11/01/2020
।।सतगुरु सेती हेत कर रामभजन सु प्रीति । परिहर विषय विकार कु मना मनोरथ जीति ।।
रामचरण गुरु राम सु अधिक प्रीति सुख तोय । राज अग्नि जल सु अधिक किया महा दुख होय ।।
हेत प्रीति कासु करू दुजा सु दुख होय । रामचरण गुरु राम बिन सगा न सूझै कोय ।।
रामचरण जंन राम का रामभजन अति सुक्ख । छिन एक बिसरै नाम कु तबही दीरघ दुख ।।
।।बाणी रामचरण जी महाराज हेत प्रीति को अंग ।।
श्री महाराज फरमाते है कि आपका दुनियावी प्रेम मोहब्बत आपको ले डूबेगा । दुनिया का ख्याल दुनिया की चिंता अच्छे बुरे की फिक्र करना आपका काम नही है । यहाँ हर इंसान प्राणी मात्र अपने भले बुरे कर्मो का दंड फल भुगतेगा । यदि आपने बीच मे टांग अड़ाई तो आप भी लपेटे में आ जाएंगे ।
आपका काम है अपना जन्म सुधारना अपनी भक्ति ज्ञान बैराग की पूंजी इकठ्ठा करना और यहाँ से रवानगी लेना ।
दुखिया से मिलोगे दुखी होवोगे सुखी से मिलोगे सुखी करेगा । दुख भंजन मालिक का नाम है । जिसको दुख है वो गाफिल है मालिक के नाम से अनजान हैं ।
आपको सचेत रहना है ।
और यह सभ तभी सम्भव है जब आप उस सन्त सतगुरु से प्रेम प्रीति बढ़ाए जो नाम का भेदी हो । आपको वो सीढ़ी वो रस्सी पकड़ा देवे जिससे आप इस अंधे कुँए से निकल सके जिसमे कोई किसी का सगा नही है ।
यहाँ के आनन्द सब खोटे है । जैसे कुत्ता हड्डी चबाता है तो खून उसके दांतो में से आ रहा होता है । जबकि वो समझता है हड्डी में से खून आ रहा है । अपने मन के घोड़े दौड़ाना बन्द कीजिए जो कुछ मिल गया है ।
उसका शुक्र मनाइए । भूख भूख पुकारने से हाथ में आए का मजा जाता रहता है । देखिए दुनिया मे क्या उथल पुथल हो रही है । एक ही रात में लोग घर बार देश से बेगाने हो जाते हैं ।
दो ही प्रेम परतीति प्रीति के योग्य है एक सतगुरु दूसरे राम परमात्मा साध संगत का सहारा तीसरा है जो जीव को विश्राम दे देता है ।
प्रीति प्रेम की मनाही नही है परन्तु अगले का भी तो कोई ठिकाना होवे । वो तो खुद मालिक को पुकारता है । रोता परेशान हाल है । बन्दा वो होवे जो आप मुक्त होवे और आपको तार देवे ।
जब तक भक्ति साधना सेवा संगत में लगे हो तभी तक काल जाल जम चोट से बचे रहोगे । जैसे ही ऊँघने लगे झटका लग जावेगा । ज्ञान भक्ति बैराग में जब तक मन लगा रहता है ।
मालिक की दया कृपा बनी रहती है । जैसे ही ध्यान हटा काल अपने पूरे गुस्से का इजहार कर डालता है । मालिक के नाम से ध्यान हटाया तो वो भी नाराज होते हैं ।