03/03/2026
*🙏 जय श्री राम 🙏*
🌷 चंद्र ग्रहण मंत्र 🌷
➡️ ०३ मार्च, मंगलवार को खग्रास चन्द्रग्रहण है। ये भारत में दिखेगा, जहाँ दिखेगा वहाँ ग्रहण के नियम पालनीय हैं।
➡️ जब भी चंद्र ग्रहण हो तो एक माला नीचे मंत्र की करें:-
मंत्र – ‘ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:’
🌷 ग्रहण में क्या करें, न करें 🌷
➡️ चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रख कर जप, ध्यान करने से कई गुना फल होता है। श्रेष्ठ साधक को उस समय उपवास लेकर, ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके, 'ॐ नमो नारायणाय' मंत्र का आठ हजार जप करने चाहिए। उस के पश्चात ग्रहण शुद्धि होने पर उस घृत को पी लें। ऐसा करने से वह मेधा, धारणशक्ति, कवित्व शक्ति तथा वाक् सिद्धि प्राप्त कर लेता है।
➡️ सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक 'अरुन्तुद' नरक में वास करता है।
➡️ सूर्यग्रहण में ग्रहण से चार प्रहर पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं। एक प्रहर ३ घण्टे का होता है।
➡️ ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डाल कर नया भोजन बनाना चाहिए।
➡️ ग्रहण वेध के प्रारम्भ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यंत आवश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए। और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।
➡️ ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल (वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं।
➡️ ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो उसका शुद्ध बिम्ब देख कर भोजन करना चाहिए।
➡️ ग्रहण काल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए। तथा स्वयं भी वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए।
➡️ ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए। ग्रहण के स्नान में गरम जल की अपेक्षा ठंडा जल, ठंडे जल में भी दूसरे के हाथ से निकाले हुए जल की अपेक्षा अपने हाथ से निकाला हुआ, निकाले हुए की अपेक्षा जमीन में भरा हुआ, भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ, (साधारण) बहते हुए की अपेक्षा सरोवर का, सरोवर की अपेक्षा नदी का, अन्य नदियों की अपेक्षा गंगा का और गंगा की अपेक्षा भी समुद्र का जल पवित्र माना जाता है।
➡️ ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।
➡️ ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए। दंतधावन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल-मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन ये सब कार्य वर्जित हैं।
➡️ ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
➡️ ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सुअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।
➡️ तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान दानादि का ग्रहण में महाफल है। किन्तु संतानयुक्त गृहस्थ को ग्रहण और संक्रान्ति के दिन उपवास नहीं करना चाहिए।
➡️ भगवान वेदव्यासजी ने परम हितकारी वचन कहे हैंः 'सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्यग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगा जल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।'
➡️ ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम-जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।
➡️ ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है। (स्कन्द पुराण)
➡️ भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिए। (देवी भागवत)
➡️ अस्त के समय सूर्य और चन्द्रमा को रोग भय के कारण नहीं देखना चाहिए। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्णजन्म खं. ७५.२४)।
*🙏 जय श्री कृष्ण 🙏*