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26/12/2021

हमारे भारतवर्ष की धरती पर कई महान वीरों जन्म लिया देश के लिए बड़ी बड़ी लड़ाइयां लड़ कर भारत के इतिहास के सुनहरे पन्नों म...
24/11/2021

हमारे भारतवर्ष की धरती पर कई महान वीरों जन्म लिया देश के लिए बड़ी बड़ी लड़ाइयां लड़ कर भारत के इतिहास के सुनहरे पन्नों में अपना नाम दर्ज कराया. लेकिन वक़्त के साथ-साथ उनका महत्व धीरे-धीरे भुला दिया गया हैं. ऐसे ही एक योद्धा तानाजी मालुसरे भी हैं. तानाजी मराठा साम्राज्य के सेनापति थे. वीर छत्रपति शिवाजी राव के बारे में तो आपने सुना ही होगा उनके काल में उन्होंने ढेरों लड़ाइयां लड़ी और उन्हें जीतकर कई के लिए अपने नाम कर लिए. आज हम उनके ही सबसे अजीज दोस्त तानाजी मालुसरे की बात कर रहे हैं. तो आइए जानते हैं तानाजी मालुसरे जैसे वीर योद्धा के बारे में विस्तार से….नाम – तानाजी मालुसरे
दूसरा नाम – सरदार कलौजी
उपनाम – तानाजी
जन्म – 1600 ई
जन्म स्थान – गोन्दोली गॉव, सतारा जिला, महाराष्ट्र
राष्ट्रीयता – भारतीय
मृत्यु – 1670
शौक – सैन्य प्रदर्शन
व्यवसाय – वीर सिपाहीतानाजी का प्रारंभिक जीवन
मराठा साम्राज्य में वीर योद्धा तानाजी मालुसरे का जन्म 1600 ईसवीं में हुआ था. उनका जन्म महाराष्ट्र के ही एक छोटे से गांव जो सातारा जिले में आता था उस गांव का नाम गोदोली में हुआ था. तानाजी के पिता सरदार कलोजी और माता पार्वती बाई कलोजी थी वे दोनों ही एक हिंदू कोली परिवार से ताल्लुक रखते थे. तानाजी को बचपन से ही बच्चों की तरह खेल खेलने का नहीं बल्कि तलवारबाजी का शौक रहा था जिसके चलते वे छत्रपति शिवाजी से मिले और बचपन से ही उनके मित्र बन गए. उनकी वीरता के चर्चे दूर-दूर तक हुआ करते थे और उनकी वीरता के चलते ही उन्हें मराठा साम्राज्य में एक उच्च पद के रूप में मुख्य सूबेदार के रूप में नियुक्त कर दिए गए.तानाजी और शिवाजी की मित्रता बचपन से ही इतनी घनिष्ठ थी कि दोनों एक-दूसरे के बिना कोई भी काम करते नहीं थे भले ही वे युद्ध में लड़ना क्यों ना हो. औरंगजेब के खिलाफ उन दोनों ने युद्ध में हिस्सा लिया और युद्ध के दौरान ही औरंगजेब के द्वारा उन्हें बंदी बना लिया गया. बाद में दोनों ने मिलकर योजना बनाई और औरंगजेब के किले से वे दोनों एक साथ भाग निकले.
तानाजी का मराठा साम्राज्य में महत्वपूर्ण योगदान
सूबेदार के रूप में मराठा साम्राज्य के लिए तानाजी ने सदैव ही अपने महत्वपूर्ण योगदान को निभाते हुए अपना समर्पण दिखाया. उन्होंने देश के हालातों को देखते हुए बचपन में ही देश को पूर्ण स्वराज कराने की कसम धारण कर ली थी. बस फिर क्या था वे अपनी इस कसम को पूरा करने के लिए युद्ध के मैदान में उतर चले. इतिहास के पन्नों में उन्हें कोंडाणा किले के युद्ध मे लहराए गए अपने परचम को लेकर एक अहम स्थान मिला.

This Hindu Goddesss Form of Durga is not in India, it's at Guanyin Temple, Taiwan. The Idol of Goddess Tamshui Yuando, a...
23/11/2021

This Hindu Goddesss Form of Durga is not in India, it's at Guanyin Temple, Taiwan. The Idol of Goddess Tamshui Yuando, as it's called there 🕉️♥️



31/10/2021
ॐ शिव शिवम्।
24/10/2021

ॐ शिव शिवम्।

सनातन धर्म के महत्वपूर्ण धर्मग्रंथ रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जयंती 20 अक्टूबर को मनाई जा रही है। वाल्मीकि का जन्म...
20/10/2021

सनातन धर्म के महत्वपूर्ण धर्मग्रंथ रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जयंती 20 अक्टूबर को मनाई जा रही है। वाल्मीकि का जन्म हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार अश्विन महीने की पूर्णिमा को हुआ था। हर साल अश्विन महीने की पूर्णिमा के दौरान, देश के विभिन्न हिस्सों में कई धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

जन्म
महर्षि वाल्मीकि के जन्म के बारे में कई किंवदंतियां हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि उनका जन्म महर्षि कश्यप और देवी अदिति के 9वें पुत्र वरुण और उनकी पत्नी चारशिनी से हुआ था। इस क्षेत्र में पहला श्लोक लिखने का श्रेय महर्षि वाल्मीकि को भी जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार, प्रचेता नाम के एक ब्राह्मण के पुत्र, उनका जन्म रत्नाकर के रूप में हुआ था, जो कभी डकैत थे। नारद मुनि से मिलने से पहले उन्होंने कई निर्दोष लोगों को मार डाला और लूट लिया, जिन्होंने उन्हें एक अच्छे इंसान और भगवान राम के भक्त में बदल दिया। वर्षों के ध्यान अभ्यास के बाद वह इतना शांत हो गया कि चींटियों ने उसके चारों ओर टीले बना लिए। नतीजतन, उन्हें वाल्मीकि की उपाधि दी गई, जिसका अनुवाद "एक चींटी के टीले से पैदा हुआ" है।

लिखा रामायण का स्वरूप
वाल्मीकि ने नारद मुनि से भगवान राम की कथा सीखी, और उनकी देखरेख में, उन्होंने काव्य पंक्तियों में भगवान राम की कहानी लिखी, जिसने महाकाव्य रामायण को जन्म दिया। रामायण में उत्तर कांड सहित 24,000 श्लोक और सात कांड हैं। रामायण लगभग 480,002 शब्द लंबा है, जो एक अन्य हिंदू महाकाव्य, महाभारत के संपूर्ण पाठ की लंबाई का एक चौथाई या एक पुराने ग्रीक महाकाव्य इलियड की लंबाई का लगभग चार गुना है। वाल्मीकि जयंती पर, वाल्मीकि संप्रदाय के सदस्य शोभा यात्रा या परेड आयोजित करते हैं, जिसमें वे भक्ति भजन और भजन गाते हैं।
वाल्मीकि जयंती आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। वाल्मीकि जयंती, जिसे परगट दिवस के रूप में भी जाना जाता है, 20 अक्टूबर, 2021 को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि के लिए पूजा का समय 19 अक्टूबर को शाम 07:03 बजे शुरू होगा और 20 अक्टूबर को रात 08:26 बजे समाप्त होगा।

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विजयदशमी 🎇🔥की आप सभी भक्तजनों😇 को ढेर सारी शुभकामनाएं प्रभु श्री राम 🕉️आप सभी के ऊपर अपनी कृपा बनाए रखें और हमारी आशा ह ...
15/10/2021

विजयदशमी 🎇🔥की आप सभी भक्तजनों😇 को ढेर सारी शुभकामनाएं प्रभु श्री राम 🕉️आप सभी के ऊपर अपनी कृपा बनाए रखें और हमारी आशा ह सुख शांति संप्रभुता बनाए रखेंगे जय सियाराम
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महानवमी की ढेर सारी शुभकामनाएं सभी भक्त जनों को।।।।।।।।।।
14/10/2021

महानवमी की ढेर सारी शुभकामनाएं सभी भक्त जनों को










भगवान श्री विष्णु नरसिंह अवतारहिरण्यकश्यप को ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त था कि वह न तो किसी मनुष्य द्वारा मारा जा सके न ह...
10/10/2021

भगवान श्री विष्णु नरसिंह अवतार
हिरण्यकश्यप को ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त था कि वह न तो किसी मनुष्य द्वारा मारा जा सके न ही किसी पशु द्वारा। न दिन में मारा जा सके, न रात में, न जमींन पर मारा जा सके, न आसमान में। इस वरदान के नशे में आकर उसके अंदर अहंकार आ गया। जिसके बाद उसने इंद्र देव का राज्य छीन लिया और तीनों लोक में रहने वाले लोगों को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उसने घोषणा कर दी कि मैं ही इस पूरे संसार का भगवान हूं और सभी मेरी पूजा करो।
उधर, हिरण्कश्यप के स्वभाव से विपरीत उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था। पिता के लाख मना करने और प्रताड़ित करने के बाद भी वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। जब प्रहला ने अपने पिता हिरण्यकश्यप की बात नहीं मानी तो उसने अपने ही बेटे को पहाड़ से धकेल कर मारने की कोशिश कि, लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की जान बचा ली। इसके बाद हिरण्कश्यप ने प्रहलाद को जिंदा जलाने की नाकाम कोशिश की।

अंत में क्रोधित हिरण्कश्यप ने अपने पुत्र प्रहलाद को दीवार में बांध कर आग लगा दी और बोला बता तेरा भगवान कहां है, प्रहलाद ने बताया कि भगवान यहीं हैं, जहां आपने मुझे बांध रखा है। जैसे ही हिरण्कश्यप अपने गदे से प्रह्लाद को मारना चाहा, वैसे ही भगवान विष्णु नरसिंह का अवतार लेकर खंभे से बाहर निकल आए और हिरण्कश्यप का वध कर दिया। जिस दिन भगवान नृसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध करके भक्त प्रहलाद के जीवन की रक्षा की, उस दिन को नरसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है।

Mahadev♥️ Take some time out to read urs religious texts Vedas PuranaShiva puran.DM for PC  🙏🏻🕉️🛐.                      ...
08/10/2021

Mahadev♥️ Take some time out to read urs religious texts Vedas Purana
Shiva puran.
DM for PC
🙏🏻🕉️🛐.

Gayatri Devi is an incarnation of Saraswati Devi, consort of Lord Brahma, symbolising the “shakti” (strength) and “dev” ...
06/10/2021

Gayatri Devi is an incarnation of Saraswati Devi, consort of Lord Brahma, symbolising the “shakti” (strength) and “dev” (quality) of Knowledge, Purity and Virtue. Saraswati Devi is held to be the patronness of the Arts, being a poet and musician, as well as skillful composer. In the form of Gayatri Devi, with the blessings of Lord Brahma, she is believed to have given the four Vedas to mankind.

Gayatri is depicted seated on a lotus. She is depicted with five faces representing the pancha pranas /pancha vayus (five lives/winds): prana, apana,vyana, udana, samana, of the five principles/ elements (pancha tatwas) earth, water, air, fire, sky (prithvi, jala, vayu, teja, aakasha). She has 10 hands carrying the five ayudhas: shankha; chakra, kamala, varada, abhaya, kasha, ankusha, ujjwala utensil, rudrakshi mala

Gayatri, Savitri and Saraswati are three goddesses representing the presiding deities of the famous Gayatri mantra chanted thrice a day. Gayatri is the presiding deity of the morning prayer and rules over the Rigveda and the garhapatya fire. Every grihasta (householder) was expected to keep 5 or 3 sacred fires ( Five fires: ahavaneeya, dakshagni, garhapatya, sawta, aavasadha.) in his house to perform Vedic rituals.

In Sanskrit, there are definite rules that regulate poetry: rhyme and meter are not written whimsically. The Gayatri Mantra has a Vedic metre of 24 syllables. Amongst the regulated poetry, the Gayatri mantra, chanted by properly qualified persons, is the most prominent. The Gayatri mantra is mentioned in the Srimad Bhagavatam. Great sins are said to be expiated by a pious recitation of this Gayatri verse which reads as follows:
In Bhagavadgita (Ch. 10. 35), Lord Krishna states:

Brihat saama latha saamnaam
Gayatri chandasaam aham
Maasaanam maarga sirshoham
Ritunaam kusumaakaraha
Among the hymns, I am the Brihat saama sung to Lord Indra, Of the poetry, I am the Gayatri verse sung daily by the initiated, Of all the nuwsas (months), I am the margasira (November- December) Among all the ritus (seasons), I am the flower-bearing spring.

Engraved Upanishad Shloka University of Warsaw, poland🇲🇨
08/08/2021

Engraved Upanishad Shloka University of Warsaw, poland🇲🇨

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