Bandichodkijai

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06/12/2021
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18/07/2021



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 कबीर साहेब अर्थात् कविर्देव (अल्लाहु अकबर)सतगुरु रामपाल जी महाराज जी प्रमाणित करके बताते हैं :-🔸अल्लाहु अकबर का भाव है ...
16/07/2021



कबीर साहेब अर्थात् कविर्देव (अल्लाहु अकबर)

सतगुरु रामपाल जी महाराज जी प्रमाणित करके बताते हैं :-

🔸अल्लाहु अकबर का भाव है भगवान कबीर (कबीर साहेब अर्थात् कविर्देव)। फजाईले दरूद शरीफ़ में भी कबीर नाम की महिमा का प्रत्यक्ष प्रमाण छुपा नहीं है।

🔸पवित्र कुरान शरीफ में प्रमाण है प्रभु सशरीर है तथा उसका नाम कबीर है।
कबीर परमात्मा को अल्लाहु अकबर भी कहते हैं।

🔸पूर्ण परमात्मा अल्लाहु अकबर(अल्लाहु अकबर) ही सर्व पाप नाश (क्षमा) कर सकता है।

🔸हजरत मुहम्मद को कुरान शरीफ बोलने वाला प्रभु (अल्लाह) कह रहा है कि वह कबीर प्रभु वही है जिसने जमीन तथा आसमान के बीच में जो भी विद्यमान है सर्व सृष्टी की रचना छः दिन में की तथा सातवें दिन ऊपर अपने सत्यलोक में सिंहासन पर विराजमान हो(बैठ) गया। क़ुरान सूरह अल-फुरकान नं. 25 आयत 59

🔸क़ुरान सूरह अल-फुरकान 25 आयत 52 से 59 में लिखा है कि कबीर परमात्मा ने छः दिन में सृष्टी की रचना की तथा सातवें दिन तख्त पर जा विराजा। जिस से परमात्मा साकार सिद्ध होता है।

🔸मुसलमान धर्म के पवित्र शास्त्र प्रमाणित करते हैं कि सर्व सृष्टी रचनहार सर्व पाप विनाशक, सर्व शक्तिमान, अविनाशी परमात्मा मानव सदृश शरीर में आकार में है तथा सत्यलोक में रहता है। उसका नाम अल्लाह कबीर है।

🔸हजरत मुहम्मद जी का खुदा कह रहा है कि हे पैगम्बर! काफिरों का कहा मत मानना, क्योंकि वे लोग कबीर को पूर्ण परमात्मा नहीं मानते। आप मेरे द्वारा दिए इस कुरान के ज्ञान के आधार पर अटल रहना कि कबीर ही पूर्ण प्रभु है तथा कबीर अल्लाह के लिए संघर्ष करना। क़ुरान सूरह अल-फुरकान नं. 25 आयत नं. 52

🔸कुरान ज्ञान दाता अल्लाह (प्रभु) किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत कर रहा है कि ऐ पैगम्बर उस कबीर परमात्मा पर विश्वास रख जो तुझे जिंदा महात्मा के रूप में आकर मिला था।
क़ुरान सूरह अल-फुरकान नं. 25 आयत नं. 58

🔸कुरान ज्ञान दाता कह रहा है कि अल्लाह कभी मरने वाला नहीं है तारीफ के साथ उसकी पवित्र महिमा का गुणगान किए जा, वह कबीर अल्लाह(कविर्देव) पूजा के योग्य है तथा अपने उपासकों के सर्व पापों को विनाश करने वाला है।
क़ुरान सूरह अल-फुरकान नं. 25 आयत नं. 58

🔸फजाईले जिक्र में आयत नं. 1, 2, 3, 6 तथा 7 में स्पष्ट प्रमाण है कि ब्रह्म(काल अर्थात् क्षर पुरूष) कह रहा है कि तुम कबीर अल्लाह की बड़ाई बयान करो।

🔸बल्लत कबीर बूल्लाह आला महादाकुप वाला अल्ला कुम तरकोरून (1)
और ताकि तुम कबीर अल्लाह की बड़ाई बयान करों, इस बात पर कि तुम को हिदायत फरमायी और ताकि तुम शुक्र करो अल्लाह तआला का।

🔸फजाइले जिक्र
अल्लीमूल गैब बसाहादाती तील कबीर रूलमुतालू (2)
वह कबीर अल्लाह तमाम पोशीदा और जाहिर चीजों का जानने वाला है(सबसे) बड़ा है और आलीशान रुत्बे वाला है।

🔸फजाइले जिक्र
थाजालीका सहारा लाकुम लीतू कबीरू बुल्लाह आला महादा कुम बसीरी रील मोहसीनीन (3)
इसी तरह अल्लाह जल्ल शानुहू ने तुम्हारे लिए मुसख्खर कर दिया ताकि तुम कबीर अल्लाह की बड़ाई बयान करो।

🔸फजाइले जिक्र
माजा काला रब्बूकूम कालू लूलहक्का वाहोवर अल्लीयू उल्ल कबीर (6)
(जब फरिश्तों को कबीर अल्लाह की तरफ से कोई हुक्म होता है तो वे खौफ के मारे घबरा जाते हैं) यहाँ तक कि जब उनके दिलों से घबराहट दूर हो जाती है, तो एक दूसरे से पूछते हैं कि कबीर परवरदिगार का क्या हुक्म है ? वाकई वह (कबीर) आलीशान और मर्तबे वाला है।

🔸फजाइले जिक्र
कुल हूक्कू मूल्लाही हीलअल्ली लील कबीर (7)
हुक्म कबीर अल्लाह ही के लिए है, जो आलीशान है, बड़े रुत्बे वाला है।

🔸फजाइले जिक्र
‘सुब्हानल्लाहि अल्हम्दु लिल्लाहि अल्लाहु अक्बरू‘(कबिर्)
अल्लाहु अक्बर ही परमेश्वर कबीर साहेब हैं।

🔸फजाइले दरूद शरीफ
मन सल्ला अला रूहि मुहम्मदिन फिल् अर्वाहि व अला-ज-स दिही फिल् अज्सादि व अला कबिर् (कबीर) ही फिल कुबूरि व इन्नहाल कबीर तुन इल्ला अलल् खाशिलीनल्लजीन यजुन्नून अन्नहुम मुलाकू रग्बिहिन व अन्नहुम इलैहि राजिऊन।
इससे सिद्ध है कि प्रभु कबीर नाम से है तथा आकार में है, ऊपर सत्यलोक में अपने तख्त पर रहता है।
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कैसे बनेगा भारत दहेज मुक्त समाज #ऐसेबनेगा_दहेजमुक्तभारत👆 कि अधिक जानकारी के लिए Sant Rampal Ji Maharaj Youtube Channel प...
08/07/2021

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परमात्मा की मगरहर लीलाजब परमात्मा कबीर जी मगर हर गए तो षटदर्शनीय साधु भी भिन्न भिन्न प्रकार की वाणियाँ गाते हुए परमात्मा...
27/06/2021

परमात्मा की मगरहर लीला
जब परमात्मा कबीर जी मगर हर गए तो षटदर्शनीय साधु भी भिन्न भिन्न प्रकार की वाणियाँ गाते हुए परमात्मा कबीर के साथ चले


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 #कबीरसाहेबसशरीरप्रकटहुएकबीर साहेब सशरीर प्रकट हुए:अधिक जानकारी के लिए Sant Rampal Ji Maharaj Youtube Channel पर Visit क...
25/06/2021

#कबीरसाहेबसशरीरप्रकटहुए

कबीर साहेब सशरीर प्रकट हुए:

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विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा सुबह-सुबह ब्रह्ममुहुर्त में वह पूर्ण परमेश्वर कबीर (कविर्देव) जी स्वयं अपने मूल स्थान सतलोक से आए और काशी में लहरतारा तालाब के अंदर कमल के फूल पर एक बालक के रूप में प्रकट हुए।

📯 शिशु कबीर परमेश्वर द्वारा कुंवारी गाय का दूध पीने का वर्णन
परमेश्वर जब पृथ्वी पर शिशु रूप में प्रकट होते हैं तो उनकी परवरिश कुंवारी गाय के दूध द्वारा होती है।
गरीब शिव उतरे शिवपुरी से, अविगत बदन विनोद।
महके कमल खुशी भये, लिया ईश कूं गोद।
सात बार चर्चा करी, बोले बालक बैन।
शिव कूं कर मस्तक धरया, ला मोमन एक धैन।
गरीब अन ब्यावर कूं दूहत है, दूध दिया तत्काल।
पीवै बालक ब्रह्मगति, तहाँ शिव भये दयाल।।

📯 कबीर परमेश्वर सन 1398, ज्येष्ठ मास की पूर्णमासी को ब्रह्म मुहूर्त में अपने निज धाम सतलोक से चलकर आए और काशी के लहरतारा तालाब में फूल पर शिशु रूप धारण करके विराजमान हुए। जहाँ से नीरू नीमा उनको घर ले गये।
कबीर, ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।

गरीब, काशी उमटी गुल भया, मोमन का घर घेर।
कोई कहै ब्रह्मा विष्णु है, कोई कहै इन्द्र कुबेर।।
पूरी काशी परमेश्वर कबीर जी के बालक रूप को देखने को उमड़ पड़ी। बच्चे को देखकर कोई कह रहा है था कि ये बालक ब्रह्मा का अवतार है। कोई कह रहा था साक्षात विष्णु भगवान आये हैं, कोई इन्द्र कुबेर कह रहा है।

📯 शिशु रूप में कबीर परमेश्वर का सुंदर शरीर
गरीब, गोद लिया मुख चूम करि, हेम रूप झलकंत।
जगर मगर काया करै, दमकै पदम अनंत।।
परमेश्वर कबीर जी जब काशी के लहरतारा तालाब पर बालक रूप में सशरीर अवतरित हुए और जुलाहा दंपति नीरू-नीमा ने बालक रूपी कबीर जी को गोद में लिया। तब उनके शरीर की शोभा अद्भुत थी।

📯 गरीब, दुनी कहै योह देव है, देव कहत हैं ईश।
ईश कहै परब्रह्म है, पूरण बीसवे बीस।।
संत गरीबदास जी कहते हैं कि शिशु रूप में कबीर परमेश्वर जी को देखकर काशी के लोग कह रहे थे कि यह तो कोई देवता का अवतार है। देवता कह रहे थे कि यह स्वयं ईश्वर है और ईश्वर कहते हैं कि स्वयं पूर्ण ब्रह्म पृथ्वी पर आए हैं।

📯 कबीर परमेश्वर का कलयुग में प्रकट होना
ज्येष्ठ मांस की पूर्णमासी सन् 1398(विक्रम संवत 1455) को पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब काशी में शिशु रूप में प्रकट हुए।
साहेब होकर उतरे, बेटा काहू का नाहीं।
जो बेटा होकर उतरे, वो साहेब भी नाहीं।।
पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब सशरीर आये और अनेकों लीलाएं करके पुनः सशरीर सतलोक चले गए। क्योंकि पूर्ण परमात्मा कभी भी न जन्म लेता है और न उसकी मृत्यु होती है।

📯जब कबीर परमेश्वर को नीरू नीमा घर लेकर आये तो उन्हें देखकर कोई कह रहा था कि यह बालक तो कोई देवता का अवतार है। कोई कह रहा था यह तो साक्षात विष्णु जी ही आए लगते हैं। कोई कह रहा था यह भगवान शिव ही अपनी काशी को कृतार्थ करने को उत्पन्न हुए हैं।

ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में परमेश्वर कबीर जी तेजोमय रूप में आकर काशी के लहरतारा तालाब में बालक रूप में कमल के फूल पर प्रकट हुए, इसके प्रत्यक्ष दृष्टा ऋषि अष्टानन्द जी थे। वहाँ से नीरू नीमा ने परमेश्वर कबीर जी को अपने घर ले आये।

📯कबीर सागर, अध्याय "अगम निगम बोध" पृष्ठ 41 में
अवधु अविगत से चल आया, कोई मेरा भेद मर्म नहीं पाया।
ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।

📯ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में कबीर परमेश्वर जी काशी के लहरतारा तालाब पर कमल के
फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। उनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ।
गरीबदास जी की वाणी है -
ना सतगुरु जननी जने, उनके मां न बाप।
पिंड ब्रह्मण्ड से अगम है, जहां न तीनों ताप ।।

सन् 1398 में शिशु रूप में अवतरित कबीर परमेश्वर जी ने 25 दिन तक कुछ नहीं खाया-पिया। लेकिन ऐसा स्वस्थ शरीर था जैसे प्रतिदिन 9 किलो दूध पीते हों। 25 दिन की उम्र में कबीर साहेब लीला करते हुए कहते हैं कि मैं कुंवारी गाय का दूध पीता हूं। नीरू एक बछिया लाया तब शिशु रूपी कबीर परमात्मा कुंवारी गाय का दूध पिया।

गरीब, दूध न पीवै न अन्न भखै, नहीं पालने झूलन्त।
अधर अमान धियान में, कमल कला फुलन्त।।
अन ब्यावर को दूहत है, दूध दिया तत्काल।
पीवै बालक ब्रह्म गति, तहां शिव भये दयाल।।

विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा सुबह-सुबह ब्रह्ममुहुर्त में वह पूर्ण परमेश्वर कबीर (कविर्देव) जी स्वयं अपने मूल स्थान सतलोक से आए और काशी में लहरतारा तालाब के अंदर कमल के फूल पर एक बालक के रूप में प्रकट हुए।

गरीब, काशी उमटी गुल भया, मोमन का घर घेर।
कोई कहै ब्रह्मा विष्णु है, कोई कहै इन्द्र कुबेर।।
पूरी काशी परमेश्वर कबीर जी के बालक रूप को देखने को उमड़ पड़ी। बच्चे को देखकर कोई कह रहा है था कि ये बालक ब्रह्मा का अवतार है। कोई कह रहा था साक्षात विष्णु भगवान आये हैं। कोई इन्द्र कुबेर कह रहा था।

📯कबीर साहेब प्रकट दिवस

गरीब, काशी उमटी गुल भया, मोमन का घर घेर।
कोई कहै ब्रह्मा विष्णु है, कोई कहै इन्द्र कुबेर।।
पूरी काशी परमेश्वर कबीर जी के बालक रूप को देखने को उमड़ पड़ी। बच्चे को देखकर कोई कह रहा है था कि ये बालक ब्रह्मा का अवतार है। कोई कह रहा था साक्षात विष्णु भगवान आये हैं। कोई इन्द्र कुबेर कह रहा है।

कबीर जी का चारों युगों में प्राकट्य होते हैं.. और अपने प्यारे भक्तों को बिजली की तरह गत करते हुए मिलते हैं.. उन्हें नाम ...
23/06/2021

कबीर जी का चारों युगों में प्राकट्य होते हैं.. और अपने प्यारे भक्तों को बिजली की तरह गत करते हुए मिलते हैं.. उन्हें नाम देकर ..काल लोक से मुक्ति दिला कर सतलोक ले जाते

तत्वज्ञान के अभाव से श्रद्धालु शंका व्यक्त करते हैं कि जुलाहे रूप में कबीर जी तो वि.सं 1455 (सन् 1398) में काशी में आए हैं। वे कैसे पूर्ण परमात्मा हो सकते हैं?

जबकि वास्तविकता यह है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं। सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिन्द्र नाम से, द्वापर युग में करूणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कविर्देव (कबीर प्रभु) नाम से प्रकट हुए हैं। इसके अतिरिक्त अन्य रूप धारण करके कभी भी प्रकट होकर अपनी लीला करके अंतर्ध्यान हो जाते हैं।

कबीर साहिब के प्राकट्य के साक्षी बहुत से संत भी हैं जो अपनी वाणी में प्रमाणित करते हैं कि कबीर साहेब उन्हें आकर मिले व अपने तत्वज्ञान से परिचित किया।

उनमें से मुख्य नाम है-
श्री नानक देव साहिब जी
श्री धर्मदास साहेब जी
श्री गरीबदास साहेब जी धाम छुड़ानी हरियाणा
श्री घीसा दास साहेब जी धाम खेखड़ा
श्री रामानंद जी
श्री संत रविदास जी आदि

जब कबीर जी सतयुग में सतसुकृत नाम से प्रकट हुए थे। उस समय गरुड़ जी, श्री ब्रह्मा जी श्री विष्णु जी तथा श्री शिव जी आदि को सतज्ञान समझाया था। श्री मनु महर्षि जी को भी तत्वज्ञान समझाना चाहा था, लेकिन वे समझ ना सके, इसलिए परमेश्वर सतसुकृत का उर्फ नाम वामदेव (उल्टा ज्ञान देने वाला) निकाल दिया गया।

त्रेतायुग में कबीर साहेब इसी प्रकार रूपान्तर करके शिशु रूप में प्रकट हुए, उनकी परवरिश वेद विज्ञ और उनकी पत्नी सूर्या ने की, व उनका नाम मुनींद्र रखा गया।

त्रेता युग में श्री रामचंद्र जी का पुल समंदर पर स्वयं कबीर साहिब जी ने मुनींद्र रूप में बनवाया था।

इस ही युग में कबीर साहेब श्री हनुमान जी, रावण की पत्नी मंदोदरी और रावण के भाई विभीषण को मिले थे तथा उन्हें तत्वज्ञान समझाकर अपना शिष्य बनाया था।

नल तथा नील नामक दो भाइयों का असाध्य रोग ठीक किया था।

द्वापर युग में परमेश्वर कबीर (कविर्देव) करूणामय नाम से प्रकट हुए थे। उस समय एक वाल्मीक जाति में उत्पन्न भक्त सुदर्शन सुपच उनका शिष्य हुआ था। अपने इस शिष्य के रूप में करुणामय (कबीर) जी ने पाण्डवों की यज्ञ सफल की थी।
द्वापर युग में रानी इन्द्रमति को शरण में लिया था।

कलयुग में कबीर जी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा सुबह-सुबह ब्रह्ममुहुर्त में स्वयं अपने मूल स्थान सतलोक से काशी में लहर तारा तालाब के अंदर कमल के फूल पर एक बालक में प्रकट हुए थे। कलयुग में कबीर जी 120 वर्ष तक रहकर गए व् उस समय कबीर जी के 64 लाख शिष्य हुए थे।

इससे सिद्ध है कि कबीर परमेश्वर पूर्ण परमेश्वर है। यही अविनाशी परमात्मा है। यही अजरो-अमर है। यही परमात्मा चारों युगों में स्वयं अतिथि रूप में कुछ समय के लिए इस संसार में आकर अपना सतभक्ति मार्ग देते हैं।

सतयुग में सतसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनिन्द्र मेरा।
द्वापर में करूणामय कहाया, कलियुग नाम कबीर धराया॥

चारों युग में मेरे संत पुकारे, कूक कहा हम हेल रे।
हीरे माणिक मोती बरसें, ये जग चुगता ढेल रे।।

अधिक जानकारी के लिए देखें "Satlok Ashram" यूट्यूब चैनल।


24 June
24 June 2021

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22/06/2021



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कबीर साहेब का प्राकटय व अन्य अवतारों का जन्म लेना।श्रीमदभगवत गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15 व 20 से 23 में स्पष्ट किया है ...
20/06/2021

कबीर साहेब का प्राकटय व अन्य अवतारों का जन्म लेना।

श्रीमदभगवत गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15 व 20 से 23 में स्पष्ट किया है कि तीनों गुणों
(रजगुण ब्रह्मा, सतगुण विष्णु, तमगुण शिव) की उपासना करने वाले मूर्ख हैं, वो राक्षस स्वभाव को धारण किए हुए मनुष्यों में नीच दुष्कर्म करने वाले हैं, वे मेरी (गीता ज्ञान दाता ब्रह्म की) पूजा भी नहीं करते । फिर गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में ब्रह्म साधना को अनुत्तम (अश्रेष्ठ) कहा है क्योंकि पूर्ण मोक्ष नहीं होता । इसलिए ऋषि-मुनि जन ब्रह्म साधना करके भी काल जाल में जन्म-मृत्यु में ही रह जाते हैं।

इसलिए गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा है कि पूर्ण मोक्ष के लिए उस पूर्ण परमात्मा की शरण ग्रहण करो जो अविनाशी है ।

कबीर परमेश्वर जी स्वयं परमात्मा है, वह 600 वर्ष पूर्व सशरीर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर प्रकट हुये, और अपने लीलामय शरीर से 120 वर्ष ज्ञान प्रचार किया और सशरीर मगहर से सतलोक गये ।

ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि जब परमात्मा दूसरी प्रकार का शरीर धारण करके अर्थात शिशु रूप धारण करके पृथ्वी पर प्रकट होता है तो उस समय उनके पालन की लीला कुंवारी गायों के द्वारा होती है ।
यह लीला सिर्फ कबीर परमेश्वर ने की है ।
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब ही हैं तथा वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज ही अधिकारी और पूर्ण सतगुरु हैं जो मानवता का उत्थान कर अखंड पृथ्वी का संचालन करेंगे। तो बिना समय व्यर्थ गवांए आन उपासना छोड़कर संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लें।
अधिक जानकारी के लिए संत रामपाल जी महाराज यूट्यूब चैनल, फ़ेसबुक, ट्विटर पर आध्यात्मिक ज्ञान सुने ।

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24 June

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 #पूर्णपरमात्माकाप्राकाट्य ***जिन भगवानो ने माँ के गर्भ से जन्म लिया है वो पूर्ण परमात्मा नहीं हैं।***  24 Juneपूर्ण परम...
19/06/2021

#पूर्णपरमात्माकाप्राकाट्य
***जिन भगवानो ने माँ के गर्भ से जन्म लिया है वो पूर्ण परमात्मा नहीं हैं।***
24 June

पूर्ण परमात्मा कौन है?वेद, पुराण और गीता के अनुसार - ब्रह्म कौन है, परमात्मा कौन है और भगवान कौन है?

परमात्मा जानकारी के लिए Satlok Ashram Youtube Channel पर Visit करें।

अवतार
राम कृष्ण तो अवतार हैं। ये मां के गर्भ से जन्म लेते हैं।
प्राकाट्य
परमात्मा कभी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेता।
कबीर साहेब जी कहते हैं-
राम कृष्ण अवतार हैं, इनका नाही संसार।
जिन साहेब संसार रचा, वो किनहू न जन्मा नारि।।

🔮अवतार vs प्राकाट्य
अवतारों का शरीर पांच तत्व का होता है जो मृत्यु उपरांत पंच तत्व में विलीन हो जाता है। जबकि कबीर परमेश्वर का शरीर पांच तत्व का बना नहीं है। वे अविनाशी हैं, जन्म मृत्यु से परे हैं।
हाड चाम लहू ना मेरे, जाने सतनाम उपासी।
तारन तरन अभय पद(मोक्ष) दाता, मैं हूं कबीर अविनाशी।।

🔮तीन ताप के अन्तर्गत भगवान विष्णु जी को भी कर्म का फल राम और कृष्ण अवतार रूप में भोगना पड़ा। इससे सिद्ध है कि ये देव तीन ताप को नाश नहीं कर सकते।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 से 20 में स्पष्ट है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) शिशु रूप धारण करके अपना तत्वज्ञान संसार को देने के लिए प्रकट होता है।
वह अपने भक्त के सर्व पाप नाश कर देता है। (प्रमाण- यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13)

🔮तीन लोक के भगवानों व उनके अवतारों में वह शक्ति नहीं होती, जिससे वे अपने भक्तों की आयु बढ़ा सकें।
जबकि ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2 में है कि परमेश्वर मृत्यु को प्राप्त हो चुके साधक को जीवित करके उसकी आयु भी बढ़ा सकता है।
परमेश्वर कबीर जी 600 वर्ष पूर्व जब सशरीर प्रकट हुए थे। तब उन्होंने दर्जनों लोगों को जीवित किया था। मुस्लिम पीर शेखतकी की मरी हुई बेटी को कब्र से निकालकर जीवित किया था।

🔮श्री विष्णु जी के जितने भी अवतार हुए हैं, उन्होंने माता के गर्भ से जन्म लिया है।
जबकि यजुर्वेद अध्याय 40 मंत्र 8 में लिखा है कि कविर्देव स्वयं प्रकट होता है उस परमात्मा की काया अर्थात शरीर मनुष्य की तरह शुक्र से बना नहीं होता है।

🔮रामचंद्र जी का जन्म माता कौशल्या से हुआ, श्रीकृष्ण जी का जन्म माता देवकी से हुआ जो कि श्री विष्णु जी के अवतार थे।
संत गरीबदासजी जी बताते हैं कि परमेश्वर कबीर जी का जन्म माता से नहीं हुआ। यही प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 3 में है कि परमेश्वर का जन्म माता से नहीं होता। वह स्वयं सशरीर प्रकट प्रकट होता है।
अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बन्दीछोड़ कहाय।
सो तो एक कबीर है, जननी जन्या न माय।।

🔮राम, कृष्ण आदि 24 अवतार श्री विष्णु जी के हुए जिनका जन्म माता से हुआ और इनकी मृत्यु भी हुई।
जबकि ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त सूक्त 93 मंत्र 2 तथा मण्डल 9 सूक्त 94 मंत्र 3 में है कि कविर्देव (कबीर साहेब) जब बालक रूप में आते हैं तो उनका जन्म माता से नहीं होता। वह परमेश्वर अविनाशी है। सशरीर आता है और सशरीर अपने लोक को चला जाता है।
अवतार
मां के गर्भ से पैदा होते हैं। काल द्वारा निर्धारित कार्य पूरा करके चले जाते हैं।
प्राकाट्य
परमपिता परमेश्वर कभी भी माँ से जन्म नहीं लेते।
ऋग्वेद मंडल 10 सूक्त 4 मंत्र 3

“शिशुम् न त्वा जेन्यम् वर्धयन्ती माता विभर्ति सचनस्यमाना
धनोः अधि प्रवता यासि हर्यन् जिगीषसे पशुरिव अवसृष्टः।।

🔮हिन्दू धर्म के किसी भी देव या किसी भी अवतार की जीवनी में शिशु रूप में सशरीर प्रकट होकर, कविताओं द्वारा ज्ञान देने का वर्णन नहीं है।
जबकि ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में कहा है कि कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करता है, वास्तव में पूर्ण परमात्मा कविर् (कबीर) ही है।

🔮अवतार vs प्राकाट्य
हिन्दू धर्म में जो भी 24 अवतार हुए हैं वे सभी माता के गर्भ से उत्पन्न होते हैं व अंत समय शरीर छोड़ कर ही संसार से जाते हैं।
जबकि ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 से 20 के अनुसार परमात्मा शिशु रूप धारण करके स्वयं ही प्रकट होते हैं। कबीर परमेश्वर चारों युगो में स्वयं प्रकट हुए, अपने तत्वज्ञान से अवगत करवाया व अंत समय में सशरीर अपने निज धाम (सतलोक) गमन किया।

🔮कबीर सागर, अध्याय "ज्ञान बोध (बोधसागर)" - पृष्ठ 36
भग की राह हम नहीं आए, जन्म मरण में नहीं समाए।
त्रिगुण पांच तत्व हमरे नांही, इच्छा रूपी देह हम आहीं।।
कबीर साहेब ने 600 वर्ष पूर्व स्वयं बताया था कि मेरा जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ। मैं जन्मता मरता नहीं, अविनाशी हूँ। मेरा शरीर पांच तत्व, तीन गुण का नहीं है। मैं अपनी इच्छा से यहाँ प्रकट हुआ हूँ।
यह प्रमाण यजुर्वेद अध्याय 40 मंत्र 8, ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 3, 5, मण्डल 9 सूक्त 93 मंत्र 2, मण्डल 9 सूक्त 94 मंत्र 3 में है।

🔮कबीर सागर, अध्याय "ज्ञान बोध (बोधसागर)" - पृष्ठ 29
नहीं बाप ना माता जाए, अविगत से हम चल आए।
कल युग मे कांशी चल आए, जब हमरे तुम दर्शन पाए।।
जिसका प्रमाण ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 3, 5, मण्डल 9 सूक्त 93 मंत्र 2, सूक्त 94 मंत्र 3 में है। वहीं कबीर परमेश्वर ने 600 वर्ष पूर्व स्वयं बताया था कि मेरे कोई माता पिता नहीं हैं, मैं स्वयं प्रकट हुआ सतभक्ति बताने के लिए।

🔮ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 82 मंत्र 1 - 2, ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 5 में है कि कविर्देव (कबीर साहेब) अमरलोक/सतलोक में रहता है। दृढ़ भक्तों को बिजली की गति से आकर मिलता है। तत्वज्ञान कराता है।
आदरणीय धर्मदास जी कहते हैं
सत्य लोक से चल कर आए, काटन यम की जंजीर।
आज मोहे दर्शन दियो जी कबीर।।

कबीर साहेब के बारे में सही जानकारी।आज तक हमने जिससे सुना यही सुना कि कबीर जी एक भक्त थे जिन्होंने समाज में फैली पाखंडवाद...
17/06/2021

कबीर साहेब के बारे में सही जानकारी।

आज तक हमने जिससे सुना यही सुना कि कबीर जी एक भक्त थे जिन्होंने समाज में फैली पाखंडवादी कुरुतियों का खंडन किया। वह कविताओं के माध्यम से वाणीयों के माध्यम से ज्ञान बताते थे। हमने यह भी सुना कि कबीर जी ने मां के गर्भ से जन्म लिया, आहार किया, विवाह किया तथा संतान उत्पत्ति की।

जबकि सच्चाई कुछ और ही है
परमेश्वर जी ने अपनी वाणीयों में स्पष्ट किया है कि वे सशरीर आते हैं और सशरीर ही जाते हैं। उनका जन्म मरण नहीं होता। वह अविनाशी परमात्मा है।

प्रमाण 👇👇
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17
मंत्र 17 में कहा है कि कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है। लीला करता हुआ बड़ा होता है। कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करता है अर्थात् उसे ऋषि, सन्त व कवि कहने लग जाते हैं, वास्तव में वह पूर्ण परमात्मा कविर् ही है।

ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहां जुलाहे ने पाया।।

मात-पिता मेरे कछु नाहीं, ना मेरे घर दासी।
जुलहे का सुत आन कहाया, जगत करे मेरी हासी।।

परमात्मा कबीर जी ने इन वाणीयों से स्पष्ट कर दिया कि उनके कोई माता पिता नहीं थे। उन्होंने विवाह नहीं किया और ना ही उनके कोई संतान थी।

परमात्मा ने मुस्लिम धर्म गुरु शेखतकी की शर्त पर दो मुर्दों को जीवित किया था और उनको ही अपने पास संतान के रूप में रखे थे।


24 June

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