30/05/2021
आप सभी को भगवान विष्णु के चौथे अवतार #श्रीनृसिंह_भगवान के प्राकट्योत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं.
गीता में चौथे अध्याय के एक श्लोक में भगवान कृष्ण ने कहा है :
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥
इसका मतलब है, हे भारत, जब-जब धर्म की हानि होने लगती है और अधर्म बढ़ने लगता है, तब-तब मैं स्वयं की रचना करता हूं, अर्थात् जन्म लेता हूं. मानव की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म की पुनःस्थापना के लिए मैं अलग-अलग युगों (कालों) में अवतरित होता हूं.
नृसिंह भगवान :.........................
ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु के दस अवतारों में से चौथा अवतार नृसिंह हैं. इस अवतार में लक्ष्मीपति नर-सिंह मतलब आधे शेर और आधे मनुष्य बनकर प्रकट हुए थे. इसमें भगवान का चेहरा शेर का था और शरीर इंसान का था. नृसिंह अवतार में उन्होंने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए उसके पिता राक्षस हिरणाकश्यप को मारा था.
नरसिंह जयंती कथा
प्राचीन काल के समय असुरराज हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानता था और अपनी प्रजा से स्वयं की पूजा करने के लिए प्रताड़ित करता था लेकिन उनका बेटा प्रहलाद स्वयं भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। जब इस बात का हिरण्यकश्यप को पता चला तो उसने अपने बच्चे को कई यातनाएं दीं लेकिन उन्होंने भगवान विष्णु की आराधना नहीं छोड़ी। हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था कि उसे न तो मनुष्य मार सकता है और न ही पशु। न घर के अंदर और न घर के बाहर उसको मारा जा सकता। न उसको दिन में मार सकते हैं और न ही रात में। न अस्त्र से और न शस्त्र से। न आकाश में और न ही धरती पर। यह वरदान पाकर हिरण्यकश्यप काफी अहंकारी हो गया था। उसने अपने पुत्र के प्राण लेने के लिए कई बार प्रयास किया लेकिन प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं हुआ। एक दिन जब प्रहलाद ने कहा कि भगवान हर जगह हैं तो हिरण्यकश्यप ने चुनौती देते हुए कहा कि इस स्तंभ में तेरे भगवान क्यों नहीं दिखते। यह कहने के बाद उसने स्तंभ पर प्रहार कर दिया। तभी स्तंभ में से भगवान विष्णु नरसिंह अवतार के रूप में प्रकट हुए। नरसिंह भगवान हिरण्यकश्यप को महल के चौखट पर लेकर चले गए और उन्होंने से अपनी जांघों पर लिटाकर उसके सीने को अपने नाखूनों से फाड़ दिया और अपने भक्त की रक्षा की।
आप सभी को भगवान विष्णु के चौथे अवतार #श्रीनृसिंह_भगवान के प्राकट्योत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं.