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14/05/2026

*इस भीषण गर्मी में 900 किलोमीटर का लंबा विहार करके आज वंदनीय आर्यिका श्री विज्ञानमति माता जी सासंघ ने महाराष्ट की धरा नागपुर में विराजमान आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के दर्शन किए*

एक बार मुनि संघ एक गाँव में विराजमान थे दूर-दूर से लोग उनके दर्शन करने आते थे, उन्हीं दिनों एक व्यापारी भी उनके पास पहुँ...
12/05/2026

एक बार मुनि संघ एक गाँव में विराजमान थे दूर-दूर से लोग उनके दर्शन करने आते थे, उन्हीं दिनों एक व्यापारी भी उनके पास पहुँचा, उसके पास धन की कोई कमी नहीं थी, लेकिन मन हमेशा अशांत रहता था,
व्यापारी ने विनयपूर्वक बड़े महाराज से कहा,
“गुरुदेव, मेरे पास सब कुछ है, फिर भी मन को शांति नहीं मिलती, इसका कारण क्या है?”
आचार्य श्री ने पास पड़ी मिट्टी की एक मुट्ठी उठाई और बोले—
“यदि इस मिट्टी को मुट्ठी में कसकर पकड़ोगे, तो हाथ में दर्द होगा, लेकिन जैसे ही छोड़ दोगे, हल्कापन महसूस होगा”
व्यापारी कुछ समझ नहीं पाया, तब बड़े महाराज श्री बोले—
“संसार की वस्तुओं को आवश्यकता तक रखो, लेकिन उनसे मोह मत करो, संग्रह बढ़ता है तो चिंता भी बढ़ती है”
व्यापारी ने पूछा—
“तो सच्चा सुख किसमें है?”
मुनि श्री शांत स्वर में बोले—
“सच्चा सुख त्याग, संयम और संतोष में है, बाहर का धन कभी मन को नहीं भर सकता”
उनकी वाणी व्यापारी के हृदय में उतर गई। उसने उसी दिन से जरूरतमंदों की सहायता करना शुरू किया और सरल जीवन अपनाया। धीरे-धीरे उसका मन शांत रहने लगा।

#मेरे #गुरुवर #मेरे #भगवान

🔥 इसी चरणों की रज पाने के लिए लाखों भक्त तरसते है भगवन आचार्य भगवान के पावन चरणों में त्रिवार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु 🙏
12/05/2026

🔥 इसी चरणों की रज पाने के लिए लाखों भक्त तरसते है भगवन

आचार्य भगवान के पावन चरणों में त्रिवार नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु 🙏

भव्य सायकल रैरी आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के दर्शन एवं  अंतरीक्षजी तीर्थ पधारणे का श्रीफल चढाणे के लिये शिरपूर जैन...
12/05/2026

भव्य सायकल रैरी
आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के दर्शन एवं अंतरीक्षजी तीर्थ पधारणे का श्रीफल चढाणे के लिये शिरपूर जैन से मुक्तागिरी सिद्ध क्षेत्र (फरवरी १९९८)

☝️मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए  कक्षा 7  में हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'भाषा भारती' में...
26/04/2026

☝️मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 7 में हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'भाषा भारती' में प्रथम अध्याय के रूप में 'मेरी भावना' कविता को सम्मिलित किया गया है।

26/04/2026

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तिरुमलाई प्राचीन काल से ही एक महत्वपूर्ण जैन केंद्र रहा है। मान्यता है कि आचार्य भद्रबाहु के साथ आए 8,000 जैन मुनियों ने...
26/04/2026

तिरुमलाई प्राचीन काल से ही एक महत्वपूर्ण जैन केंद्र रहा है। मान्यता है कि आचार्य भद्रबाहु के साथ आए 8,000 जैन मुनियों ने यहाँ कठोर तपस्या की और निर्वाण प्राप्त किया। यहाँ श्री समन्तभद्राचार्य के चरणचिह्न भी विराजमान हैं।

यहाँ 1024 ईस्वी का एक शिलालेख भी प्राप्त होता है, जिसमें ‘कुन्दवै जिनालय’ मंदिर का उल्लेख मिलता है। इस शिलालेख में राजेन्द्र चोल प्रथम द्वारा किए गए विजयों का वर्णन तथा कुन्दवै जिनालय मंदिर को अर्पित दानों का उल्लेख मिलता है।

कुन्दवै जिनालय मंदिर 10वीं शताब्दी का एक प्राचीन जैन मंदिर है, जिसका निर्माण चोल वंश की राजकुमारी कुन्दवै द्वारा करवाया गया माना जाता है। उनके द्वारा निर्मित ऐसे दो जैन स्थलों में से यह एकमात्र सुरक्षित स्थल है, क्योंकि दूसरा स्थल दादापुरम अब अस्तित्व में नहीं है।

यह मंदिर तिरुमलाई पर्वत की चोटी पर स्थित है, जहाँ भगवान महावीर की प्रतिमा के साथ दोनों ओर सिंहों की आकृतियाँ उत्कीर्ण हैं। यह मंदिर आंशिक रूप से शैल-गुहा को काटकर तथा आंशिक रूप से निर्मित किया गया है। यह मंदिर अपनी समृद्ध मूर्तिकला और भित्ति-उत्कीर्ण शिल्पकला के लिए विशेष प्रसिद्ध है।

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