25/05/2026
कर्ण पिशाचनी साधना का एक सच्चा अनुभव
यह बात आज से लगभग 6-7 साल पहले की है…
जब साधना के क्षेत्र में नया-नया प्रवेश हुआ था, तो मन में अलग-अलग साधनाओं को जानने और अनुभव लेने की तीव्र इच्छा रहती थी।
हर नया साधक चाहता है कि वह कुछ अलग अनुभव करे, कुछ नया जाने…
इसी क्रम में हमने कर्ण पिशाचनी साधना की शुरुआत की…
यह साधना सात्विक विधि से केवल अनुभव प्राप्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
रात्रि 10 बजे के बाद, स्फटिक की माला से 5 से 11 माला जप करना होता था…
लगातार 21 दिनों तक यह साधना की गई…
जैसे-जैसे साधना के दिन आगे बढ़ने लगे, वैसे-वैसे कुछ अनुभव भी होने लगे…
एक घटना ऐसी हुई जो लगातार 3 दिन तक दोहराई गई…
रोज एक छिपकली आकर साधना के आसन के ठीक सामने बैठ जाती थी…
अब बहुत लोग कहेंगे —
इसमें कौन सी बड़ी बात है? छिपकली तो हर घर में होती है…
बिल्कुल होती है…
लेकिन यहां बात सिर्फ छिपकली आने की नहीं थी…
सामान्य रूप से अगर कोई छिपकली आपके पास आए और आप जमीन पर हाथ मारो या इशारा करो, तो वह तुरंत भाग जाती है…
लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ…
जमीन पर हाथ मारने पर भी वह भागती नहीं थी…
बल्कि…
और पास आकर ठीक आसन के सामने बैठ जाती थी…
पहले दिन लगा कि शायद सामान्य बात होगी…
लेकिन जब यही घटना लगातार 3 दिन तक दोहराई गई, तब मन में अजीब सा भाव उठना स्वाभाविक था…
उस समय अनुभव बहुत कम था…
इसलिए जल्दी-जल्दी माला पूर्ण करके साधना समाप्त कर लेते थे…
लेकिन अंतिम दो दिनों में अनुभव थोड़ा और गहरा हो गया…
वह शक्ति हमें प्रत्यक्ष रूप से नहीं दिखाई दी…
लेकिन माताजी के सपने में एक भयानक रूप में अनुभव हुई…
जब उन्होंने यह बात बताई, तो उस समय जितना ज्ञान था, उसी अनुसार घर का बंधन किया गया…
क्योंकि यह साधना घर पर, चोरी-छिपे की जा रही थी…
ना इतनी आज्ञा थी कि रात्रि में बाहर जाकर की जाए,
ना उतना साधन उपलब्ध था…
फिर भी अनुभव लेने की जिज्ञासा में साधना पूरी की गई…
अंतिम दिन खीर से हवन किया गया…
उसके बाद अनुभव ऐसा होने लगा कि कुछ बातें मन में स्वयं संकेत देने लगती थीं…
लेकिन बाद में उस शक्ति का विसर्जन कर दिया गया…
क्योंकि नए साधक के लिए ऐसी शक्तियों को लंबे समय तक धारण करना उचित नहीं होता…
कुछ अनुभव गुप्त रखे है सार्वजनिक नहीं
उस समय इससे पहले अपने इष्ट के लाखों जप किए जा चुके थे…
इसलिए किसी प्रकार की हानि पहुंचाने में वह शक्ति असमर्थ थी…
लेकिन आजकल एक बहुत बड़ी भ्रांति फैला दी गई है…
लोग कहते हैं—
11 दिन में शक्ति सामने आ जाएगी…
यह कर देगी…
वह कर देगी…
जबकि सच्चाई यह है कि…
शक्ति को पकाना पड़ता है…
मेहनत करनी पड़ती है…
अनुशासन रखना पड़ता है…
पहले शक्ति मन के माध्यम से संकेत देती है…
फिर साधक की मेहनत और साधना के अनुसार अनुभव गहरे होते हैं…
और एक बात हमेशा याद रखिए…
शक्ति कभी बुरी नहीं होती…
बुरा या अच्छा उसका उपयोग करने वाला साधक होता है…
जैसे—
बंदूक सेना के पास भी होती है…
और आतंकवादी के पास भी…
हथियार एक ही है…
लेकिन उपयोग कोई रक्षा के लिए करता है,
तो कोई विनाश के लिए…
ठीक वैसे ही…
शक्ति वही रहती है…
निर्भर यह करता है कि साधक उसका प्रयोग किस उद्देश्य से कर रहा है…
आजकल कई नए साधक बिना अनुभव के बड़े-बड़े दावे करते हैं…
कमेंट में पूछते हैं—
क्या आपके पास यह शक्ति है?
क्या आपके पास भैरव के गण हैं?
लेकिन सच्चाई यह है कि…
साधना दिखाने की चीज नहीं…
जीने की चीज है…
जीवन में इतने अनुभव लिए हैं कि शायद नए साधक कल्पना भी न कर पाएं…
लेकिन अंत में आज भी एक ही बात कहेंगे—
एक साधे सब सधे…
हर शक्ति के पीछे मत भागो…
एक शक्ति को पकड़ो…
उसी में डूब जाओ…
उसी में टिक जाओ…
सफलता वहीं से शुरू होती है…
बाकी कुछ गुप्त विधियां गुरु परंपरा की होती हैं…
लेकिन बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलता…
आजकल लोग कहते हैं—
ट्रांसफर चाहिए…
शॉर्टकट चाहिए…
लेकिन सच्चाई यही है—
बिना अपनी मेहनत के साधना में कुछ प्राप्त नहीं होता…