हर हर महादेव

हर हर महादेव Dedicated to lord Shiva
The consort of Parvati
The Bestower of eternal bliss, knowledge and immortali

17/05/2021

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||"

ईश्वर में आस्था हमारे देश की परंपरा ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। भक्तिमय माहौल विचारों को शुद्...
17/05/2021

ईश्वर में आस्था हमारे देश की परंपरा ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के जीवन का अभिन्न हिस्सा है। भक्तिमय माहौल विचारों को शुद्ध करता है और तन-मन को शांति देता है जिसका एहसास हमारी आत्मा को हो ही जाता है। तभी तो जब कोई ख़ुशी या दुःख का अवसर होता है या मन की बात ईश्वर से करनी हो तो हमारे कदम मंदिरों की ओर चल पड़ते हैं। जी हाँ, शिवमयी काशी की इस यात्रा में, हम आपको आज काशी विश्वनाथ मंदिर के रहस्यमयी पहलुओं से अवगत कराएंगे जहां पतित पावनी गंगा के तट पर देवताओं की नगरी काशी में श्री विश्वनाथ शिवलिंग के रूप में विराजते हैं, साक्षात महादेव। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में इनका नौंवा स्थान है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्री काशी विश्वनाथ दो भागों में है। दाहिने भाग में शक्ति के रूप में माँ पार्वती विराजमान हैं, दूसरी ओर भगवान् शिव वाम रूप में विराजमान है। काशी अनंतकाल से बाबा विश्वनाथ के जयकारों से गूँज रही है। शिवभक्त यहां मोक्ष की कामना से आते हैं। यह भी माना गया है कि काशी नगरी शिवजी के त्रिशूल पर टिकी हुई है व जिस जगह ज्योतिर्लिंग स्थापित है, वह जगह कभी भी लोप नहीं होती। स्कन्द पुराण के अनुसार जो प्रलय में भी लय को प्राप्त नहीं होती, आकाश मंडल से देखने में ध्वज के आकार का प्रकाश पुंज दिखती है, वह काशी अविनाशी है।

पांच कोस (पंचक्रोशी) के क्षेत्रफल वाले काशी क्षेत्र को शिव और पार्वती ने प्रलयकाल में भी कभी त्याग नहीं किया। यही वजह है कि यह क्षेत्र 'अविमुक्त' क्षेत्र कहा गया है। स्कन्द (कार्तिकेय) ने अगस्त्य जी को बताया कि यह काशी क्षेत्र भगवान् शिव के आनंद के कारण है, इसलिए इसे आनंदवन भी कहा जाता है। शिवपुराण की अन्य कथा के अनुसार माना यह भी जाता है कि काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग किसी मनुष्य की पूजा, तपस्या से प्रकट नहीं हुआ बल्कि यहां निराकार परमेश्वर ही शिव बनकर विश्वनाथ के रूप में साक्षात प्रकट हुए।

16/05/2021

मैं अपने भक्तों में कोई अन्तर नहीं करता - महादेव ❤️

Bhagwan Parshuram jayanti...❤️❤️
14/05/2021

Bhagwan Parshuram jayanti...❤️❤️

13/05/2021

नमस्कृत्य महादेवं विश्वव्यापिनमीश्वरम् ।।
वक्ष्ये शिवमयं वर्म सर्वरक्षाकरं नृणाम् ।। १ ।।

आस्था, विश्वास, सौहार्द एवं संस्कृतियों के मिलन का पर्व होता है कुंभ। ज्ञान, चेतना, और उसका परस्पर मंथन कुंभ मेले का वो ...
16/03/2021

आस्था, विश्वास, सौहार्द एवं संस्कृतियों के मिलन का पर्व होता है कुंभ। ज्ञान, चेतना, और उसका परस्पर मंथन कुंभ मेले का वो आयाम है जो आदि काल से ही हिन्दू धर्मावलंबियों की जाग्रत चेतना को बिना किसी आमंत्रण के खींचकर ले आता है। कुंभ पर्व किसी इतिहास निर्माण के दृष्टिकोण से नहीं शुरु हुआ था। अपितु उसका इतिहास समय द्वारा स्वयं ही बना दिया गया। वैसे भी धार्मिक परंपराएं हमेशा आस्था एवं विश्वास के आधार पर ही टिकती हैं, ना की इतिहास पर। यह कहा जा सकता है कि कुंभ जैसा विशालतम मेला संस्कृतियों को एक सूत्र में बांधे रखने के लिए ही आयोजित होता है। कुंभ का शाब्दिक अर्थ है कलश। और यहां कलश का संबंध अमृत कलश से है।

बात उस समय की है जब देवासुर संग्राम के बाद दोनों पक्ष समुद्र मंथन को राजी हुए थे। जब समुद्र को मंथना था तो मंथनी और नेती भी उसी हिसाब की चाहिए थी। ऐसे में मंदराचल पर्वत मंथनी बना और वासुकी नाग को नेती बनाया गया। समुद्र मंथन से 14 रत्नों की प्राप्ति हुई। जिन्हें परस्पर बांट लिया गया। परंतु जब धन्वंतरि ने अमृत कलश देवताओं को दे दिया तो फिर युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई। तब भगवान विष्णु ने स्वयं मोहिनी रुप धारण कर सबको अमृत पान कराने की बात कही। और अमृत कलश का दायित्व इंद्र के पुत्र जयंत को सौंपा। अमृत कलश को प्राप्त कर जब जयंत दानवों से अमृत की रक्षा हेतु भाग रहा था, तभी इस क्रम में अमृत की बूंदें पृथ्वी पर चार स्थानों पर गिरी, हरिद्वार, नासिक, उज्जैन और प्रयागराज। चूंकि विष्णु की आज्ञा से सूर्य, चंद्र शनि एवं बृहस्पति भी अमृत कलश की रक्षा कर रहे थे। और विभिन्न राशियों सिंह, कुंभ, एवं मेष में विचरण के कारण ये सभी कुंभ पर्व के द्योतक बन गए। इस प्रकार ग्रहों एवं राशियों की सहभागिता के कारण कुंभ पर्व ज्योतिष का पर्व भी बन गया।

जयंत को अमृत कलश को स्वर्ग ले जाने में 12 दिन का समय लगा। और माना जाता है कि देवताओं का एक दिन पृथ्वी के एक वर्ष के बराबर होता है। यहीं कारण है कि कालांतर में वर्णित स्थानों पर ही ग्रह, राशियों के विशेष संयोग पर 12 वर्षों में कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। ज्योतिष गणना के क्रम में कुंभ का आयोजन चार प्रकार से माना गया है। बृहस्पति के कुंभ राशि तथा सूर्य के मेष राशि में प्रविष्ट होने पर हरिद्वार में गंगातट पर कुंभ पर्व का आयोजन होता है।

Har Har Mahadev ❤️❤️
12/03/2021

Har Har Mahadev ❤️❤️

मानव समाज को जब भी जिस चीज की आवश्यकता हुई है, भगवान शिव ने अपनी दया और करुणा की छतरी खोल दी है। शिवजी के प्रति हम विभिन...
11/03/2021

मानव समाज को जब भी जिस चीज की आवश्यकता हुई है, भगवान शिव ने अपनी दया और करुणा की छतरी खोल दी है। शिवजी के प्रति हम विभिन्न प्रकार से विचार भी नहीं कर सकते और न ही इतिहास में लिख सकते हैं।

मानव सभ्यता और मानव संस्कृति के गठन में भगवान शिव की जो विराट भूमिका है, उसमें यही कहना संगत है कि भगवान शिव को हटा देने पर मानव सभ्यता और मानव संस्कृति के लिए कोई भूमि ही नहीं मिल पाएगी। किंतु मानव सभ्यता और संस्कृति को निकाल देने पर भी भगवान शिव महिमा मंडित रहेगे। वर्तमान मानव समाज और सुदूर भविष्य में भी मानव समाज के प्रति सुविचार करते समय, उसका यथार्थ इतिहास लिखते समय परब्रह्म भगवान शिव को छोड़ देने से काम नहीं चलेगा। वैदिक भाषा और वैदिक धर्म के साथ भी देवाधिदेव महादेव का सम्यक परिचय था। भगवान शिव को हम तंत्र और वेद, दोनों में ही पाते हैं। भगवान शिव ही इस ब्रह्मांड का सार व अंतिम सत्य है। शिव ही इस संसार की ऊर्जा है। सम्पूर्ण सजीव व निर्जीव जीव शिव की ऊर्जा संचालित है।

‘शिव’ शब्द का अर्थ क्या है? तंत्र, वेद और जो कुछ भी मौखिक या लिखित प्रमाण मिलते हैं, उनसे ‘शिव’ शब्द के तीन अर्थ मिलते हैं। प्रथम या प्रधान अर्थ है-‘शिव’ माने कल्याण या मंगल। यहां ‘शिव’ शब्द का अर्थ है कल्याण। ‘शिवमस्तु’ का अर्थ है ‘कल्याणवस्तु।’ इस कल्याणात्मक शिव के प्रतिभू हैं कल्याणसुंदरम्।
कहा जाता है, शिव पंच मुख से जगत का कल्याण करते रहते हैं। अर्थात कल्याणार्थ ही वह सुंदर हैं, कल्याण करते हैं, इसी कारण वह सुंदर हैं। वह कठोर हैं, पर वह अति शांत भी हैं। उनकी कठोरता तथा उनकी शांति, दोनों के पीछे कल्याणसुंदरम् भाव ही निहित है। ‘शिव’ शब्द का प्रथम अर्थ ही है: कल्याण या मंगल। ‘शिव’ शब्द का दूसरा अर्थ है परमब्रह्म जो निराकार।

10/03/2021

Shiv gyan ........महादेव की ये 10 अनमोल बातें आपकी जिंदगी बदल देगी ............ 10 life changing quotes....!!!..
Har Har Mahadev ❤️❤️

08/03/2021

पश्चाताप का अर्थ है

05/03/2021

जो समय की चाल है अपने भक्तो की ढाल है।।
पल में बदल दे सृष्टि को वो बाबा महाकाल है ।।

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