04/06/2025
जयगुरूदेव
गुरु का ध्यान कर प्यारे, बिना इस के नहीं छुटना ।
नाम के रंग में रंग जा, मिले तोहि धाम निज अपना॥
गुरु की सरन दृढ़ कर ले, बिना इस काज नहीं सरना ।
लाभ और मान क्यों चाहे, पड़ेगा फिर तुझे देना॥
करम जो जो करेगा तू, वही फिर भोगना भरना ।
जगत के जाल में ज्यों त्यों, हटो मरदानगी करना॥
जिन्होने मार मन डाला, उन्ही को सूरमा कहना ।
बड़ा बैरी ये मन घट में, इसी का जीतना कठिना॥
पड़ो तुम इसही के पीछे, और सबही जतन तजना ।
गुरू की प्रीत कर पहिले, बहुरि घट शब्द को सुनना॥
मान लो बात यह मेरी, करे मत और कुछ जतना ।
हार जब जाय मन तुझसे, चढ़ा दे सुर्त को गगना॥
और सब काम जग झूठा, त्याग दे इसी को गहना ।
कहै जयगुरुदेव स्वामी जी समझाई, गहो अब नाम की सरना॥
जयगुरूदेव