Haridwar - हरिद्वार, Uttarakhand, India

Haridwar - हरिद्वार, Uttarakhand, India Haridwar is an ancient city and important Hindu pilgrimage site in North India's Uttarakhand state, where the River Ganges exits the Himalayan foothills.

उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग दो माह से बिहार के कुछ प्रबुद्ध जनों द्वारा प्रदेश की पांच नदियों (भागलपुर में चम्पा, पूर्णिय...
25/07/2020

उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग दो माह से बिहार के कुछ प्रबुद्ध जनों द्वारा प्रदेश की पांच नदियों (भागलपुर में चम्पा, पूर्णिया में साऊरा, चम्पारण में धनौती, रोहतास में काव और नवादा में काव नदी) पर नदी चेतना यात्रा के लिए होमवर्क चल रहा है। यह होमवर्क रोज सबेरे 8.30 पर प्रांरंभ होता है और आधा घंटे से लेकर एक घंटे तक चलता है। इस दौरान सारे लोग नदी पर अपनी समझ को परिमार्जित तथा परिष्कृत करने के साथ-साथ समाज के नदी से सम्बन्ध को समझने का प्रयास करते हैं। पंकज मालवीय जो मूलतः पत्रकार हैं, इस अभियान के संयोजक हैं। यह अभियान पानी रे पानी अभियान जो 2014 से चल रहा है, का हिस्सा है।

उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग दो माह से बिहार के कुछ प्रबुद्ध जनों द्वारा प्रदेश की पांच नदियों (भागलपुर में चम्पा, पू....

हिंडन नदी डूब क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेशऐसे आदेश को जोरदार जनसमर्थन की ज़रुरत है। यदि हम ऐसा न क...
07/01/2020

हिंडन नदी डूब क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश

ऐसे आदेश को जोरदार जनसमर्थन की ज़रुरत है। यदि हम ऐसा न कर सके, तो बस देखते रखिए कि कहाँ तक टिका रह पायेगा यह नदी हितैषी आदेश ? टिकेगा या राजसत्ता-धनसत्ता के आगे स्वयं ध्वस्त हो जायेगा ?

देहरादून के सरस्वती विहार निवासी अरुण कुमार गुप्ता ने भूमि विवाद को लेकर 13 मई 2016 को एसआइटी में शिकायत की थी। एसआइटी न...
30/12/2019

देहरादून के सरस्वती विहार निवासी अरुण कुमार गुप्ता ने भूमि विवाद को लेकर 13 मई 2016 को एसआइटी में शिकायत की थी। एसआइटी ने 27 जुलाई 2016 को जिलाधिकारी को पत्र भेजकर भूमि का सीमांकन कराने का आग्रह किया था। इस पत्र पर प्रशासन ने क्या जांच की। इसकी जानकारी अरुण कुमार गुप्ता ने आरटीआइ में मांगी थी। तय समय के भीतर सूचना न मिलने पर अरुण ने विभागीय अपीलीय अधिकारी जिलाधिकारी के पास अपील की। उन्होंने बताया कि आरटीआइ आवेदन के जवाब में सर्वे कानूनगो की जांच दी गई है। जबकि अरुण ने सीमांकन/जांच रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद उन्हें दोबारा यही आख्या दी गई। साथ में बताया गया कि सीमांकन के लिए तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अरविंद कुमार पांडे ने उपजिलाधिकारी सदर, सहायक अभिलेख अधिकारी, तहसीलदार सदर व सर्वे नायब तहसीलदार की कमेटी बनाई है।इसे अधूरी जानकारी बताते हुए अरुण ने सूचना आयोग में अपील की। प्रकरण की सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त चंद्र सिंह नपलच्याल ने कहा कि एक तरफ पैमाइश के लिए संयुक्त कमेटी बनाई गई है और जांच के नाम पर महज एक सर्वे कानूनगो की आख्या दी जा रही है।आयोग ने एक अगस्त 2019 को आदेश दिया कि जांच कमेटी एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करे। कलक्ट्रेट के लोक सूचना अधिकारी देवी प्रसाद नैनवाल ने वर्तमान एडीएम रामजी शरण शर्मा को इस बाबत याद भी दिलाया, मगर उन्होंने जांच नहीं कराई।

एडीएम (प्रशासन) ने एक अगस्त को जारी सूचना आयोग के आदेश के बाद भी नहीं कराई भूमि मामले की संयुक्त जांच सुमन सेमवाल, दे....

गंगा के पास व्हिस्की निर्माण इकाई अस्वीकार्य क्यों?कहा जाता है गंगा के पानी को पीने, उसकी सुगंध, या स्नान मात्र करने से ...
22/07/2019

गंगा के पास व्हिस्की निर्माण इकाई अस्वीकार्य क्यों?

कहा जाता है गंगा के पानी को पीने, उसकी सुगंध, या स्नान मात्र करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. गंगा की सुगंध पृथ्वी के चारों और फैलती है. यही कारण है कि हम उसके तटों को प्रदूषित नहीं करते हैं. इसलिए यह वास्तव में अजीब है कि उत्तराखंड सरकार ने गंगा के तट से बमुश्किल 5 किलोमीटर दूर देवप्रयाग में एक शराब फैक्ट्री की स्थापना को मंजूरी दी है. शराब की गंध अब गंगा की सुगंध के साथ मिश्रित .....

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कहा जाता है गंगा के पानी को पीने, उसकी सुगंध, या स्नान मात्र करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. गंगा की सुगंध पृथ्वी क...

गंदी नदियां सिर्फ गंगा की समस्या नहीं है, न ही सिर्फ भारत की. बांग्लादेश में सर्वोच्च अदालत ने नदियों पर कब्जे और उसे गं...
02/07/2019

गंदी नदियां सिर्फ गंगा की समस्या नहीं है, न ही सिर्फ भारत की. बांग्लादेश में सर्वोच्च अदालत ने नदियों पर कब्जे और उसे गंदा करने को अपराध घोषित कर दिया है. साथ ही सरकार से लोगों को जागरूक करने के कदम उठाने को कहा है.
बांग्लादेश हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में सरकार से कहा है कि वह नदी संरक्षण आयोग कानून में संशोधन करे और नदियों पर कब्जे और प्रदूषण के लिए कैद और भारी जुर्माने की सजा तय करे. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने ये फैसला पिछली फरवरी में ही सुना दिया था लेकिन अब उसका पूरा टेक्स्ट जारी किया गया है. इस फैसले में नदियों और जलाशयों को बचाने के लिए 17 निर्देश दिए गए हैं. बांग्लादेश नदियों और जलाशयों का देश है लेकिन पिछले सालों में उनकी संख्या लगातार घटती गई है.

हाई कोर्ट बेंच ने तूराग नदी पर मुकदमे की सुनवाई के बाद अपने सख्त फैसले में कहा है, "नदियों की हत्या हम सबकी सामूहिक आत्महत्या है. नदियों को मारना मौजूदा और भावी पीढ़ियों को मारना है." तूराग नदी के कब्जे और प्रदूषण का मामला इतना गंभीर हो गया था कि अदालत ने उसे व्यक्ति और जीवित हस्ती घोषित कर दिया है. वह यह दर्जा पाने वाली दुनिया की चौथी नदी है. इससे पहले न्यूजीलैंड में वांगानुई और भारत में गंगा और यमुना को यह दर्जा मिल चुका है.

गंदी नदियां सिर्फ गंगा की समस्या नहीं है, न ही सिर्फ भारत की. बांग्लादेश में सर्वोच्च अदालत ने नदियों पर कब्जे और उस...

पर्यावरण मंत्री का कार्य है पर्यावरण को बचाना न कि व्यवसाय करने को आसान बनाना: जयराम रमेशकांग्रेस सांसद श्री जयराम रमेश ...
30/06/2019

पर्यावरण मंत्री का कार्य है पर्यावरण को बचाना न कि व्यवसाय करने को आसान बनाना: जयराम रमेश

कांग्रेस सांसद श्री जयराम रमेश ने संसद में सही कहा है कि पर्यावरण मंत्री का काम पर्यावरण की रक्षा करना है न कि विकास के प्रोजेक्ट को हरी झंडी देना. लेकिन हमें याद रखना चाहिए की 2009 से 2011 तक इन्ही श्री रमेश ने पर्यावरण मंत्रालय का कार्य संभाला था. उस समय मन्दाकिनी नदी पर बन रहे फाटा-व्युंग और सिंगोली-भटवारी जल विद्युत् परियोजनाओं से प्रभावित लोगों ने इनके पास शिकायत की थी कि परियोजनाओं द्वारा गैर कानूनी ढंग से मक को नदी में डाला जा रहा है. टनल बनाने के कारण पहाड़ी श्रोत सूख रहे हैं, जंगल का कटान बिना स्वीकृति के किये जा रहे हैं. वन पंचायतों द्वारा स्वीकृति लिए बिना वन काटे जा रहे हैं. ग्राम प्रधानों से झूट बोलकर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर लिए जा रहे हैं इत्यादि. लेकिन उस समय श्री रमेश ने इन शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया था. यह परियोजना 2013 में आयी केदारनाथ आपदा के कारण क्षतिग्रस्त हो गयी थी जैसा कि फोटो में दर्शाया गया है. आज विपक्ष में बैठकर उन्हें चिंतन करना चाहिए कि क्या उनका उस समय का कार्य उचित था. लेकिन यह भी सही है की श्री जयराम रमेश ने भागीरथी पर तीन जल विद्युत परियोजनाओं को बंद कराया था और उसके लिए उन्हें साधुआत.

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कांग्रेस सांसद श्री जयराम रमेश ने संसद में सही कहा है कि पर्यावरण मंत्री का काम पर्यावरण की रक्षा करना है न कि विका....

06/06/2019

फिलहाल तो मैं अपने साथियों को मातृ सदन हरिद्वार का निमंत्रण भेज रहा हूं। @⁨Varsha Verma Haridwar Matri Sadan⁩ वर्षा दीदी और उनका पूरा परिवार गंगा आंदोलन से पिछले करीब 15 -20 सालों से जुड़ा हुआ है उनकी तरफ से यह निमंत्रण आया है।


स्वामी निगमानंद सरस्वती जी की नौवीं पुण्यतिथि पर 13,14,15,16 जून को मातृ सदन में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी गंगा पर चिंतन होगा ।13 जून को श्रद्धांजलि सभा 14 जून को त्रयोदशी होने के कारण वैयक्तिक चिंतन ।15,16 को सरकार के द्वारा दिए गए आश्वासन की पूर्ति अभी तक ना होने के कारण अग्रिम आंदोलन की रूप रेखा तैयार की जाएगी। उसके लिए गंगा प्रेमी आमंत्रित है।

स्वामी निगमानंद जी का गंगा के लिए लंबे अनशन के बाद निर्वाण हो गया था।

स्वामी निगमानंद कोई आसमान से चाँद -तारे तोड़कर लाने की जिद नहीं कर रहे थे.वे तो गंगा मैया को -जो न केवल बल्कि हिन्दू धर्म की जननी है-उसे उन खनन माफियाओं से बचाने और गंगा की जीवन्तता के लिए अनशनरत रहे थे और लंबे अनशन के बाद गंगालीन हो गए थे।

‘बांध बनेगा तो देश का विकास होगा, आपका विकास होगा। आपके घर में बिजली आएगी, रोड आएगी, रोजगार आएगा’। ये पंक्ति हमने कई बार...
18/05/2019

‘बांध बनेगा तो देश का विकास होगा, आपका विकास होगा। आपके घर में बिजली आएगी, रोड आएगी, रोजगार आएगा’। ये पंक्ति हमने कई बार सरकार के मुंह से सुन रखी है। लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? बांध बनने से वहां के लोगों का विकास होना चाहिए, रोजगार मिलना चाहिए, उनकी जिंदगी पहले से बेहतर होनी चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं है, डैम बनता है और लोग अच्छी जिंदगी की आशा में अपना घर, जमीन-जायदाद सब छोड़ देते हैं लेकिन मिलता क्या है सिर्फ झूठे वायदे?

उत्तराखंड राज्य को पहाड़ और नदियों के लिए जाना जाता है लेकिन सरकार इसे बांधों का राज्य बनाने पर तुली हुई है। उत्तराखंड में इस समय 20 से ज्यादा डैम के प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं जिनमें से कुछ बन भी गये हैं। इन्हें प्रस्तावित डैम प्रोजेक्ट में से एक प्राजेक्ट है, किशाऊ बांध परियोजना।

‘बांध बनेगा तो देश का विकास होगा, आपका विकास होगा। आपके घर में बिजली आएगी, रोड आएगी, रोजगार आएगा’। ये पंक्ति हमने कई ....

बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण सही तरीके से नहीं करने पर देहरादून के 20 अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों पर ‘उत्तराखंड पर्याव...
18/05/2019

बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण सही तरीके से नहीं करने पर देहरादून के 20 अस्पतालों और पैथोलॉजी सेंटरों पर ‘उत्तराखंड पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ ने दस लाख का जुर्माना लगा दिया है। हर अस्पताल को पचास-पचास हजार रुपये का जुर्माना भरना होगा। जुर्माना लगाए गए अस्पतालों में प्राइमरी हेल्थ सेंटर (रांझा वाला), विद्या डायग्नोस्टिक सेंटर (ऋषिकेश रोड देहरादून), गंगोत्री चाइल्ड केयर (नेहरू कॉलोनी, देहरादून) डायबिटीज़ सेंटर ( सहस्त्रधारा रोड) आदि प्रमुख हैं।

हिन्दुस्तान, देहरादून, 18 मई 2019 बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण सही तरीके से नहीं करने पर देहरादून के 20 अस्पतालों और पैथ...

उत्तराखंड ने अब तक तमाम शहरों के सीवर नेटवर्क में लगे सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले उपचारित पानी के उपयोग का एक्श...
16/05/2019

उत्तराखंड ने अब तक तमाम शहरों के सीवर नेटवर्क में लगे सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले उपचारित पानी के उपयोग का एक्शन प्लान नहीं बनाया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड, गुजरात, असम, पंजाब, बिहार और उप्र अब तक अपने एक्शन प्लान नहीं जमा किए हैं।

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल -एनजीटी) में आये एक मामले में इसका खुलासा हुआ है। एनजीटी ने उत्तराखंड समेत 18 राज्यों व संघ शासित प्रदेशों को उपचारित जल के उपयोग का एक्शन प्लान पेश करने के निर्देश दिए हैं। ताकि देशभर में भूजल पर दबाव कम किया जा सके और भूजल का दोहन कम किया जा सके।

प्रदेश ने अब तक तमाम शहरों के सीवर नेटवर्क में लगे सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले उपचारित पानी के उपयोग का ए.....

गंगा किनारे से 200 मीटर की परिधि तक निर्माण कार्य पर न्यायालय के रोक के आदेश धनकुबेरों के लिए मजाक की तरह है और आये दिन ...
11/05/2019

गंगा किनारे से 200 मीटर की परिधि तक निर्माण कार्य पर न्यायालय के रोक के आदेश धनकुबेरों के लिए मजाक की तरह है और आये दिन ऐसे लोग न्यायालय के आदेशों को हवा में उड़ाते रहे हैं। ऐसे ही लगभग तीन हजार से ज्यादा मामले हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के कार्यालय में फाइलों में धूल फांक रहे हैं और विभागीय अधिकारी जांच की बात कहकर अपना पल्ला झड़ते रहे हैं जैसे इन्हें इन निर्माण कार्यों की जानकारी ही न हो।

टिहरी जनपद के मुनि की रेती थाना क्षेत्र के तपोवन सराय इलाके में गंगा नदी के महज 50-150 मीटर की दूरी पर कई निर्माण कार्य हो रहे हैं। लेकिन एचआरडीए ने अपने आंखों पर पैंसे की पट्टी बांध रखी है। तपोवन सराय के बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग में पुलिस चौकी से मात्र दस कदम की दूरी पर तीन स्थानों पर अवैध खनन कर उसमें होटल बनाने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि यहां रात के समय यहां खनन कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। लेकिन जिम्मेदार प्रशासन ने आंख बंद की हुई है। उक्त जगह पर पहले मिट्टी का काफी बड़ा एक टीला था, जिसे जेसीबी मशीन से एकदम समतल कर दिया गया। इसके बाद उक्त जगह पर होटल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है।

गंगा किनारे से 200 मीटर की परिधि तक निर्माण कार्य पर न्यायालय के रोक के आदेश धनकुबेरों के लिए मजाक की तरह है और आये दि.....

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