13/05/2026
उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान देकर
राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
जिस मुद्दे पर पहले भी देशभर में भारी विवाद हुआ था,
उसी लाइन को दोहराते हुए
उन्होंने फिर सनातन पर निशाना साधा।
इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक
तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।
आलोचकों का कहना है कि
करोड़ों लोगों की आस्था पर बार-बार हमला करना
सिर्फ “राजनीतिक बयान” नहीं माना जा सकता।
वहीं समर्थक इसे वैचारिक और सामाजिक बहस का हिस्सा बता रहे हैं।
लेकिन सवाल यही उठ रहा है कि
क्या वोट बैंक और विचारधारा की राजनीति में
अब सीधे धार्मिक भावनाओं को टारगेट करना
एक नया राजनीतिक मॉडल बनता जा रहा है?
ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद के शब्द फिर याद आते हैं—
“सनातन धर्म शाश्वत है…
यह किसी एक व्यक्ति, पुस्तक या समय पर आधारित नहीं।”
इतिहास गवाह है
कि सनातन पर सवाल नए नहीं हैं,
लेकिन हर दौर में यह और मजबूती से खड़ा दिखाई दिया है।
क्योंकि आस्था पर हमला करके
सुर्खियां तो मिल सकती हैं…
इनकी 7 पुश्तें मिट जायेगी ,
लेकिन फिर भी सनातन धर्म ख़त्म करने का सपना
सपना ही रह जाएगा