20/05/2026
‼️ हमीं एक कदम और आगे बढ़ें (अन्तिम भाग) ‼️
‼️ शांतिकुंज ऋषि चिंतन ‼️
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🌞 20 May, 2026 Wednesday 🌞
🌻 २० मई, २०२६ बुधवार 🌻
!! ज्येष्ठ माह, शुक्ल पक्ष, चतुर्थी तिथि, संवत २०८३ !!
!! सूर्योदय 5:25 AM, सूर्यास्त 7:02 PM !!
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आदर्शवादी बीजारोपणों की संकल्प और साहस का खाद पानी मिले तो उनके उगने, लहराने और देखते-देखते पुष्पित फलित होने में फिर कोई कठिनाई शेष न रहे। संकट परिस्थितिजन्य नहीं, मनःस्थिति में घुसी हुई कृपणता का है। चोर पकड़ा और हटाया जा सके तो समझना चाहिए कि प्रज्ञा परिजनों में से हर किसी को बहुत कुछ कर गुजरने का सुयोग सौभाग्य उपलब्ध हो गया।
श्रम, समय की इन दिनों महती आवश्यकता है। जन-जागरण के लिए जन-संपर्क साधने और युग चेतना से अवगत कराने वाले प्रयास आरम्भ करने होंगे। यह बन पड़े तो जन समर्थन और जन सहयोग की कहीं कोई कमी न रहेगी। बीमा एजेण्टों और वोट बटोरने वालों जैसी ललक हो तो जन-संपर्क में निकलने में लगने वाले संकोच, असमंजस देखते-देखते हवा में उड़ जायेंगे। कथनी और करनी का समन्वय ही प्रज्ञा अभियान की गतिविधियों को आगे बढ़ाता है। परामर्श देने से ही छुटकारा नहीं मिलता कुछ ऐसी भी करना पड़ता है, जिसमें समय लगे और पसीना बहे। ज्ञान रथ चलाने, स्लाइड प्रोजेक्टर दिखाने जैसे प्रारम्भिक काम तक जब श्रम माँगते हैं तो उन बड़े कामों के लिए तो और भी बड़े प्रयास परिश्रम की आवश्यकता पड़ेगी।
अमृतवाणी:- उपासना के तीन सूत्र क्या हैं? | पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी, https://youtu.be/gxrNriLUwNs?si=YfOWZCmqCyYlUovZ
लगन हो तो हममें से अधिकाँश की वह स्थिति है कि स्वाध्याय और सत्संग को सर्वसुलभ बनाने वाले उपरोक्त तीनों उपकरणों को अपने एकाकी बलबूते अपने संपर्क क्षेत्र में चलाते और उत्साहवर्धक आलोक वितरण करते रह सकें। बात एक कदम और आगे बढ़े तो शिक्षा प्रचार, हरितम् संवर्धन, स्वच्छता अभियान जैसे कितने ही सेवा कार्यों में कुछेक घनिष्ठ साथियों को लेकर जुटा जा सकता है। स्वयं संकल्प पूर्व आगे बढ़ने पर सहयोगी अनुयायियों की कभी कमी नहीं पड़ती। इंजन दौड़ेगा तो डिब्बे भी पीछे-पीछे घिसटते चलेंगे ही। प्रज्ञा अभियान के अंतर्गत असंख्यों प्रचारात्मक, सुधारात्मक और रचनात्मक कार्यक्रम हैं जिनमें से योग्यता और सुविधा के अनुरूप स्थानीय परिस्थितियों-आवश्यकताओं के अनुसार कुछ भी चुना जा सकता है। लक्ष्य एक ही है-लोकमानस का परिष्कार। सुविधा संवर्धन से अधिक महत्व इन दिनों विचार परिवर्तन को दिया जाना है। यह तथ्य हम में से किसी को भी भुला नहीं देना चाहिए।
जिनके पारिवारिक उत्तरदायित्व हलके हैं। जिनके पास गुजारे के साधन हैं वे परिव्राजकों की भूमिका निभा सकते हैं अपने समय को पुरातन वानप्रस्थों की तरह लोक मंगल के लिए लगा सकते हैं। इसमें निकटवर्ती प्रज्ञापीठों के माध्यम से सुव्यवस्थित कार्य करना अधिक सरल और सफल हो सकता है। एक वर्ष का वानप्रस्थ लेकर जन जागरण की तीर्थयात्रा पर निकल पड़ना अपने आप में एक मनोरंजक, अनुभव सम्पादन, तप साधन एवं उच्चस्तरीय पुण्य परमार्थ है। साइकिलों पर तीर्थयात्रा और ढपली पर युग गायन के लिए निकलने वाली दो-दो की टोलियाँ जो काम कर सकती हैं, उसका मूल्याँकन असाधारण या अद्भुत के रूप में ही कहा जा सकता है। जिनसे बाहर जाना न बन पड़े वे अपने समीपवर्ती क्षेत्र में ही नित्य दो घण्टे लगाकर प्रज्ञा अभियान के निर्धारित कार्यक्रमों में हाथ बँटाते रह सकते हैं।
✍️ परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
📖 अखण्ड ज्योति 1982 अक्टूबर
अमृतवाणी:- आत्मीयता पूर्ण विदाई भाग-2परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम ...