15/02/2025
लव-जिहाद" एक वास्तविकता
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का देहांत बेटी के (लव) जेहाद में फंसने,विधर्मी दामाद द्वारा सबकुछ लूटकर व भांजी के साथ भागने से हुआ!!*
*भारत के सारे हिन्दू व उनकी बेटियाँ जो चाहे भाजपा से या तथाकथित धर्मनिरपेक्ष और गंगा-जमुनी दलों से जुड़े हों,यह लेख अवश्य पढ़ें ताकि शीला दीक्षित के जीवन से कुछ सीखा जा सके।*
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अपने अंतिम समय में शीला दीक्षित अपनी बेटी लतिका के मुस्लिम पति मौहम्मद इमरान से मिले धोखे व गद्दारी से बेहद आहत व परेशान थीं,जो माँ-बेटी दोनों की कमाई धन-दौलत लेकर,लतिका को छोडकर और उनकी भांजी को लेकर भाग गया। तब वो अपनी बेटी लतिका के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित और अवसादग्रस्त हो गईं।*
*शीला दीक्षित की बेटी लतिका ने इमरान मोहम्मद से 1996 में विवाह किया जो 20 वर्ष पश्चात 2016 में उसका सारा धन लेकर,जमीन व मकान धोखे से अपने नाम कराकर भाग गया। वर्ष 2016 में इमरान को लतिका की FIR पर गिरफ्तार भी किया गया। लतिका ने आरोप लगाया कि इमरान के किसी दूसरी महिला से संबंध हैं,इसीलिए वह उसे मारता-पीटता भी है। यह किसी भी मां के लिए चिंता का विषय होता है और बुढापे में बच्चों व धन के प्रति लगाव काफी बढ जाता है।*
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में जो चर्चा थी,उसके अनुसार शीला दीक्षित की जीवनभर की कमाई का लेखा-जोखा उनका यह मुस्लिम दामाद ही रखता था,वो सारे पैसे लेकर,शीला की बेटी को छोडकर उनकी भांजी को लेकर भाग गया। पुलिस में यह प्रकरण गया,परन्तु मुस्लिम दामाद द्वारा कमाई का राज खोल देने की धमकी(ब्लैकमेलिंग) देने के कारण शीला दीक्षित ने चुप रहना ही ठीक समझा।*
*अब आप समझ सकते हैं कि किसी की बेटी को छोडकर व युवा भांजी को लेकर कोई मुस्लिम दामाद भाग जाये,उपर से जीवनभर की कमाई को भी ले जाये तो फिर शिकार व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली क्यों ना हो, बुरी तरह से आहत तो होगा ही और टेंशन में भी आ ही जाएगा। इतना आहत होकर अवसादग्रस्त होना बड़ी बीमारी का घर होता है। यह बीमारी ही शीला दीक्षित की मृत्यु का कारण बनी।*
एक हिन्दू ब्राह्मण मगर कांग्रेसी धर्मनिरपेक्ष ताकतवर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की बेटी लतिका द्वारा पहली बेवकूफ़ी एक जेहादी पर अन्धा भरोसा करके विवाह से की गई,दूसरी बेवकूफ़ी अनुभवी मुख्यमंत्री माँ शीला द्वारा मुस्लिम दामाद पर अन्धा भरोसा करके अपनी कमाई का लेखा-जोखा सौंपकर की गई और तीसरी सबसे बड़ी बेवकूफ़ी शीला की भांजी द्वारा बहन के बेवफा मुस्लिम पति पर पूर्ण अँधी होकर उसके साथ भागकर की गई। ऐसे बिलकुल ही अक्ल के अंधे लोगों के साथ यह सब नहीं होगा तो क्या होगा?*
*इस अत्यंत गंभीर घटना से सभी सनातन बंधुओं,उनके परिवारों व बेटियों को शिक्षा लेनी चाहिए कि एक बहुत ही शक्तिशाली परिवार से गद्दारी कर एक मुस्लिम ने उनकी अस्मिता को लव-जिहाद में किस प्रकार नष्ट-भ्रष्ट कर दिया। उन्हें घर का रखा न घाट का!*
इस घटना का सबसे बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण पहलू व अनुभव तो यह है कि जब एक अदना-सा मुस्लिम एक राज्य की ताकतवर मुख्यमंत्री,उसकी बेटी व भांजी के साथ भी इतना बड़ा षड्यंत्र करके,उनके जीवन तहस-नहस करके,उनकी वैयक्तिक, आत्मिक, पारिवारिक, सामाजिक, राजनैतिक मान-प्रतिष्ठा को धूल-धूसरित कर देता है,फिर भी वो और उनका दल व हितैषी नेता उसके विरुद्ध कुछ नहीं कर पाते तो एक आम आदमी क्या कर पायेगा? और आजकल तो इसकी भयंकर हवा बह रही है!