Khajrana Ganesh Mandir

Khajrana Ganesh Mandir श्री खजराना गणेशजी को प्रणाम करके अपनी आयु, कामना और अर्थ की सिद्धि के लिये उन का नित्य स्मरण करे।

इस मंदिर के बारे में प्रसिद्ध है कि यहां हर किसी की मुराद पूरी होती है। यहां जो भी भक्त अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिये गणेश जी के पीठ पर उल्टा स्वास्तिक बनाता है, गणपति जी उसकी मनोकामना पूर्ण करते हैं। मनोकामना पूर्ण होने के पश्चात पुनः सीधा स्वास्तिक बनाने भक्‍त यहां आते हैं। इसी तरह मुराद मन में रखकर यहां धागा बांधने की भी परंपरा है। इच्‍छा पूर्ण होने पर वह धागा खोल दिया जाता है।

📿 जब भी मन में उलझन हो, बस एक बार सच्चे मन से बप्पा को याद कर लीजिए… कहते हैं, उनकी कृपा से सबसे कठिन रास्ते भी सरल हो ज...
02/06/2026

📿 जब भी मन में उलझन हो, बस एक बार सच्चे मन से बप्पा को याद कर लीजिए… कहते हैं, उनकी कृपा से सबसे कठिन रास्ते भी सरल हो जाते हैं।

गणपति बप्पा मोरया! मंगलमूर्ति मोरया! 🙏

🙏 तिलकुट (सकट) चौथ की कथा से जुड़ा भाव 🙏तिलकुट (सकट) चौथ केवल व्रत नहीं, बल्कि भगवान गणेश की करुणा, सेवा और भक्तवत्सलता ...
08/01/2026

🙏 तिलकुट (सकट) चौथ की कथा से जुड़ा भाव 🙏

तिलकुट (सकट) चौथ केवल व्रत नहीं, बल्कि भगवान गणेश की करुणा, सेवा और भक्तवत्सलता का स्मरण है। जिस तरह सकट चौथ की कथा में गणेश जी अपनी माता और भक्तों के कष्ट हरते हैं, उसी तरह इस कथा में भी वे अपने ही पश्चाताप के लिए भक्त के घर सेवक बन जाते हैं।

तिल, गुड़ और तिलकुट का भोग हमें यह सिखाता है कि भगवान को आडंबर नहीं, शुद्ध मन और सच्ची भावना प्रिय होती है। गणेश जी का नौकर बनकर सेवा करना यही दर्शाता है कि प्रभु अपने भक्त के द्वार स्वयं चलकर आते हैं, जब भक्ति निष्कलंक होती है।

🌺 सकट चौथ का व्रत और यह कथा दोनों हमें यह संदेश देती हैं कि गणपति जी हर रूप में—पूज्य, रक्षक और सेवक बनकर—अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। 🌺

भगवान गणेश अपने भक्तों से कितनी गहरी करुणा रखते हैं, इसका एक अत्यंत भावुक प्रसंग है।
कहा जाता है कि एक बार भगवान गणेश को भूख लगी। उन्होंने एक सेठ के खेत से अनाज के कुछ दाने तोड़कर खा लिए। परंतु जैसे ही उन्हें इसका आभास हुआ, उनके मन में गहरा पश्चाताप जाग उठा। अपने इस कृत्य के प्रायश्चित स्वरूप, उन्होंने सेठ के घर पर एक साधारण नौकर बनकर सेवा करने का निर्णय लिया।

सेठ के घर वे पूरी निष्ठा और प्रेम से सेवा करने लगे। एक दिन सेठानी राख से हाथ धो रही थीं। गणेश जी ने कोमलता से उनका हाथ थाम लिया और मिट्टी से हाथ धुलवा दिए। सेठानी ने इसे अनुचित समझकर सेठ से शिकायत कर दी। सेठ ने कारण पूछा तो गणेश जी ने विनम्रता से कहा,
“सेठ जी, राख से हाथ धोने से लक्ष्मी जी दूर हो जाती हैं, जबकि मिट्टी से हाथ धोने से लक्ष्मी जी का आगमन होता है।”
यह सुनकर सेठ का मन प्रसन्न हो गया। वह समझ गया कि उसका यह नौकर साधारण नहीं, बल्कि अत्यंत ज्ञानी है।

कुछ समय बाद सेठ ने गणेश जी से सेठानी को कुंभ मेले में स्नान कराने को कहा। वहां सेठानी किनारे बैठकर स्नान कर रही थीं। गणेश जी ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें स्वच्छ जल में ले जाकर विधिपूर्वक डुबकी लगवाई। सेठानी ने फिर शिकायत की।
इस बार गणेश जी बोले,
“सेठ जी, किनारे का पानी अशुद्ध था। मैंने इन्हें शुद्ध जल में स्नान कराया ताकि इन्हें इस जन्म के साथ-साथ अगले जन्म में भी राजपाट और सुख की प्राप्ति हो।”
सेठ फिर संतुष्ट हो गया और मन ही मन इस नौकर की दिव्यता को महसूस करने लगा।

एक दिन सेठ के घर हवन की तैयारी हो रही थी। सेठानी काली चुनरी ओढ़कर हवन में जाने लगीं। गणेश जी ने उन्हें स्नेहपूर्वक रोका और कहा कि शुभ कार्यों में काले वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए, लाल चुनरी अधिक शुभ होती है।
सेठानी नाराज़ हो गईं, पर गणेश जी ने समझाया कि काले वस्त्र पहनकर किए गए शुभ कार्य पूर्ण फल नहीं देते। सेठ ने यह बात मानी और सेठानी को लाल चुनरी ओढ़कर हवन में बैठाया।

एक दिन सेठ ने बड़ी पूजा रखी, परंतु गणेश जी की मूर्ति लाना भूल गया। चिंतित होकर उसने नौकर बने गणेश जी से पूछा कि अब क्या किया जाए। गणेश जी मुस्कुराए और बोले,
“मुझे ही मूर्ति के रूप में विराजमान कर दीजिए।”
सेठ को यह मजाक लगा और वह क्रोधित हो गया। तभी गणेश जी ने अपना दिव्य स्वरूप प्रकट कर दिया। साक्षात भगवान गणेश को सामने देखकर सेठ और सेठानी के नेत्र अश्रुओं से भर आए। दोनों ने श्रद्धा से उनकी पूजा की।

पूजा के पश्चात भगवान गणेश अंतर्ध्यान हो गए। बाद में स्वप्न में दर्शन देकर उन्होंने कहा,
“मैंने तुम्हारे खेत से कुछ दाने खा लिए थे। उसी का प्रायश्चित करने के लिए मैंने तुम्हारे घर सेवक बनकर सेवा की। तुम्हें किसी प्रकार का पश्चाताप नहीं करना चाहिए।”

भगवान गणेश की कृपा से सेठ का घर धन-धान्य, सुख-शांति और समृद्धि से भर गया।

🙏 ऐसी है हमारे विघ्नहर्ता गणेश जी की महिमा—जो अपने भक्त के लिए स्वयं सेवक बन जाते हैं। 🙏

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Ganeshpuri Main Road, Ganeshpuri, Khajrana
Indore
452016

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