शिव शक्ति साधक

शिव शक्ति साधक 🕉️आध्यात्मिक ✨ साधना 🧘‍♂️ कुण्डलिनी अनुभव
🌌 ऊपरी बाधा नकारात्मक ऊर्जा समाधान
भक्ति की शक्ति सबसे ऊपर है
गलत कार्य वाले दूर रहे

कर्ण पिशाचनी साधना का एक सच्चा अनुभवयह बात आज से लगभग 6-7 साल पहले की है…जब साधना के क्षेत्र में नया-नया प्रवेश हुआ था, ...
25/05/2026

कर्ण पिशाचनी साधना का एक सच्चा अनुभव
यह बात आज से लगभग 6-7 साल पहले की है…
जब साधना के क्षेत्र में नया-नया प्रवेश हुआ था, तो मन में अलग-अलग साधनाओं को जानने और अनुभव लेने की तीव्र इच्छा रहती थी।
हर नया साधक चाहता है कि वह कुछ अलग अनुभव करे, कुछ नया जाने…
इसी क्रम में हमने कर्ण पिशाचनी साधना की शुरुआत की…
यह साधना सात्विक विधि से केवल अनुभव प्राप्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
रात्रि 10 बजे के बाद, स्फटिक की माला से 5 से 11 माला जप करना होता था…
लगातार 21 दिनों तक यह साधना की गई…
जैसे-जैसे साधना के दिन आगे बढ़ने लगे, वैसे-वैसे कुछ अनुभव भी होने लगे…
एक घटना ऐसी हुई जो लगातार 3 दिन तक दोहराई गई…
रोज एक छिपकली आकर साधना के आसन के ठीक सामने बैठ जाती थी…
अब बहुत लोग कहेंगे —
इसमें कौन सी बड़ी बात है? छिपकली तो हर घर में होती है…
बिल्कुल होती है…
लेकिन यहां बात सिर्फ छिपकली आने की नहीं थी…
सामान्य रूप से अगर कोई छिपकली आपके पास आए और आप जमीन पर हाथ मारो या इशारा करो, तो वह तुरंत भाग जाती है…
लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ…
जमीन पर हाथ मारने पर भी वह भागती नहीं थी…
बल्कि…
और पास आकर ठीक आसन के सामने बैठ जाती थी…
पहले दिन लगा कि शायद सामान्य बात होगी…
लेकिन जब यही घटना लगातार 3 दिन तक दोहराई गई, तब मन में अजीब सा भाव उठना स्वाभाविक था…
उस समय अनुभव बहुत कम था…
इसलिए जल्दी-जल्दी माला पूर्ण करके साधना समाप्त कर लेते थे…
लेकिन अंतिम दो दिनों में अनुभव थोड़ा और गहरा हो गया…
वह शक्ति हमें प्रत्यक्ष रूप से नहीं दिखाई दी…
लेकिन माताजी के सपने में एक भयानक रूप में अनुभव हुई…
जब उन्होंने यह बात बताई, तो उस समय जितना ज्ञान था, उसी अनुसार घर का बंधन किया गया…
क्योंकि यह साधना घर पर, चोरी-छिपे की जा रही थी…
ना इतनी आज्ञा थी कि रात्रि में बाहर जाकर की जाए,
ना उतना साधन उपलब्ध था…
फिर भी अनुभव लेने की जिज्ञासा में साधना पूरी की गई…
अंतिम दिन खीर से हवन किया गया…
उसके बाद अनुभव ऐसा होने लगा कि कुछ बातें मन में स्वयं संकेत देने लगती थीं…
लेकिन बाद में उस शक्ति का विसर्जन कर दिया गया…
क्योंकि नए साधक के लिए ऐसी शक्तियों को लंबे समय तक धारण करना उचित नहीं होता…
कुछ अनुभव गुप्त रखे है सार्वजनिक नहीं
उस समय इससे पहले अपने इष्ट के लाखों जप किए जा चुके थे…
इसलिए किसी प्रकार की हानि पहुंचाने में वह शक्ति असमर्थ थी…
लेकिन आजकल एक बहुत बड़ी भ्रांति फैला दी गई है…
लोग कहते हैं—
11 दिन में शक्ति सामने आ जाएगी…
यह कर देगी…
वह कर देगी…
जबकि सच्चाई यह है कि…
शक्ति को पकाना पड़ता है…
मेहनत करनी पड़ती है…
अनुशासन रखना पड़ता है…
पहले शक्ति मन के माध्यम से संकेत देती है…
फिर साधक की मेहनत और साधना के अनुसार अनुभव गहरे होते हैं…
और एक बात हमेशा याद रखिए…
शक्ति कभी बुरी नहीं होती…
बुरा या अच्छा उसका उपयोग करने वाला साधक होता है…
जैसे—
बंदूक सेना के पास भी होती है…
और आतंकवादी के पास भी…
हथियार एक ही है…
लेकिन उपयोग कोई रक्षा के लिए करता है,
तो कोई विनाश के लिए…
ठीक वैसे ही…
शक्ति वही रहती है…
निर्भर यह करता है कि साधक उसका प्रयोग किस उद्देश्य से कर रहा है…
आजकल कई नए साधक बिना अनुभव के बड़े-बड़े दावे करते हैं…
कमेंट में पूछते हैं—
क्या आपके पास यह शक्ति है?
क्या आपके पास भैरव के गण हैं?
लेकिन सच्चाई यह है कि…
साधना दिखाने की चीज नहीं…
जीने की चीज है…
जीवन में इतने अनुभव लिए हैं कि शायद नए साधक कल्पना भी न कर पाएं…
लेकिन अंत में आज भी एक ही बात कहेंगे—
एक साधे सब सधे…
हर शक्ति के पीछे मत भागो…
एक शक्ति को पकड़ो…
उसी में डूब जाओ…
उसी में टिक जाओ…
सफलता वहीं से शुरू होती है…
बाकी कुछ गुप्त विधियां गुरु परंपरा की होती हैं…
लेकिन बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलता…
आजकल लोग कहते हैं—
ट्रांसफर चाहिए…
शॉर्टकट चाहिए…
लेकिन सच्चाई यही है—
बिना अपनी मेहनत के साधना में कुछ प्राप्त नहीं होता…

23/05/2026

भैरव जी के शक्तिशाली गण प्राप्ति की गुप्त साधना

22/05/2026

गद्दी दरबार चलाते है लेकिन पूछा नहीं आता तो करे कालिका दुर्गा योगिनी की सिद्धि

ये किलन मंत्र इतना प्रबल है कि एक माला में ही सिद्ध हो जाता है मंत्र : “कीलू कीलू महा कीलू ,कीलू अपनी कायामरघट का मसान क...
21/05/2026

ये किलन मंत्र इतना प्रबल है कि एक माला में ही सिद्ध हो जाता है
मंत्र : “कीलू कीलू महा कीलू ,कीलू अपनी काया
मरघट का मसान कीलू ,हनुमत करे छाया
इस किलन मंत्र का जाप हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने करना है । लाल आसन ,लाल या सफेद वस्त्र। उत्तर मुख होकर बैठना है । लड्डू का भोग लगाना है।सभी का पंचोपचार पूजन करना है।रूद्राक्ष माला से , पॉच माला करनी है । केवल एक ही मंगलवार में सिद्ध हो जाएगा । ये प्रयोग मंगल वार रात्रि ठीक नौ बजे शुरू करना है। इसमें ये ध्यान रखे कि समय नौ बजे का हो।पूजन पाठ नौ से पहले शुरू कर देना। जाप नौ बजे शुरू हो जाना चाहिए। इस मंत्र को मंगलवार को सिध्द करना है । आपको कम से कम 5 माला करनी है, किन्तु जो साधक अपनी शक्ति अधिक बढ़ा न चाहते है वे इसका 11, 21, 41, 51 माला अपनी क्षमता के अनुसार कर सकते है । ये पूरा कार्य करने में सक्षम है ।जाप के बाद 1 माला हवन गुगल गुड घी मिलाकर करे
इसे सिद्ध करके किसी का भी इलाज किया जा सकता है छोटी मोटी झाडफूंक ये आसानी से करता है । इस मंत्र की सबसे अच्छी बात येहै कि इसके द्वारा यदि किसी को मंत्र से पढके धागा या गंडा दिया जाता है तो वो किसी भी सूतक यानि मरण और जनन दोनो सूतको मे काम करता है खण्डित नही होता । इसे पहन कर मरीज कही भी आ या जा सकता है । किसी दूसरे के ऊपर प्रयोग करते समय मंत्र मे अपनी काया की जगह अमुक की काया पढे और अमुक की जगह मरीज का नाम लें । ये एक मंत्र ही पूरी भगतई सम्भाल लेता है ,बस इसे ठीक से सिद्ध करने की जरूरत होती है ।

मुंजा क्या होता हैऐसे बच्चे जिनकी उम्र 6 से 12 वर्ष की होती है और उस अवस्था मै उनकी अकाल मृत्यु हो जाती है, ऐसे बच्चे मु...
20/05/2026

मुंजा क्या होता है
ऐसे बच्चे जिनकी उम्र 6 से 12 वर्ष की होती है और उस अवस्था मै उनकी अकाल मृत्यु हो जाती है, ऐसे बच्चे मुंजा बन जाते है, इनकी शक्ति बहुत अधिक होती है, यह मंदिर मै भी प्रवेश कर सकते है,इनकी साधना इमली के पेड़ के नीचे, पीपल के नीचे या निर्जन स्थान मसान आदि जगह पर सिद्ध की जाती है, यह अलग अलग प्रकार के होते है सात्विक और तामसिक दोनों प्रकार से इनकी साधना की जाती है,क्योंकि यह बच्चे होते है तो इनको चॉकलेट मिठाई दूध आदि का भोग प्रिय होता है,इनकी साधना से पहले महाकाली और भैरव की पूजा अवश्य करनी चाहिए जिससे साधना मै किसी प्रकार का नुकसान न हो, यह मित्र बनकर साधक के साथ रहते है, पीपल पर की जाने वाली साधना मै पहले पीपल के बरम बाबा (ब्रह्म देव) इनका भोग प्रसाद लगाकर आज्ञा लेकर तब ही इनकी साधना करनी चाहिए, ऐसा एकांत स्थल जहां नदी बहती हो आस पास मसान आदि हो और पीपल का पेड़ हो उस पेड़ पर इनका स्थान होता है,जमीन का धन बताना निकालना ऐसे काम इनके लिए बहुत सरल होते है,यह पोस्ट केवल जानकारी के लिए है,इनके मंत्र सार्वजनिक नहीं है

गुप्त साधना एक मनुष्य ने सुन रखा था कि आध्यात्मिक जगत में कुछ ऐसे गुप्त मंत्र हैं जो यदि किसी को सिद्ध हो जावें तो उसे ब...
17/05/2026

गुप्त साधना
एक मनुष्य ने सुन रखा था कि आध्यात्मिक जगत में कुछ ऐसे गुप्त मंत्र हैं जो यदि किसी को सिद्ध हो जावें तो उसे बहुत सिद्धियाँ मिल सकती हैं। मन्त्रों की अद्भुत शक्तियों के बारे में उसने बहुत कुछ सुन रक्खा था और बहुत कुछ देखा था इसलिए उसे बड़ी प्रबल उत्कंठा थी कि किसी प्रकार कोई मन्त्र सिद्ध कर लें, तो आराम से जिन्दगी बीते और गुणवान तथा यशस्वी बन जावें।
गुप्त मन्त्र की दीक्षा लेने के विचार से गुरुओं को तलाश करता हुआ, वह दूर-दूर मारा फिरने लगा। एक दिन एक सुयोग्य गुरु का उसे पता चला और वह उनके पास जा पहुँचा। वह महानुभाव दीक्षा देने के लिये तैयार न होते थे। पर जब उस मनुष्य ने बहुत प्रार्थना की और चरणों पर गिरा तो उन महानुभाव ने उसे शिष्य बना लिया। कुछ दिन के उपरान्त उसे गुप्त मंत्र बताने की तिथि नियत की गई। उस दिन उसे गायत्री मंत्र की दीक्षा दे दी और आदेश कर दिया कि इस मंत्र को गुप्त रखना, यह अलभ्य मंत्र औरों को मालूम नहीं है, तू इसका निष्ठापूर्वक जप कर ले तो बहुत सी सिद्धियाँ प्राप्त हो जावेंगी।
शिष्य उस मंत्र का जप करने लगा। एक दिन वह नदी किनारे गया तो देखा कि कुछ लोग गायत्री मंत्र को जोर-जोर से उच्चारण करके गा रहे थे। शिष्य को सन्देह हुआ कि इसे तो और लोग भी जानते हैं, इसमें गुप्त बात क्या है। इसी सोच विचार में वह आगे नगर में गया तो दिखा कि कितनी ही दीवारों पर गायत्री मंत्र लिखा हुआ है। वह और आगे चला तो एक पुस्तक विक्रेता की दुकान पर गायत्री सम्बन्धी कई पुस्तकें देखीं, जिनमें वह मंत्र छपा हुआ था। अब उसका सन्देह दृढ़ होने लगा। वह सोचने लगा यह तो मामूली मंत्र है और सब पर प्रकट है। गुरुजी ने मुझे योंही बहका दिया है। भला इससे क्या लाभ हो सकता है?
इन सन्देहों के साथ वह गुरुजी के पास पहुँचा और क्रोध पूर्वक उनसे कहने लगा कि आप ने व्यर्थ ही मुझे उलझा रखा है और एक मामूली मंत्र को गुप्त एवं रहस्यपूर्ण बताया है।
गुरु जी बड़े उदार और क्षमाशील थे। उतावले शिष्य को क्रोधपूर्वक वैसी ही उतावली का उत्तर देने की अपेक्षा उसे समझा कर सन्तोष करा देना ही उचित समझा। उन्होंने उस समय उससे कुछ न कहा और चुप हो गये। दूसरे दिन उन्होंने उस शिष्य को बुलाकर एक हीरा दिया और कहा इसे क्रमशः कुँजड़े, पंसारी, सुनार, महाजन और जौहरी के पास ले जाओ और वे जो इसका मूल्य बतावें उसे आकर मुझे बताओ। शिष्य गुरु जी की आज्ञानुसार चल दिया। पहले वह कुँजड़े के पास पहुँचा और उसे दिखाते हुए कहा इस वस्तु का क्या मूल्य दे सकते हो? कुँजड़े ने उसे देखा और कहा-काँच की गोली है, पड़ी रहेगी, बच्चे खेलते रहेंगे, इसके बदले में पाव भर साग ले जाओ। इसके बाद वह उसे पंसारी के यहाँ ले गया। पंसारी ने देखा काँच चमकदार है, तोलने के लिए बाँट अच्छा रहेगा। उसने कहा भाई, इसके बदले में एक सेर नमक ले सकते हो। शिष्य फिर आगे बढ़ा और एक सुनार के पास पहुँचा। सुनार ने देखा कोई अच्छा पत्थर है। जेवरों में नग लगाने के लिए अच्छा रहेगा। उसने कहा-इसकी कीमत 50 दे सकता हूँ। इसके बाद वह महाजन के पास पहुँचा। महाजन पहचान गया कि यह हीरा है पर यह न समझ सका किस जाति का है, तब भी उसने अपनी बुद्धि के अनुसार उसका मूल्य एक हजार रुपया लगा दिया। अन्त में शिष्य जब जौहरी के पास पहुँचा तो उसने दस हजार रुपया दाम लगाया। इन सब के उत्तरों को लेकर वह गुरु जी के पास पहुँचा और जिसने जो कीमत लगाई थी वह उन्हें कह सुनाई।
गुरु ने कहा-यही तुम्हारी संदेहों का उत्तर है। एक वस्तु को देखा तो सब ने, पर मूल्य अपनी बुद्धि के अनुसार आँका। मंत्र साधारण मालूम पड़ता है और उसे सब कोई जानते हैं, पर उसका असली मूल्य जान लेना सब के लिए संभव नहीं है। जो उसके गुप्त तत्व को जान लेता है, वही अपनी श्रद्धा के अनुसार लाभ उठा लेता है।
यथार्थ में मंत्रानुष्ठान और आध्यात्मिक क्रियाओं को स्थूल दृष्टि से देखा जाये, तो वे वैसी ही मामूली और तुच्छ प्रतीत होती हैं जैसी कि कुँजड़े को वह काँच की गोली प्रतीत हुई थी, किन्तु श्रद्धा और निष्ठा के द्वारा जिसने अपना मन जौहरी बना लिया है, उसके लिये वह साधनाएं बड़ा महत्व रखती हैं और इच्छानुसार फल भी देती है। सारा महत्व श्रद्धा और विश्वास में है। विश्वास के साथ की गई एक छोटी सी क्रिया भी विचित्र फल दिखाती है, किन्तु अविश्वास और अश्रद्धा के साथ किया हुआ अश्वमेध भी निष्फल है। यही गुप्त साधनाओं का रहस्य है।
सीताराम
हर हर महादेव

माता विपरीत प्रत्यंगिरा साधना: विधि,एवं विधानरावण के पुत्र इन्द्रजीत (मेघनाद) ने जिन देवी निकुम्बला का पूजन किया था उन्ह...
16/05/2026

माता विपरीत प्रत्यंगिरा साधना: विधि,एवं विधान

रावण के पुत्र इन्द्रजीत (मेघनाद) ने जिन देवी निकुम्बला का पूजन किया था उन्हें देवी प्रत्यंगिरा भी कहा जाता है.

प्रत्यंगिरा देवी मुख्य रूप से सुरक्षा प्रदान करती हैं और नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करती हैं। इनका रूप सिंहमुखी देवी का है। इन्हें सुरक्षा और मुक्ति के लिए आह्वान किया जाता है। साधना में मंत्र, यंत्र और सामान्य पूजा की जाती है, जिससे बाधाएँ दूर होती हैं और मुक्ति मिलती है।

विपरीत प्रत्यंगिरा भी सिंहमुखी रूप में हैं, पर इनकी ऊर्जा विपरीत होती है। ये नकारात्मकता को वापस शत्रु पर भेजती हैं और प्रतिकार या जवाबी कार्रवाई के लिए आह्वान की जाती हैं। इनकी साधना में विशेष पूजा या यज्ञ किया जाता है, जिससे शत्रु पराजित होता है और संतुलन बहाल होता है।

माता प्रत्यंगिरा देवी, जिन्हें भद्रकाली का उग्र स्वरूप भी कहा जाता है, शक्ति की अत्यंत प्रभावशाली देवी हैं। जिस प्रकार माता बगलामुखी की साधना से शत्रु का विनाश होता है, ठीक उसी प्रकार माता प्रत्यंगिरा की साधना भी शत्रु पर विजय दिलाती है और नकारात्मक शक्तियों को समूल नष्ट करती है। विपरीत प्रत्यंगिरा साधना में नकारात्मकता को वापस भेजने की भी अद्भुत शक्ति है।

साधना की विशेषताएँ

शत्रु पर विजय: माता विपरीत प्रत्यंगिरा की साधना से शत्रु का मन भ्रमित होता है और उसकी शक्ति आप पर कोई प्रभाव नहीं डाल पाती।

नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: तंत्र-मंत्र, बुरी नजर, भूत-प्रेत, ग्रह दोष आदि से सुरक्षा मिलती है।

आत्मविश्वास में वृद्धि: साधना से मन में स्पष्टता आती है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य: रोग, दुर्घटना, चोरी आदि से भी सुरक्षा मिलती है।

साधना विधि

सामग्री एवं आवश्यक तैयारियाँ

आसन: लाल कंबल या मोटे लाल कपड़े का आसन।

वस्त्र: साधक को लाल वस्त्र धारण करना चाहिए। सिर पर लाल कपड़ा रखे

माला: श्वेतार्क, कमलगट्टा या संस्कारित रुद्राक्ष की जपमाला।

दीपक: तेल या गाय के घी का दीपक (तेल का दीपक बाईं ओर, घी का दाहिनी ओर रखें)।

समय: सुबह या रात्रि 10 बजे के बाद शुभ मुहूर्त में।

दिशा: पूर्व दिशा।

ब्रह्मचर्य: साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।

साधना प्रारंभ

मन को शांत करें और आसन पर बैठें।

गणेश जी का मंत्र:
**************
इसे 11 बार जपकर गणेश जी को प्रणाम करें।

ध्यान:

नीचे दिए गए प्रत्यंगिरा ध्यान श्लोक को पढ़ें और मन में माता का ध्यान करें:

प्रत्यंगिरा ध्यान:

नानारत्नारचिरक्रांतम वृक्षाम्भ स्त्रवर्युतम।
व्याघ्रादिपशुभवर्याप्तम सानुयुक्तम गिरीसमरेत।।
मत्स्यकूर्माडीबीजाढयं नवरत्न समान्वितम।
घनच्छायां सकल्लोलम कूपारं विचिन्त्येत।।
जवालावलीसमाक्रान्तं जग स्त्री तयमद्भूतम।
पीतवर्णम महावह्नीं संस्मरेच्छत्रुशांतये।।
त्वरा समुत्थरावौघमलिनं रुद्धभूविदम।
पवनम संस्मरेदविश्व जीवनं प्राणरूपतः।।
नदी पर्वत वृक्षादिकालिताग्रास संकुला।
आधारभूता जगतो ध्येया पृथ्वीह मंत्रीणा।।
सूर्यादिग्रह नक्षत्र कालचक्र समन्वितां।
निर्मलं गगनं ध्यायेत प्राणिनामाश्रय पदम।।

मूल मंत्र:
*********

माला संख्या: 21 माला प्रतिदिन (1 माला = 108 बार)

अवधि: 21 से 45दिन तक लगातार

हवन: 21 दिन के बाद 3 दिन के भीतर दशांश हवन करें (अर्थात प्रतिदिन जप की संख्या का 1/10 भाग हवन में समर्पित करें)

पुरश्चरण: इस प्रक्रिया को 3 माह (तीन बार) दोहराएं

हवन विधि

लकड़ी: आम की लकड़ी,

हवन सामग्री: कमलगट्टे के बीज, घी, घी से चौगुना शहद

विशेष निर्देश: हवन करते समय अनामिका उंगली में कुशा की अंगूठी अवश्य धारण करें

साधना के लाभ

शत्रु पर विजय एवं उनका मन भ्रमित होता है।

तंत्र-मंत्र, बुरी नजर, भूत-प्रेत से सुरक्षा।

मानसिक शांति एवं आत्मविश्वास में वृद्धि।

रोग, दुर्घटना, चोरी आदि से रक्षा।

ग्रह दोष, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति।

विशेष नोट

साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है।

हवन और जप के समय मन को एकाग्र रखें।

यदि संभव हो तो संस्कारित रुद्राक्ष या कमलगट्टा की माला का प्रयोग करें। केवल मंत्र मिल जाने से शक्ति नहीं चलती शक्ति चलाना गुरु सिखाता है, जो यह विशेष साधना करना चाहे पर्सनल संपर्क कर सकते है, केवल समय पास करने के लिए msg न करे, फ्री वाले दूर रहे क्योंकि कफ़न भी फ्री नहीं आता
व्हाट्सएप: 9193579919

"माता विपरीत प्रत्यंगिरा अपने भक्तों को सभी प्रकार के भय से मुक्ति दिलाती हैं और शत्रु के सभी प्रयासों को विफल कर देती हैं।"

बटुक भैरव साधना भगवान शिव के बाल रूप (बटुक भैरव) की आराधना है, जो शत्रुओं के नाश, सुरक्षा, और शीघ्र मनोकामना पूर्ति के ल...
15/05/2026

बटुक भैरव साधना भगवान शिव के बाल रूप (बटुक भैरव) की आराधना है, जो शत्रुओं के नाश, सुरक्षा, और शीघ्र मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत प्रभावी है। यह साधना मुख्य रूप से रात्रिकाल में की जाती है, जिसमें बटुक भैरव यंत्र, काली हकीक माला, और प्रतिदिन के भोग के साथ 21 दिनों तक साधना करने का विधान है।बटुक भैरव साधना विधि (संक्षेप में):समय व दिशा: साधना रात के समय उत्तर दिशा की ओर मुंह करके की जाती है।तैयारी: स्वच्छ स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर बटुक भैरव यंत्र स्थापित करें और तेल का दीपक जलाएं।मंत्र: "ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा" या "ॐ ह्रीं बम बम बम बटुक भैरवाय नमः
का जाप करें।भोग: प्रतिदिन अलग-अलग भोग, जैसे मंगलवार को गुड़-घी, शनिवार को उड़द के पकौड़े, का भोग लगाएं।लड्डू,मिट्टी के बर्तन मै दूध मै शहद डाल कर भोग दे,
साधना मै यंत्र की बहुत आवश्यकता होती है,जब किसी शक्ति की साधना करके उनको याद किया जाता है तो उससे पहन उनके गण आते है, और कुछ शक्तियां अपने आप से स्थान ले लेती है क्योंकि वो उस महाशक्ति के साथ चलने वाले गण होते है, इसलिए यंत्र अवश्य रखे, जिन लोगों के आस पास यंत्र की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वह यहां से खरीद सकते है, प्रतिदिन पूजा करेंगे तो यंत्र सिद्ध हो जाएगा, जो प्राणप्रतिष्ठा करके लेना चाहते है वह पर्सनल कॉन्टैक्ट कर सकते है, आ अपने आस पास किसी पुजारी जो स्वयं साधना करते हो उनसे करवा सकते है, 5 से 11 माला से प्रारम्भ करे जितना जाप करे उसका दशांश (10%) हवन अवश्य करे, बटुक भैरव बाल रूप मै है इसलिए इनको हर प्रकार का सात्विक भोग जैसे नमकीन चॉकलेट का भी भोग दिया जाता है, यह बाल रूप मै है तो इनके चमत्कार भी ऐसे ही दिखाते है, एक बहुत छोटा सा चमत्कार बताते है, एक साधक इनकी साधना भैरव मंदिर मै करता था, एक दिन भाव विभोर होकर वह भैरव दर्शन के लिए रोने लगा, लगभग 15 मिनट ऐसे ही चलता रहा, साधक अपने इष्ट की मूर्ति से बात करता था, तभी वातारण बदला, और एक तेज हवा का झोंका आया जिसने हजारों चंदन मिला दिए हो ऐसी सुगंध थी, और सिर के बीच मै मानो किसी ने हाथ रखा हो, किसी साधक की साधना करते हुए कोई विशेष मिठाई खाने की इच्छा हुई, आंख बंद करके साधना करते हुए, अगले ही 5 मिनट मै कोई भक्त वही मिठाई भैरव को भोग लगा कर चला गया,तो ऐसे सैकड़ों अनुभव है, होते उसे ही है जिसका हृदय पवित्र हो
सावधानी: साधना गुरु के मार्गदर्शन में या सुरक्षा कवच के साथ करें, ।बटुक भैरव साधना के लाभ:शत्रु नाश: अकाल मृत्यु और दुश्मनों से रक्षा होती है।आर्थिक समृद्धि: धन लाभ और दरिद्रता का नाश होता है।सुरक्षा: नकारात्मक ऊर्जा, जादू-टोने से सुरक्षा प्रदान करते हैं।शीघ्र प्रसन्नता: बटुक भैरव दयालु रक्षक हैं और साधक को शीघ्र फल देते हैं।

भैरव यंत्र: https://www.flipkart.com/om-ssvmb9-siddhi-vinayak-shri-batuk-bhairav-yantra-100-pure-copper-22gauge-2-2/p/itmba726cb292852?pid=YNTH3MPYK5VHYYA7&marketplace=FLIPKART&cmpid=content_appretar_SpiritualItems&affid=inf_4be67014-2606-45ba-bd98-2df5a61770e1

हकीक माला:https://www.flipkart.com/namisha-pooja-mala-kale-hakik-ki-mala-jaap-puja-108-beads-black-6-mm-stone-chain/p/itm5f2f05765c9e3?pid=NKCFZ5ZRMXWYAMBX&marketplace=FLIPKART&cmpid=content_appretar_FashionJewellery&affid=inf_4be67014-2606-45ba-bd98-2df5a61770e1

Address

Haridwar Industrial Area

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when शिव शक्ति साधक posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share