Baba kalu Birth place Barial

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डेरा बाबा कालू जी जन्म स्थान धाम गांव बरियाल डाक-शयाम 84 जिला होशियारपुर पंजाब में है ।
यहां बैशाखी मेला 13 अप्रैल हर साल बहुत ही धुमधाम से लगता है जिसमें देश विदेश से श्रधालु दर्शन कर जीवन सफल करते हैं।

22/04/2026
19/04/2026

13 अप्रैल 2026 बेसाखी मेले में पहुंचने पर डेरा प्रबंधक मनोता परिवार द्वारा डोल नगाडो के साथ श्रद्धालुओं संगत का स्वागत डेरा बाबा कालु जी, गांव बरियाल डाकखाना श्याम चोरासी जिला होशियारपुर में इस प्रकार हर ग्रुप का किया जाता है।
इस कार्यक्रम में बाबा कालु जी का आशिर्वाद प्राप्त करने लोग दूर-दूर से आते हैं और घर परिवार में सुख-शांति की प्राप्त करते हैं

28/01/2026

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07/01/2026

🔱 प्रस्तावना : 12 वर्षों की साधना, खोज और आत्म-मंथन

यह लेख किसी एक ग्रंथ, कथा या व्यक्ति पर आधारित नहीं है।
यह 12 वर्षों के निरंतर आत्म-मंथन, अध्ययन और लोक-संवाद का परिणाम है।

रमेश कश्यप ‘ललाना’ द्वारा यह समस्त जानकारी —

बुजुर्गों की मौखिक परंपरा

विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक ग्रंथ

संत–महंतों के अनुभव

समाज में प्रचलित भ्रांतियों के तर्कसंगत विश्लेषण

के आधार पर एकत्र की गई है।

उद्देश्य यह है कि —
👉 गुरु परंपरा को अंधविश्वास नहीं,
बोध और विवेक के रूप में समझा जाए।

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1️⃣ गुरु साहिब बाबा कालु जी : महाकाल के अंश “काल” का अवतरण

सनातन परंपरा के अनुसार
गुरु साहिब बाबा कालु जी
भगवान भोलेनाथ (महाकाल) और माता पार्वती के अंश से
पृथ्वी लोक पर प्रकट हुए दिव्य पुरुष हैं।

महाकाल के अंश होने के कारण
उन्हें “काल” कहा गया —
जो समय, अहंकार और ज्ञान — तीनों का संतुलन करता है।

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2️⃣ अमर कथा के पश्चात बरीयाल भूमि पर अवतरण की लीला

अमर कथा के घटनाक्रम के पश्चात
जब भगवान शिव
इसी बरीयाल भूमि पर तप में लीन थे,
तब माता पार्वती ने
सेवा और तप द्वारा
एक पुत्र रत्न की कामना की।

भगवान शिव ने समझाया —

> “समस्त संसार ही हमारी संतान है,
हमें किसी एक की मोह-माया में नहीं बंधना चाहिए।”

परंतु माता पार्वती की मातृत्व हठ के आगे
भगवान शिव ने
एक बालक को प्रकट किया।

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3️⃣ पंच परमेश्वर पंचायत और साधारण परिवार में पालन-पोषण

भगवान शिव ने उस बालक के
सम्पूर्ण ज्ञान के लिए समाधि का स्वांग रचते हुए
एक ऐसा विवादित घटनाक्रम उत्पन्न किया
जिससे यह सिद्ध हो सके कि —

👉 यह बालक
किसी एक वंश या सत्ता की धरोहर नहीं,
बल्कि समस्त समाज का है।

पंच परमेश्वर पंचायत के निर्णय अनुसार
उस बालक का पालन-पोषण
एक साधु मैहरा, संतान-हीन दम्पति को सौंपा गया।

उसी वंश के उत्तराधिकारी
आज मनोता गोत्र के रूप में
डेरा बरीयाल धाम के
महंत और प्रबंधक हैं।

यह परंपरा आज तक
सेवा और उत्तरदायित्व के रूप में निभाई जा रही है।

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4️⃣ पृथ्वी लोक में अवतरण का मूल उद्देश्य

बाबा कालु जी का साधारण मानव रूप में अवतरण
एक स्पष्ट संदेश देता है —

✔ ज्ञान केवल देव लोक में नहीं
✔ अनुभवजन्य ज्ञान पृथ्वी लोक की विशेषता है
✔ साधारण व्यक्ति भी गुरु हो सकता है

यही कारण बना कि
आगे चलकर
देवर्षि नारद मुनि जैसे सर्वज्ञानी को भी
इसी पृथ्वी लोक में
गुरु धारण करना पड़ा।

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5️⃣ नारद मुनि : सृष्टि के प्रथम पत्रकार

देवर्षि नारद मुनि
तीनों लोकों में
सूचना, संवाद और घटनाओं के संवाहक थे।

उनका कार्य था —

सूचना का निष्पक्ष आदान-प्रदान

लोकहित में सत्य का संचार

संवाद द्वारा संतुलन बनाना

इसी कारण उन्हें —

👉 सृष्टि का प्रथम सूचना वाहक
👉 आज की भाषा में प्रथम पत्रकार

कहा जाता है।

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6️⃣ गुरु की आवश्यकता और भगवान विष्णु का निर्देश

सभा में सम्मान
और सभा के बाद निंदा
इस द्वंद्व ने नारद मुनि को विचलित किया।

भगवान विष्णु ने स्पष्ट कहा —

> “गुरु के बिना
ज्ञान भी अहंकार बन जाता है।”

और उन्हें आदेश दिया कि —

> “पृथ्वी लोक में
जो पहला मनुष्य मिले,
उसे गुरु स्वीकार करना।”

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7️⃣ गुरु–शिष्य मिलन : प्रथम गुरु और प्रथम शिष्य

चार दिशाओं में भ्रमण के बाद
नारद मुनि को
हर बार वही साधारण वेशधारी पुरुष मिले।

चौथे दिन
दक्षिण दिशा में
बावड़ी में स्नान करते देख
नारद मुनि ने उन्हें गुरु स्वीकार किया।

🔱 गुरु–शिष्य परंपरा का प्रथम क्रम —

🛕 प्रथम गुरु :
गुरु साहिब बाबा कालु जी
(प्रकट स्थल — बरीयाल धाम)

📿 प्रथम शिष्य :
देवर्षि नारद मुनि

📢 प्रथम पत्रकार / सूचना वाहक :
नारद मुनि

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8️⃣ “झाल” नहीं, माता पार्वती का दिव्य वस्त्र

गुरु दीक्षा के समय
बाबा कालु जी ने
अपने दिव्य वस्त्र के सूत्र से
नारद मुनि को जन्यू दिया।

यह वस्त्र —

✔ माता पार्वती द्वारा प्रदत्त
✔ त्याग और दीक्षा का प्रतीक
✔ साधु परंपरा का चिन्ह

इसे “मछली पकड़ने का झाल” कहना
अज्ञानजनित भ्रांति है।

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9️⃣ गुरु आज्ञा, संशय और 84 लाख योनियाँ

गुरु आज्ञा स्पष्ट थी — धोती, जन्यू और
“नारायण–नारायण” मंत्र।

पर संशय बना रहा।

भगवान विष्णु बोले —

> “गुरु पर संदेह
रक्षा-कवच को तोड़ देता है।”

फलस्वरूप
84 लाख योनियों का विधान हुआ।

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🔟 गुरु ही संकटमोचक और रक्षा-सूत्र परंपरा

बाबा कालु जी ने
प्रतीकात्मक उपाय देकर
नारद मुनि का उद्धार किया।

नाथु राम जी और दिव्य वस्त्र की घटना के बाद
बाबा कालु जी ने
अपने हिस्से के वस्त्र को
सूत्रों में विभक्त कर दिया।

आज वही सूत्र —

📍 बरीयाल धाम
📍 पासटा धाम
📍 पंचनगला धाम

में
मनोता परिवार के महंतों द्वारा
रक्षा-कवच के रूप में प्रदान किया जाता है।

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🔚 निष्कर्ष : समाज के लिए शाश्वत संदेश

✔ गुरु वेश नहीं, तत्व है
✔ ज्ञान पद से नहीं, अनुभव से आता है
✔ आम इंसान भी गुरु हो सकता है
✔ गुरु पर विश्वास — उत्थान
✔ गुरु पर संदेह — पतन

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✍️ लेखक का विनम्र निवेदन

यह समस्त विवेचन
रमेश कश्यप ‘ललाना’ द्वारा
12 वर्षों के आत्म-मंथन के पश्चात
समाज के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

यदि कहीं त्रुटि रह जाए,
तो उसे असत्य नहीं,
सत्य की खोज का प्रयास समझा जाए।

🙏 नारायण–नारायण

https://youtu.be/dV1GURs5BOA?si=VGQjK093YhSfs68- गुरु साहिब बाबा कालू जी का गुणगान प्रभाव कश्यप जलबेडा जिला अम्बाला हरिय...
23/03/2025

https://youtu.be/dV1GURs5BOA?si=VGQjK093YhSfs68- गुरु साहिब बाबा कालू जी का गुणगान प्रभाव कश्यप जलबेडा जिला अम्बाला हरियाणा से

lyrics:- सलाना बैशाखी मेला बरियाल का आया है,बाबा कालू जी ने भक्तों को बुलाया है,प्यार से स्वागत में है मनोता परिवार,बरिय.....

भगवान शिव पार्वती जी के अश से पैदा हो मैहरा समाज में पालन पोषण होने के बाद 12 वर्ष की आयु में गुरु गद्दी पर विराजमान बाब...
19/03/2025

भगवान शिव पार्वती जी के अश से पैदा हो मैहरा समाज में पालन पोषण होने के बाद 12 वर्ष की आयु में गुरु गद्दी पर विराजमान बाबा कालू जी के महान स्थान पर एक बार दर्शन जरूर करें।

📍🙏 गुरु साहिब बाबा कालू जी जन्म स्थान धाम 🙏📍गांव बरियाल, डाक- श्याम 84, जिला होशियारपुर, पंजाबमहान आध्यात्मिक स्थल पर नत...
19/03/2025

📍🙏 गुरु साहिब बाबा कालू जी जन्म स्थान धाम 🙏📍
गांव बरियाल, डाक- श्याम 84, जिला होशियारपुर, पंजाब
महान आध्यात्मिक स्थल पर नतमस्तक होने के लिए इस गूगल मैप लिंक पर जाएं:
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