Indore Youth Sikh Community

Indore Youth Sikh Community Page created with the aim to increase awareness about Sikh religion through volunteer work based on health, education and social justice.

26/12/2025

हर गुरुपुरब पर जब सुखासन होता है, उस समय अक्सर स्वागत और घोषणाओं पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है। यह देखकर मन विचार करता है कि कहीं हम गुरू साहिबों की ਹाज़ਰੀ और उस पਵित्र ਪਲ से ज़ਿਆਦਾ अपनी announcements और welcome speeches को महत्व तो नहीं देने लगे?

जहाँ गुरू ਸਾਹिब ਦੀ ਹਾਜ਼ਰੀ ਹੋਵੇ, वहाँ मुख्य ध्यान ਸਿਮਰਨ, ਸ਼ਬਦ, ਅਤੇ ਸਹਿਜਤਾ पर रहना चाहिए।
स्वागत और घोषणाएँ ज़रूरी हो सकती हैं, परन्तु वो सुखासन के बाद भी हो सकती हैं।

अगर किसी को अपना स्वागत सुनाना है या Announcement करनी है,
तो उचित होगा कि वह समापन तक रुके, क्योंकि सबसे पहले सम्मान गुरू ਸਾਹिब का है — न कि हमारी announcements का।
Aaj fir guru gobind singh jayanti par vahi hua
Sonu Bagga Manpreet Kaur Kalsi Monu Bhatia Harpal Singh Bhatia - Monu Singh kalsi

25/11/2025

25 नवंबर 2025

अमरदास हॉल, इंदौर में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का 350वां शताब्दी शहीदी समागम अत्यंत अनुशासन और श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। गुरु नाम का जाप करते हुए पूरा समागम शांति, मर्यादा और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।

सबसे सराहनीय बात यह रही कि सुखासन के समय कोई भी घोषणा नहीं की गई। प्रबंधक कमेटी ने इस बात का विशेष ध्यान रखा, जो वास्तव में प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय है।
इसके लिए प्रबंधक कमेटी का हृदय से धन्यवाद। आशा है कि भविष्य में भी यही अनुशासन और मर्यादा इसी प्रकार बनी रहे।

05/11/2025

सभी संगत को सादर निवेदन है कि जब भी जन्मदिवस का समागम होता है और जन्म का समय आता है, उस समय हमें विशेष रूप से शांत और अनुशासन में रहना चाहिए। यह क्षण ध्यान और भक्ति का होता है, जिसमें हमें अपने मन को एकाग्र कर प्रभु-भक्ति में लीन होना चाहिए।

कृपया इस दौरान फूलों के लिए बेचैन होकर इधर-उधर न जाएं। सभी फूल अपनी बारी पर सभी को मिलेंगे। अनुशासन बनाए रखें ताकि समागम की पवित्रता और गरिमा बनी रहे।
आपके सहयोग से ही यह आयोजन और भी शुभ और सफल बन सकेगा।

धन्यवाद।

05/11/2025

हर गुरुपुरब पर जब सुखासन होता है, उस समय अक्सर स्वागत और घोषणाओं पर ज़्यादा ध्यान दिया जाता है। यह देखकर मन विचार करता है कि कहीं हम गुरू साहिबों की ਹाज़ਰੀ और उस पਵित्र ਪਲ से ज़ਿਆਦਾ अपनी announcements और welcome speeches को महत्व तो नहीं देने लगे?

जहाँ गुरू ਸਾਹिब ਦੀ ਹਾਜ਼ਰੀ ਹੋਵੇ, वहाँ मुख्य ध्यान ਸਿਮਰਨ, ਸ਼ਬਦ, ਅਤੇ ਸਹਿਜਤਾ पर रहना चाहिए।
स्वागत और घोषणाएँ ज़रूरी हो सकती हैं, परन्तु वो सुखासन के बाद भी हो सकती हैं।

अगर किसी को अपना स्वागत सुनाना है या Announcement करनी है,
तो उचित होगा कि वह समापन तक रुके, क्योंकि सबसे पहले सम्मान गुरू ਸਾਹिब का है — न कि हमारी announcements का।

08/11/2024

चुनाव जीतने का असली मतलब: धर्म और समाज की सेवा, ना कि केवल राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन

आज बाबा जी की कृपा से जो भी चुनाव जीतकर आए हैं, उन्हें लाख-लाख बधाई। लेकिन याद रखें, चुनाव जीतने का मतलब केवल सीट पर कब्जा करना नहीं है। जनता ने अपना समय निकालकर आपको वोट दिया है। अब यह हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम उनके विश्वास की कद्र करें। हमें अपनी ऊर्जा केवल राजनीति में नहीं, बल्कि समाज और धर्म की उन्नति में लगानी चाहिए। असल जीत तब होगी जब हम समाज के हर वर्ग को धर्म, शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ सकें।

क्या हमारा मकसद केवल चुनाव जीतना है?

क्या हमारा असली मकसद चुनाव जीतकर सिर्फ गुरुद्वारों में राजनीतिक पद हासिल करना है? क्या हमें धर्म के लिए लोगों को जोड़ने की जगह केवल सत्ता हासिल करने का प्रयास करना चाहिए? आज हमारे पास धन, संसाधन और बुनियादी ढांचा है। लेकिन क्या हम इनका सही उपयोग कर रहे हैं? हम अक्सर इन्हें संपत्ति को बढ़ाने या पूंजीगत आय के लिए उपयोग करते हैं, जबकि असली संपत्ति तो व्यक्ति हैं, जो धर्म से जुड़े हुए हैं।

हमें क्या करना चाहिए, लेकिन हम कर क्या रहे हैं?

गुरुद्वारे में हमें #कीर्तनकारों और #ज्ञानीयों का सम्मान करना चाहिए। उनके अधिकारों का ध्यान रखना चाहिए, उन्हें अच्छी सुविधाएं, वेतन और आर्थिक लाभ देना चाहिए। ये वही लोग हैं जो समाज को #धर्म से जोड़ते हैं। क्या आपके अंदर इतनी शक्ति है कि आप बिना देखे-समझे इतनी #गुरबाणी याद कर सकते हैं? जब कोई धार्मिक अवसर आता है, तो लोग केवल #कीर्तन सुनने, #लंगर खाने आते हैं और प्रधान अपने भाषणों में केवल अपनी श्रेष्ठता की बातें करते हैं। लेकिन अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि इस आयोजन के पीछे कौन सा इतिहास है, इसका क्या महत्व है।

समाज में जागरूकता लाने की ज़रूरत

हमें ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करना चाहिए जहां लोग जानें कि कौन से #त्योहार क्यों मनाए जाते हैं। इसके पीछे क्या कारण है और इसका धर्म और समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है। सिर्फ गुरुद्वारे की #टाइलें और बुनियादी ढांचे पर पैसा खर्च करने से कुछ नहीं होगा, अगर हमें समाज की वास्तविक उन्नति करनी है तो हमें #गुरुमत_संगीत, #इतिहास, #भाषा, #गातका (Martial Arts) और अन्य विषयों पर संगत को शिक्षित करना होगा। इसके लिए हमें गुरुद्वारों में #शिक्षकों की नियुक्ति करनी चाहिए।

गुरुद्वारों के हॉल का सही उपयोग

अगर हमारे पास गुरुद्वारे में हॉल हैं, तो हमें उन्हें केवल विशेष अवसरों पर ही नहीं खोलना चाहिए। बल्कि, हमें वहां पर लोगों की #स्किल_एन्हांसमेंट के लिए नियमित कक्षाएं और #वर्कशॉप आयोजित करनी चाहिए। लेकिन आजकल हम हॉल को बंद रखते हैं और केवल बड़े आयोजनों के लिए खोलते हैं, जो कि सही नहीं है।
सिख समाज के पास सबसे ज़्यादा संपत्तियाँ हैं, जितनी शायद ही किसी और के पास हों। ये संपत्तियाँ स्कूल, कॉलेज, हॉल आदि के रूप में हैं। अगर इन संपत्तियों का सही उपयोग किया जाए, तो समाज को जागरूक भी किया जा सकता है।

हमारे पास स्कूल और कॉलेज हैं, लेकिन अगर हम अच्छी सुविधाएँ नहीं देंगे—चाहे वो शिक्षकों की गुणवत्ता हो, उनकी फीस हो, इंफ्रास्ट्रक्चर हो या कोई अन्य चीज़ हो—तो कोई भी अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश वहाँ क्यों कराएगा? क्या प्रधान खुद अपने बच्चों को ऐसी जगह भेजेगा जहाँ सुविधाएँ अधूरी हों?

अब सवाल आता है कि अगर हम बेहतरीन सेवाएँ देंगे, तो उसकी फीस और चार्जेस भी उसी स्तर की होनी चाहिए। सबसे पहले हमें अच्छी शुरुआत करनी होगी। अगर हम अपने संसाधनों का सही और उचित तरीके से उपयोग करेंगे, तो पैसा, ऊर्जा, और समय बर्बाद नहीं होगा। ऐसे में हम प्रभावी दाम पर अच्छी सेवाएँ दे सकते हैं। जब हम अच्छी सेवाएँ प्रदान करेंगे, तो बहुत से लोग सही मूल्य देने के लिए भी तैयार होंगे। इसके अलावा, हम आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए एक परीक्षा रख सकते हैं, जिसमें उत्तीर्ण होने पर उनकी फीस माफ की जा सकती है।

आजकल हर किसी को सबसे अच्छा चाहिए, कोई भी बेकार या कम गुणवत्ता की चीज़ों के साथ समझौता नहीं करना चाहता। अगर किसी को कमतर चीज़ें चाहिए होंगी, तो उनके पास पहले से ही बहुत सारे विकल्प उपलब्ध हैं।

हमारे पास मानव संसाधन, पैसा और संपत्ति हैं। फिर हम इनका सही उपयोग क्यों नहीं कर पा रहे हैं? इसका एक मुख्य कारण भ्रष्टाचार है। हमें यह समझना चाहिए कि यह कोई व्यवसाय नहीं है, बल्कि समाज की संपत्ति है, और इसका मुनाफा व्यक्तिगत जेब में नहीं, बल्कि समाज के कल्याण में लगना चाहिए।

हमारे सामने इंदौर में अग्रवाल पब्लिक स्कूल का एक उदाहरण है, जो भी एक समाज का स्कूल है। फिर वह क्यों इतना प्रसिद्ध है?

युवाओं को धर्म से जोड़ना

#युवा हमारे धर्म और समाज का भविष्य हैं। हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हें #इतिहास, #भाषा, #गुरमत_संगीत और धर्म के बारे में जागरूक करें। उन्हें इस बात के लिए प्रेरित करें कि वे अपने ज्ञान को समाज में बांटें और दूसरों को भी शिक्षित करें। लेकिन आज हम केवल #राजनीतिक_खेलों में उलझे हुए हैं और युवाओं को इस ओर धकेलने की बजाय उनसे दूर कर रहे हैं।

असली समाजिक योगदान

समाज का असली योगदान तब है जब हम कम से कम 40% लोगों की #स्किल_एन्हांसमेंट में योगदान दें। सिर्फ फोटो खिंचवाकर #फेसबुक पर अपलोड करने या कोई नई बिल्डिंग बनाने से हम महान साबित नहीं होते। हमें असल में धरातल पर काम करने की ज़रूरत है।

हमें नए कोर्सेज़ प्रदान करने चाहिए, जैसे कि आईटी, कंप्यूटर, खेल आदि उच्च स्तर पर। इससे बच्चों का भविष्य संवर सकेगा। अगर आज हम समाज के बच्चों को अच्छी शिक्षा और सुविधाएँ देंगे, तो भविष्य में वही बच्चे समाज को कुछ लौटाने की भावना रखेंगे, क्योंकि वे अच्छे पदों पर होंगे और उनके पास समाज के प्रति देने का जज़्बा होगा।

हमें अपनी संपत्तियों और संसाधनों का सही और बेहतर उपयोग करना चाहिए ताकि समाज का समुचित विकास हो सके।

समाज में रोजगार के अवसर प्रदान करें

हमारी विनम्र प्रार्थना है कि प्रबंधक समिति यह सुनिश्चित करे कि समाज के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर #रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं। अगर समाज का हर व्यक्ति रोजगार से जुड़ा होगा, तो उसकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, जिससे समाज का समग्र विकास भी सुनिश्चित होगा। किसी भी परिवार की प्रगति के लिए उनकी आर्थिक स्थिति का मजबूत होना बहुत जरूरी है, इसलिए हम चाहते हैं कि समिति इस दिशा में विशेष प्रयास करे।

समागम, कीर्तन या कथा वाचन के समय उचित आचरण

किसी भी धार्मिक समागम, कीर्तन, या कथा वाचन के दौरान जो भी #विद्वान, #कीर्तनी या #कथा_वाचक आते हैं, उनका पूरा सम्मान करें। वे अत्यंत शिक्षित और ज्ञानी होते हैं, इसलिए उनके प्रवचनों से अधिक से अधिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए तत्पर रहें। उनके समय की कद्र करें और उस समय को राजनीति या नेतागिरी दिखाने में व्यर्थ न करें। उनके द्वारा दिए गए ज्ञान का लाभ उठाएं और उन्हें पूरी श्रद्धा के साथ सुनें।

निष्कर्ष

हमें समझना चाहिए कि धर्म का असली उद्देश्य #समाज को जोड़ना, उसे शिक्षित करना और उसे उन्नति की ओर ले जाना है। हमें अपनी राजनीति से ऊपर उठकर समाज के विकास के लिए काम करना चाहिए। #गुरुद्वारे सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि ज्ञान का केंद्र भी बनने चाहिए।

इसलिए, आइए हम सभी मिलकर समाज के हर व्यक्ति को #शिक्षित और समर्थ बनाने की दिशा में कदम उठाएं। ताकि हम धर्म और समाज दोनों की उन्नति कर सकें, और असली बदलाव ला सकें।

आइए धर्म के असली मकसद को समझें और समाज को धर्म से जोड़ें।

धन्यवाद।

12/04/2024
02/04/2024
27/02/2024
19/02/2024

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