22/05/2024
महंत के बैकुंठ उत्सव में लगा संतों और प्रबुद्धों का जमावड़ा
बाबा की याद में लगाये गये पौधे,
कश्मीर और कारगिल में भी महंत फलाहारी बाबा ने दी सेवा - महामंडलेश्वर सुखदेव दास
दो दिवसीय अनुष्ठान का महाभंडारे के साथ समापन
संतों की संगति श्रेष्ठ, फलाहारी बाबा ने अध्यात्मिक चेतना लाई - हरिश्चंद्र सिंह
फोटो - चौपारण के बिगहा बाजार में महंत फलाहारी बाबा के बैकुंठ उत्सव में मौजूद लोग
चौपारण, हजारीबाग:
सिद्ध महंत फलाहारी बाबा के भू समाधि के द्वितीय वर्ष पर उनके शिष्यों द्वारा दो दिवसीय बैकुंठ उत्सव समारोह का समापन बुधवार को अखंड रामायण पाठ, पूजा, अभिषेक तथा हवन के बाद महाप्रसाद के वितरण के साथ संपन्न हो गया। उत्सव के दौरान बाबा की याद में पौधारोपण भी किया गया। इस उत्सव में साधु संतों तथा उनके शिष्यों का जमावड़ा बिगहा स्थित हनुमत मंदिर परिसर में लगा। इस आयोजन में निर्मोही अखाड़ा के महामंडलेश्वर परम पूज्य सुखदेव दास जी महाराज, इस्कॉन के धर्मगुरु तथा भक्ति वेदांता शिक्षालय के संस्थापक डॉ केशवानंद प्रभु, तारापीठ के सिद्ध खडेश्वरी बाबा, आचार्य बालमुकुंद पांडेय, ज्योतिषाचार्य शुभम पांडेय, हनुमत मंदिर के पुजारी कपिल पांडेय समेत 108 ब्राह्मण एवं सैकड़ों शिष्य के साथ क्षेत्र के बुद्धिजीवी, धार्मिक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। इस दौरान महंत फलाहारी बाबा के गुणों का वर्णन करते हुए उनके गुरु भाई निर्मोही अखाड़ा के महामंडलेश्वर सुखदेव दास जी महाराज ने कहा कि भक्ति से शक्ति, शक्ति से प्रकाश और प्रकाश से जनकल्याण होता है। महंत ने कश्मीर तथा करगिल में भी मंदिर में सेवा दी थी। हरिद्वार, प्रयागराज, अयोध्या सभी धाम में महंत ने सेवा दी। वे भक्ति के पर्याय थे। डॉ केशवानंद प्रभु ने कहा कि महंत के आशीर्वाद से ही आज बिगहा में नित्य दिन धार्मिक कार्यों का विस्तार हो रहा है। मौसी बाडी भी इसी मंदिर को बनाया गया है। तारापीठ के सिद्ध खडेश्वरी बाबा ने कहा कि साधु महंत के संगत से जीवन का कल्याण हो जाता है। फलाहारी बाबा ने इस क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना लाई जिससे युवावर्ग काफी प्रभावित हुआ। आज हनुमत सेवा संस्थान के युवा इसके उदाहरण हैं।बताते चलें कि सिद्ध महंत फलाहारी उर्फ आलु बाबा बीते तीस सालों से भी अधिक समय से क्षेत्र में सेवारत रहे। इस दौरान भद्रकाली मंदिर, ईटखोरी में निवास कर सेवा और र