08/05/2022
हरि ओम ,
सादर वंदे ,
आज हम जिनके बारे में बात करने वाले हैं वो जीवन में सशक्त , बली , और निर्भय रहने की प्रेरणा देते है | जो शास्त्र और शस्त्र दोनो में प्रवीण हैं , और जीवन में आई हुई हर परिस्थिति का यथोचित , योग्य रीति से , उत्तम रीति से उत्तर देना जानते हैं ,साथ ही हमें भी इसी की प्रेरणा देते हैं | जो सप्त चिरंजीवी में से एक हैं और आज भी इस पृथ्वी पर विराजमान हैं | हम बात कर रहे हैं , भगवान परशुराम की |
भगवान परशुराम , श्रीविष्णु के छठे अवतार थे | इनका जन्म अक्षय तृतीया को , मध्यप्रदेश में , महू के निकट जानापाव नामक स्थल पर हुआ था | इनके पिता महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका थीं | अक्षय तृतीया के अक्षय पुण्य के समान , भगवान श्री परशुराम का शास्त्र और शस्त्र दोनो का अगाध ज्ञान था | परशुराम के जन्म के समय उनका नाम रामभद्र था | कालांतर में , परशु धारण करने के कारण वे परशुराम कहलाए | इनका एक नाम भार्गव राम भी है |
इनके जीवन की अनेक कहानियों का वर्णन सुनने में आता हैं | भगवान परशुराम ने अपने पिता और गुरु महर्षि जमदग्नि के कहने पर , अपनी माता रेणुका का वध कर दिया था | इसके पीछे की कहानी है की जब एक दिन माता रेणुका समीप के कुंड से जल भर रही थीं , वहां उन्हें एक गंधर्व दिखा जो अपनी पत्नियों के साथ लीलाएं कर रहा था | उन्हें देखकर रेणुका के मन में किंचित सा भाव आ गया , की इनका जीवन कितना सुखी है | परंतु तभी उन्हें अपनी और अपने कुल की मर्यादा का स्मरण हुआ , और उन्होंने तुरंत ही उस विचार को मन से निकाल दिया | परंतु महर्षि जमदग्नि को इस बात का पता चल चुका था | वे माता रेणुका पर बहुत क्रोधित हुए और परशुराम को उनका वध करने की आज्ञा दे डाली | परशुराम ने बिना एक भी क्षण गवाएं अपनी माता का मस्तक धड़ से अलग कर दिया | जमदग्नि परशुराम की आज्ञापालन को देखकर अचंभित हो गए | फलस्वरूप उन्होंने परशुराम से वर मांगने को कहा | परशुराम ने मातृवश लगाव हेतु जमदग्नि से पुनः माता रेणुका को जीवित करने व उन्हें इस घटना की विस्मृति हो जाए ऐसा वर मांगा | जमदग्नि ने उन्हें वर प्रदान किया और माता रेणुका पुनः जीवित हो गई ।
लेकिन जमदग्नि को उन्हें दंडित करने का क्या कारण था ? देखा जाए तो उन्होंने कोई कृत्य नहीं किया था , मन में विचार आया था बस , वह भी क्षणिक | परंतु
उस समय किसी भी अपराध के लिए दंड का निर्धारण क्या किया , और किसने किया है दोनो देखकर किया जाता था । एक ही अपराध के लिए विशेष व्यक्तियों को कठोर दण्ड और सामान्य व्यक्ति को उसकी तुलना में कम दंड मिलता था | कारण ऐसा की एक मंत्री , या सेनापति , समाज के एक बहुत बड़े वर्ग को प्रभावित करते थे | उनके एक गलत कृत्य से पूरे समाज पर गलत असर जाता था | इसलिए उनको अंकुश में रखने हेतु इस व्यवस्था को रखा गया था | जमदग्नि उस वक्त के सबसे बड़े तपस्वियों में से एक थे | समाज उनके आदर्शो पर चलता था | इस कारण उन्होंने माता रेणुका को शिक्षा करना जरूरी माना |
परशुराम ने अपनी माता का वध क्यों किया | अपनी ही माता का वध करना महापाप है | मगर वह गुरु की आज्ञा से बंधे हुए थे | और वह जमदग्नि की शक्तियों से भली भांति परिचित थे | वे जानते थे जमदग्नि उन्हें पुनः जीवित कर सकते थे | इस कारण उन्होंने यह कृत्य किया |
उस काल में सहस्त्रबाहु नाम का दुष्ट राजा था | उसने कड़ी तपस्या कर भगवान दत्तात्र्य को प्रसन्न कर लिया और अजेय रहने का वरदान मांगा | फलस्वरूप उसे सहस्र हाथो का बल मिला , इसलिए वह सहस्त्रबाहु कहलाया |
सहस्त्रबाहु को अपनी ताकत का घमंड था | उसने उद्दंडता की और ऋषि जमदग्नि की कामधेनु गाय को बलात उठा ले गया | जिस समय यह घटना हुई , तब परशुराम आश्रम में नहीं थे | परशुराम जब वापस आए और आश्रम को अस्त व्यस्त देखा तो क्रोध से भर उठे और सहस्त्रबाहु का वध करने का संकल्प लिया | परशुराम ने उसे पराजित किया और अपनी गाय लेकर लौट आए | बाद में उसी के वंशजों ने ऋषि जमदग्नि की हत्या कर दी |
परशुराम को उन सभी को उचित दंड दिया और उनका वध किया |
परशुराम के बारे में एक बात और प्रचलित है की उन्होंने पूरी धरती को २१ बार क्षत्रिय विहीन कर दिया था | परंतु उसका अर्थ है की उन्होंने ऐसे २१ राजवंशों का नाश किया जो प्रजा का शोषण करते थे | संपूर्ण क्षत्रिय कुल का नहीं अपितु उनका जो जनता पर अत्याचार करते थे |
परशुराम के जीवन में शक्ति का ,बल का अत्यधिक महत्व रहा , परंतु वे सत्य धर्म के मार्ग पर रहे , इसलिए वंदनीय हुए , पूजनीय हुए |
उनके जीवन से सीख लेने के लिए नीचे लिखी हुई पंक्तियां श्रेष्ठ हैं
सच पूछो, तो शर में ही
बसती है दीप्ति विनय की
सन्धि-वचन संपूज्य उसी का
जिसमें शक्ति विजय की।
सहनशीलता, क्षमा, दया को
तभी पूजता जग है
बल का दर्प चमकता उसके
पीछे जब जगमग है...