17/10/2025
अभी दिवाली पर निम्नलिखित नामों से श्री यंत्र का अर्चन किया जा सकता है ।
ध्यान
ॐ सिंहासनस्थां त्रिनयनां माणिक्याभरणोज्ज्वलाम्।
मुक्ताहारलसत्कण्ठां स्मेरवक्त्रां मनोहराम्॥
मंदारमाल्यभूषाढ्यां मणिद्वीपांतसंस्थिताम्।
शिवकामेश्वराराध्यां श्रीललितां नमाम्यहम्॥
मैं श्रीललिता त्रिपुरसुंदरी देवी को प्रणाम करता हूँ —
जो मणिद्वीप में सिंहासन पर विराजमान हैं, तीन नेत्रों वाली हैं,
माणिक्य रत्नों से शोभित हैं, मुक्तामालाओं से अलंकृत हैं,
मधुर मुस्कान वाली, मन को मोह लेने वाली हैं,
जिनकी पूजा स्वयं शिव-कामेश्वर करते है ।
विनियोग मंत्र
ॐ अस्य श्रीललिता नामावलि जपस्य, परमशक्तिप्राप्त्यर्थं, सर्वसिद्ध्यर्थं जपे विनियोगः ॥
श्री ललिता त्रिपुरसुंदरी नामावलि
1. श्रीललितायै नमः
2. त्रिपुरसुन्दर्यै नमः
3. राजराजेश्वर्यै नमः
4. राजमातृकायै नमः
5. श्रीविद्यायै नमः
6. राजराजार्चितायै नमः
7. कामेश्वर्यै नमः
8. महेश्वर्यै नमः
9. श्रीमातै नमः
10. श्रीमहामायायै नमः
11. सर्वशक्त्यै नमः
12. चिदानन्दरूपिण्यै नमः
13. मणिद्वीपवासिन्यै नमः
14. चिदग्निकुण्डसम्भूतायै नमः
15. देवकन्यायै नमः
16. पराशक्त्यै नमः
17. पंचदशाक्षरीविद्यायै नमः
18. कामबीजरूपिण्यै नमः
19. ह्रींकारिण्यै नमः
20. त्रैलोक्यमोहन्यै नमः
21. भक्तप्रियायै नमः
22. भक्तवत्सलायै नमः
23. करुणामय्यै नमः
24. शरण्यायै नमः
25. शिवकामेश्वरपूजितायै नमः
26. रत्नसिंहासनस्थायै नमः
27. महात्रिपुरसुन्दर्यै नमः
28. सर्वसौख्यप्रदायै नमः
29. सर्वसिद्धिप्रदायै नमः
30. श्रीचक्रनिलयायै नमः
31. श्रीनिवासायै नमः
32. श्रीकण्ठनिलयायै नमः
33. सर्वविद्यामय्यै नमः
34. सौभाग्यदायिन्यै नमः
35. कामकलेश्वर्यै नमः
36. मनोन्मन्यै नमः
37. सर्वदर्शिन्यै नमः
38. सर्वात्मिकायै नमः
39. सौम्यरूपायै नमः
40. चंद्रनयनीयायै नमः
41. सुमुख्यै नमः
42. स्मेरवक्त्रायै नमः
43. सुलोचनायै नमः
44. सुमनसां पूजितायै नमः
45. भक्तहृदयवासिन्यै नमः
46. मनोहारिण्यै नमः
47. सर्वमङ्गल्यै नमः
48. अष्टसिद्धिदायिन्यै नमः
49. चिद्रूपिण्यै नमः
50. कालातीतायै नमः
51. परमानन्दरूपिण्यै नमः
52. मुक्तिदायिन्यै नमः
53. ज्ञानगम्यायै नमः
54. ब्रह्मस्वरूपिण्यै नमः
55. विश्वजनन्यै नमः
56. महालक्ष्म्यै नमः
57. महाकाल्यै नमः
58. महासरस्वत्यै नमः
59. महात्रिपुरेश्वर्यै नमः
60. कामबीजसंभावितायै नमः
61. रत्नमाल्यविभूषितायै नमः
62. सर्वसंपालिन्यै नमः
63. विश्वपालिन्यै नमः
64. विश्वमोहिन्यै नमः
65. सर्वकर्मफलप्रदायै नमः
66. श्रीराजराजेश्वर्यै नमः
67. राजीवनेत्रायै नमः
68. कोमलांग्यै नमः
69. सुवर्णवर्णायै नमः
70. सुधामय्यै नमः
71. अमृतस्वरूपिण्यै नमः
72. शरणागतपालिन्यै नमः
73. सर्वविघ्ननिवारिण्यै नमः
74. सर्वरोगनिवारिण्यै नमः
75. सर्वदुःखनिवारिण्यै नमः
76. सर्वमङ्गलमङ्गल्यै नमः
77.शिवायै नमः
78. सर्वार्थसाधिकायै नमः
79. भुक्तिमुक्तिप्रदायिन्यै नमः
80. कामिनीप्रियायै नमः
81. भवान्यै नमः
82. त्रिपुरमालिन्यै नमः
83. सौन्दर्यनिलयायै नमः
84. बालारूपायै नमः
85. राजराजगुरुप्रसादायै नमः
86. महाशक्त्यै नमः
87. महाभोगदायिन्यै नमः
88. सर्वसमृद्धिप्रदायिन्यै नमः
89. आनन्दरूपायै नमः
90. योगिन्यै नमः
91. सिद्धविद्यायै नमः
92. हृदयेश्वर्यै नमः
93. सर्वकामफलप्रदायै नमः
94. आदिशक्त्यै नमः
95. नित्यकल्याण्यै नमः
96. परात्परायै नमः
97. चिदम्बरनिलयायै नमः
98. सर्वेश्वर्यै नमः
99. सर्वानन्ददायिन्यै नमः
100. मोक्षप्रदायिन्यै नमः
101. भक्तरक्षिण्यै नमः
102. दुर्गत्युद्धारिण्यै नमः
103. सिद्धिदायिन्यै नमः
104. त्रिपुरराजेश्वर्यै नमः
105. सौख्यदायिन्यै नमः
106. परमानन्दरूपिण्यै नमः
107. श्रीविद्यारूपिण्यै नमः
108. श्रीललिताम्बिकायै नमः ॥
समापन प्रार्थना
जय ललिते त्रिपुरसुंदरी मातः,
जय राजराजेश्वरी पराशक्ते।
देहि मे सौभाग्यम्, बुद्धिं, बलं, आयुः, सुखं च॥
सर्वं श्रीललिताप्रीत्यर्थं समर्पयामि॥ 🌸
जप विधि व लाभ
प्रत्येक नाम पर अक्षत (चावल) या माला का एक मनका स्पर्श करें।
शुक्रवार, पूर्णिमा या रात्रि ९–१० बजे इस जप का विशेष प्रभाव होता है।
यह नामावलि ललिता सहस्रनाम के समान फलदायक है —
इससे भक्ति, सौंदर्य, शांति, वैभव, और आत्मबल की वृद्धि होती है।