29/05/2026
मगहर में अंतिम लीला
जब कबीर साहेब का पृथ्वी पर रहने का समय पूरा हुआ, तब हिंदू और मुस्लिम दोनों उनके शरीर को अपने-अपने रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार देना चाहते थे।
हिंदू लोग शरीर का दाह संस्कार करना चाहते थे।
मुस्लिम लोग दफनाना चाहते थे।
इस बात पर विवाद होने लगा। तब कबीर साहेब ने सबको एक चादर ओढ़ाने को कहा।
जब चादर हटाई गई, तो वहाँ शरीर नहीं था — केवल सुगंधित फूल मिले।फिर:
आधे फूल हिंदुओं ने लेकर समाधि बनाई।
आधे फूल मुसलमानों ने लेकर मजार बनाई।
आज भी Kabir Chaura Maghar में मंदिर और मजार साथ-साथ बने हुए हैं, जो भाईचारे का प्रतीक माने जाते हैं।