10/05/2026
Swarn Akarshan Bhairav (स्वर्णाकर्षण भैरव) भगवान शिव के एक अत्यंत कल्याणकारी और सात्विक रूप माने जाते हैं। "स्वर्ण" का अर्थ है सोना और "आकर्षण" का अर्थ है खींचने वाला या आकर्षित करने वाला।
इनके स्वरूप और महत्व से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
1. परिचय और स्वरूप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वर्ण आकर्षण भैरव को "धन और समृद्धि के देवता" के रूप में पूजा जाता है। भैरव के अन्य रूप जहाँ उग्र या रौद्र माने जाते हैं, वहीं स्वर्ण आकर्षण भैरव का स्वरूप सौम्य, शांत और वरदान देने वाला है। उनके शरीर का रंग सोने की तरह चमकता हुआ (स्वर्ण वर्ण) बताया गया है और वे पीले रंग के वस्त्र धारण करते हैं।
2. पौराणिक महत्व
कुबेर के संरक्षक: ऐसा माना जाता है कि इन्होंने ही धन के देवता कुबेर को उनकी निधि और संपत्ति की रक्षा करने की शक्ति प्रदान की थी।
कलियुग में कल्याणकारी: शास्त्रों के अनुसार, कलियुग में आर्थिक कष्टों और दरिद्रता को दूर करने के लिए इनकी साधना विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।
3. आध्यात्मिक प्रतीक
वे अपने हाथों में एक स्वर्ण पात्र (अमृत कलश) धारण करते हैं। यह पात्र जीवन में केवल भौतिक धन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक है।
4. उपासना का लाभ
साधकों का मानना है कि उनकी भक्ति से निम्नलिखित लाभ होते हैं:
आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति।
व्यापार और करियर में प्रगति।
घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास।
इनकी पूजा विशेष रूप से भैरव अष्टमी या रविवार के दिन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।।