22/03/2026
*मैया कुष्मांडा*
चतुर्थ दिवस नवरात्र का, सृष्टि का आधार,
मंद हास्य से मैया ने, रचा है ये संसार।
अष्टभुजा धारी मैया, सिंह पे है सवार,
अमृत कलश और चक्र लिए, करती बेड़ा पार।
आदिशक्ति तू आदिस्वरूपा, तेजपुंज का वास,
मिटे अंधेरा जीवन का, जब हो तेरा आभास।
सौरमंडल के भीतर माँ, तेरा ही है निवास,
भक्तों के हर संकट का, करती है तू विनाश ।
"अष्टभुजा, मंद मुस्कान,
रच दिया तुमने सकल जहान।
चतुर्थ नवरात्रि, कुष्मांडा माँ,
तुमसे जग में जीवन प्राण॥"
मालपुए का भोग निराला, मैया को अति भाए,
ध्यान धरे जो श्रद्धा से, सुख-संपत्ति वो पाए।
अष्टभुजा की छाया में, मिटते रोग और शोक,
तेरी मंद मुस्कान से ही, महके ये तीनों लोक।
जय जय माता कुष्मांडा! जय जय माँ भवानी!
सकल जगत की जननी तू ही, तू ही है कल्याणी।
— उमेश यादव
माँ कूष्मांडा: सृष्टि की आदि-शक्ति | नवरात्रि चतुर्थ दिवस | प्रज्ञा गीत 🚩✨👇👇👇https://youtu.be/ZVWQ_p6INkI ...