God bless_you our House

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15/01/2024

*ठहरो, और जागते रहो।*

*"और उन से कहा; मेरा मन बहुत उदास है, यहां तक कि मैं मरने पर हूं: तुम यहां ठहरो, और जागते रहो।" (मरकुस 14:34)।*

*जागते रहना कठिन है, विशेषकर दिन भर कड़ी मेहनत के बाद। शरीर थक जायेगा; और नियमित सोने के समय पलकें बंद हो जाएंगी। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी नींद पर कभी नियंत्रण नहीं रख पाते; उनकी आंखें थकी होंगी; और वे जम्हाई लेते रहेंगे।*

*लेकिन अगर कोई हमारा करीबी हो, आधी रात को अंतरराष्ट्रीय उड़ान से आ रहा हो, तो हम अपनी नींद का त्याग कर देंगे; जागते रहेगे और रात भर उनकी प्रतीक्षा करते रहेगे। या जब कोई करीबी रिश्तेदार बीमार होता है, तो हम अपनी नींद छोड़कर पूरी रात उनकी देखभाल करने की कोशिश करते हैं। जब आधिकारिक काम बढ़ जाता है, तो हम काम का बोझ कम करने के लिए देर रात तक रुकने के लिए तैयार रहते हैं। लेकिन प्रभु के वचन पर ध्यान देना - इनमें से सब से भी बहुत महत्वपूर्ण है।*

*प्रभु यीशु ने यूं ही नहीं कहा, 'जागते रहो'। उन्होंने कहा 'यहाँ रुको और मेरे साथ देखो'। तो, प्रभु यीशु की मधुर उपस्थिति में देखें। उसके महिमामय चेहरे को देखो; आनंदित रहे और प्रार्थना करे। “जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर दुर्बल है।” (मरकुस 14:38)।*

*जिस रात प्रेरित पतरस को कैद किया गया, कलीसिया के सदस्य सो नहीं सके। चूँकि उनके मन में पतरस के प्रति प्रचुर प्रेम था, इसलिए वे प्रभु से उत्साहपूर्वक प्रार्थना करते रहे। पतरस को इसकी जानकारी नहीं थी. “उस रात पतरस दो सिपाहियों के बीच दो जंजीरों से बंधा हुआ सो रहा था; और द्वार के साम्हने पहरूए बन्दीगृह की रखवाली करते थे” (प्रेरितों 12:6)।*

*प्रभु ने पूरी रात कलिसिया की उत्कट प्रार्थना सुनी। और उसने अपना दूत भेजा। पवित्रशास्त्र कहता है, “देखो, प्रभु का एक दूत उसके पास आ खड़ा हुआ, और बन्दीगृह में ज्योति चमकी; और उस ने पतरस की बाजू पर मार कर उसे खड़ा किया, और कहा, “तो देखो, प्रभु का एक स्वर्गदूत आ खड़ा हुआ: और उस कोठरी में ज्योति चमकी: और उस ने पतरस की पसली पर हाथ मार के उसे जगाया, और कहा; उठ, फुरती कर, और उसके हाथ से जंजीरें खुलकर गिर पड़ीं।” (प्रेरितों 12:7)।*

*क्या आप जानते हैं कि जंजीरों से छूटने के तुरंत बाद पतरस कहाँ गया? वह कलीसिया गए, जिसके सदस्य रात भर उनके लिए प्रार्थना कर रहे थे। जब उन्होंने बताया कि कैसे प्रभु ने उन्हें आश्चर्यजनक रूप से जेल से रिहा किया, तो वे सभी खुशी से भर गए और एक साथ प्रभु की आराधना की।*

*प्रार्थना तोड़ देगी सारे बंधन; सब जंजीरें तोड़ डालेगा; और उन सभी रस्सियों को गायब कर दो जो हमको बांधती हैं। जब आप प्रार्थना करते हैं तो आप एक महान मुक्ति और आत्मा की शक्तिशाली प्रेरणा की उम्मीद कर सकते हैं। फिर कोई बाधा नहीं रहेगी। जो प्रार्थना करेंगे उनके लिये बन्दीगृह के द्वार भी आप ही खुल जायेंगे; उनकी कृपा से आपके लिए सांसारिक उन्नति के भी अवसर खुलेंगे।*

*परमेश्वर के प्रिय लोगो, ठहरे और प्रार्थना करे। तब आप अपने चारों ओर शक्तिशाली चमत्कार होते हुए देखेंगे। यहोवा हमारे लिये लड़ेगा और हमारे लिये सब कुछ करेगा।*

*बदलते रिश्ते|*हमारी ज़िंदगी में रिश्तों की अहमियत किसी से छिपी नहीं है| यहां तक की जानवरों और परिंदों में भी रिश्ते निभा...
28/04/2023

*बदलते रिश्ते|*

हमारी ज़िंदगी में रिश्तों की अहमियत किसी से छिपी नहीं है| यहां तक की जानवरों और परिंदों में भी रिश्ते निभाए जाते हैं| मुहब्बत रिश्तों की कड़ी मानी जाती है| मुहब्बत की डोर टूटते ही रिश्तों के मोती बिख़र जाते हैं| सच्चाई रिश्तों की जान समझी जाती है| जान निकलते ही रिश्ते बेमौत मर जाते हैं| प्राचीन यूनान में नाटकों में कलाकार मुखौठा पहना करते थे| नाटक ख़त्म होते ही मुखौठा उतार फेंका जाता था और व्यक्ति अपने असल क़िरदार में लौट आता| रिश्तों में कभी कभी असलियत को छुपाने के लिए मुखौठे चढ़ा लिए जाते हैं| यहूदा ने चुम्बन लेकर येशू को धोखे से पकड़वा दिया| अय्यूब पर विपत्तियां क्या आईं, लोगों के चेहरों से मुखौठे उतरने लगे| 📖अय्यूब 19:14-19 में इसका ज़िक्र मिलता है| अय्यूब ने रिश्तों को बदलते और हक़ीकत पर से नकाब हटते देखा| रिश्तों की मिठास कड़वाहट में कैसे बदल जाती हैं यह राख़ पर बैठने के बाद ही जाना| सुख का सूरज डूबते ही साया भी साथ छोड़ जाता है| *जय मसीह*

09/04/2023

*अंजीर का पेड़।*

यीशु यरूशलेम की तरफ जा रहा था, रास्ते में उसे भूख लगी। उसने दूर से अंजीर का पेड़ देखा, और फल की उम्मीद में पेड़ के पास गया। पवित्र वचन में यह भी लिखा है, फलों का समय नहीं था। अब सवाल यह है कि जब फल का समय ही नहीं था तो यीशु ने उसे सज़ा क्यों दी? अंजीर के पेड़ में पत्ते और फल एक साथ आते हैं। पेड़ में पत्ते तो थे मगर फल नहीं थे। वो अपने स्वभाव के विरुद्ध काम कर रहा था इसलिए यीशु ने उसे सजा दी। पेड़ कलीसिया का प्रतीक है। दूर से देखने पर लगता है, पेड़ हरा भरा है। हमारी धार्मिकता पत्तों की तरह होती है। जो सिर्फ़ एक छलावा है। यीशु को पत्ते नहीं, फल चाहिए। पेड़ अपने फलों से पहचाना जाता है। हमारी ज़िंदगी भी अंजीर के पेड़ की तरह है। पत्ते बाहरी दिखावा हैं। जो पेड़ फलता नहीं, काट डाला जाएगा 📖अब कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है, इसलिये जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।
मत्ती 3:10.
(अभी भी अवसर हैं)आत्मा के फल हमारे जीवन मे लगना चाहिए 📖 आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं;
गलातियों 5:22-23 *जय मसीह*

09/04/2023
07/04/2023

*अंजीर का पेड़।*

यीशु यरूशलेम की तरफ जा रहा था, रास्ते में उसे भूख लगी। उसने दूर से अंजीर का पेड़ देखा, और फल की उम्मीद में पेड़ के पास गया। पवित्र वचन में यह भी लिखा है, फलों का समय नहीं था। अब सवाल यह है कि जब फल का समय ही नहीं था तो यीशु ने उसे सज़ा क्यों दी? अंजीर के पेड़ में पत्ते और फल एक साथ आते हैं। पेड़ में पत्ते तो थे मगर फल नहीं थे। वो अपने स्वभाव के विरुद्ध काम कर रहा था इसलिए यीशु ने उसे सजा दी। पेड़ कलीसिया का प्रतीक है। दूर से देखने पर लगता है, पेड़ हरा भरा है। हमारी धार्मिकता पत्तों की तरह होती है। जो सिर्फ़ एक छलावा है। यीशु को पत्ते नहीं, फल चाहिए। पेड़ अपने फलों से पहचाना जाता है। हमारी ज़िंदगी भी अंजीर के पेड़ की तरह है। पत्ते बाहरी दिखावा हैं। जो पेड़ फलता नहीं, काट डाला जाएगा 📖अब कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है, इसलिये जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।
मत्ती 3:10.
(अभी भी अवसर हैं)आत्मा के फल हमारे जीवन मे लगना चाहिए 📖 आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं;
गलातियों 5:22-23 *जय मसीह*

Good Friday
07/04/2023

Good Friday

05/04/2023

*परमेश्वर ने मनुष्य को सीधा बनाया, पर वो टेढ़ा क्यों चलता है?
📖 सभोपदेशक 7:29"
परमेश्वर ने मनुष्य को बेशुमार बुद्धि दी और उस बुद्धि से मनुष्य ने बड़े बड़े अविष्कार किए। मनुष्य ने अपने को जानवरो से बचाने के लिए हथियार का अविष्कार किया, पर बाद उसी हथियार से मनुष्य को घात करने लगे। परमेश्वर की बुद्धि से बहुत सी दवाइयों का अविष्कार हुआ, पर लोगो ने उसमे से भी नशे (ड्रग्स) का तरीका ढूंढ लिया। बुद्धि प्राप्त करके लोगो की जान बचाने के लिए डॉक्टर बने, पर अबोर्शन कर करके करोड़ों अजन्मे बच्चो की हत्याए की, ऐसे ऐसे उदाहरण इस संसार में भरे पड़े है।
इसलिए परमेश्वर ने कहा कि "मनुष्य के मन में जो कुछ उत्पन्न होता है वह निरन्तर बुरा ही होता है और वो मनुष्य को बनाकर पछताया।" 📖उत्पति 6:5-6
परमेश्वर ने तो मनुष्य को सीधा सादा बनाया था, पर वो टेढ़ी चाल चलकर दुष्टता करने लगा। इसका एक ही कारण है "अनाज्ञाकारिता", जिसे "पाप" कहा जाता है, और पाप ने मनुष्य के स्वभाव में लोभ भर दिया, इसी लोभ के कारण मनुष्य अपनी इच्छा से संसारिक वस्तुओ की खोज में लग गया और परमेश्वर से अलग गया, जिसका हिसाब उन्हे देना होगा।

God bless you all  my friends
04/04/2023

God bless you all my friends

02/04/2023

Come back to God again, lest it be too late.

*कहीं देर न हो जाए|*

चेले येशू की बातों की गंभीरता को समझ नहीं पाए| येशू के सामने सलीब थी, वो दर्दनाक मौत के लिए ख़ुद को तैयार कर रहा था| मुसीबत में होने के बाद भी उसे चेलों की फ़िक्र सता रही थी| वो अच्छी तरह से जनता था, यही चेले उसकी जमा पूंजी हैं| वो बार बार आकर उन्हें जागते रहने और दुआ करने की हिदायत दे रहा था| वो येशू के चेले थे, मगर नींद से हार गए| येशू वक़्त की क़ीमत को बाखूबी समझता था| एक एक लम्हा उसके लिए बेशकीमत था| उसके पास गवांने के लिए कुछ भी नहीं था| बहुत बार लोग वक़्त की क़ीमत नहीं समझ पाते| ज़िंदगी कुछ और नहीं, हाथ से फ़िसलती हुई रेत है| मुट्ठी कब ख़ाली हो जाए, कोई नहीं जानता| 📖मरकुस 14:41 में येशू ने फ़रमाया – अब सोते रहो, और विश्राम करो| येशू के इन शब्दों में दुःख था, अफ़सोस था| मैं नहीं चाहता की येशू कभी मुझसे ये कहे| आप अपने बारे में क्या सोचते हैं|

*जय मसीह*

02/04/2023

* कहीं देर न हो जाए *

चेले येशू की बातों की गंभीरता को समझ नहीं पाए| येशू के सामने सलीब थी, वो दर्दनाक मौत के लिए ख़ुद को तैयार कर रहा था| मुसीबत में होने के बाद भी उसे चेलों की फ़िक्र सता रही थी| वो अच्छी तरह से जनता था, यही चेले उसकी जमा पूंजी हैं| वो बार बार आकर उन्हें जागते रहने और दुआ करने की हिदायत दे रहा था| वो येशू के चेले थे, मगर नींद से हार गए| येशू वक़्त की क़ीमत को बाखूबी समझता था| एक एक लम्हा उसके लिए बेशकीमत था| उसके पास गवांने के लिए कुछ भी नहीं था| बहुत बार लोग वक़्त की क़ीमत नहीं समझ पाते| ज़िंदगी कुछ और नहीं, हाथ से फ़िसलती हुई रेत है| मुट्ठी कब ख़ाली हो जाए, कोई नहीं जानता| 📖मरकुस 14:41 में येशू ने फ़रमाया – अब सोते रहो, और विश्राम करो| येशू के इन शब्दों में दुःख था, अफ़सोस था| मैं नहीं चाहता की येशू कभी मुझसे ये कहे| आप अपने बारे में क्या सोचते हैं| *जय मसीह*

31/03/2023

*विलाप को नृत्य में बदलने वाला परमेश्वर |*

हम अकसर दुखों के बारे में बढ़ा-चढ़ा के सोचते हैं| आशीषों से ज़्यादा परेशानियों की चर्चा करते हैं| यूसुफ जब 17 साल का था, तब परमेश्वर ने उसे सपने दिखाए 📖उत्पत्ति 37:2| जब वह फ़िरौन के सामने खड़ा हुआ तब उसकी उम्र 30 साल की थी| बीच के तेरह साल बेहद परेशानियों से भरे थे| गुलामी करनी पड़ी, कुछ साल जेल की सलाखों के पीछे भी गुज़रने पड़े| मगर उसने कभी ख़ुदा से सवाल नहीं किया| 📖उत्पत्ति 41:42-43 में लिखा है – उसे फ़िरौन ने अपनी अंगूठी पहना दी, उसको मलमल के कपड़े पहनाए गए, और उसके गले में सोने की चैन डाली गई| फ़िरौन ने अपने दूसरे रथ पर उसे सवार कराया, उसके आगे ये प्रचार करवाया गया, घुटने टेको, दंडवत करो, उसे मिस्र का प्रधानमंत्री बनाया गया| यूसुफ 110 साल तक ज़िंदा रहा| ख़ुदा ने 13 साल के दुःखों की एवज़ में 80 साल की ऐश ओ आराम की ज़िन्दगी दी| इज्ज़त और दौलत बख्शी, फ़िरौन के बाद सबसे बड़ा हुकूमत करने वाला बनाया| वो जब देता है, तो छप्पर फाड़ के देता है| *जय मसीह*

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