Acharya Sanjeev Mishra

Acharya Sanjeev Mishra श्री राम कथा व हनुमान कथा के माध्यम से ईश्वर प्रेम,भारतीय संस्कृति, भाईचारे का सन्देश व ज्ञान

वर्तमान में लगभग 28 रामायण प्रचलन में हैं: 1. अध्यात्म रामायण, 2. वाल्मीकि की 'रामायण' (संस्कृत), 3. आनंद रामायण, 4. 'अद...
09/01/2020

वर्तमान में लगभग 28 रामायण प्रचलन में हैं: 1. अध्यात्म रामायण, 2. वाल्मीकि की 'रामायण' (संस्कृत), 3. आनंद रामायण, 4. 'अद्भुत रामायण', 5. रंगनाथ रामायण (तेलुगु), 6. कवयित्री मोल्डा रचित मोल्डा रामायण (तेलुगु), 7. रूइपादकातेणपदी रामायण (उड़िया), 8. रामकेर (कंबोडिया), 9. तुलसीदास की 'रामचरित मानस' (अव‍धी), 10. कम्बन की 'इरामावतारम' (तमिल), 11. कुमार दास की 'जानकी हरण' (संस्कृत), 12. मलेराज कथाव (सिंहली), 13. किंरस-पुंस-पा की 'काव्यदर्श' (तिब्बती), 14. रामायण काकावीन (इंडोनेशियाई कावी), 15. हिकायत सेरीराम (मलेशियाई भाषा), 16. रामवत्थु (बर्मा), 17. रामकेर्ति-रिआमकेर (कंपूचिया खमेर), 18. तैरानो यसुयोरी की 'होबुत्सुशू' (जापानी), 19. फ्रलक-फ्रलाम-रामजातक (लाओस), 20. भानुभक्त कृत रामायण (नेपाल), 21. अद्भुत रामायण, 22. रामकियेन (थाईलैंड), 23. खोतानी रामायण (तुर्किस्तान), 24. जीवक जातक (मंगोलियाई भाषा), 25. मसीही रामायण (फारसी), 26. शेख साद (या सादी???), मसीह की 'दास्ताने राम व सीता', 27. महालादिया लाबन (मारनव भाषा, फिलीपींस), 28. दशरथ कथानम (चीन) आदि।

सर्वप्रथम श्रीराम की कथा भगवान श्री शंकर ने माता पार्वतीजी को सुनाई थी। उस कथा को एक कौवे ने भी सुन लिया। उसी कौवे का पु...
08/01/2020

सर्वप्रथम श्रीराम की कथा भगवान श्री शंकर ने माता पार्वतीजी को सुनाई थी। उस कथा को एक कौवे ने भी सुन लिया। उसी कौवे का पुनर्जन्म कागभुशुण्डि के रूप में हुआ। काकभुशुण्डि को पूर्व जन्म में भगवान शंकर के मुख से सुनी वह रामकथा पूरी की पूरी याद थी। उन्होंने यह कथा अपने शिष्यों को सुनाई। इस प्रकार रामकथा का प्रचार-प्रसार हुआ। भगवान शंकर के मुख से निकली श्रीराम की यह पवित्र कथा अध्यात्म रामायण के नाम से विख्यात है।

हिम्मत ना हारिए, प्रभु ना बिसारिए ।हँसते मुस्कुराते हुये,जिंदगी गुजारिए ॥काम ऐसे कीजिये कि,जिनसे हो सब का भला । बातें ऐस...
06/01/2020

हिम्मत ना हारिए, प्रभु ना बिसारिए ।
हँसते मुस्कुराते हुये,जिंदगी गुजारिए ॥

काम ऐसे कीजिये कि,जिनसे हो सब का भला । बातें ऐसे कीजिये,जिमनें हो अमृत भरा ।
मीठी बोली बोल सबको,प्रेम से पुकारिए । कड़वे बोल बोलके ना,जिंदगी बिगाड़िए ॥

अच्छे कर्म करते हुये,दुःख भी अगर पा रहे । पिछले पाप कर्मों का,भुगतान वो भुगता रहे ।
सद्गुरु की भक्ति करके,पाप को मिटाइए । गल्तियों से बचते हुये,साधना बढ़ाइए ॥

हिम्मत ना हारिए,प्रभु ना बिसारिए ।
हँसते मुस्कुराते हुये,जिंदगी गुजारिए ॥

हृदय की किताब पर,ये बात लिख लीजिए । बनके सच्चे भक्त सच्चे,दिल से अमल कीजिये ।
करके अमल बनके कमल,तरिए और तारिए । जग में जगमगाती हुई,जिंदगी गुजारिए ॥

हिम्मत ना हारिए,प्रभु ना बिसारिए ।
हँसते मुस्कुराते हुये,जिंदगी गुजारिए ॥

मुश्किलों मुसीबतों का,करना है जो खात्मा । हर समय कहना तेरा,शुक्र है परमात्मा ।
फरियादें करके अपना,हाल ना बिगाड़िए ।जैसे प्रभु राखें वैसे,जिंदगी गुजारिए ॥

हिम्मत ना हारिए,प्रभु ना बिसारिए ।
हँसते मुस्कुराते हुये,जिंदगी गुजारिए ॥

भगवान के दर्शन के लिए मनुष्यों को भरत जैसा भक्त बनना पड़ेगा। उन्हें देखने के लिए संत जैसी दृष्टि होनी चाहिए। भगवान केवल भ...
04/01/2020

भगवान के दर्शन के लिए मनुष्यों को भरत जैसा भक्त बनना पड़ेगा। उन्हें देखने के लिए संत जैसी दृष्टि होनी चाहिए।
भगवान केवल भाव के भूखे होते है। उन्हें पैसा, सोना-चांदी से नहीं प्राप्त किया जा सकता। भगवान श्रीराम को प्राप्त करने के लिए सच्ची भक्ति की जरूरत होती है।

राजा दशरथ और इनकी तीनों रानियां इस बात को लेकर चिंतित रहती हैं कि पुत्र नहीं होने पर उत्तराधिकारी कौन होगा। इनकी चिंता द...
02/01/2020

राजा दशरथ और इनकी तीनों रानियां इस बात को लेकर चिंतित रहती हैं कि पुत्र नहीं होने पर उत्तराधिकारी कौन होगा। इनकी चिंता दूर करने के लिए ऋषि वशिष्ठ सलाह देते हैं कि आप अपने दामाद ऋंग ऋषि से पुत्रेष्ठी यज्ञ करवाएं। इससे पुत्र की प्राप्ति होगी।

ऋंग ऋषि का विवाह राजा दशरथ की इकलौती पुत्री शांता से हुआ था। राजा दशरथ ने अपनी पुत्री शांता को रोमपाद नामक के राजा को गोद दे दिया था। शांता के कहने पर ही ऋंग ऋषि राजा दशरथ के लिए पुत्रेष्ठी यज्ञ करने के लिए तैयार हुए थे।

इसका कारण यह था कि यज्ञ कराने वाले का जीवन भर का पुण्य इस यज्ञ की आहुति में नष्ट हो जाता। राजा दशरथ ने ऋंग ऋषि को यज्ञ करवाने के बदले बहुत सा धन दिया जिससे इनके पुत्र और कन्या का भरण-पोषण हुआ और यज्ञ से प्राप्त खीर से राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। ऋंग ऋषि फिर से पुण्य अर्जित करने के लिए वन में जाकर तपस्या करने लगे।

नया साल आप पर नए मौकों की बरसात करे, हर कदम पर सफलता हो और खुशियां मनाने के कारण मिले। नया साल मुबारक हो..!!
01/01/2020

नया साल आप पर नए मौकों की बरसात करे, हर कदम पर सफलता हो और खुशियां मनाने के कारण मिले।
नया साल मुबारक हो..!!

 #रामेश्‍वरम समुद्र तट एक शांत समुद्र तट है और यहां का  #छिछला  #पानी तैरने और  #सन बेदिंग के लिए आदर्श है। रामेश्‍वरम प...
31/12/2019

#रामेश्‍वरम समुद्र तट एक शांत समुद्र तट है और यहां का #छिछला #पानी तैरने और #सन बेदिंग के लिए आदर्श है। रामेश्‍वरम प्रसिद्ध #हिन्दू तीर्थ केंद्र है। महाकाव्‍य #रामायण के अनुसार भगवान #श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने के पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी। रामेश्वरम का शिवलिंग श्रीराम द्वारा स्थापित शिवलिंग है।

प्रभु  #श्रीराम ने प्रयाग संगम के समीप यमुना नदी को पार किया और फिर पहुंच गए चित्रकूट।  #चित्रकूट वह स्थान है, जहां  #रा...
30/12/2019

प्रभु #श्रीराम ने प्रयाग संगम के समीप यमुना नदी को पार किया और फिर पहुंच गए चित्रकूट।
#चित्रकूट वह स्थान है, जहां #राम को मनाने के लिए भरत अपनी सेना के साथ पहुंचते हैं। तब जब #दशरथ का देहांत हो जाता है।
भरत यहां से राम की #चरण #पादुका ले जाकर उनकी चरण पादुका रखकर राज्य करते हैं।

|| राम कथा में वीर जटायु || राम कथा में वीर जटायु का अपना अनुपम स्थान तुलसी ने बडभागी कहकर, किया जटायु का यशगान । सीताहर...
27/12/2019

|| राम कथा में वीर जटायु ||
राम कथा में वीर जटायु का अपना अनुपम स्थान तुलसी ने बडभागी कहकर, किया जटायु का यशगान ।
सीताहरण समय रावण से, युद्ध किया वीर गति पाये शूरवीर शरणागत रक्षक, धर्म प्राण त्यागी कहलाये ।
परहित में अपने प्राणों का, धर्मवीर करते बलिदान रामकथा में वीर जटायु का अनुपम स्थान ।
अँत समय बोले रघुवर लो अमर तुम्हें कर देता हूँ कहे जटायु नहीं तात बस मुक्ति का वर लेता हूँ ।
प्राण विहिन देह गोद मेँ,लिए राम करुणा बरसाये कमल नयन की अश्रुधार से, प्रभु अन्तिम स्नान कराये ।
ऋणी रहुँगा गिद्धराज का, लक्ष्मण से बोले भगवान रामकथा में वीर जटायु का अनुपम स्थान ।
त्रेता युग के अवतारी नर अपने हाथों चिता रचाकर मात पिता समान अग्नि दाह दे त्रिभुवन के स्वामी करुणाकर ।
साधु जटायु धन्य जटायु महाभाग स्तुत्य महान रामकथा में वीर जटायु का अपना अनुपम स्थान ।।
!! जय श्री राम जी जय लखनलाल जी !!

श्री राम और वानर सेना की चिंता का विषय था कैसे पूरी सेना समुद्र के दुसरे और जा सकेंगे। श्री राम जी ने समुद्र से निवेदन क...
23/12/2019

श्री राम और वानर सेना की चिंता का विषय था कैसे पूरी सेना समुद्र के दुसरे और जा सकेंगे। श्री राम जी ने समुद्र से निवेदन किया की वे रास्ता दें ताकि उनकी सेना समुद्र पार कर सके। परन्तु कई बार कहने पर भी समुद्र ने उनकी बात नहीं मानी तब राम ने लक्ष्मण से धनुष माँगा और अग्नि बाण को समुद्र पर साधा जिससे की पानी सुख जाये और वे आगे बढ़ सकें।

जैसे ही श्री राम ने ऐसा किया समुद्र देव डरते हुए प्रकट हुए और श्री राम से माफ़ी मांगी और कहा हे नाथ, ऐसा ना करें आपके इस बाण से मेरे में रहते वाले सभी मछलियाँ और जीवित प्राणी का अंत हो जायेगा। श्री राम ने कहा – हे समुद्र देव हमें यह बताएं की मेरी यह विशाल सेना इस समुद्र को कैसे पार कर सकते हैं।

समुद्र देव ने उत्तर दिया – हे रघुनन्दन राम आपकी सेना में दो वानर हैं नल और नील उनके स्पर्श करके किसी भी बड़े से बड़े चीज को पानी में तैरा सकते हैं। यह कह कर समुद्र देव चले गए।

उनकी सलाह के अनुसार नल और नील ने पत्थर पर श्री राम के नाम लिख कर समुद्र में फैंक के देखा तो पत्थर तैरने लगा। उसके बाद एक के बाद एक करके नल नील समुद्र में पत्थर को समुद्र में फेंकते रहे और समुद्र के अगले छोर तक पहुच गए।

जय जय श्री सीताराम स्व इन्दर सिंह सेंगर (डैडी) की स्मृति में श्रीमद भगवत कथा ज्ञानगंगा सप्ताह दिनांक 5 जनवरी से 11 जनवरी...
21/12/2019

जय जय श्री सीताराम
स्व इन्दर सिंह सेंगर (डैडी) की स्मृति में
श्रीमद भगवत कथा ज्ञानगंगा सप्ताह
दिनांक 5 जनवरी से 11 जनवरी 2020 तक
समय - दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक
स्थान - मंशापूर्ण हनुमान मंदिर कारसदेव नगर इंदौर
विशाल शोभा यात्रा -:
दिनांक 5 जनवरी 2020 रविवार प्रातः 10 बजे से
विशाल भंडारा -:
दिनांक 11 जनवरी 2020 रविवार शाम 7 बजे से
कथा व्यास आचार्य संजीव मिश्रा जी

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527, Shyam Nagar Main Near Mount Carmel School. Sukhliya
Indore
452010

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