Thought Transformation community

Thought Transformation community Thought Transformation community However for most of us thoughts are only figments of one’s imagination. In fact, this entire world is a creation of thoughts.

Shantikunj was founded by the Saint-Scholar-Philosopher par excellence, Pandit Shriram Sharma Acharya, who in his youth was also a freedom fighter. Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojana (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage. It is the head-qua

rter of Yug Nirman Yojna of the All World Gayatri Pariwar, which has a following of more than twenty million devoted disciples and seventy million persons all over the worldhoughts have got immense power. Generally people consider thoughts as spare time entertainment, but the only reason for this is that they have never paid attention to the power of thoughts. Gross material objects of physical world are nothing but the creation of subtle power of thoughts. The scriptures describe this entire Universe as the Creator’s urge to manifest as many. “ Ekoh~m bahusyami”. Even if we don’t go that far, we can see the power of thoughts manifested all around us in the form of this evolved material world. All the material developments, arts, equipments, technological innovations, life-transforming literature are the result of the thoughts originated in the minds of their creators. First the possibility of such a creation arises in their thoughts, then contemplation and investigation on the same thought ultimately manifest as the creation.

माँ ब्रह्मचारिणी जय जय जय ब्रह्मचारिणी माँ, तप की ज्योति धारी,भक्तों के जीवन में भर दो, माता शक्ति सारी॥जपमाला कर में धर...
23/09/2025

माँ ब्रह्मचारिणी

जय जय जय ब्रह्मचारिणी माँ, तप की ज्योति धारी,
भक्तों के जीवन में भर दो, माता शक्ति सारी॥

जपमाला कर में धरी, कमंडल शोभा पाए,
तपस्विनी माँ कृपा करो, सब दुर्गुण-दोष मिटायें॥
श्रद्धा भक्ति की ज्योति से, जग में करो उजियारी,
जय जय जय ब्रह्मचारिणी माँ, तप की ज्योति धारी॥

संयम स्वरूपा माता , साधना की दानी,
सुख शांति देती हो माते , भव-भय हरखानी॥
धैर्य और बल देकर माँ, कर दो पार उतारी,
जय जय जय ब्रह्मचारिणी माँ, तप की ज्योति धारी॥

भवसागर की नैया, माता, तुम ही पार उतारो,
संकट सब हर लो हे माता, कृपा अमृत बारो॥
सिद्धि-मुक्ति दायिनी माते, कर दो कृपा भारी,
जय जय जय ब्रह्मचारिणी माँ, तप की ज्योति धारी॥
-उमेश यादव

Navratri 2025 : Maa Bramcharini song | Pargya Geet - Shantikunj Haridwar Highlights👇👇👇https://youtu.be/aggH9MMySwc🌸 Navratri 2025 Special | Maa Brahmacha...

06/10/2024

आदिशक्ति माँ कूष्मांडा ने ,अखिल विश्व निर्माण किया।
आदिस्वरुपा अष्टभुजा ने, सारे जग का त्राण किया।।
रोग शोक का अंत करो माँ, अंतस से कुविचार हरो।
अंतस से कुविचार हरो।।
नव दुर्गा माँ कृपा करो अब, जगती पर उपकार करो।
मानव में देवत्व जगाओ, दनुजों का संहार करो।।
उमेश यादव, शांतिकुंज, हरिद्वार।

*साधना में सुगति दो मां*सुगति दो माँ साधना में, श्रेष्ठ चिंतन मांगते हैं।प्राण वायु क्षीण न हो, सृजन में गति चाहते हैं।।...
06/09/2024

*साधना में सुगति दो मां*
सुगति दो माँ साधना में, श्रेष्ठ चिंतन मांगते हैं।
प्राण वायु क्षीण न हो, सृजन में गति चाहते हैं।।

चल पड़ें पथ आपकी माँ, राह तू आसान कर।
गति मिले पग शक्ति दो माँ,हृदय में नवप्राण भर।।
गात ढीला पड़ न जाए, शक्ति को हम साधते हैं।
सुगति दो माँ साधना में, श्रेष्ठ चिंतन मांगते हैं।

भाव में समभाव हो माँ,साधना हम कर रहे।
भाव दुर्बल हो न पाएं,दुर्भाव से हम डर रहे।।
मीड़ वीणा तंतुओं से, स्वर सुमन से साधते हैं।
सुगति दो माँ साधना में, श्रेष्ठ चिंतन मांगते हैं।।

श्वास तन की चल रही है,डोर तेरे हाथ में है।
मन हृदय अंतःकरण में,माँ हमारे साथ में हैं।
पुत्र हैं हम माँ तुम्हारे, सिर्फ इतना जानते हैं ।
सुगति दो माँ साधना में,श्रेष्ठ चिंतन मांगते हैं।।
-उमेश यादव, अखंड ज्योति मई 2024

सुगति दो माँ साधना में || Sugati do maa sadhna me👇👇👇https://youtu.be/8KNPV3KMiq0 ...

https://www.youtube.com/watch?v=Qw0M47Cilm0
13/08/2024

https://www.youtube.com/watch?v=Qw0M47Cilm0

गुरुदेव ने क्यों ठुकराए करोड़ों रुपये?- आद. डॉ. चिन्मय पण्ड्या जीWhy did Gurudev refuse crores of rupees? Gurudev Ne Kyon Thukarae Karodon Rupaye?👇👇👇https:...

बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏
23/05/2024

बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏

संवत 2081नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।
08/04/2024

संवत 2081नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

होली पर्व पर हार्दिक शुभकामनायें. (बैनीआहपीनाला – VIBGYOR)आओ स्वयं से होली खेलें, खुद को ही हम रंग लगाएं।इन्द्रधनुष सा स...
25/03/2024

होली पर्व पर हार्दिक शुभकामनायें. (बैनीआहपीनाला – VIBGYOR)

आओ स्वयं से होली खेलें, खुद को ही हम रंग लगाएं।
इन्द्रधनुष सा सतरंगी बन, जीवन अपना सफल बनायें।।

बैर भाव अब दूर भगाएं, प्यार और सहकर बढ़ाएं।
मिलजुलकर हम रहना सीखें,सबके सहयोगी बन जाएँ।।
आध्यात्मिकता से जीवन के, रंग बैंगनी से रंग जाएँ।
इन्द्रधनुष सा सतरंगी बन,जीवन अपना सफल बनायें।।

नील रंग अवनी नभ शोभित,अति अनन्त भाव जगाता।
ह्रदय हमारा हो विशाल यह, शांति धैर्य सद्भाव बढाता।।
नील रंग में रंगकर हम भी, स्नेह प्रेम विश्वास जगाएं।
इन्द्रधनुष सा सतरंगी बन, जीवन अपना सफल बनायें।।

आत्मशक्ति संग प्रज्ञा मेधा, विचार क्रांति अभियान करें।
मस्त मयूर कानन मन नर्तन, प्रेम सुधा रसपान करें॥
आसमान में रंग मिलाकर, दिग दिगंत तक बढ़ते जाएँ।
इन्द्रधनुष सा सतरंगी बन, जीवन अपना सफल बनायें।।

हरा रंग हरियाली मन की, स्वस्थ सुखी जीवन हो अपना।
मातृभूमि के लिए हमारा, तन मन धन अर्पण सब अपना।।
हरे रंग से रंगकर मन ये , धरती माँ का मान बढ़ाए।
इन्द्रधनुष सा सतरंगी बन, जीवन अपना सफल बनायें।।

पीत पवित्र पावन निर्मल मन,त्याग तपस्यामय हो जीवन ।
गुरु के आदर्शों में ढलकर,गुरु को ही तन मन हो अर्पण॥
गुरु चरणों का रज धारण कर, गुरु के रंगों में रंग जाएँ।
इन्द्रधनुष सा सतरंगी बन, जीवन अपना सफल बनायें।।

नारंगी रंग मान हमारा, राष्ट्र धर्म हो प्राण से प्यारा।
केसरिया बलदायक भी है, संतों का परिचायक भी है ।।
मन केसरिया रंग में रंग कर,धर्ममय जीवन बन जाए।
इन्द्रधनुष सा सतरंगी बन,जीवन अपना सफल बनायें।।

लाल रंग है रक्त हमारा, अंग अंग में जोश जगाता।
सूर्योदय की मधुर लालिमा, सारा जग उर्जा है पाता।।
लाल रंग तो प्रेम रंग है, प्रेममयी जीवन बन जाए।
इन्द्रधनुष सा सतरंगी बन,जीवन अपना सफल बनायें॥

इन्द्रधनुष सा जीवन को भी, सात रंग में हम रंग डालें।
सात चक्र को जागृत करके,अनंत शक्ति श्रोत हम पालें॥
नवल प्रभात के कलरव जैसे, नवल जागृति गान सुनाएं।
आओ स्वयं से होली खेलें, खुद को ही हम रंग लगाएं।
-उमेश यादव

*वागीश्वरी माँ सरस्वती* बासन्ती बयार बह रही, कुसुमाकर इतराए। विद्यादायिनी, हंस वाहिनी, ज्ञानमृत बरसायें॥    अंग-अंग पुलक...
14/02/2024

*वागीश्वरी माँ सरस्वती*
बासन्ती बयार बह रही, कुसुमाकर इतराए।
विद्यादायिनी, हंस वाहिनी, ज्ञानमृत बरसायें॥

अंग-अंग पुलकन, आनंदित मन, कुहक रही अमराई।
कण-कण सुरभित,वसुधा सज्जित,चहक रही तरुणाई॥
हंस वाहिनी, ज्ञान दायिनी, भक्ति भाव विकसायें।
विद्या दायिनी, हंस वाहिनी, ज्ञानमृत बरसायें॥

नैसर्गिक आलोक प्रकाशित, ले लें जितना वांछित।
ध्येय हमारे पूर्ण हो रहे, सद्कर्मों हित इच्छित॥
प्रकृति प्रदेय करने को आतुर, निज पात्रता दिखाएं।
विद्या दायिनी, हंस वाहिनी, ज्ञानमृत बरसायें॥

गंगा तट पर पावन उत्सव, गुरुवर का आवाहन।
मन मस्ती में झूम उठा है, दृढ़ संकल्प संभावन॥
वागीश्वरी माँ सरस्वती से, ज्ञान भक्ति वर पाएं॥
विद्या दायिनी, हंस वाहिनी, ज्ञानमृत बरसायें॥

माँ भारती विमला वाचा, उर प्रज्ञा जाग्रत हो।
माँ शारदा, शास्त्ररूपिणी, चरणों में अनुरत हॉन॥
मन उपवन हो शांतिकुंज,अंतस नव-ज्योति जलाएं।
विद्या दायिनी, हंस वाहिनी, ज्ञानमृत बरसायें॥
-उमेश यादव

23/12/2023

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