श्री मद भागवत कथा एवं श्री राम कथा एवं श्री भक्तमाल जू की कथा के आयोजन के लिए यह पेज बनाया गया है। कथा कहीं व्यवसाय न बन जाये हमेशा इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है। कथा का उद्देश्य केवल भगवत चरणों में प्रीती उत्पन्न करना है, और हमेशा यही कथा का स्वरूप एवं उद्देश्य रहना चाहिए। इतनी कथा सुनो कि कथा एक व्यसन बन जाये। जैसे व्यसन करने वाला व्यक्ति व्यसन के बिना रह नहीं पाता वैसे ही हम भी कथा के बिना
रह नहीं पाएं। और जब हम कथा के बिना नहीं रह पाएंगे तो फिर निश्चित ऐसी स्थिति आ जाएगी कि हम परमात्मा के बिना नहीं रह पाएंगे। और जब हम परमात्मा के बिना नहीं रह पाएंगे तो भगवान को हमारे पास आना ही पड़ेगा। जैसे एक बच्चा जब मां के लिए रोता है तो लाख काम छोड़कर भी मां बच्चे के पास आ जाती है और उसे गोद में ले लेती है। ऐसे ही जब हम भगवान के लिए रोयेंगे तो निश्चित ही भगवन को हमारे पास आना ही होगा। और भगवान के लिए रोना हमें कथा सिखाती है। मानव जीवन का वास्तविक लक्ष्य कहीं हम भूल न जाएँ। इसलिए अंतिम लक्ष्य प्राप्ति का एक मात्र साधन है भगवन नाम स्मरण और संकीर्तन। और नाम स्मरण में हमेशा मन लगा रहे इसलिए हमेशा कथा सुनते रहिये।
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