Devbhumi Haridwar, Uttarakhand

Devbhumi Haridwar, Uttarakhand Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Devbhumi Haridwar, Uttarakhand, Hindu temple, हरिद्वार, Haridwar.
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हरिद्वार, उत्तराखण्ड के हरिद्वार जिले का एक पवित्र नगर तथा सनातन का प्रमुख तीर्थ है। यह बहुत प्राचीन नगरी है। हरिद्वार हिन्दुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है। हर हर गंगे🚩जय मां गंगे🚩

12/08/2026
11/08/2026

हैरो, लंदन, यूके

*इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के रजत जयंती समारोह का शुभारंभ विश्व भर से आए संतों ने किया*


*राज राजेश्वर गुरूजी जैसे संतों ने ही सदैव विश्व का मार्गदर्शन करने का कार्य किया हैः श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज*

*चौथे दिन संत संसद की अध्यक्षता राज राजेश्वर गुरूजी ने की, मुख्य अतिथि हजूर महाराज त्रिलोचन दास रहे*

हैरो, लंदन, यूकेः
विदेशी धरती पर सचखंड नानक धाम, सिद्धाश्रम व नेटवर्क 10 न्यूज चैनल की ओर से पहली बार हो रही संत संसद चौथे सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर में हुई। इस अवसर पर इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित रजत जयंती महोत्सव का शुभारंभ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष, जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी के अध्यक्ष एवं हिंदू यूनाइटेड फ्रंट के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज व देश-विदेश से आए संतों ने किया। सभी संतों के पावन सानिघ्य में विश्व शांति हवन एवं नवीन भवन का शिला पूजन हुआ। नवीन भवन में चिकित्सालय, विद्यालय और चार मंजिला संत निवास का निर्माण होगा। सिद्धाश्रम की रजत जयंती एक वर्ष तक विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक और सेवा कार्यक्रमों के साथ मनाई जाएगी। सिद्धाश्रम के संस्थापक राजराजेश्वर गुरुजी ने सभी संतों का स्चागत अभिनंदन किया। उन्होंने ही चौथे दिन की संत संसद की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि हजूर महाराज त्रिलोचन दास महाराज व विशिष्ट अतिथि विजय बाबा शिवपुरी लंदन रहे।
श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरूजी ने इंग्लैंड की धरती से पूरे विश्व में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का जो बीडा उठाया है, उसे पूरा करने में इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर अहम भूमिका निभा रहा है। सेंटर का नया भवन बनने से यह कार्य और अधिक तेजी से होगा। राज राजेश्वर गुरूजी जैसे संतों ने ही सदैव विश्व का मार्गदर्शन करने का कार्य किया है। उनके प्रयासों से लंदन में हो रही छठी संत संसद से पूरे विश्व में सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार हो रहा है। वे लंदन की धरती से पूरे विश्व में सनातन संस्कृति, परम्परा व विरासत की गंगा बहा रहे हैं।
हजूर महाराज त्रिलोचन दास ने कहा कि संतों के चरणों में ही कृपा है। सदगुरू जहां भी पहुंच जाती है, वहां की धरती पवित्र हो जाती है। राज राजेश्वर गुरू ने इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के माध्यम से लंदन की धरती को पवित्र बना दिया है। संत संसद रूपी महाकुंभ इसी प्रकार विदेशी धरती पर लगता रहे और संतों को पावन आशीर्वाद इसी प्रकार मिलता रहे तो पूरे विश्व में सनातन संस्कृति का परचम लहराएगा।
दास विजय बाबा ने कहा कि राज राजेश्वर गुरूजी ने पूरे विश्व को शांति, करूणा, सदभाव, बंधुत्व व मैत्री के प्रकाश से अलोकित करने का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करने के लिए हर संत उनके साथ है।
जगतगुरू चक्रपाणि नंद गिरि महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरू सनातन धर्म के स्तंभ के रूप में भारत का गौरव पूरे विश्व में बढा रहे हैं। इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर व संत संसद के माध्यम से उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों से वसुधैव कुटुम्बकम् की परिकल्पना साकार होगी।
महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर का संकल्प युग को बदलने व आने वाले समाय को बदलकर पूरे विश्व के कल्याण का है। उनके इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के माध्यम से पूरे विश्व में शांति, सदभाव, बंधुत्व, करूणा मैत्री व मानवता की गंगा बहेगी।
पंडोखर सरकार ने कहा कि सिद्धाश्रम से सनातन संस्कृति की ऐसी रसधार बहेगी कि पूरी मानवता का कल्याण हो जाएगा। रा राजेश्वर गुरू पूरे विश्व में सनातन की जो अलख जगा रहे हैं, वह सभी के लिए अनुकरणीय है।
बटुक गिरि महाराज ने कहा कि संतों की उर्जा ही विश्व की दशा व दशा को बदलने का कार्य कर सकती है। राज राजेश्वर गुरूजी संत संसद व सिद्धाश्रम के माध्यम से विदेशों में भी भारतीय संस्कृति का ध्वज फहरा रहे हैं।
मनीषी स्वामी निरंजन स्वामी महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरूजी ने इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के माध्यम से लंदन ही नहीं पूरे इंग्लैंड की धरती को पावन बना दिया है। उनका सेंटर आज विश्व भर में शांति, अहिंसा, करूणा व बंधुत्व का संदेश दे रहा है।
देवेंद्र ब्रहमचारी ने कहा कि सिद्धाश्रम से पूरे विश्व में वसुधैव कुटंबकम का संदेश जाएगा। राज राजेश्वर गुरूजी सनातन संस्कृति का विस्तार कर भारत का गौरव बढा रहे हैं।
महामंडलेश्वर भूपेंद्र गिरि महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरूजी ने सनातन संस्कृति, आध्यात्म व धर्म का जो पौधा 25 वर्ष पूर्व लगाया था, आज वह वट वृक्ष बन चुका है और पूरे विश्व के सदभाव व कल्याण के लिए कार्य कर रहा है।
महामंडलेश्वर डॉ उमाकांतानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरू ने वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार व मानवता के कल्याण के जिस बीज का रोपण किया, उसमें बडे-बडे संतों ने जल डालकर यह संदेश दिया है कि संत विश्व व मानवता के कल्याण के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। नेटवर्क 10 न्यूज चैनल के एमडी व एडिटर इन चीफ संजय गिरि ने छठी संत संसद का आयोजन लंदन में कराकर विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने का कार्य किया है।
पदमश्री सदगुरू ब्रहमेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरूजी व उनका इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म का गौरव बढाने का कार्य कर रहे हैं।
जयंती राम बप्पा, ब्रह्म देवी गोवा समेत हजारों भक्त भी मौजूद रहे।
#सनातनहमारीपहचान #धर्मसंसद #लन्दन

हैरो, लंदन, यूकेः11 अगस्त 2026*इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के रजत जयंती समारोह का शुभारंभ विश्व भर से आए संतों ने क...
11/08/2026

हैरो, लंदन, यूकेः

11 अगस्त 2026

*इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के रजत जयंती समारोह का शुभारंभ विश्व भर से आए संतों ने किया*

*राज राजेश्वर गुरूजी जैसे संतों ने ही सदैव विश्व का मार्गदर्शन करने का कार्य किया हैः श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज*

*चौथे दिन संत संसद की अध्यक्षता राज राजेश्वर गुरूजी ने की, मुख्य अतिथि हजूर महाराज त्रिलोचन दास रहे*

हैरो, लंदन, यूकेः
विदेशी धरती पर सचखंड नानक धाम, सिद्धाश्रम व नेटवर्क 10 न्यूज चैनल की ओर से पहली बार हो रही संत संसद चौथे सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर में हुई। इस अवसर पर इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित रजत जयंती महोत्सव का शुभारंभ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष, जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी के अध्यक्ष एवं हिंदू यूनाइटेड फ्रंट के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज व देश-विदेश से आए संतों ने किया। सभी संतों के पावन सानिघ्य में विश्व शांति हवन एवं नवीन भवन का शिला पूजन हुआ। नवीन भवन में चिकित्सालय, विद्यालय और चार मंजिला संत निवास का निर्माण होगा। सिद्धाश्रम की रजत जयंती एक वर्ष तक विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक और सेवा कार्यक्रमों के साथ मनाई जाएगी। सिद्धाश्रम के संस्थापक राजराजेश्वर गुरुजी ने सभी संतों का स्चागत अभिनंदन किया। उन्होंने ही चौथे दिन की संत संसद की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि हजूर महाराज त्रिलोचन दास महाराज व विशिष्ट अतिथि विजय बाबा शिवपुरी लंदन रहे।
श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरूजी ने इंग्लैंड की धरती से पूरे विश्व में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का जो बीडा उठाया है, उसे पूरा करने में इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर अहम भूमिका निभा रहा है। सेंटर का नया भवन बनने से यह कार्य और अधिक तेजी से होगा। राज राजेश्वर गुरूजी जैसे संतों ने ही सदैव विश्व का मार्गदर्शन करने का कार्य किया है। उनके प्रयासों से लंदन में हो रही छठी संत संसद से पूरे विश्व में सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार हो रहा है। वे लंदन की धरती से पूरे विश्व में सनातन संस्कृति, परम्परा व विरासत की गंगा बहा रहे हैं।
हजूर महाराज त्रिलोचन दास ने कहा कि संतों के चरणों में ही कृपा है। सदगुरू जहां भी पहुंच जाती है, वहां की धरती पवित्र हो जाती है। राज राजेश्वर गुरू ने इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के माध्यम से लंदन की धरती को पवित्र बना दिया है। संत संसद रूपी महाकुंभ इसी प्रकार विदेशी धरती पर लगता रहे और संतों को पावन आशीर्वाद इसी प्रकार मिलता रहे तो पूरे विश्व में सनातन संस्कृति का परचम लहराएगा।
दास विजय बाबा ने कहा कि राज राजेश्वर गुरूजी ने पूरे विश्व को शांति, करूणा, सदभाव, बंधुत्व व मैत्री के प्रकाश से अलोकित करने का जो संकल्प लिया है, उसे पूरा करने के लिए हर संत उनके साथ है।
जगतगुरू चक्रपाणि नंद गिरि महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरू सनातन धर्म के स्तंभ के रूप में भारत का गौरव पूरे विश्व में बढा रहे हैं। इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर व संत संसद के माध्यम से उनके द्वारा किए जा रहे प्रयासों से वसुधैव कुटुम्बकम् की परिकल्पना साकार होगी।
महामंडलेश्वर यतींद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर का संकल्प युग को बदलने व आने वाले समाय को बदलकर पूरे विश्व के कल्याण का है। उनके इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के माध्यम से पूरे विश्व में शांति, सदभाव, बंधुत्व, करूणा मैत्री व मानवता की गंगा बहेगी।
पंडोखर सरकार ने कहा कि सिद्धाश्रम से सनातन संस्कृति की ऐसी रसधार बहेगी कि पूरी मानवता का कल्याण हो जाएगा। रा राजेश्वर गुरू पूरे विश्व में सनातन की जो अलख जगा रहे हैं, वह सभी के लिए अनुकरणीय है।
बटुक गिरि महाराज ने कहा कि संतों की उर्जा ही विश्व की दशा व दशा को बदलने का कार्य कर सकती है। राज राजेश्वर गुरूजी संत संसद व सिद्धाश्रम के माध्यम से विदेशों में भी भारतीय संस्कृति का ध्वज फहरा रहे हैं।
मनीषी स्वामी निरंजन स्वामी महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरूजी ने इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर के माध्यम से लंदन ही नहीं पूरे इंग्लैंड की धरती को पावन बना दिया है। उनका सेंटर आज विश्व भर में शांति, अहिंसा, करूणा व बंधुत्व का संदेश दे रहा है।
देवेंद्र ब्रहमचारी ने कहा कि सिद्धाश्रम से पूरे विश्व में वसुधैव कुटंबकम का संदेश जाएगा। राज राजेश्वर गुरूजी सनातन संस्कृति का विस्तार कर भारत का गौरव बढा रहे हैं।
महामंडलेश्वर भूपेंद्र गिरि महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरूजी ने सनातन संस्कृति, आध्यात्म व धर्म का जो पौधा 25 वर्ष पूर्व लगाया था, आज वह वट वृक्ष बन चुका है और पूरे विश्व के सदभाव व कल्याण के लिए कार्य कर रहा है।
महामंडलेश्वर डॉ उमाकांतानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरू ने वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार व मानवता के कल्याण के जिस बीज का रोपण किया, उसमें बडे-बडे संतों ने जल डालकर यह संदेश दिया है कि संत विश्व व मानवता के कल्याण के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। नेटवर्क 10 न्यूज चैनल के एमडी व एडिटर इन चीफ संजय गिरि ने छठी संत संसद का आयोजन लंदन में कराकर विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने का कार्य किया है।
पदमश्री सदगुरू ब्रहमेशानंद गिरि महाराज ने कहा कि राज राजेश्वर गुरूजी व उनका इंटरनेशनल सिद्धाश्रम शक्ति सेंटर पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म का गौरव बढाने का कार्य कर रहे हैं।
जयंती राम बप्पा, ब्रह्म देवी गोवा समेत हजारों भक्त भी मौजूद रहे।
#धर्मसंसद #लंदन #नारायणगिरी #सनातनभारत

*🌹हिंदू अरेंज्ड मैरिज करने का सही तरीका क्या है, स्टेप बाई स्टेप प्रक्रिया और 7 फेरे के 7 वचन, कैसे करते हैं हिंदू विवाह...
23/07/2026

*🌹हिंदू अरेंज्ड मैरिज करने का सही तरीका क्या है, स्टेप बाई स्टेप प्रक्रिया और 7 फेरे के 7 वचन, कैसे करते हैं हिंदू विवाह, जानिये परंपरा और रिवाज🌹*
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*🌼हिन्दू विवाह क्या है: धर्मशास्त्रों के अनुसार हिंदू विवाह एक समझौता नहीं है। यह भोगविलासिता का साधन भी नहीं है। हिन्दू विवाह 16 संस्कारों में से एक धार्मिक संस्कार है। शास्त्रों के अनुसार विवाह आठ प्रकार के होते हैं। विवाह के ये प्रकार हैं- ब्रह्म, दैव, आर्श, प्राजापत्य, असुर, गन्धर्व, राक्षस और पिशाच। इसमें से ब्रह्म विवाह को ही धर्म शास्त्रों ने मान्यता दी है। वर्तमान में सभी हिंदू इसी विवाह पद्धिति को अपनाते हैं जिसमें स्थानीय संस्कृति के अनुसार उनके रीति रिवाज भले ही भिन्न हो।*

*🌸ब्रह्म विवाह क्या है:-* दोनों पक्ष की सहमति से समान वर्ग के सुयोज्ञ वर से कन्या का विवाह उसकी समहित से निश्चित कर देना 'ब्रह्म विवाह' कहलाता है। विवाह करके एक पत्नी व्रत धारण करना ही सभ्य मानव की निशानी है। शिव और पार्वती और श्रीराम और सीता ने इसी विवाह का पालन किया था।

*🌸हिंदू अरेंज्ड मैरिज का सही तरीका:-*
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
हिन्दू धर्मानुसार विवाह एक ऐसा कर्म या संस्कार है जिसे बहुत ही सोच-समझ और समझदारी से किए जाने की आवश्यकता है।

किसी भी लड़के या लड़की के विवाह योग्य हो जाने पर माता पिता उसके लिए योग वर या वधु ढूंढते हैं।

दूर-दूर तक रिश्तों की छानबीन किए जाने की जरूरत है।

पहले इस कार्य के हेतु रिश्‍तेदारों के अलावा किसी ज्योतिष और पुरोहित की मदद भी ली जाती थी।

जब योग वर या वधु मिल जाते हैं तो नाड़ी दोष और मंगल दोष का मिलान किया जाता है।

नाड़ी दोष और मंगल दोष का निवारण होने के बाद लड़के और लड़की की आपसी सहमति से रिश्ता तय होता है।

रिश्ता तय होने के बाद तिलक की रस्म निभाई जाती है।

तिलक की रस्म के 1 से 3 माह के अंदर सगाई की रस्म पूर्ण करते हैं।

जब दोनों ही पक्ष सभी तरह से संतुष्ट हो जाते हैं तभी इस विवाह को किए जाने के लिए शुभ मुहूर्त निकाला जाता है।

सगाई की रस्म पूर्ण होने के 3 माह बाद उचित मुहूर्त देखकर विवाह किया जाता है।

*🚩मांगलिक दोष और नाड़ी दोष:-* मांगलिक दोष मात्र 20 प्रतिशत ही बाधक बन सकता है। वह भी तब जब अष्टमेश एवं द्वादशेश दोनों के अष्टम एवं द्वादश भाव में 5 या इससे अधिक अंक पाते हैं। मांगलिक के अलावा यदि अन्य मामलों में कुंडली मिलती है तो विवाह सुनिश्चित कर दिया जाता है। अत: मंगल दोष कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं होती है। समस्या नाड़ी दोष ही है। यह माना जाता है कि नाड़ी मिलान नहीं होता है तो यह विवाह नहीं करना चाहिए।

*🌸विवाह की रस्म:-*
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
- वैदिक पंडितों के माध्यम से विशेष व्यवस्था, देवी पूजा, वर वरण तिलक, हरिद्रालेप, द्वार पूजा, मंगलाष्टकं, हस्तपीतकरण, वरमाला, मर्यादाकरण, पाणिग्रहण, ग्रंथिबन्धन, प्रतिज्ञाएं, प्रायश्चित, शिलारोहण, सप्तपदी, शपथ आश्‍वासन आदि रीतियों को पूर्ण किया जाता है।

- वर द्वारा मर्यादा स्वीकारोक्ति के बाद कन्या अपना हाथ वर के हाथ में सौंपे और वर अपना हाथ कन्या के हाथ में सौंप दे। इस प्रकार दोनों एक दूसरे का पाणिग्रहण करते हैं। यह क्रिया हाथ से हाथ मिलाने जैसी होती है। मानों एक दूसरे को पकड़कर सहारा दे रहे हों।

- कन्यादान की तरह यह वर-दान की क्रिया तो नहीं होती, फिर भी उस अवसर पर वर की भावना भी ठीक वैसी होनी चाहिए, जैसी कि कन्या को अपना हाथ सौंपते समय होती है। वर भी यह अनुभव करें कि उसने अपने व्यक्तित्व का अपनी इच्छा, आकांक्षा एवं गतिविधियों के संचालन का केन्द्र इस वधू को बना दिया और अपना हाथ भी सौंप दिया।

- दोनों एक दूसरे को आगे बढ़ाने के लिए एक दूसरे का हाथ जब भावनापूर्वक समाज के सम्मुख पकड़ लें, तो समझना चाहिए कि विवाह का प्रयोजन पूरा हो गया।

- इसके बाद 7 वचनों के साथ ही सात फेरे लिए जाते हैं।

*🌸विवाह के 7 फेरे के 7 वचन-*
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
विवाह के समय पति-पत्नी अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे को सात 7 वचन देते हैं। इसे सप्तपदी कहा जाता है।

*🚩1. तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:*
*वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी!।*

(यहां कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने संग लेकर जाना। कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धर्म कार्य आप करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग में अवश्य स्थान दें। यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।)

`•किसी भी प्रकार के धार्मिक कृत्यों की पूर्णता हेतु पति के साथ पत्नी का होना अनिवार्य माना गया है। पत्नी द्वारा इस वचन के माध्यम से धार्मिक कार्यों में पत्नी की सहभा‍गिता व महत्व को स्पष्ट किया गया है।`

*🚩2. पुज्यो यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:*
*वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम!!*

(कन्या वर से दूसरा वचन मांगती है कि जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें तथा कुटुम्ब की मर्यादा के अनुसार धर्मानुष्ठान करते हुए ईश्वर भक्त बने रहें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।)

`•यहां इस वचन के द्वारा कन्या की दूरदृष्टि का आभास होता है। उपरोक्त वचन को ध्यान में रख वर को अपने ससुराल पक्ष के साथ सदव्यवहार के लिए अवश्य विचार करना चाहिए।`

*🚩3. जीवनम अवस्थात्रये पालनां कुर्यात*
*वामांगंयामितदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृतीयं!!*

(तीसरे वचन में कन्या कहती है कि आप मुझे यह वचन दें कि आप जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढ़ावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा पालन करते रहेंगे, तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूं।)

*🚩4. कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:*
*वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थ:।।*

(कन्या चौथा वचन यह मांगती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिंता से पूर्णत: मुक्त थे। अब जब कि आप विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दा‍यित्व आपके कंधों पर है। यदि आप इस भार को वहन करने की प्रतिज्ञा करें तो ही मैं आपके वामांग में आ सकती हूं।)

`•इस वचन में कन्या वर को भविष्य में उसके उत्तरदायित्वों के प्रति ध्यान आकृष्ट करती है। इस वचन द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुत्र का विवाह तभी करना चाहिए, जब वह अपने पैरों पर खड़ा हो, पर्याप्त मात्रा में धनार्जन करने लगे।`

*🚩5. स्वसद्यकार्ये व्यहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्‍त्रयेथा*
*वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या!!*

(इस वचन में कन्या कहती जो कहती है, वह आज के परिप्रेक्ष्य में अत्यंत महत्व रखता है। वह कहती है कि अपने घर के कार्यों में, लेन-देन अथवा अन्य किसी हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी मंत्रणा लिया करें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।)

`•यह वचन पूरी तरह से पत्नी के अधिकारों को रेखांकित करता है। अब यदि किसी भी कार्य को करने से पूर्व पत्नी से मंत्रणा कर ली जाए तो इससे पत्नी का सम्मान तो बढ़ता ही है, साथ-साथ अपने अधिकारों के प्रति संतुष्टि का भी आभास होता है।`

*🚩6. न मेपमानमं सविधे सखीना द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्वेत*
*वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम!!*

(कन्या कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों अथवा अन्य स्‍त्रियों के बीच बैठी हूं, तब आप वहां सबके सम्मुख किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे। यदि आप जुआ अथवा अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन से अपने आपको दूर रखें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।)

*🚩7. परस्त्रियं मातूसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कूर्या।*
*वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तमंत्र कन्या!!*

(अंतिम वचन के रूप में कन्या यह वर मांगती है कि आप पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगे और पति-पत्नी के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी को भागीदार न बनाएंगे। यदि आप यह वचन मुझे दें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूं।)

`•इस वचन के माध्यम से कन्या अपने भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास करती है।`

*🌸क्यों करते हैं ब्रह्म विवाह :-* मनुष्य के ऊपर देवऋण, ऋषिऋण एवं पितृऋण- ये तीन ऋण होते हैं। यज्ञ-यागादि से देवऋण, स्वाध्याय से ऋषिगण तथा उचित रीति से ब्रह्म विवाह करके पितरों के श्राद्ध-तर्पण के योग्य धार्मिक एवं सदाचारी पुत्र उत्पन्न करके पितृऋण का परिशोधन होता है। इस प्रकार पितरों की सेवा तथा सदधर्म का पालन करने की परंपरा सुरक्षित रखने के लिए संतान उत्पन्न करना विवाह का परम उद्देश्य है। यही कारण है कि हिन्दू धर्म में ब्रह्म विवाह को एक पवित्र-संस्कार के रूप में मान्यता दी गयी है।

#सनातनहमारीपहचान #हिंदूसंस्कृती #विवाह

🚩अकाल मृत्यु का रहस्य 🚩 *यदि धर्मराज जी (यमराजजी) के बहीखाते में कोई चूक नहीं होती, तो 'अकाल मृत्यु' का क्या रहस्य है?**...
23/07/2026

🚩अकाल मृत्यु का रहस्य 🚩

*यदि धर्मराज जी (यमराजजी) के बहीखाते में कोई चूक नहीं होती, तो 'अकाल मृत्यु' का क्या रहस्य है?*

*एक बार एक जिज्ञासु के मन में बड़ा गहरा सवाल उठा कि यदि सृष्टि का नियम अचूक है और धर्मराज यमराज जी के बहीखाते में रत्ती भर भी चूक नहीं होती, तो फिर इस संसार में 'अकाल मृत्यु' का क्या अस्तित्व है? अगर सब कुछ पहले से तय है, तो कोई समय से पहले कैसे मर सकता है? क्या यमराज जी से भी कभी गणित में कोई गलती हो जाती है? यह एक ऐसा विरोधाभास है जो देखने में जितना उलझा हुआ लगता है, हमारे ग्रंथों में इसका उत्तर उतना ही सीधा और तार्किक है।*

*इस उलझन का उत्तर हमें सदियों पीछे श्री गरुड़ पुराण जी के उस प्रसंग में मिलता है, जहाँ स्वयं पक्षीराज गरुड़ जी ने भगवान विष्णुजी के सामने यही शंका रखी थी। तब नारायण जी ने मुस्कुराते हुए उन्हें समझाया था कि मृत्यु के दो रूप होते हैं। एक होती है काल मृत्यु, जब कोई जीव अपने संचित पुण्यों के आधार पर अपनी पूर्ण स्वाभाविक आयु भोगकर शरीर छोड़ता है। और दूसरी होती है अकाल मृत्यु, जो किसी दुर्घटना, भुखमरी, विष, शस्त्र के प्रहार या आत्महत्या के कारण अचानक घटित होती है। लेकिन नारायण जी ने स्पष्ट किया था कि यह यमराज जी की कोई भूल नहीं होती, बल्कि इसके पीछे कर्मों का एक गहरा गणित छिपा होता है।*

*इसी बात को और विस्तार से समझने के लिए हमें महाभारत के अनुशासन पर्व में जाना होगा, जहाँ कुरुक्षेत्र के मैदान में भीष्म पितामह जी, युधिष्ठिर जी को कर्म का सिद्धांत समझा रहे थे। पितामह भीष्म जी ने बताया कि अकाल मृत्यु के पीछे मनुष्य के क्रियमाण कर्म यानी इस जन्म की लापरवाही और उसकी स्वतंत्र इच्छाशक्ति काम करती है। ईश्वर जी ने मनुष्य को एक प्राकृतिक आयु दी है, लेकिन साथ ही उसे विवेक भी दिया है। यदि कोई मनुष्य शास्त्रों द्वारा वर्जित आचरण करता है, अपने शरीर के साथ खिलवाड़ करता है, या अत्यधिक लापरवाही में कोई आत्मघाती कदम उठाता है, तो वह अपनी प्राकृतिक आयु को खुद ही छोटा कर लेता है। इसे यमराज जी की भूल नहीं, बल्कि मनुष्य के इसी जन्म के फैसलों का तात्कालिक फल माना जाता है। इसके अलावा कई बार पिछले जन्मों का कोई अत्यंत तीव्र और नकारात्मक प्रारब्ध भी अचानक सामने आ जाता है, जिसे टालना मनुष्य के वश में नहीं होता।*

*हमारे ऋषियों ने इसे समझाने के लिए एक बहुत ही सुंदर और सरल उदाहरण दिया है। कल्पना कीजिए कि मनुष्य का यह जीवन एक दीपक है, और उसकी सांसें उस दीपक में भरा हुआ तेल हैं। स्वाभाविक मृत्यु तब होती है जब दीपक का तेल बूंद-बूंद करके पूरी तरह समाप्त हो जाता है और दीया अपनी मर्जी से शांत हो जाता है। लेकिन अकाल मृत्यु ऐसी है जैसे दीपक में तेल तो अभी बहुत बचा हुआ था, लेकिन किसी की लापरवाही से अचानक तेज हवा का झोंका आया और उसने जलते हुए दीये को समय से पहले बुझा दिया। वह हवा का झोंका मनुष्य की असावधानी या उसका कोई पुराना प्रारब्ध हो सकता है। श्री गरुड़ पुराण जी में बताया है कि ऐसी स्थिति में उस जीव की केवल भौतिक देह नष्ट होती है, लेकिन उसकी अधूरी इच्छाओं और बची हुई सांसों का कोटा अभी बाकी रहता है। इसीलिए वह आत्मा सूक्ष्म जगत में तब तक प्रतीक्षा करती है, जब तक कि उसका मूल समय-चक्र पूरा नहीं हो जाता।*

*तो यदि हम परम सत्य के धरातल पर खड़े होकर देखें, तो हमारे लिए जो 'अकाल' या असमय है, वह उस सर्वोच्च सत्ता और कर्म के नियम के अनुसार बिल्कुल सटीक और तय समय ही है। मनुष्य अपनी सीमित आँखों से पर्दे के पीछे चल रहे धर्मराज जी के उस विशाल बहीखाते को देख नहीं पाता, इसलिए वह इसे महज़ एक दुर्घटना मान लेता है।* *पर हकीकत यही है* *कि ब्रह्मांड के उस* *सबसे बड़े न्यायधीश जी के रजिस्टर में कभी कोई कैलकुलेशन*
*मिस्टेक नहीं होती।।*
🙏🌿*ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः*🌿

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक, अखंड राष्ट्र साधना व तपस्वी जीवन के पर्याय, महान चिंतक, 'राष्ट्र ऋषि' श्रद...
05/06/2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक, अखंड राष्ट्र साधना व तपस्वी जीवन के पर्याय, महान चिंतक, 'राष्ट्र ऋषि' श्रद्धेय श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर 'गुरुजी' को उनकी पुण्यतिथि पर कोटिशः नमन।

'पूज्य गुरु जी' के विचार माँ भारती की सेवा हेतु हम सभी को युग-युगांतर तक प्रेरित करते रहेंगे।

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_*।। नौतपा ।।*_कल 25 मई 2026 से नौतपा शुरू हो रहा है। जिसे नौतपा या नौ तप के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय ज्योतिष और स...
24/05/2026

_*।। नौतपा ।।*_

कल 25 मई 2026 से नौतपा शुरू हो रहा है। जिसे नौतपा या नौ तप के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय ज्योतिष और संस्कृति में यह एक महत्वपूर्ण अवधि है जो गर्मी के चरम समय में आती है। यह रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश के साथ शुरू होती है और आमतौर पर नौ दिनों तक चलती है।

*इस बार नौतपा:-* 25 मई 2026 से 2 जून 2026 तक ( 9 दिन )।
सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 25 मई 2026 को प्रवेश कर रहा है ( दोपहर के आसपास )। इस अवधि में सूर्य का प्रभाव तीव्र होता है, जिसके कारण गर्मी अपने चरम पर रहती है। कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका प्रभाव 8 जून 2026 तक भी महसूस हो सकता है।

*इस दौरान विशेष सावधानियां :-*

- अपने खाने-पीने का विशेष ध्यान रखें। भरपूर पानी पिएं, ठंडे और हल्के भोजन का सेवन करें।

- मुख्यतः बैंगन खाने पर पूर्णतः प्रतिबंध रखें।

- दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें।

- प्यासे पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था अवश्य करें। गर्मी में जानवरों और पक्षियों को पानी और छाया उपलब्ध कराना अत्यंत महत्वपूर्ण और पुण्य का कार्य है।

आप सभी अपना और अपने परिवार का ध्यान रखिए। पशु-पक्षियों का भी ख्याल रखें और सुरक्षित रहिए।

#नौतपा #गर्मी #बचाव #सावधानी

बद्रीनाथ -केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण GMVN होटलों के फोन नंबर ।
02/05/2026

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