष्ण वाला भागवत एक उपपुराण है।वैष्णव संप्रदाय का मत: जो लोग भगवान विष्णु और कृष्ण के उपासक हैं, वे श्रीकृष्ण वाले भागवत पुराण को महापुराण मानते हैं। उनके अनुसार देवी भागवत १८ महापुराणों से अलग एक 'महा-उपपुराण' या विशिष्ट ग्रंथ है।

इससे सम्बंधित और मेहत्पूर्ण जानकारी हम अगले पोस्ट मे डालेंगे
#हमारेपुराण

14/07/2026

❤️❤️क्या आप जानते हो श्रीमद् देवी भागवत महापुराण' का नाम 18 पुराणों की सूची मे क्यों नहीं आता ❤️❤️

पहले समझते है ये पुराण है क्या 👉 श्रीमद् देवी भागवत महापुराण) हिंदू धर्म के शाक्त संप्रदाय का सबसे प्रमुख और पवित्र ग्रंथ है, जिसमें सर्वोच्च सत्ता के रूप में आदि शक्ति मां दुर्गा की महिमा का वर्णन है। इसमें मुख्य रूप से ब्रह्मांड की उत्पत्ति, देवी के विभिन्न अवतारों, और उनकी शक्तियों के रहस्यों को 12 स्कंधों (भागों) और 18,000 श्लोकों के माध्यम से समझाया गया है।

इस महापुराण से जुड़ी मुख्य बातें और विशेषताएं इस प्रकार हैं:

१. सर्वोच्च सत्ता के रूप में देवी (Adi Shakti as Supreme)त्रिदेवों की जननी: इस पुराण के अनुसार, श्रीमद् देवी भागवत में मां दुर्गा (आदिशक्ति) को ही परम ब्रह्म माना गया है।सृष्टि संचालक: उन्हीं की शक्ति से ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना करते हैं, विष्णु जी पालन करते हैं और शिव जी संहार करते हैं।

२. मुख्य विषय और कथाएं (Key Topics)देवी के रूप: इसमें महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, दस महाविद्याओं और नवदुर्गा के अवतारों की विस्तार से कथाएं हैं।महिषासुर वध: मां दुर्गा द्वारा महिषासुर, मधु-कैटभ, और शुंभ-निशुंभ जैसे राक्षसों के संहार का विस्तृत इतिहास इसमें मिलता है।देवी गीता: इस पुराण के सातवें स्कंध में 'देवी गीता' शामिल है, जिसमें स्वयं माता ने हिमालय को अत्यंत गूढ़ आध्यात्मिक, दार्शनिक और योग ज्ञान दिया है।मणिद्वीप का वर्णन: इसमें देवी के सर्वोच्च निवास स्थान 'मणिद्वीप' का अद्भुत और प्रतीकात्मक वर्णन किया गया है

इसके सेकंड पार्ट मे हम हम समझेंगे की इसमें विवाद क्या है और ज्यों इसे 18 पुराण या 18 उपपुराण मे नहीं रखा है

#हमारेपुराण





14/07/2026

हमारे पुराण सही है?
ऐसी बहुत बातें कईं लिखी है जो सही नहीं हो सकती?
👇

यह सच है कि कई पुराणों में ऐसी बातें मिलती हैं जो आज के तार्किक या वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मेल नहीं खातीं। कई विद्वान और समाज सुधारक भी इस बात से सहमत रहे हैं कि पुराणों में सभी बातें एक जैसी प्रामाणिक नहीं हैं।इस स्थिति को सही संदर्भ में समझने के लिए निम्नलिखित बातों पर गौर करना ज़रूरी है:

१. प्रक्षेप (Interpolations) या बाद में जोड़ी गई बातें या मिलावट: 👉पुराण सदियों तक मौखिक (oral tradition) रूप से चलते रहे और बाद में लिखे गए। इस दौरान कई राजाओं, पुजारियों और लेखकों ने अपनी सुविधा या सामाजिक बदलावों के अनुसार नई कहानियाँ और नियम जोड़ दिए।विरोधाभास: यही कारण है कि एक ही पुराण में एक जगह महिलाओं या निचली जातियों का सम्मान मिलता है, तो दूसरी जगह उनके खिलाफ बातें लिखी मिलती हैं।

२. रूपक और प्रतीकवाद (Allegory and Symbolism)कहानियों का ताना-बाना: 👉पुराण इतिहास की किताबें नहीं हैं। इनका उद्देश्य जटिल दार्शनिक बातों को आम जनता को समझाने के लिए कहानियों का रूप देना था।अतिशयोक्ति: राजाओं की प्रशंसा या किसी देवता की महिमा बढ़ाने के लिए लेखकों ने अक्सर अतिशयोक्ति (exaggeration) का सहारा लिया, जो सुनने में अवास्तविक लगती हैं।

३. वेदों की तुलना में स्थानसनातन धर्म में सर्वोच्च स्थान: 👉हिंदू दर्शन में वेद और उपनिषद को 'श्रुति' (परम सत्य) माना जाता है। पुराणों को 'स्मृति' (समय के साथ बदलने योग्य) माना जाता है।
नियम: विद्वानों का स्पष्ट नियम है कि यदि पुराण की कोई बात वेद या मानवीय तर्क के खिलाफ जाती है, तो उसे अमान्य कर दिया जाता है
#हमारेपुराण






14/07/2026

Rampal ke anuyayi ab koi award nahi de rahe hai rampal ko
Aur na koi samman samaroh ho raha hai
N koi baad ka pani nikal rahe hai
Aur n hi kahin ped lagane ja rahe hai aur n hi koi makan banae ke prachar chal rahe hai
Kyonki jamanat mil g*i n ab

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