09/07/2017
विश्वास की गहराई !!
एक बार नारदजी एक पर्वत से गुजर रहे थे। अचानक उन्होंने देखा कि एक विशाल वटवृक्ष के नीचे एक तपस्वी तप कर रहा है। उनके दिव्य प्रभाव से वह जाग गया और उसने उन्हें प्रणाम करके पूछा कि उसे प्रभु के दर्शन कब होंगे। नारदजी ने पहले तो कुछ कहने से इनकार किया, फिर बार-बार आग्रह करने पर बताया कि इस वटवृक्ष पर जितनी छोटी-बड़ी टहनियां हैं उतने ही वर्ष उसे और लगेंगे। नारदजी की बात सुनकर तपस्वी बेहद निराश हुआ। उसने सोचा कि इतने वर्ष उसने घर-गृहस्थी में रहकर भक्ति की होती और पुण्य कमाए होते तो उसे ज्यादा फल मिलते। वह बोला, ‘मैं बेकार ही तप करने आ गया।’ नारदजी उसे हैरान-परेशान देखकर वहां से चले गए।
🌿ॐ नमः शिवाय ॐ ॐ नमः शिवाय ॐ 🌿
आनन्दित रहिये !!
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🌿 ॐतथास्तुॐ 🌿
#ॐ
ादेव
ः_शिवाय्
्री_महाकाल